आज के डिजिटल युग में जहां हमारे कई काम स्मार्टफोन से आसान हो गए हैं, वहीं साइबर ठगी का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। अगर आपके मोबाइल पर गैस बिल, बिजली बिल, बैंक केवाईसी (KYC) अपडेट या किसी सरकारी सेवा के नाम पर कोई साइबर फ्रॉड APK लिंक आता है, तो सावधान हो जाएं। आपकी एक छोटी सी लापरवाही आपके बैंक खाते की पूरी जमा-पूंजी पल भर में गायब कर सकती है। हाल ही में अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे ही बड़े और खतरनाक नेक्सस का पर्दाफाश किया है।READ ALSO:-WhatsApp New Feature: अनजान नंबर की चैट खोलते ही दिखेगा खतरे का अलर्ट, व्हाट्सएप ला रहा है धांसू सुरक्षा फीचर
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अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने देशभर में एक्टिव जामताड़ा स्टाइल साइबर ठगी गैंग के एक बड़े नेटवर्क को ध्वस्त किया है। पुलिस ने फर्जी ऐप के जरिए बैंक खाते खाली कराने वाले मुख्य मास्टरमाइंड समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि यह पूरा गैंग कैसे काम करता था और आप खुद को इस तरह की ठगी से कैसे सुरक्षित रख सकते हैं।
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अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच का बड़ा खुलासा

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अहमदाबाद पुलिस ने साइबर अपराध की दुनिया में एक बहुत बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। पुलिस ने इस हाई-टेक साइबर ठगी मामले में मुख्य टेक्निकल मास्टरमाइंड पूर्णानंद उर्फ मुकेश तिवारी, उसके सहयोगी विकास दास और सीताराम मंडल को गिरफ्तार किया है।
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जांच अधिकारियों के मुताबिक, यह कोई आम साइबर ठगों का गिरोह नहीं था। यह गैंग देशभर के अन्य साइबर अपराधियों को ठगी करने के लिए तकनीकी सहायता, सॉफ्टवेयर, फर्जी डोमेन और बैंकिंग सुविधाएं मुहैया कराता था। यह एक तरह का 'साइबर क्राइम एज ए सर्विस' (Cybercrime as a Service) मॉडल था, जिसने पुलिस की भी नींद उड़ा दी थी।
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कैसे काम करता था यह हाई-टेक ठगी का नेटवर्क?

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पुलिस पूछताछ में यह बात सामने आई है कि मुख्य आरोपी पूर्णानंद उर्फ मुकेश तिवारी तकनीकी रूप से बेहद माहिर है। वह साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाला खास सॉफ्टवेयर और टेलीग्राम (Telegram) आधारित ऑटोमेटेड सिस्टम तैयार करता था। यह सिस्टम इतना एडवांस था कि यह पलक झपकते ही पीड़ित के फोन का डेटा चुरा लेता था।
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वहीं, इस गैंग का दूसरा सदस्य विकास दास इस खतरनाक सॉफ्टवेयर की मार्केटिंग का काम देखता था। वह इस सॉफ्टवेयर को देशभर में एक्टिव करीब 400 साइबर फ्रॉड गैंग को हर महीने लगभग 12,000 रुपये के किराए पर मुहैया कराता था।
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तीसरा आरोपी सीताराम मंडल इस पूरे गोरखधंधे में लॉजिस्टिक्स का काम संभालता था। वह फर्जी डेबिट-क्रेडिट कार्ड, फर्जी वेबसाइट डोमेन बनाने और ठगी के पैसों को अलग-अलग बैंक खातों तक सुरक्षित पहुंचाने में मदद करता था।
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साबरमती गैस लिमिटेड के नाम पर हुई 6.70 लाख की ठगी

