ख़बरीलाल न्यूज़ डेस्क, नई दिल्ली (06 अप्रैल 2026): एक तरफ जहां आम आदमी हर दिन बढ़ती महंगाई (Inflation) से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर रसोई गैस और व्यावसायिक ईंधनों की लगातार बढ़ती कीमतों ने घरेलू बजट और व्यापारियों के मुनाफे दोनों की कमर तोड़ कर रख दी है। इस ज्वलंत और सीधे जनता से जुड़े मुद्दे को लेकर अब देश के प्रमुख व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने एक बड़ा कदम उठाया है। देश में गैस की किल्लत और लगातार बढ़ रहे आर्थिक दबाव को देखते हुए, CTI ने सीधे तौर पर भारत सरकार से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।READ ALSO:-आकिब खान आतंकी मामला: AK-47 को 'खिलौना' और ग्रेनेड को 'परफ्यूम' मानकर दी क्लीनचिट, बिजनौर इंस्पेक्टर सस्पेंड और सीओ लाइन हाजिर
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CTI के चेयरमैन श्री बृजेश गोयल ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और केंद्रीय वित्त मंत्रालय को एक विस्तृत पत्र लिखा है। इस पत्र में पुरजोर मांग की गई है कि घरेलू और व्यावसायिक उपयोग में आने वाली LPG (Liquefied Petroleum Gas) तथा शहरों में तेजी से लोकप्रिय हो रही PNG (Piped Natural Gas) को पूरी तरह से 'टैक्स फ्री' (Tax Free) किया जाए। उनका तर्क है कि ऊर्जा के इन प्राथमिक स्रोतों पर भारी टैक्स वसूलने से महंगाई का चक्र और अधिक तेज हो रहा है।
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टैक्स का भारी बोझ: आम जनता और व्यापारियों की टूटती कमर

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CTI ने अपने पत्र में गैस की कीमतों में टैक्स के गणित को बेहद सरलता और स्पष्टता के साथ समझाया है। वर्तमान में जिस कीमत पर आम उपभोक्ता या व्यापारी गैस खरीदते हैं, उसका एक बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर टैक्स के रूप में सरकार के खजाने में जाता है।
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LPG और PNG पर टैक्स का मौजूदा ढांचा: 

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    घरेलू LPG पर GST: जो गैस सिलेंडर सीधे आम आदमी की रसोई में इस्तेमाल होता है, उस पर केंद्र सरकार द्वारा वर्तमान में 5 प्रतिशत GST (माल एवं सेवा कर) वसूला जाता है।
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    कमर्शियल LPG पर GST: होटल, रेस्टोरेंट, बेकरी और छोटे उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले नीले रंग के कमर्शियल सिलेंडर पर यह कर दर सीधे 18 प्रतिशत हो जाती है। यह 18% का भारी-भरकम टैक्स व्यापारियों की लागत को बेतहाशा बढ़ा देता है, जिसका सीधा असर बाहर के खाने-पीने की चीजों की महंगाई पर पड़ता है।
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    PNG पर VAT का पेंच: दूसरी ओर, पाइपलाइन के जरिए घरों तक पहुंचने वाली PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) को GST के दायरे से बाहर रखा गया है। लेकिन, इसका फायदा उपभोक्ताओं को नहीं मिल रहा है क्योंकि अलग-अलग राज्य सरकारें इस पर अपने हिसाब से VAT (Value Added Tax) वसूल रही हैं। पूरे देश में यह VAT 3% से लेकर 14.5% तक अलग-अलग है। यदि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की बात करें, तो यहां की राज्य सरकार PNG पर 5 प्रतिशत VAT वसूलती है।
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CTI का स्पष्ट कहना है कि यदि सरकार इन दोनों ईंधनों से यह अतिरिक्त कर (Tax) हटा लेती है, तो सीधे तौर पर सिलेंडर और गैस बिल में बड़ी गिरावट आएगी।
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वैश्विक उथल-पुथल: पश्चिम एशिया के युद्ध ने गहराया गैस संकट

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आखिर अचानक से गैस की कीमतों और सप्लाई पर इतना फोकस क्यों हो गया है? इसका सीधा संबंध वैश्विक भू-राजनीति (Global Geopolitics) से है। CTI के पदाधिकारियों और ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिमी एशिया (मुख्य रूप से ईरान, इजराइल और अरब देशों के बीच) में चल रहे मौजूदा युद्ध और भारी तनाव ने पूरी दुनिया की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को बुरी तरह से बाधित कर दिया है।
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लाल सागर (Red Sea) और स्वेज नहर के रास्ते होने वाले व्यापार पर खतरा मंडरा रहा है, जिसके कारण कच्चे तेल और गैस के शिपमेंट में देरी हो रही है और उनका परिवहन खर्च (Freight Cost) बढ़ गया है। भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात (Import) पर निर्भर है, इस वैश्विक संकट से अछूता नहीं है। आयातित LPG की खेपों में देरी और किल्लत के कारण स्थानीय स्तर पर गैस एजेंसियों पर दबाव बढ़ गया है।
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LPG की किल्लत और PNG की तरफ तेजी से भागते उपभोक्ता

