नई दिल्ली (टेक-पॉलिसी डेस्क): भारत में बेलगाम होते सोशल मीडिया और ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स पर केंद्र सरकार ने अब पूरी तरह से नकेल कस दी है। डिजिटल दुनिया में बढ़ती अश्लीलता, फेक न्यूज, डीपफेक और साइबर अपराधों को देखते हुए सरकार ने अपनी 'जीरो टॉलरेंस' नीति को जमीनी स्तर पर उतार दिया है। सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत में व्यापार करना है, तो भारत के कानून मानने होंगे। आईटी अधिनियम 2000 (IT Act 2000), आईटी नियम 2021 (IT Rules 2021) और नए लागू हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS 2023) के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय कर दी गई है।READ ALSO:-रेल यात्रियों के लिए बड़ी खबर: ट्रेन रवाना होने से 10 घंटे पहले तैयार होगा पहला चार्ट, रेलवे ने नियमों में किया बदलाव
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सरकार का स्पष्ट उद्देश्य भारत में एक 'ओपन, सेफ, ट्रस्टेड और अकाउंटबल' (Open, Safe, Trusted and Accountable) इंटरनेट इकोसिस्टम तैयार करना है, जहाँ विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
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अब 24 घंटे का अल्टीमेटम: कंटेंट हटाने की समय-सीमा तय सरकार द्वारा लागू किए गए नियमों में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव 'टाइम-बाउंड एक्शन' (समयबद्ध कार्रवाई) है। अब सोशल मीडिया कंपनियां किसी आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने में आनाकानी या देरी नहीं कर सकतीं।
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    24 घंटे का नियम: किसी भी यूजर की प्राइवेसी का उल्लंघन, नग्नता (Nudity), या डॉक्टर्ड वीडियो (जैसे Deepfake) की शिकायत मिलने पर प्लेटफॉर्म को 24 घंटे के भीतर उस कंटेंट को हटाना अनिवार्य होगा।
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    72 घंटे में समाधान: हर डिजिटल प्लेटफॉर्म को एक शिकायत अधिकारी (Grievance Officer) नियुक्त करना होगा। इस अधिकारी को यूजर की शिकायत स्वीकार करनी होगी और 72 घंटे (3 दिन) के भीतर उसका समाधान करना होगा।
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    अगर प्लेटफॉर्म ऐसा करने में विफल रहता है, तो यूजर सरकार द्वारा गठित शिकायत अपीलीय समिति (Grievance Appellate Committee) में अपील कर सकता है।
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'सिग्निफिकेंट सोशल मीडिया इंटरमीडियरी' पर अतिरिक्त भार फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर) और यूट्यूब जैसे बड़े प्लेटफॉर्म, जिनके भारत में 50 लाख से अधिक रजिस्टर्ड यूजर्स हैं, उन्हें सरकार ने 'महत्वपूर्ण सोशल मीडिया मध्यस्थ' (Significant Social Media Intermediary) की श्रेणी में रखा है। इनके लिए नियम और भी सख्त हैं:
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    लोकल ऑफिसर: इन्हें भारत में रहने वाले एक मुख्य अनुपालन अधिकारी (Chief Compliance Officer), नोडल संपर्क अधिकारी और एक शिकायत अधिकारी को नियुक्त करना होगा।
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    मासिक रिपोर्ट: इन्हें हर महीने एक कंप्लायंस रिपोर्ट (Compliance Report) जारी करनी होगी, जिसमें बताना होगा कि कितनी शिकायतें मिलीं और उन पर क्या कार्रवाई की गई।
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    ओरिजिनेटर की पहचान: गंभीर अपराधों (देश की संप्रभुता, सुरक्षा या रेप जैसे मामलों) में, जांच एजेंसियों के मांगने पर मैसेज के 'फर्स्ट ओरिजिनेटर' (मैसेज सबसे पहले किसने भेजा) का पता बताना अनिवार्य होगा।
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ओटीटी प्लेटफॉर्म्स: 43 ऐप्स पर गिर चुकी है गाज ओटीटी (Over-The-Top) प्लेटफॉर्म्स अब सेंसरशिप से पूरी तरह मुक्त नहीं रहे। आईटी नियम 2021 के भाग-III के तहत उन पर 'कोड ऑफ एथिक्स' (Code of Ethics) लागू किया गया है। लोकसभा में जानकारी देते हुए सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने बताया कि सरकार अश्लील और भ्रामक कंटेंट पर लगातार नजर रखे हुए है। नियमों का उल्लंघन करने पर अब तक 43 ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को भारत में ब्लॉक किया जा चुका है। सरकार का रुख साफ है कि क्रिएटिविटी के नाम पर अश्लीलता या कानून विरोधी कंटेंट बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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डीपफेक और AI पर विशेष नजर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दुरुपयोग से बन रहे 'डीपफेक' वीडियोज पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। नियमों के तहत, किसी दूसरे की पहचान चुराकर (Impersonation) बनाए गए कंटेंट को रोकने की जिम्मेदारी प्लेटफॉर्म की होगी। आईटी एक्ट और BNS के तहत ऐसे मामलों में जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
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10 प्वाइंट्स में समझें: अब क्या-क्या बदल गया है?

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    उद्देश्य: 'सेफ और ट्रस्टेड इंटरनेट' बनाना सरकार की प्राथमिकता है।
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    जीरो टॉलरेंस: अश्लील (Pornographic), घृणास्पद (Hateful) और भ्रामक (Misleading) कंटेंट को होस्ट या शेयर करना प्रतिबंधित है।
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    डीपफेक पर वार: AI जनरेटेड फर्जी पहचान वाले कंटेंट पर पूर्ण प्रतिबंध।
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    त्वरित कार्रवाई: कोर्ट या सरकार के आदेश पर गैरकानूनी कंटेंट को तुरंत हटाना होगा।
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    24 घंटे का नियम: नग्नता और प्राइवेसी उल्लंघन वाले कंटेंट को 24 घंटे में हटाना अनिवार्य।
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    शिकायत अधिकारी: हर प्लेटफॉर्म पर Grievance Officer की नियुक्ति अनिवार्य, समाधान 72 घंटे में।
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    लोकल ऑफिस: 50 लाख+ यूजर्स वाले प्लेटफॉर्म्स को भारत में अधिकारी बैठाने होंगे।
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    रिपोर्टिंग: बड़ी कंपनियों को मासिक कंप्लायंस रिपोर्ट सार्वजनिक करनी होगी।
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    ट्रेसिबिलिटी: गंभीर मामलों में मैसेज भेजने वाले (Originator) की पहचान बतानी होगी।
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    ब्लॉकिंग: ओटीटी प्लेटफॉर्म्स अगर 'कोड ऑफ एथिक्स' तोड़ते हैं, तो उन्हें बैन किया जाएगा।
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सरकार के ये कदम स्पष्ट करते हैं कि इंटरनेट अब 'कानून विहीन क्षेत्र' (Lawless Zone) नहीं है। सोशल मीडिया कंपनियों को अगर भारत के विशाल यूजर बेस का फायदा उठाना है, तो उन्हें भारतीय संविधान और कानूनों के दायरे में रहकर ही काम करना होगा। इसका सीधा फायदा आम जनता, खासकर महिलाओं को मिलेगा, जो अक्सर ऑनलाइन ट्रोलिंग और शोषण का शिकार होती हैं।
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टेक अपडेट: अपने अधिकारों को जानें। यदि कोई प्लेटफॉर्म आपकी शिकायत नहीं सुनता है, तो आप GAC (Grievance Appellate Committee) के पोर्टल पर ऑनलाइन अपील कर सकते हैं।
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