अगर आप भी बढ़ते खाने-पीने के दामों से परेशान हैं, तो आपके लिए एक बड़ी राहत की खबर है। अगस्त के महीने में घर पर बनी थाली की लागत में जबरदस्त गिरावट आई है। क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के अनुसार, सब्जियों और दालों की कीमतों में कमी के कारण शाकाहारी और मांसाहारी थाली, दोनों ही सस्ती हो गई हैं। यह आम आदमी की जेब के लिए एक बड़ी राहत है।READ ALSO:-नेपाल में ‘डिजिटल कर्फ्यू’ के खिलाफ सड़कों पर Gen Z: क्या इंटरनेट से कटने का मतलब है जिंदगी से कट जाना?
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शाकाहारी थाली हुई सस्ती, रसोई का बजट संभला
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रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में शाकाहारी थाली की कीमत में लगभग 7% की कमी आई है। इसकी मुख्य वजह आलू और प्याज जैसी जरूरी सब्जियों के दामों में आई भारी गिरावट है।
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    आलू और प्याज: इनकी कीमतों में पिछले साल के मुकाबले क्रमशः 31% और 37% की गिरावट दर्ज की गई है। पिछले साल फसल खराब होने से इनके दाम बढ़े थे, लेकिन इस साल रिकॉर्ड उत्पादन से उपभोक्ताओं को सीधे राहत मिली है।
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    दालों का सहारा: दालों की कीमतों में भी पिछले वर्ष की तुलना में 14% की गिरावट आई है, जो आम आदमी के बजट के लिए एक बड़ी राहत है। बेहतर उत्पादन और पर्याप्त स्टॉक के कारण दालों के दाम नियंत्रित रहे।
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नॉन-वेज थाली में चिकन ने दिलाई बड़ी राहत
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मांसाहारी खाने के शौकीनों के लिए भी अच्छी खबर है। मांसाहारी थाली की लागत में लगभग 8% की गिरावट आई है। इसका सबसे बड़ा कारण ब्रॉयलर (चिकन) की कीमतों में आई 10% की कमी है, क्योंकि यह मांसाहारी थाली की कुल लागत का लगभग आधा हिस्सा होता है। इसके अलावा, सब्जियों और दालों के दाम गिरने से भी नॉन-वेज थाली की लागत कम हुई है।
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टमाटर का तड़का, लेकिन आगे राहत पक्क
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हालांकि, टमाटर और वनस्पति तेल की कीमतों में थोड़ी वृद्धि देखी गई, जिसने थाली की कुल लागत में गिरावट को कुछ हद तक सीमित किया। इसके बावजूद, क्रिसिल के निदेशक पुशन शर्मा का कहना है कि आने वाले समय में भी खाद्य पदार्थों की कीमतें पिछले साल की तुलना में कम ही रहेंगी। सरकार के पीली मटर और काले चने के मुफ्त आयात के फैसले से भी दालों की कीमतों पर दबाव पड़ने और उपभोक्ताओं को और राहत मिलने की उम्मीद है। यह रिपोर्ट दर्शाती है कि बाजार में उपलब्धता और उत्पादन बढ़ने से महंगाई पर लगाम लग सकती है और घर का बजट अब आसानी से संभल सकता है।
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