भारतीय राजनीति और न्याय प्रणाली के लिए शुक्रवार का दिन एक बड़े ऐतिहासिक घटनाक्रम का गवाह बना। बहुचर्चित दिल्ली शराब नीति केस (Delhi Liquor Policy Case) में जांच एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को राउज एवेन्यू कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत इस मामले में नामजद सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने अपने कड़े और स्पष्ट फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष इन आरोपियों के खिलाफ बिना किसी ठोस सबूत के आरोप साबित करने में पूरी तरह से विफल रहा है।READ ALSO:-यूपी के 3.72 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी सौगात: मार्च के बिल में फ्यूल सरचार्ज 2.42% घटा, जेब में बचेंगे 141 करोड़ रुपये; जानिए पूरा गणित
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इस फैसले ने न केवल आम आदमी पार्टी (AAP) को एक बड़ी राजनीतिक और कानूनी संजीवनी दी है, बल्कि देश की प्रमुख जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महीनों तक जेल की सलाखों के पीछे रहे आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं के लिए यह 'सत्य की जीत' के रूप में सामने आया है। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम इस पूरे घटनाक्रम, कोर्ट की तीखी टिप्पणियों, नेताओं की भावुक प्रतिक्रियाओं और आगे के कानूनी रास्तों का गहराई से विश्लेषण करेंगे।
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 घर पहुंचने पर पत्नी सुनिता से गले मिलते अरविंद केजरीवाल। इस दौरान वे भावुक नजर आए।

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भावुक हुए अरविंद केजरीवाल: "मैंने जिंदगी में सिर्फ ईमानदारी कमाई है"

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कोर्ट से बरी होने के तुरंत बाद जब पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बाहर आकर मीडिया को संबोधित किया, तो वे अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके। मीडिया के सामने अपनी बात रखते-रखते केजरीवाल फफक कर रो पड़े।
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उन्होंने कहा, "पिछले कुछ सालों से जिस तरह से बीजेपी शराब घोटाला, शराब घोटाला कर रही थी। हमारे ऊपर आरोप लगा रही थी। आज कोर्ट ने सारे आरोप खारिज कर दिए और हम सबको डिसचार्ज कर दिया। हम हमेशा कहते थे कि हमें भारतीय न्याय प्रणाली पर भरोसा है। मैं जज साहब का बहुत-बहुत शुक्रिया करता हूं, जिन्होंने हमारे साथ न्याय किया।"
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केजरीवाल ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर सीधा और तीखा हमला बोलते हुए इसे एक बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया। उन्होंने कहा, "सत्य की जीत हुई। भगवान हमारे साथ है। मोदी जी और अमित शाह जी ने मिलकर आजाद भारत का यह सबसे बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र रचा। आम आदमी पार्टी को खत्म करने के लिए आम आदमी पार्टी के सबसे बड़े पांच नेताओं को जेल में डाल दिया। आज तक आजाद भारत के इतिहास में ऐसा नहीं हुआ।"
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मनीष सिसोदिया ने बढ़ाया ढांढस जब केजरीवाल रोने लगे, तो उनके पुराने साथी और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने उनके कंधे पर हाथ रखकर उन्हें ढांढस बंधाया। इसके बाद खुद को संभालते हुए केजरीवाल ने दोबारा बोलना शुरू किया, "मैंने जिंदगी में सिर्फ ईमानदारी कमाई है। इन्होंने झूठा केस लगाया। आज ये साबित हो गया कि केजरीवाल कट्टर ईमानदार है। मनीष सिसोदिया कट्टर ईमानदार है, आम आदमी पार्टी कट्टर ईमानदार है।"
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उन्होंने प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि सत्ता के लिए देश और संविधान के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। उन्होंने देश की वास्तविक समस्याओं—महंगाई, बेरोजगारी, खराब बुनियादी ढांचे और प्रदूषण—की ओर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी।
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मनीष सिसोदिया की प्रतिक्रिया: "संविधान पर गर्व है"

