Rain Thunderstorm Impact India: देश के कई राज्यों में मौसम ने अचानक ऐसी करवट ली है कि लोगों का जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। प्रचंड गर्मी के बीच मानसून की दस्तक और पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के टकराव ने उत्तर-पश्चिम और पूर्वी भारत में एक भयंकर प्राकृतिक आपदा का रूप ले लिया है। बीते 24 घंटों में उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और उत्तराखंड समेत कई राज्यों में आंधी-तूफान, भारी बारिश और आकाशीय बिजली गिरने से भारी तबाही मची है। इस विनाशकारी मौसम ने न केवल संपत्तियों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है, बल्कि 50 से अधिक मासूम लोगों की जिंदगियां भी छीन ली हैं।
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​आइए, विस्तार से जानते हैं कि किस राज्य में मौसम ने कैसा कहर बरपाया है और इस तबाही का खौफनाक मंजर कैसा रहा।
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​विनाशकारी मौसम का राज्यवार संक्षिप्त विवरण

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राज्य का नाम
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मौतों का आंकड़ा
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तबाही का मुख्य कारण
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प्रमुख प्रभावित क्षेत्र
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उत्तर प्रदेश
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31
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100 किमी/घंटा की हवाएं, बारिश, पेड़ और दीवारें गिरना
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बुंदेलखंड, पूर्वांचल, आगरा, प्रयागराज, सहारनपुर
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बिहार
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17
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आकाशीय बिजली, 107 किमी/घंटा की तूफानी हवाएं
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पटना, गया, मोतिहारी, पश्चिमी चंपारण
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पश्चिम बंगाल
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07
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तूफान, तेज बारिश और बिजली गिरना
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दक्षिण बंगाल के विभिन्न हिस्से
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उत्तराखंड
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02
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आकाशीय बिजली गिरना
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तुंगनाथ-चोपता (रुद्रप्रयाग)
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जम्मू-कश्मीर
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01
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तेज आंधी में पेड़ गिरना
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अनंतनाग
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उत्तर प्रदेश में तबाही का खौफनाक मंजर: 31 लोगों की दर्दनाक मौत

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उत्तर प्रदेश में पिछले 24 घंटों के दौरान मौसम का सबसे भयानक रूप देखने को मिला। बुंदेलखंड और पूर्वांचल के इलाकों में आंधी और बारिश ने मानों सब कुछ तहस-नहस कर दिया। राज्य में अलग-अलग हादसों में 31 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
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नदियों का उफान और बहती गाड़ियां:

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सहारनपुर जिले में स्थिति तब भयावह हो गई जब पहाड़ी इलाकों से तेज बहाव के साथ आए पानी ने रौद्र रूप ले लिया। इस तेज बहाव में एक इनोवा और ट्रैक्टर समेत 10 गाड़ियां तिनके की तरह बह गईं। यह दृश्य देखकर स्थानीय लोग सहम गए।
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रेलवे और बिजली व्यवस्था चरमराई:

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खराब मौसम का सीधा असर यातायात और संचार पर पड़ा। चौरीचौरा और गौरी बाजार रेलवे स्टेशन के बीच अचानक 4 विशाल पेड़ रेलवे लाइन पर गिर गए। वहीं, भारी जलभराव के कारण गोरखपुर कैंट से देवरिया के बीच बिजली सप्लाई पूरी तरह से बाधित हो गई, जिससे कई प्रमुख ट्रेनें बीच रास्ते में ही फंस गईं। झांसी-लखनऊ रेलखंड पर उरई और भुआ स्टेशनों के बीच ओवरहेड इलेक्ट्रिक (OHE) लाइन का खंभा टूटने से ट्रेनों का संचालन घंटों तक ठप रहा।
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आगरा और प्रयागराज में टूटे रिकॉर्ड:

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ताजनगरी आगरा में 100 किलोमीटर प्रति घंटे की खौफनाक रफ्तार से तूफान आया। हवा की गति इतनी तेज थी कि कई जगहों पर भारी-भरकम पेड़ और बिजली के खंभे जड़ से उखड़ गए। आगरा के साईं का तकिया चौराहे पर एक ई-रिक्शा के ऊपर विशाल नीम का पेड़ गिर गया, जिसमें दबकर चालक की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इसके अलावा, सुल्तानगंज और रश्मि विहार जैसे इलाकों में भी भारी नुकसान दर्ज किया गया।
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दूसरी ओर, प्रयागराज में बारिश ने 55 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। रात एक बजे से सुबह 5 बजे के बीच महज 4 घंटे में 61 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इससे पहले 18 मई 1971 को यहां 54 मिलीमीटर बारिश हुई थी। वाराणसी में भी 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी ने भारी दहशत फैलाई।
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राहत और बचाव कार्य:

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हालात की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत एक्शन लिया है। उन्होंने आला अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पूरे प्रदेश में हुए नुकसान का त्वरित आकलन किया जाए और 24 घंटे के भीतर सभी प्रभावितों और मृतकों के परिजनों को आर्थिक राहत राशि प्रदान की जाए।
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बिहार में आसमानी आफत: 17 मौतें और बाढ़ का मंडराता खतरा

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पड़ोसी राज्य बिहार में भी प्रकृति का कहर कम नहीं रहा। तेज आंधी, मूसलाधार बारिश और लगातार गिरती आकाशीय बिजली (वज्रपात) ने पूरे राज्य में खौफ का माहौल बना दिया। पिछले 24 घंटों में प्राकृतिक आपदाओं के चलते 17 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
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हवाओं की डराने वाली रफ्तार और यातायात बाधित:

