उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में बुधवार, 14 अक्टूबर को अदालत सजा सुनाएगी। इस मामले में सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को अदालत पहले ही हत्या के मामले में दोषी करार दे चुकी है। करीब 13 महीने तक चली सुनवाई, 126 तारीखों और 22 गवाहों के बयान के बाद अब दोनों की सजा पर फैसला होना है।
मार्च 2025 में शव मिला
यह मामला मार्च 2025 में तब देशभर में चर्चा में आया था, जब सौरभ का शव उसके किराए के घर में नीले ड्रम के अंदर मिला। ड्रम में शव के टुकड़े रखे गए थे और उन्हें सीमेंट से छिपाने की कोशिश की गई थी। पुलिस की जांच में पत्नी मुस्कान और उसके बचपन के दोस्त साहिल के संबंधों, हत्या की कथित योजना और वारदात के बाद हिमाचल प्रदेश जाने की जानकारी सामने आई।
सौरभ के परिवार ने दोनों के लिए फांसी की मांग की है। हालांकि, उन्हें मृत्युदंड मिलेगा या उम्रकैद, इसका फैसला अदालत को करना है।
2016 में घर से भागकर की थी लव मैरिज
सौरभ राजपूत और मुस्कान रस्तोगी ने वर्ष 2016 में प्रेम विवाह किया था। दोनों एक-दूसरे को पसंद करते थे, लेकिन शादी को लेकर परिवारों की सहमति नहीं बनने पर वे घर से चले गए थे। बाद में परिवारों ने उनका विवाह स्वीकार कर लिया।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›मेरठ में रहने लगे दंपती
शादी के बाद दोनों मेरठ में रहने लगे। वर्ष 2019 में उनकी पहली बेटी का जन्म हुआ। सौरभ मर्चेंट नेवी में काम कर चुका था। बाद में वह लंदन चला गया, जहां उसने एक मॉल में सेल्स मैनेजर के तौर पर काम किया।
सौरभ के विदेश में रहने के दौरान मुस्कान मेरठ में बेटी के साथ रहती थी। परिवारों के बीच संबंधों और दंपती के आपसी रिश्तों को लेकर समय के साथ तनाव की बात भी सामने आई। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों के बीच अलगाव और तलाक को लेकर चर्चा हुई थी, लेकिन रिश्ता कानूनी रूप से समाप्त नहीं हुआ था।
बचपन के दोस्त साहिल से बढ़ीं नजदीकियां
साहिल शुक्ला और मुस्कान एक-दूसरे को स्कूल के समय से जानते थे। दोनों की दोबारा नजदीकियां बढ़ने की बात वर्ष 2019 के आसपास सामने आई। पुलिस जांच और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मुस्कान और साहिल के बीच प्रेम संबंध बन गए थे।
खबरीलाल न्यूज़ का Telegram चैनल जॉइन करें Join ›सौरभ लंदन में नौकरी कर रहा था, जबकि साहिल ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग का काम करता था। रिपोर्टों में बताया गया कि साहिल का मुस्कान के घर आना-जाना बढ़ गया था। अभियोजन के मुताबिक, सौरभ के वापस लौटने के बाद यह संबंध हत्या की साजिश से जुड़ गया।
सौरभ के परिवार ने भी सवाल उठाया था कि यदि मुस्कान उसके साथ नहीं रहना चाहती थी, तो वह अलग होने का रास्ता चुन सकती थी। परिवार के मुताबिक, हत्या की कोई जरूरत नहीं थी। अदालत ने मुकदमे के दौरान सामने आए साक्ष्यों के आधार पर मुस्कान और साहिल को दोषी करार दिया।
बेटी का जन्मदिन मनाने लंदन से मेरठ आया था सौरभ
सौरभ 24 फरवरी 2025 को लंदन से मेरठ लौटा था। रिपोर्टों के मुताबिक, वह परिवार के साथ जन्मदिन मनाना चाहता था। 25 फरवरी को मुस्कान का जन्मदिन था, जबकि 28 फरवरी को बेटी पीहू का जन्मदिन था।