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लगभग दो साल तक इस मामले में जेल में रहने वाले पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी कोर्ट के इस फैसले पर राहत की सांस ली। उन्होंने इस जीत का श्रेय देश के संविधान को दिया।
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सिसोदिया ने कहा, "हमें एक बार फिर गर्व हो रहा है अपने संविधान पर और डॉ. बी.आर. अंबेडकर पर, जिन्होंने हमें ऐसा मजबूत और निष्पक्ष संविधान दिया। आज सच की फिर से जीत हुई है। यह सिर्फ हमारी जीत नहीं, बल्कि देश के उस हर आम आदमी की जीत है जो न्यायपालिका में भरोसा रखता है।"
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दिल्ली शराब नीति केस: राउज एवेन्यू कोर्ट की 8 सबसे बड़ी और तीखी बातें

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राउज एवेन्यू कोर्ट का यह फैसला CBI के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। कोर्ट ने जांच एजेंसी की थ्योरी की धज्जियां उड़ाते हुए 8 प्रमुख बिंदुओं पर अपनी बात रखी:
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    सभी 23 आरोपी बरी: अदालत ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और के. कविता सहित चार्जशीट में शामिल सभी 23 लोगों को बिना शर्त बरी कर दिया।
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  3. \r\n
    आपराधिक मंशा का अभाव: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नई आबकारी नीति (Excise Policy) के निर्माण या उसके क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की व्यापक साजिश या आपराधिक मंशा (Criminal Intent) के सबूत नहीं मिले हैं।
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  4. \r\n
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    CBI की कहानी मात्र अनुमान: अदालत ने कहा कि CBI ने साजिश की एक मनगढ़ंत कहानी गढ़ने की कोशिश की, जिसका आधार ठोस साक्ष्य नहीं, बल्कि केवल 'अनुमान' था।
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    गवाहों और बयानों में विरोधाभास: हजारों पन्नों की लंबी-चौड़ी चार्जशीट में गंभीर खामियां पाई गईं। जो आरोप लगाए गए थे, वे किसी गवाह या दस्तावेजी बयान से साबित नहीं होते। इन विरोधाभासों ने अभियोजन पक्ष की पूरी थ्योरी को ढहा दिया।
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    संवैधानिक पद का सम्मान: केजरीवाल को बिना किसी पुख्ता सबूत के मामले में घसीटे जाने पर कोर्ट ने सख्त एतराज जताया। अदालत ने कहा कि जब मामला किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से जुड़ा हो, तो बिना मजबूत साक्ष्य के आरोप लगाना सीधे तौर पर कानून के स्थापित सिद्धांतों के खिलाफ है।
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    मुख्य आरोपी के खिलाफ ही सबूत नहीं: पहले आरोपी बनाए गए कुलदीप सिंह को बरी करते हुए जज ने हैरानी जताई कि जब उनके खिलाफ कोई ठोस सामग्री ही नहीं थी, तो उन्हें मुख्य आरोपी कैसे और क्यों बना दिया गया।
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  12. \r\n
  13. \r\n
    सिसोदिया के खिलाफ कोई बरामदगी नहीं: यद्यपि मनीष सिसोदिया आबकारी विभाग के प्रभारी थे, लेकिन कोर्ट ने पाया कि भ्रष्टाचार में उनके सीधे शामिल होने का कोई सबूत नहीं है और न ही उनके पास से कोई गैर-कानूनी नकद या संपत्ति बरामद हुई है।
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    CBI अधिकारी के खिलाफ एक्शन: अदालत इतनी असंतुष्ट थी कि उसने इस पूरे मामले की जांच करने वाले CBI के जांच अधिकारी (IO) के खिलाफ विभागीय जांच (Departmental Enquiry) शुरू करने के सख्त आदेश दे दिए हैं।
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राजनीतिक प्रभाव: किसको राहत, किसे बड़ा झटका?

