ख़बरीलाल विशेष रिपोर्ट: महंगाई की मार झेल रही आम जनता की जेब पर जब नियम विरुद्ध तरीके से डाका डालने की कोशिश की जाती है, तो प्रशासन का डंडा चलना लाजिमी है। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद के नजीबाबाद तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले साहनपुर कस्बे में कुछ ऐसा ही देखने को मिला है। यहां ई-रिक्शा चालकों द्वारा मनमाने ढंग से किराया बढ़ाए जाने के खिलाफ स्थानीय प्रशासन और परिवहन विभाग ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। एंटी करप्शन ब्यूरो एंड वेलफेयर फाउंडेशन की एक पुख्ता शिकायत के बाद सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) गौरी शंकर ने खुद ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया और नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले चालकों को कड़ी चेतावनी दी है।Read also:-बिजनौर में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई: बिंदल शुगर मिल पर IT, ED और GST का 'ट्रिपल अटैक', अधिकारियों के फोन जब्त, कई नदारद
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साहनपुर में क्या है पूरा विवाद? 10 रुपये से सीधे 15 रुपये हुआ किराया

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सार्वजनिक परिवहन किसी भी शहर या कस्बे की जीवन रेखा होता है। साहनपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों में ई-रिक्शा यातायात का सबसे प्रमुख और सुलभ साधन बन चुके हैं। छात्र-छात्राएं हों, दिहाड़ी मजदूर हों, या फिर घरेलू महिलाएं, छोटी दूरी तय करने के लिए हर कोई इन्हीं ई-रिक्शा पर निर्भर है। लेकिन हाल ही में साहनपुर में एक नवगठित रिक्शा यूनियन ने अपनी मनमानी करते हुए एकतरफा फैसला सुना दिया।
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इस यूनियन ने बिना किसी प्रशासनिक अनुमति, बिना किसी गजट नोटिफिकेशन और बिना किसी पूर्व सूचना के स्थानीय स्तर पर न्यूनतम किराया 10 रुपये से बढ़ाकर सीधे 15 रुपये कर दिया। 5 रुपये की यह वृद्धि सुनने में शायद छोटी लगे, लेकिन एक दिहाड़ी मजदूर या उस छात्र के लिए जो दिन में कई बार सफर करता है, यह महीने के बजट पर एक बड़ा आर्थिक प्रहार था। इस तुगलकी फरमान के बाद पूरे साहनपुर क्षेत्र में यात्रियों और ई-रिक्शा चालकों के बीच रोजमर्रा की बहस और तीखी नोकझोंक आम बात हो गई थी। क्षेत्र में इस मनमानी को लेकर भारी असंतोष और आक्रोश पनप रहा था।
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एंटी करप्शन ब्यूरो एंड वेलफेयर फाउंडेशन की निर्णायक भूमिका

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जब आम आदमी की आवाज दबने लगती है, तब सामाजिक संस्थाओं की भूमिका अहम हो जाती है। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ। ई-रिक्शा चालकों की इस संगठित मनमानी के खिलाफ 'एंटी करप्शन ब्यूरो एंड वेलफेयर फाउंडेशन' ने मोर्चा खोला। संस्था ने सिर्फ मौखिक विरोध नहीं किया, बल्कि कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन करते हुए एक ठोस कदम उठाया।
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संस्था की डिस्ट्रिक एडमिनिस्ट्रेटिव (जिला प्रशासनिक प्रमुख) रंजना सैनी ने इस पूरे प्रकरण का संज्ञान लेते हुए बिजनौर के जिलाधिकारी (DM) और नजीबाबाद के उपजिलाधिकारी (SDM) को एक विस्तृत लिखित शिकायत भेजी। इस शिकायती पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि:
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    नियमों का खुला उल्लंघन: सार्वजनिक परिवहन के किराए में वृद्धि करने का अधिकार केवल संबंधित परिवहन प्राधिकरण या सक्षम प्राधिकारी के पास होता है। कोई भी प्राइवेट यूनियन अपने स्तर पर किराया तय नहीं कर सकती।
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    आर्थिक शोषण: इस अवैध वृद्धि से आम नागरिकों, विशेषकर समाज के निचले तबके, मजदूरों, स्कूली छात्रों और दैनिक यात्रियों पर अनावश्यक और अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।
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    कानून व्यवस्था का प्रश्न: अवैध वसूली के कारण आए दिन यात्रियों और चालकों के बीच विवाद हो रहे हैं, जो कभी भी कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकते हैं।
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संस्था ने प्रशासन से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और पुरानी किराया दर (10 रुपये) को दोबारा सख्ती से लागू करवाने की मांग की थी।
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एआरटीओ गौरी शंकर का साहनपुर दौरा और 'ऑन-द-स्पॉट' एक्शन

