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Bijnor News: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में इंसान और वन्यजीवों के बीच का संघर्ष लगातार चर्चा का विषय बना रहता है। इसी कड़ी में नूरपुर (Nurpur) क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए आज की सुबह एक बड़ी राहत लेकर आई। पिछले कई दिनों से मिठाई गांव और आसपास के इलाकों में दहशत का पर्याय बना गुलदार (Leopard) आखिरकार वन विभाग के बिछाए जाल में फंस गया।READ ALSO:-यूपी में हाड़ कंपाने वाली ठंड की दस्तक: कानपुर 4°C पर ठिठुरा, नोएडा बना 'गैस चेंबर'; मौसम विभाग का शीत लहर को लेकर बड़ा अलर्ट
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गुलदार के पिंजरे में कैद होने की खबर जैसे ही गांव में फैली, लोगों ने राहत की सांस ली। वन विभाग की इस त्वरित कार्रवाई की क्षेत्र में सराहना हो रही है।
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नागदेवता मंदिर के पास हुआ कैद

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नूरपुर थाना क्षेत्र के गांव मिठाई और बाखराबाद के जंगलों में पिछले काफी समय से एक गुलदार की आवाजाही देखी जा रही थी। यह गुलदार अक्सर गन्ने के खेतों और आबादी वाले इलाकों के पास देखा जा रहा था, जिससे किसानों का खेतों पर जाना मुश्किल हो गया था।
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ग्रामीणों की सूचना को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग ने कमर कसी। वन विभाग के डिप्टी रेंजर मोती लाल ने बताया कि गुलदार की लोकेशन को ट्रैक करने के बाद गांव के पास स्थित प्रसिद्ध नागदेवता मंदिर के परिसर में एक विशेष पिंजरा (Trap Cage) लगाया गया था। इस पिंजरे में शिकार रखा गया था ताकि गुलदार को ललचाया जा सके।
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बीती रात गुलदार शिकार की तलाश में वहां पहुंचा और पिंजरे में कैद हो गया।
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किसानों में था खौफ, अब मिली आजादी

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शुक्रवार-शनिवार की दरम्यानी रात जब गुलदार पिंजरे में फंसा, तो उसकी दहाड़ सुनकर आसपास के लोग सतर्क हो गए। आज (6 दिसंबर) सुबह जब ग्रामीण मौके पर पहुंचे, तो उन्होंने गुलदार को पिंजरे में कैद पाया। इसके बाद तुरंत वन विभाग को सूचित किया गया।
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सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और भारी भीड़ के बीच गुलदार को सुरक्षित अपने कब्जे में लिया। टीम अब उसे किसी सुरक्षित जंगल या रेस्क्यू सेंटर में छोड़ने की तैयारी कर रही है।
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(Internal link to related article: वन विभाग की नई एडवाइजरी, किसान रखें इन बातों का ध्यान)
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बिजनौर में क्यों बढ़ रहे हैं गुलदार?

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बिजनौर जिला गन्ने की खेती (Sugarcane Belt) के लिए मशहूर है। गन्ने के घने खेत गुलदारों के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह (Natural Habitat) का काम करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, जंगल कम होने और शिकार की तलाश में गुलदार अक्सर आबादी वाले इलाकों का रुख करते हैं। मिठाई गांव के किसानों का कहना है कि वे पिछले कई दिनों से रात में घरों से निकलने में भी डर रहे थे।
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ग्रामीणों ने बताई आपबीती:

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    किसानों ने बताया कि शाम होते ही खेतों में सन्नाटा पसर जाता था।
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    कई बार गुलदार को ट्यूबवेल और रास्तों पर देखा गया था।
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    पशुपालकों को अपने मवेशियों की चिंता सता रही थी।
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वन विभाग की अपील: सावधानी ही सुरक्षा

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भले ही एक गुलदार पकड़ा गया हो, लेकिन वन विभाग ने ग्रामीणों से अभी भी सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में अन्य गुलदारों की मौजूदगी से इनकार नहीं किया जा सकता।
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किसानों के लिए जरूरी सलाह:

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    अकेले न जाएं: खेतों में काम करने के लिए समूह में जाएं।
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    रोशनी रखें: शाम के समय टॉर्च या मोबाइल की फ्लैश लाइट का उपयोग करें।
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    शोर मचाएं: खेत में घुसने से पहले शोर मचाएं या रेडियो बजाएं, ताकि जानवर वहां से भाग जाए।
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    गले में कपड़ा लपेटें: गन्ने की कटाई करते समय गर्दन को तौलिए या मोटे कपड़े से ढंक कर रखें, क्योंकि गुलदार अक्सर गर्दन पर हमला करता है।
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नूरपुर के मिठाई गांव में गुलदार के पकड़े जाने से निश्चित रूप से एक बड़े खतरे का अंत हुआ है। वन विभाग की सूझबूझ और ग्रामीणों की सतर्कता ने एक संभावित दुर्घटना को टाल दिया। हालांकि, बिजनौर में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए अभी और भी ठोस कदम उठाने की जरूरत है। फिलहाल, मिठाई गांव के लोग चैन की नींद सो सकेंगे।
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