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राजधानी पटना में हवा की रफ्तार 107 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई, जबकि गया में यह 74 किमी प्रति घंटा रही। इस भयंकर तूफान के कारण हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। पटना एयरपोर्ट पर 4 उड़ानों को आपातकालीन स्थिति में डायवर्ट करना पड़ा, जबकि 18 से अधिक उड़ानें घंटों देरी से चलीं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। रेल यातायात की बात करें तो कोडरमा रेलखंड पर भी ट्रेनों का संचालन बाधित रहा।
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गंडक नदी का बढ़ा जलस्तर और बाढ़ की चेतावनी:

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बिहार में सबसे अधिक 116.0 मिलीमीटर बारिश मोतिहारी में दर्ज की गई। इस बीच, पड़ोसी देश नेपाल में हो रही लगातार भारी बारिश ने बिहार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। नेपाल से आने वाले पानी के कारण पश्चिमी चंपारण जिले में गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है। नदी के उफान के चलते पुजहा घाट के पास बना पीपा पुल भी क्षतिग्रस्त हो गया है। इससे इलाके में बाढ़ का गंभीर खतरा मंडराने लगा है और प्रशासन हाई अलर्ट पर है।
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मुख्यमंत्री ने आपदा प्रबंधन विभाग को तत्काल प्रभाव से सक्रिय होने और प्रभावित परिवारों को शीघ्र राहत राशि जारी करने का सख्त निर्देश दिया है।
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देवभूमि उत्तराखंड: जंगलों की आग बुझी, पर गिरी मौत की बिजली

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पहाड़ी राज्य उत्तराखंड के लिए यह बारिश एक तरफ राहत लेकर आई, तो दूसरी तरफ एक बड़ा दुख भी दे गई।
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राहत की खबर:

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पिछले कई हफ्तों से उत्तराखंड के जंगल भीषण आग में धधक रहे थे। गढ़वाल क्षेत्र में 305.78 हेक्टेयर और कुमाऊं क्षेत्र में 69.29 हेक्टेयर की बहुमूल्य वन संपदा जलकर राख हो गई थी। इस बारिश ने प्राकृतिक अग्निशामक का काम किया और जंगलों में लगी आग पूरी तरह से बुझ गई, जिससे वन विभाग और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली।
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दर्दनाक हादसा:

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रुद्रप्रयाग जिले के प्रसिद्ध पर्यटक स्थल तुंगनाथ-चोपता में आंधी-तूफान के बीच आकाशीय बिजली गिरने से एक बेहद हृदयविदारक घटना घटी। यहां घूमने आए उत्तर प्रदेश (लखनऊ और उन्नाव) के पर्यटकों के समूह पर बिजली गिर गई। इस हादसे में लखनऊ निवासी दो सगे भाइयों (19 वर्षीय अभिनव वाजपेयी और 22 वर्षीय अभिषेक वाजपेयी) की दर्दनाक मौत हो गई। उनके अन्य साथी बुरी तरह घायल हो गए। प्रशासन और एसडीआरएफ की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वहां फंसे 50 से अधिक अन्य पर्यटकों का सुरक्षित रेस्क्यू किया।
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पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर का हाल
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मौसम का यह रौद्र रूप केवल यूपी-बिहार तक सीमित नहीं था, बल्कि भारत के कई अन्य हिस्सों में भी इसका व्यापक असर देखा गया।
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पश्चिम बंगाल: दक्षिण बंगाल में आए भयंकर तूफान, तेज बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं में सात लोगों की जान चली गई। राज्य प्रशासन ने इस आपदा पर गहरा दुख व्यक्त किया है। मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि देने का ऐलान किया गया है। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया गया है कि सभी घायलों के इलाज का संपूर्ण खर्च राज्य सरकार उठाएगी।
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हिमाचल प्रदेश और कश्मीर: पहाड़ों पर मौसम ने अलग ही रंग दिखाया। हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में जहां भारी ओलावृष्टि ने फसलों को नुकसान पहुंचाया, वहीं ऊंचाई वाले इलाकों जैसे रोहतांग, शिंकुला और बारालाचा में बेमौसम की हल्की बर्फबारी देखने को मिली। जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में तेज आंधी के कारण एक विशाल अखरोट का पेड़ गिर गया, जिसकी चपेट में आने से 70 वर्षीय एक बुजुर्ग महिला की दुखद मृत्यु हो गई।
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IMD की चेतावनी: आगे कैसा रहेगा मौसम?

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भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आगे के लिए भी गंभीर चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले जून के महीने में सामान्य से 90% अधिक बारिश होने की संभावना है। वहीं, देश के करीब 10 राज्यों में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और हीटवेव का अलर्ट भी जारी किया गया है। यह दोहरी मार (एक तरफ भीषण गर्मी और दूसरी तरफ आंधी-तूफान) आम जनजीवन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। पश्चिमी विक्षोभ और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी वाली हवाओं के इस अनोखे टकराव ने मौसम विज्ञानियों की भी चिंता बढ़ा दी है।
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इस बदलते और खतरनाक होते मौसम में सभी नागरिकों से अपील की जाती है कि वे बेवजह घरों से बाहर न निकलें, आंधी-तूफान के समय पक्के मकानों में शरण लें, और पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे खड़े होने से बचें। प्रकृति का यह तांडव एक बार फिर हमें याद दिला रहा है कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) अब भविष्य की नहीं, बल्कि वर्तमान की सबसे बड़ी सच्चाई बन चुका है।
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