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इस पूरे अंतरराष्ट्रीय स्तर के नेटवर्क का खुलासा एक आम नागरिक की शिकायत के बाद हुआ। अहमदाबाद के रहने वाले एक व्यक्ति के मोबाइल पर 'साबरमती गैस लिमिटेड' के नाम से एक मैसेज आया। इस मैसेज में बिल अपडेट करने के बहाने एक फर्जी .APK फाइल भेजी गई थी।
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पीड़ित ने असली मैसेज समझकर उस फाइल को डाउनलोड कर लिया। फाइल इंस्टॉल होते ही साइबर ठगों ने उनके मोबाइल का पूरा रिमोट कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया। इसके चंद मिनटों के भीतर ही पीड़ित के बैंक खाते से करीब 6.70 लाख रुपये निकाल लिए गए। इस घटना के बाद जब मामला पुलिस के पास पहुंचा, तब जाकर इस बड़े नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं।
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SBI Yono कैश सुविधा का किया गया दुरुपयोग

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जांच में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। ये ठग बैंक खाते से सीधे पैसे ट्रांसफर करने के बजाय कैश निकालने के नए तरीके अपनाते थे। आरोपियों ने एसबीआई योनो (SBI Yono Cash) जैसी बिना कार्ड के नकद निकासी वाली सुविधाओं का जमकर दुरुपयोग किया।
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पीड़ित के फोन से ओटीपी (OTP) चुराकर, ये अपराधी बिना किसी एटीएम कार्ड के ही एटीएम मशीनों से नकदी निकाल लेते थे। इससे पुलिस के लिए उन्हें ट्रैक करना और भी मुश्किल हो जाता था, क्योंकि सीधे बैंक ट्रांसफर में अकाउंट फ्रीज करने का विकल्प रहता है।
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आखिर कैसे आपके फोन पर कब्जा जमाते हैं हैकर्स?

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यह जानना बेहद जरूरी है कि यह गैंग तकनीक का इस्तेमाल कैसे करता था। दरअसल, ये लोग लोगों को अलग-अलग बहानों से फर्जी ऐप (APK फाइल) डाउनलोड करवाते थे। प्ले स्टोर (Play Store) के बजाय व्हाट्सएप या एसएमएस के जरिए लिंक भेजे जाते थे।
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जैसे ही पीड़ित उस ऐप को इंस्टॉल करता और उसे जरूरी परमिशन (Permissions) देता, ठग उसके मोबाइल की हर एक्टिविटी पर नजर रखने लगते थे। इसके बाद फोन पर आने वाले बैंक के ओटीपी, मैसेज और बाकी जरूरी जानकारी सीधे हैकर्स के सर्वर तक पहुंचने लगती थी। इस तकनीक का इस्तेमाल करके अलग-अलग राज्यों में हजारों लोगों को निशाना बनाया गया।
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इस तरह के फर्जी लिंक्स और ऐप्स से कैसे बचें?

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साइबर क्राइम अधिकारियों ने आम जनता से इस तरह की ठगी से बचने के लिए कुछ सख्त कदम उठाने की अपील की है:
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    किसी भी अनजान नंबर से व्हाट्सएप या एसएमएस पर भेजी गई APK फाइल, लिंक या ऐप को बिल्कुल भी डाउनलोड न करें।
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    यह गांठ बांध लें कि कोई भी बैंक, गैस कंपनी, बिजली विभाग या सरकारी संस्था कभी भी व्हाट्सएप के जरिए ऐप इंस्टॉल करने के लिए नहीं कहती है।
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    किसी भी ऐप को डाउनलोड करने के लिए हमेशा आधिकारिक 'Google Play Store' या 'Apple App Store' का ही इस्तेमाल करें।
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    अगर आपके मोबाइल पर केवाईसी अपडेट या बिल कटने का कोई डराने वाला मैसेज आता है, तो उसे तुरंत डिलीट करें।
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    किसी भी जानकारी के लिए सीधे संबंधित विभाग की ऑफिशियल वेबसाइट या उनके आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर पर ही संपर्क करें।
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अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच की यह कार्रवाई एक बड़ी कामयाबी है, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। जब तक 400 साइबर गैंग पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाते, तब तक हर नागरिक को सतर्क रहना होगा। अगर आप या आपका कोई परिचित किसी तरह की साइबर ठगी का शिकार हो जाता है, तो बिल्कुल घबराएं नहीं। बिना देरी किए तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। आपकी सतर्कता ही आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है।
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