नई दिल्ली। देश भर के कारोबारियों, व्यापारियों और करदाताओं के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। सरकार जीएसटी ढांचे (GST 2.0 Reforms) में अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक सुधार करने जा रही है। 7 अक्टूबर 2026 को होने वाली आगामी जीएसटी काउंसिल की अहम बैठक में व्यापारियों पर लटकने वाली गिरफ्तारी की तलवार को हटाने की तैयारी है। नए प्रस्तावों के अनुसार, टैक्स अधिकारियों से सीधे गिरफ्तारी करने की शक्ति वापस ली जा सकती है और आपराधिक मुकदमे (Criminal Prosecution) शुरू करने की सीमा को भी भारी अंतर से बढ़ाया जा सकता है।

​इस कदम का मुख्य उद्देश्य देश में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (Ease of Doing Business) को वास्तविक धरातल पर उतारना और व्यापारियों को बिना वजह अदालती या आपराधिक विवादों में उलझने से बचाना है।

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​सीधे गिरफ्तारी के अधिकार पर लगेगी रोक

वर्तमान में केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) कानून की धारा 69 के तहत, फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम करने या भारी टैक्स चोरी के मामलों में टैक्स कमिश्नर के पास सीधे गिरफ्तारी का आदेश देने का अधिकार है। पीटीआई (PTI) की रिपोर्ट के अनुसार, नए जीएसटी 2.0 ड्राफ्ट में अधिकारियों की इस सीधी शक्ति को खत्म करने का प्रस्ताव है। यदि इस पर मुहर लगती है, तो कोई भी टैक्स अफसर कमिश्नर के आदेश मात्र से व्यापारी को गिरफ्तार नहीं कर सकेगा। किसी भी प्रकार की गिरफ्तारी के लिए सीधे अदालत (Court) की पूर्व मंजूरी अनिवार्य होगी।

​5 करोड़ रुपये तक की गड़बड़ी पर नहीं होगा क्रिमिनल केस

काउंसिल के सामने दूसरा सबसे बड़ा प्रस्ताव आपराधिक मुकदमा शुरू करने की वित्तीय सीमा को बढ़ाने का है। वर्तमान व्यवस्था में 1 करोड़ रुपये से अधिक की टैक्स गड़बड़ी पर क्रिमिनल केस दर्ज करने का प्रावधान है। सरकार अब इस लिमिट को बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने जा रही है। इसका सीधा मतलब यह है कि 5 करोड़ रुपये से कम के टैक्स विवादों में कारोबारियों पर कोई भी आपराधिक (Criminal) कार्रवाई नहीं होगी। ऐसे मामलों को केवल सिविल पेनाल्टी, टैक्स रिकवरी और आर्थिक जुर्माने के जरिए ही निपटाया जाएगा।

​तकनीकी विवादों में जेल नहीं, आर्थिक दंड से होगा समाधान

कारोबार के दौरान अक्सर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC), वैल्यूएशन (Valuation) या जटिल नियमों की अलग-अलग व्याख्या को लेकर व्यापारियों और टैक्स विभाग के बीच मतभेद हो जाते हैं। नए सुधारों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ऐसे तकनीकी और सामान्य विवादों को क्रिमिनल श्रेणी से बाहर रखा जाए। सरकार यह स्पष्ट करना चाहती है कि टैक्स चोरी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा—बकाया टैक्स, ब्याज और भारी जुर्माने की वसूली पूरी सख्ती से होगी, लेकिन बिना वजह जेल भेजने की प्रथा पर लगाम लगेगी।

​24 अपराधों की समीक्षा और सजा में कटौती

जीएसटी 2.0 के तहत सिर्फ गिरफ्तारी के नियम ही नहीं बदल रहे हैं, बल्कि पूरे आपराधिक ढांचे की समीक्षा की जा रही है।

  • ​प्रस्ताव में कुल 24 अपराधों की गहरी समीक्षा की गई है।
  • ​इनमें से 9 अपराधों को जीएसटी नियमों से पूरी तरह हटाने (Decriminalize) का विचार है।
  • ​मध्यम श्रेणी के अपराधों में सजा की अधिकतम अवधि को 3 साल से घटाकर 2 साल किया जा सकता है।
  • ​इसके अतिरिक्त, छोटे व्यापारियों की लेट फीस माफ करने और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाने पर भी मुहर लग सकती है।

​अब अधिकारियों के एक्शन के बजाय तकनीक पर भरोसा

सरकार का मानना है कि अब जीएसटी का डिजिटल और एआई (AI) आधारित सिस्टम इतना मजबूत हो चुका है कि खरीद-बिक्री के डेटा (Data Matching) से फर्जी बिल या इनपुट क्रेडिट की चोरी को पहले ही चरण में पकड़ा जा सकता है। ऐसे में जमीनी स्तर पर अधिकारियों के मनमाने एक्शन और 'इंस्पेक्टर राज' के बजाय तकनीक के दम पर पारदर्शिता लाने की दिशा में यह एक मास्टरस्ट्रोक साबित होगा।

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