बैंक ग्राहकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने बैंकिंग क्लेम और उत्तराधिकार की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए बैंक खाते में नॉमिनी (Nominee) जोड़ने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब ग्राहक अपने बैंक खाते में एक के बजाय चार नॉमिनी जोड़ सकेंगे। वित्त मंत्रालय ने 23 अक्टूबर को यह जानकारी दी है। इस बदलाव का उद्देश्य खाताधारक के न रहने पर परिवार वालों को जमा राशि और मूल्यवान वस्तुओं को प्राप्त करने में होने वाली देरी और कानूनी पेचीदगियों को खत्म करना है।
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पारिवारिक विवादों को खत्म करने की पहल

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मौजूदा नियमों के तहत, एक बैंक खाते में केवल एक ही नॉमिनी को जोड़ा जा सकता था। इससे अक्सर परिवार के सदस्यों (जैसे पत्नी, बेटे, बेटी, माता) के बीच जमा राशि के बँटवारे को लेकर विवाद उत्पन्न होते थे, और मामला कोर्ट तक पहुँच जाता था।
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    पुरानी मजबूरी: पहले सिर्फ एक नॉमिनी का नाम देने की मजबूरी थी, जिससे परिवार में संपत्ति को लेकर झगड़े की संभावना अधिक रहती थी।
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    पारदर्शिता: नए नियम से यह सुनिश्चित होगा कि खाताधारक की इच्छा के अनुसार, उसकी संपत्ति का बंटवारा स्पष्ट और कानूनी रूप से हो सके।
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 1 नवंबर से लागू होगा नया सिस्टम

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वित्त मंत्रालय ने बताया कि यह नया, ग्राहक-केंद्रित नियम 1 नवंबर 2025 से लागू हो जाएगा। नॉमिनेशन जोड़ने, बदलने या रद्द करने के लिए आवश्यक फॉर्म और प्रोसेस की विस्तृत गाइडलाइन जल्द ही जारी की जाएगी।
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4 पॉइंट्स में समझें नया सिस्टम कैसे काम करेगा

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    नॉमिनी की संख्या: ग्राहक अपने बचत खाते, चालू खाते या फिक्स्ड डिपॉजिट में एक, दो, तीन या अधिकतम चार नॉमिनी जोड़ सकते हैं।
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    हिस्सेदारी (Share) तय: ग्राहक यह भी तय कर सकते हैं कि चार नॉमिनी में से किसे कितना हिस्सा (जैसे पत्नी, बेटे, बेटी, माता को 25-25% हिस्सा) मिलेगा।
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    बदलाव और रद्दीकरण: नॉमिनी को कभी भी बदला (Change) या रद्द (Cancel) किया जा सकेगा, जिससे ग्राहकों को अपने नामांकन में पूरी स्वतंत्रता मिलेगी।
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    सक्सेसिव नॉमिनी (Sequential Nominee): ग्राहक चाहें तो सक्सेसिव नॉमिनी भी रख सकते हैं। इसका मतलब है कि यदि पहले नंबर का नॉमिनी न रहे, तो दूसरे की दावेदारी होगी, और इसी क्रम में तीसरे और चौथे नॉमिनी दावेदारी कर सकेंगे।
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लॉकर के लिए विशेष नियम

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वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि हालांकि बैंक खातों में ग्राहक एक साथ चार नॉमिनी रजिस्टर कर सकते हैं, लेकिन सेफ कस्टडी (Safe Custody) और लॉकर के मामले में नियम अलग होंगे।
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    लॉकर में सक्सेसिव: सेफ कस्टडी और लॉकर में केवल सक्सेसिव नॉमिनी ही बनाए जा सकेंगे। यानी, पहले नॉमिनी के न रहने पर ही दूसरे नॉमिनी की दावेदारी होगी।
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    दावे में देरी नहीं: इस बदलाव से लॉकर में रखे गहने, कागजात और मूल्यवान वस्तुओं के क्लेम में देरी नहीं होगी, क्योंकि हकदार का क्रम स्पष्ट होगा।
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आम आदमी को मिलेगा बड़ा फायदा

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इस बदलाव से आम भारतीय ग्राहकों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिलेंगे:
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    पारिवारिक शांति: अब अकाउंट होल्डर अपनी जमा राशि को स्पष्ट रूप से परिवार के सभी प्रमुख सदस्यों (पत्नी, बेटे, बेटी, माता) में बांट सकते हैं, जिससे पारिवारिक झगड़े या कोर्ट केस कम होंगे।
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    वित्तीय सुरक्षा: बैंक के पास यदि चारों नॉमिनी और उनकी स्पष्ट हिस्सेदारी दर्ज है, तो खाताधारक के न रहने पर बैंक सीधे रिकॉर्ड देखकर रकम ट्रांसफर कर सकता है, जिससे परिवार वालों का समय, पैसा और मानसिक तनाव बचेगा।
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    व्यवस्था में विश्वास: यह बैंकिंग कानून में हुआ एक बड़ा बदलाव है, जो ग्राहकों और बैंकिंग व्यवस्था के बीच पारदर्शिता और विश्वास को बढ़ाएगा।
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न्यू रूल, न्यू रिलीफ: आम आदमी के लिए 5 बेमिसाल फायदे

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लाभ का क्षेत्रनया नियम कैसे मदद करेगापहले की स्थिति (एक नॉमिनी)
पारिवारिक सौहार्दजमा राशि को परिवार के सभी सदस्यों (जैसे माता-पिता, पत्नी, बच्चे) में समान रूप से बांटकर विवाद को जड़ से खत्म करना।नॉमिनी को सारी राशि मिलने पर, अन्य कानूनी वारिसों के बीच अक्सर कोर्ट केस होते थे।
क्लेम सेटलमेंटबैंक सीधे रिकॉर्ड देखकर रकम ट्रांसफर करेगा, जिससे क्लेम तुरंत सेटल होगा।कानूनी उत्तराधिकार प्रमाण पत्र या कोर्ट के आदेश का इंतजार करना पड़ता था।
वित्तीय नियोजनखाताधारक अब अपनी वसीयत के अनुसार, अपने जीवनकाल में ही जमा पूंजी का स्पष्ट वितरण कर सकेंगे।वसीयत के बावजूद, नॉमिनी को लेकर कानूनी पेचीदगी बनी रहती थी।
समय और लागत की बचतपरिवार का समय, पैसा और सबसे महत्वपूर्ण मानसिक तनाव बचेगा जो कानूनी लड़ाई में बर्बाद होता था।संपत्ति हासिल करने के लिए सालों तक मुकदमे लड़ना पड़ता था।
व्यवस्था में विश्वासबैंकिंग प्रणाली में अधिक पारदर्शिता और विश्वास पैदा होगा, जिससे अधिक लोग औपचारिक वित्तीय बचत की ओर आकर्षित होंगे। 
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