रात में नशीली दवा मिलाई
सौरभ की वापसी के कुछ ही दिनों बाद घटनाक्रम ने गंभीर रूप ले लिया। अभियोजन के अनुसार, 3 मार्च 2025 की रात मुस्कान ने सौरभ के खाने में नशीली दवा मिलाई। इसके बाद साहिल को घर बुलाया गया।
जांच के मुताबिक, सौरभ के बेहोश होने के बाद दोनों ने उस पर धारदार हथियार से हमला किया। मुस्कान और साहिल के सौरभ के दोनो हाथ और गर्दन काटकर अलग कर दी थी।
हत्या के बाद शव के टुकड़े कर नीले ड्रम में छिपाया
सौरभ की हत्या के बाद शव को छिपाने के लिए नीले रंग के प्लास्टिक ड्रम का इस्तेमाल किया गया। पुलिस के मुताबिक, शव के टुकड़े किए गए और उन्हें ड्रम में रखा गया। इसके बाद सीमेंट का घोल डालकर शव को छिपाने की कोशिश की गई।
ड्रम और सीमेंट की खरीद
जांच में ड्रम और सीमेंट की खरीद को लेकर भी तथ्य सामने आए। अभियोजन ने इन चीजों की व्यवस्था को हत्या के बाद शव छिपाने की तैयारी से जोड़ा। पुलिस को बाद में घर से ड्रम मिला, जिसे खोलने पर सौरभ के शव के टुकड़े बरामद हुए।
शव को इस तरह छिपाने की कोशिश की गई थी कि कई दिनों तक किसी को हत्या का पता न चले। लेकिन सौरभ से संपर्क नहीं होने पर उसके परिवार को संदेह हुआ। यही संदेह आगे पुलिस जांच और हत्याकांड के खुलासे की अहम कड़ी बना।
बेटी को ननिहाल छोड़कर हिमाचल चले गए थे मुस्कान और साहिल
हत्या के बाद मुस्कान और साहिल की गतिविधियां भी जांच का हिस्सा बनीं। रिपोर्टों के मुताबिक, मुस्कान ने बेटी को अपने मायके में छोड़ा और फिर साहिल के साथ हिमाचल प्रदेश चली गई। दोनों शिमला और कसौल जैसे स्थानों पर गए थे।
बताया गया कि यात्रा के दौरान दोनों ने तस्वीरें खिंचवाईं और सोशल मीडिया पर पोस्ट भी कीं। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, सौरभ के फोन और सोशल मीडिया अकाउंट का इस्तेमाल करके परिवार को गुमराह करने की कोशिश की गई, ताकि लगे कि वह अभी बाहर है।
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दोनों 17 मार्च के आसपास मेरठ लौटे। इस दौरान सौरभ के परिवार को उसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही थी। जब परिवार ने खोजबीन की और पुलिस से संपर्क किया, तो जांच का दायरा मुस्कान और साहिल तक पहुंचा।
पुलिस ने ऐसे किया हत्याकांड का खुलासा
सौरभ के परिवार की शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। मुस्कान से पूछताछ की गई और साहिल को भी जांच में शामिल किया गया। पुलिस ने ब्रह्मपुरी इलाके में स्थित किराए के घर की तलाशी ली।
वहीं से नीला ड्रम बरामद हुआ। ड्रम में सीमेंट के भीतर शव के टुकड़े छिपाए गए थे। बरामदगी के बाद हत्या का मामला सामने आया और पुलिस ने मुस्कान तथा साहिल को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी मार्च 2025 में हुई।
पुलिस ने जांच में दोनों के संबंधों, यात्रा, खरीदारी, डिजिटल रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों की पड़ताल की। सौरभ के भाई की शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज हुआ। जांच के बाद पुलिस ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया।
गिरफ्तारी के समय अदालत परिसर में साहिल की पिटाई