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एंटी करप्शन ब्यूरो की इस गंभीर शिकायत के बाद बिजनौर प्रशासन हरकत में आ गया। जिलाधिकारी के निर्देशानुसार, सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) गौरी शंकर ने बिना समय गंवाए साहनपुर का रुख किया।
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एआरटीओ का काफिला जब साहनपुर के मुख्य चौराहों और ई-रिक्शा स्टैंड पर पहुंचा, तो हड़कंप मच गया। एआरटीओ गौरी शंकर ने दल-बल के साथ स्थिति का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने सिर्फ अधिकारियों से रिपोर्ट नहीं ली, बल्कि सीधे ई-रिक्शा चालकों और वहां मौजूद आम यात्रियों से संवाद स्थापित किया।
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चालकों के साथ हुई बातचीत में एआरटीओ ने बेहद सख्त लहजे में स्पष्ट कर दिया कि:

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    "बिना परिवहन विभाग की अनुमति के एक भी रुपया अतिरिक्त वसूलना गैर-कानूनी है।"
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    "कोई भी स्वयंभू यूनियन सरकारी नियमों से ऊपर नहीं है।"
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    "यदि भविष्य में किसी भी चालक द्वारा निर्धारित 10 रुपये से अधिक किराया मांगे जाने की शिकायत मिलती है, तो सिर्फ चालान नहीं कटेगा, बल्कि ई-रिक्शा सीज करने और परमिट/लाइसेंस रद्द करने जैसी वैधानिक और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।"
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यह चेतावनी उन सभी चालकों के लिए एक स्पष्ट संदेश था जो संगठन की आड़ में आम जनता की जेब काटने का प्रयास कर रहे थे।
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निरीक्षण के दौरान मौजूद रहे सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक

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प्रशासनिक कार्रवाई को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए शिकायतकर्ता पक्ष का मौजूद रहना आवश्यक होता है। एआरटीओ के इस निरीक्षण और कार्रवाई के दौरान 'एंटी करप्शन ब्यूरो एंड वेलफेयर फाउंडेशन' के फाउंडर मेंबर इंजीनियर विकास कुमार आर्य अपनी टीम के साथ मौके पर डटे रहे। उनके साथ कस्बे के कई गणमान्य नागरिक और दैनिक यात्री भी उपस्थित थे।
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इंजीनियर विकास कुमार आर्य ने एआरटीओ के समक्ष स्पष्ट किया कि प्रशासन को सिर्फ चेतावनी देकर नहीं रुकना चाहिए, बल्कि यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस आदेश का जमीनी स्तर पर लंबे समय तक पालन हो। स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि आसपास के नजीबाबाद और अन्य कस्बों में आज भी न्यूनतम किराया 10 रुपये ही है। ऐसे में सिर्फ साहनपुर में 15 रुपये वसूलना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण था। लोगों ने बताया कि इस मनमानी के कारण कई बार उन्हें पैदल ही अपना सफर तय करने को मजबूर होना पड़ रहा था।
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ई-रिक्शा संचालन: उत्तर प्रदेश में नियम और जमीनी हकीकत