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विदेशी संकट के कारण पैदा हुई LPG सिलेंडरों की कमी और बुकिंग के बाद डिलीवरी में लगने वाले समय ने उपभोक्ताओं को एक नए और स्थायी विकल्प की ओर मुड़ने पर मजबूर कर दिया है। यही कारण है कि देश के महानगरों, विशेषकर दिल्ली-NCR में, PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) के कनेक्शन लेने की होड़ सी मच गई है।
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आंकड़े दे रहे हैं गवाही: दिल्ली में PNG कनेक्शन की मांग में आए इस अभूतपूर्व उछाल को आंकड़ों से आसानी से समझा जा सकता है। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) और संबंधित एजेंसियों के डाटा के अनुसार:
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    फरवरी 2026 के महीने तक दिल्ली में औसतन रोजाना करीब 686 नए PNG कनेक्शन दिए जा रहे थे।
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    लेकिन जैसे ही मार्च में LPG की किल्लत बढ़ी और वैश्विक तनाव की खबरें आईं, यह संख्या रॉकेट की तरह उछल गई। मार्च 2026 के अंत तक रोजाना लगभग 2,000 नए PNG कनेक्शन इंस्टॉल किए जाने लगे।
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हालांकि, यह एक सकारात्मक बदलाव है क्योंकि PNG को LPG के मुकाबले अधिक सुरक्षित और निर्बाध (Uninterrupted) माना जाता है, लेकिन दिल्ली में पहले से मौजूद करीब 56 लाख घरेलू LPG कनेक्शन धारकों का एक बड़ा वर्ग अभी भी सिलेंडर पर ही निर्भर है। ऐसे में दोनों ईंधनों को टैक्स फ्री करना ही एकमात्र व्यवहारिक समाधान नजर आता है।
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CTI की सरकार से दो-टूक मांगें

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चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के अध्यक्ष बृजेश गोयल ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भेजे गए अपने मांग पत्र में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर तत्काल कार्रवाई का आग्रह किया है:
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    LPG पर शून्य GST: घरेलू उपयोग (5%) और कमर्शियल उपयोग (18%) दोनों ही तरह के LPG सिलेंडरों पर लगने वाले GST को तुरंत प्रभाव से शून्य (0%) किया जाए।
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    PNG को मिले VAT से मुक्ति: चूंकि PNG पहले से ही GST के दायरे से बाहर है, इसलिए केंद्र सरकार सभी राज्य सरकारों को यह निर्देश दे कि वे इस पर लगने वाले 3% से 14.5% तक के राज्य स्तरीय VAT को पूरी तरह से समाप्त कर दें।
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    कमर्शियल राहत से रुकेगी महंगाई: व्यापारियों के लिए ईंधन सस्ता होने से माल ढुलाई, रेस्टोरेंट और उत्पादन लागत में कमी आएगी, जिसका सीधा लाभ (Benefit Pass-on) सस्ते उत्पादों के रूप में आम ग्राहकों को मिलेगा।
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टैक्स खत्म हुआ तो क्या होगा आम जनता को फायदा?

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अर्थशास्त्र के जानकारों का मानना है कि यदि भारत सरकार और GST काउंसिल CTI की इन मांगों को मान लेती है, तो इसका बाजार पर एक 'चेन रिएक्शन' (Chain Reaction) देखने को मिलेगा।
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    घरेलू बजट में बचत: सिलेंडर के दाम सीधे 50 से 100 रुपये (टैक्स के अनुपात में) तक कम हो जाएंगे, जिससे मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों की रसोई का बजट सुधरेगा।
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    उद्योगों की उत्पादन लागत में कमी: छोटे कारखानों, बेकरी, और भोजनालयों में गैस एक प्राथमिक कच्चा माल है। 18% टैक्स बचने से उनकी लागत घटेगी और वे इस मुश्किल समय में अपने व्यापार को बंद होने से बचा सकेंगे।
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    मुद्रास्फीति (Inflation) पर नियंत्रण: ऊर्जा की कीमतें सीधे तौर पर महंगाई दर को प्रभावित करती हैं। गैस सस्ती होने से ओवरऑल महंगाई सूचकांक (CPI) नीचे आएगा, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी का काम करेगा।
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ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है और आम जनता पहले ही खाद्य पदार्थों की महंगाई से त्रस्त है, गैस पर टैक्स खत्म करने का यह एक मास्टरस्ट्रोक कदम साबित हो सकता है। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि प्रधानमंत्री कार्यालय और वित्त मंत्रालय CTI की इस अहम मांग पर क्या संज्ञान लेते हैं और आगामी GST काउंसिल की बैठक में इसे शामिल किया जाता है या नहीं। पूरे देश के व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं की निगाहें अब सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं।
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