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इस फैसले के राजनीतिक निहितार्थ बहुत गहरे हैं।
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AAP के लिए संजीवनी: आम आदमी पार्टी के लिए यह फैसला किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है। पार्टी पिछले दो सालों से लगातार बचाव की मुद्रा में थी। उनके शीर्ष नेता जेल में थे और "शराब घोटाले" का दाग उनके "कट्टर ईमानदार" होने के दावे को कमजोर कर रहा था। अब, इस फैसले के बाद पार्टी इसे अपने खिलाफ रचे गए एक बड़े षड्यंत्र के पर्दाफाश के रूप में जनता के सामने पेश करेगी। आगामी चुनावों में यह उनके लिए सबसे बड़ा हथियार बनेगा।
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बीजेपी और केंद्र सरकार के लिए झटका: दूसरी ओर, यह फैसला भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार के लिए एक बड़ा राजनीतिक और नैतिक झटका है। विपक्ष लंबे समय से आरोप लगा रहा है कि मोदी सरकार ED और CBI जैसी केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को कुचलने के लिए कर रही है। कोर्ट के इस फैसले ने विपक्ष के इन आरोपों को एक मजबूत कानूनी आधार दे दिया है।
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कानूनी तौर पर आगे क्या हो सकता है? (ED केस का भविष्य)

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यह मामला सिर्फ CBI तक सीमित नहीं था। अगस्त 2022 में CBI की ओर से दर्ज की गई FIR और चार्जशीट को ही आधार (Predicate Offence) बनाकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के तहत केस दर्ज किया था।
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क्या ED केस भी गिरेगा? कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामला तभी टिक सकता है जब कोई मूल अपराध (Scheduled Offence) साबित हो। चूंकि CBI मामले (जो कि मूल अपराध था) में केजरीवाल समेत सभी लोग बरी हो गए हैं, इसलिए कानूनी तौर पर ED का मामला अब बेहद कमजोर पड़ गया है। प्रबल संभावना है कि जल्द ही ED मामले में भी इन सभी आरोपियों को क्लीन चिट मिल जाए।
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CBI का अगला कदम: हालांकि, कानूनी लड़ाई अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है। नियमतः जांच एजेंसी (CBI) के पास राउज एवेन्यू कोर्ट (निचली अदालत) के इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में चुनौती देने का अधिकार सुरक्षित है।
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CBI के वो दावे जो कोर्ट में औंधे मुंह गिरे

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इस मामले को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि आखिर CBI ने अदालत में क्या कहानी पेश की थी, जिसे जज ने सिरे से खारिज कर दिया।
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    विजय नायर और 100 करोड़ की थ्योरी: CBI का सबसे बड़ा दावा यह था कि अरविंद केजरीवाल के बेहद करीबी माने जाने वाले विजय नायर ने शराब कारोबारियों ('साउथ ग्रुप') से संपर्क साधा था। आरोप था कि BRS नेता के. कविता की अध्यक्षता वाले इस साउथ ग्रुप को दिल्ली की शराब नीति में अनुचित लाभ दिया गया और इसके बदले विजय नायर ने ₹100 करोड़ की रिश्वत वसूली।
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    गोवा चुनाव में कैश का इस्तेमाल: एजेंसी ने दावा किया था कि विनोद चौहान और आशीष माथुर के जरिए इस पैसे को हवाला के माध्यम से गोवा भेजा गया। आरोप था कि केजरीवाल के निर्देश पर इस ₹100 करोड़ में से ₹44.5 करोड़ नकद आम आदमी पार्टी के गोवा विधानसभा चुनाव अभियान में खर्च किए गए।
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    विधायकों के बयान: CBI ने गोवा के दो पूर्व विधायकों के बयानों का हवाला दिया था, जिन्होंने कथित तौर पर कहा था कि उन्हें चुनाव खर्च के लिए पार्टी वालंटियर से कैश मिला था। इसके लिए AAP के तत्कालीन गोवा प्रभारी दुर्गेश पाठक को जिम्मेदार ठहराया गया था।
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    कार्टेल का निर्माण: आरोप था कि शराब निर्माताओं, थोक विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं का एक कार्टेल (गुट) बनाया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ और चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचा।
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अदालत ने इन सभी दावों को साक्ष्यों के अभाव में महज "हवा-हवाई" और "काल्पनिक थ्योरी" करार दिया।
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दिल्ली शराब नीति केस में बरी हुए सभी 23 लोगों की सूची

