मेरठ: मेरठ के बदनाम कबाड़ी बाजार में एक बार फिर देह व्यापार के धंधे का भंडाफोड़ हुआ है। यह मामला इसलिए चौंकाने वाला है, क्योंकि यह गोरखधंधा न सिर्फ कानूनी मंजूरी की आड़ में चल रहा था, बल्कि पुलिस चौकी से महज चंद कदमों की दूरी पर बेरोकटोक जारी था। पुलिस ने दिल्ली की एक एनजीओ के साथ मिलकर छापा मारकर 21 महिलाओं और किशोरियों को मुक्त कराया है।READ ALSO:-मेरठ में लापता बच्चों का 'मिस्ट्री': एक स्कूटी छोड़ हरिद्वार पहुंचा, दूसरे का 9 दिन से कोई सुराग नहीं
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कानूनी मंजूरी, गैरकानूनी धंधा
\r\n\r\nयह बात हैरान करती है कि जिस कोठे पर यह धंधा चल रहा था, उसे अदालत के आदेश पर केवल मुजरा जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम चलाने की अनुमति मिली थी। कोठा संचालिकाओं ने एक हलफनामा देकर यह भरोसा दिलाया था कि वे देह व्यापार नहीं कराएंगी। लेकिन पुलिस को ग्राहकों की आवाजाही के वीडियो सबूत मिले, जिससे यह साफ हो गया कि यह अनुमति केवल अवैध काम करने का एक बहाना थी।
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पुलिस की नाक के नीचे चल रहा था गोरखधंधा
\r\n\r\nसवाल यह उठता है कि पुलिस चौकी के इतने करीब होने के बावजूद यह अवैध गतिविधि इतने लंबे समय से कैसे चल रही थी। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई स्थानीय पुलिस की पहल पर नहीं, बल्कि दिल्ली की मिशन मुक्ति फाउंडेशन के साथ मिलकर की गई। इस छापेमारी के दौरान मौके से पांच युवकों को भी पकड़ा गया, जो ग्राहकों को बुलाने का काम करते थे।
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नेपाल और दार्जिलिंग से लाई गईं थीं बच्चियां
\r\n\r\nइस रैकेट में मिली युवतियों की पृष्ठभूमि भी कई सवाल खड़े करती है। मुक्त कराई गईं महिलाओं और किशोरियों में से कई दूर-दराज के राज्यों से हैं, जिनमें राजस्थान और दार्जिलिंग शामिल हैं। कुछ युवतियां पड़ोसी देश नेपाल से भी लाई गई थीं। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि यह केवल एक स्थानीय देह व्यापार का मामला नहीं, बल्कि एक संगठित मानव तस्करी का नेटवर्क है।
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पुलिस ने इस मामले में पांच युवकों के साथ-साथ चार कोठा संचालिकाओं के खिलाफ भी केस दर्ज करने की तैयारी शुरू कर दी है। मुक्त कराई गई नाबालिग लड़कियों को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया जाएगा। इस घटना ने एक बार फिर कबाड़ी बाजार की सच्चाई को सामने लाकर रख दिया है।
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Sabse pehle comment karne wale banein.