मामले की शुरुआती सुनवाई के दौरान आरोपियों को अदालत में पेश किया गया था। उस समय इस मामले को लेकर लोगों में इतना गुस्सा था कि वकीलों ने अदालत परिसर में साहिल की पिटाई कर दी थी।
दोनों को गिरफ्तारी के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। तब से वे मेरठ की चौधरी चरण सिंह जिला जेल में बंद हैं।
जेल में मुस्कान ने बेटी को जन्म दिया
इस मामले का एक अलग पारिवारिक पहलू नवंबर 2025 में सामने आया, जब जेल में बंद मुस्कान ने बेटी को जन्म दिया। रिपोर्टों के मुताबिक, 24 नवंबर 2025 को उसे प्रसव पीड़ा के बाद मेरठ के मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां उसने बच्ची को जन्म दिया।
सौरभ की हत्या के समय मुस्कान गर्भवती थी। बच्ची के जन्म के बाद सौरभ के परिवार ने पितृत्व की पुष्टि के लिए डीएनए जांच की मांग उठाई थी।
सौरभ और मुस्कान की पहली बेटी परिवार के पास रह रही है। इस पूरे मामले में बच्चों का भविष्य भी परिवारों के लिए एक संवेदनशील सवाल बना रहा है।
126 तारीखें, 22 गवाह और 13 महीने की सुनवाई
पुलिस जांच के बाद मामला अदालत पहुंचा। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 22 गवाह पेश किए। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मामले में 126 तारीखें पड़ीं और सुनवाई लगभग 13 महीने तक चली।
अभियोजन ने हत्या की कथित योजना, नशीली दवा, धारदार हथियार, ड्रम और सीमेंट की खरीद, शव की बरामदगी तथा हिमाचल यात्रा से जुड़े तथ्यों को अदालत के सामने रखा। बचाव पक्ष ने अपना पक्ष रखा और अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों का मूल्यांकन किया।
30 सितंबर 2026 को मेरठ की जिला अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी करार दिया। इसके बाद अदालत ने सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 14 अक्टूबर की तारीख तय की।
सौरभ के परिवार ने की फांसी की मांग
दोषसिद्धि के बाद सौरभ के परिवार ने दोनों के लिए मृत्युदंड की मांग की है। परिवार का कहना है कि सौरभ की हत्या बेहद गंभीर अपराध है और दोषियों को कठोरतम सजा मिलनी चाहिए।
अभियोजन पक्ष ने भी अधिकतम सजा की मांग की है। दूसरी ओर, सजा तय करते समय अदालत दोषियों के पक्ष को सुनने और कानून के तहत उपलब्ध विकल्पों पर विचार करने की प्रक्रिया पूरी करेगी।
बुधवार को अदालत का फैसला यह तय करेगा कि मुस्कान और साहिल को कौन-सी सजा दी जाती है। फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि दोनों को फांसी ही मिलेगी, क्योंकि अंतिम निर्णय न्यायालय का होगा।
कल पूरे मामले में आएगा अहम फैसला
सौरभ हत्याकांड में अब निगाहें 14 अक्टूबर की सुनवाई पर हैं। एक प्रेम विवाह से शुरू हुआ रिश्ता, विदेश में नौकरी, पुराने दोस्त से नजदीकियां, पति की हत्या, शव को नीले ड्रम में छिपाने और फिर हिमाचल जाने की घटनाओं ने इस मामले को देश के चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल कर दिया।
अदालत ने मुस्कान और साहिल को दोषी ठहरा दिया है। अब सजा पर अंतिम निर्णय बाकी है। सौरभ का परिवार इस फैसले से न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है। अदालत की ओर से सुनाई जाने वाली सजा ही इस मुकदमे का अगला निर्णायक चरण होगी।

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