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इस घटना ने ई-रिक्शा संचालन से जुड़े कई गंभीर सवालों को जन्म दिया है, जिस पर ख़बरीलाल का ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है। उत्तर प्रदेश के टियर-2 और टियर-3 शहरों (जैसे बिजनौर, नजीबाबाद, मेरठ आदि) में ई-रिक्शा ने रोजगार का एक बड़ा साधन तो पैदा किया है, लेकिन इसके असंगठित स्वरूप ने कई परेशानियां भी खड़ी की हैं।
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    किराया निर्धारण की प्रक्रिया: मोटर वाहन अधिनियम के तहत, किसी भी व्यावसायिक यात्री वाहन का किराया तय करने के लिए एक 'रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी' (RTA) होती है। इसमें वाहन की लागत, ईंधन (या बिजली) का खर्च, और चालक के मुनाफे का आकलन करने के बाद ही किराया तय किया जाता है। साहनपुर के मामले में इस पूरी प्रक्रिया को दरकिनार कर दिया गया था।
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    अवैध यूनियनों का मकड़जाल: अक्सर देखा जाता है कि ई-रिक्शा चालक अवैध स्टैंड बना लेते हैं और अपनी खुद की यूनियन खड़ी कर लेते हैं। ये यूनियनें प्रशासन के समानांतर अपनी सत्ता चलाने की कोशिश करती हैं, जिसका सीधा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है।
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    यातायात की समस्या: बिना रूट निर्धारण के सैकड़ों की संख्या में दौड़ते ये ई-रिक्शा छोटे कस्बों की संकरी सड़कों पर भारी जाम का कारण बनते हैं। प्रशासन के लिए इनका पंजीकरण और रेगुलेशन आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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हालांकि, ई-रिक्शा चालकों का अपना तर्क भी होता है। बढ़ती महंगाई, बैटरियों के आसमान छूते दाम और ई-रिक्शा के मेंटेनेंस के खर्च का हवाला देकर वे किराया बढ़ाने को सही ठहराने की कोशिश करते हैं। लेकिन, लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था में किसी भी समस्या का समाधान नियम तोड़कर नहीं निकाला जा सकता। यदि उन्हें किराया बढ़ाना ही था, तो उन्हें अपनी मांगें परिवहन विभाग के समक्ष विधिवत रूप से रखनी चाहिए थीं।
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जनता की प्रतिक्रिया: प्रशासन के एक्शन से मिली बड़ी राहत

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एआरटीओ गौरी शंकर की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद साहनपुर की जनता ने राहत की सांस ली है। जिन छात्रों को स्कूल-ट्यूशन जाने के लिए रोज अपनी पॉकेट मनी का एक बड़ा हिस्सा किराये में खर्च करना पड़ रहा था, उनके चेहरे पर अब सुकून है। दिहाड़ी मजदूरों का कहना है कि 5 रुपये उनके लिए बहुत मायने रखते हैं और प्रशासन ने सही समय पर हस्तक्षेप करके उन्हें लुटने से बचा लिया है।
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अब देखना यह दिलचस्प होगा कि क्या ई-रिक्शा चालक प्रशासन की इस सख्त चेतावनी का स्थायी रूप से पालन करते हैं, या कुछ दिन बाद फिर से वही पुरानी कहानी दोहराई जाएगी। स्थानीय पुलिस और प्रशासन को भी इस मामले में लगातार मॉनिटरिंग करनी होगी ताकि दोबारा कोई भी यूनियन इस तरह का फरमान जारी करने की हिम्मत न कर सके।
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इस खबर से जुड़े प्रमुख बयान (Video Bytes Script)

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    बाइट 1: गौरी शंकर (एआरटीओ, बिजनौर) "हमें शिकायत मिली थी कि साहनपुर में ई-रिक्शा चालकों ने अपनी मर्जी से किराया बढ़ा दिया है। हमने आज यहां आकर सभी चालकों को सख्त हिदायत दी है कि परिवहन विभाग की अनुमति के बिना किराया नहीं बढ़ाया जा सकता। पुराना किराया ही लागू रहेगा। अगर इसके बाद भी कोई अधिक पैसे वसूलता पाया गया, तो उसके खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"
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    बाइट 2: इंजीनियर विकास आर्य (फाउंडर मेंबर, एंटी करप्शन ब्यूरो एंड वेलफेयर फाउंडेशन - शिकायतकर्ता) "साहनपुर में गरीब जनता, छात्र और मजदूरों को 10 रुपये की जगह 15 रुपये देने के लिए मजबूर किया जा रहा था। यह सरासर अन्याय था। हमारी संस्था ने डीएम और एसडीएम महोदय को पत्र लिखा था, जिसके बाद आज एआरटीओ साहब ने यहां आकर संज्ञान लिया है। हम प्रशासन के इस त्वरित एक्शन का स्वागत करते हैं और आगे भी जनता के हकों के लिए लड़ते रहेंगे।"
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    बाइट 3: स्थानीय नागरिक / रिक्शा चालक (नागरिक प्रतिक्रिया): "हम गरीब आदमी हैं, रोज काम पर जाना होता है। अचानक 15 रुपये किराया कर दिया था तो बहुत दिक्कत हो रही थी। अब अधिकारी आए हैं तो उम्मीद है किराया फिर से 10 रुपये ही रहेगा।"
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