सीतापुर, यूपी: समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री आजम खां को आखिरकार 23 महीने की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद मंगलवार को सीतापुर जेल से रिहा कर दिया गया। उनकी रिहाई से पहले ही जेल के बाहर उनके बेटे अदीब आजम और सैकड़ों समर्थक पहुंच चुके थे, जिन्होंने अपने नेता का जोरदार स्वागत किया। आजम खां को उनके बेटे के दो जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के एक मामले में दोषी ठहराया गया था, जिसमें उन्हें उनकी पत्नी डॉ. तजीन फात्मा और बेटे अब्दुल्ला आजम के साथ 7 साल की सजा मिली थी।
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रिहाई का रास्ता कैसे साफ हुआ?
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आजम खां की रिहाई का रास्ता तब साफ हुआ जब रामपुर कोर्ट से उनकी 70 मुकदमों में जमानत का आदेश सीतापुर जेल को मिला। हालांकि, उनकी रिहाई शत्रु संपत्ति मामले में जोड़ी गई नई धाराओं के कारण अटक गई थी, लेकिन 20 सितंबर को न्यायालय से कोई नया वारंट जारी न होने के बाद कानूनी अड़चनें दूर हो गईं।
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    पत्नी और बेटे पहले ही हो चुके थे रिहा: आजम खां की पत्नी डॉ. तजीन फात्मा को 29 मई 2024 को जमानत मिल गई थी, जबकि उनके बेटे अब्दुल्ला आजम 25 फरवरी 2025 को हरदोई जेल से बाहर आ गए थे।
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जेल के बाहर का मंजर
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जेल के बाहर समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। गाड़ियों की कतारें लग गईं, जिससे यातायात भी प्रभावित हुआ। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए 30 वाहनों का चालान किया। मुरादाबाद की सांसद रुचि वीरा भी आजम से मिलने पहुंचीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया।
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अखिलेश यादव का बयान
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आजम खां की रिहाई पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, "यह पार्टी के लिए बेहद खुशी का पल है।" उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास था कि आजम को न्याय मिलेगा और आरोप लगाया कि उनके खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज किए गए थे। अखिलेश ने यह भी वादा किया कि अगर सपा की सरकार बनती है तो आजम खां पर लगे सभी मुकदमे वापस लिए जाएंगे।
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अपनी रिहाई के बाद, आजम खां 10 गाड़ियों के काफिले के साथ रामपुर के लिए रवाना हुए, जहां उनका भव्य स्वागत होने की उम्मीद है।
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