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राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा बरी किए गए सभी 23 व्यक्तियों के नाम इस प्रकार हैं:
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    अरविंद केजरीवाल (पूर्व मुख्यमंत्री, दिल्ली)
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  2. \r\n
  3. \r\n
    मनीष सिसोदिया (पूर्व उपमुख्यमंत्री, दिल्ली)
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  4. \r\n
  5. \r\n
    के. कविता (BRS नेता)
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  6. \r\n
  7. \r\n
    दुर्गेश पाठक (AAP नेता)
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  8. \r\n
  9. \r\n
    विजय नायर (AAP संचार प्रभारी)
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  11. \r\n
    कुलदीप सिंह
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  12. \r\n
  13. \r\n
    नरेंद्र सिंह
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  14. \r\n
  15. \r\n
    अभिषेक बोइनपल्ली
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  16. \r\n
  17. \r\n
    अरुण पिल्लई
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  18. \r\n
  19. \r\n
    मूथा गौतम
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  20. \r\n
  21. \r\n
    समीर महेंद्रू
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  22. \r\n
  23. \r\n
    अमनदीप सिंह ढल
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  24. \r\n
  25. \r\n
    अर्जुन पांडे
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  26. \r\n
  27. \r\n
    बुचिबाबू गोरंतला
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  28. \r\n
  29. \r\n
    राजेश जोशी
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  30. \r\n
  31. \r\n
    दामोदर प्रसाद शर्मा
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  32. \r\n
  33. \r\n
    प्रिंस कुमार
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  34. \r\n
  35. \r\n
    अरविंद कुमार सिंह
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  36. \r\n
  37. \r\n
    चनप्रीत सिंह
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  38. \r\n
  39. \r\n
    अमित अरोरा
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  40. \r\n
  41. \r\n
    विनोद चौहान
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  42. \r\n
  43. \r\n
    आशीष चंद माथुर
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  44. \r\n
  45. \r\n
    शरत रेड्डी
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  46. \r\n
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फैसले के बाद AAP नेताओं की जोरदार प्रतिक्रियाएं

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इस ऐतिहासिक फैसले के आते ही आम आदमी पार्टी के खेमे में जश्न का माहौल छा गया। पार्टी के दिग्गज नेताओं ने सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए अपनी बात रखी।
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सुनीता केजरीवाल (अरविंद केजरीवाल की पत्नी): उन्होंने ईश्वर को धन्यवाद देते हुए एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, "इस संसार में कोई कितना भी शक्तिशाली हो जाये, शिव शक्ति से ऊपर नहीं हो सकता। सत्य की हमेशा जीत होती है। आज मेरे पति और पूरी पार्टी का सच देश के सामने आ गया है।"
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आतिशी (दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ AAP नेता): आतिशी ने इसे भाजपा के पतन की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा, "चाहे कितने भी झूठे आरोप लगाये, चाहे कितना भी अत्याचार किया, लेकिन आख़िरकर सच की जीत हुई। आज पूरे देश के सामने है - भाजपा का षड्यंत्र और अरविंद केजरीवाल की कट्टर ईमानदारी। दिल्ली की जनता ने जो भरोसा हम पर जताया था, आज अदालत ने उस पर मुहर लगा दी है।"
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संजय सिंह (AAP राज्यसभा सांसद): अपने तीखे तेवरों के लिए मशहूर संजय सिंह ने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री और गृहमंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "यह बात हम पहले दिन से कह रहे हैं कि देश पर एक खतरनाक षडयंत्रकारी राज कर रहा है, जिसका नाम नरेंद्र मोदी है। उनके साथ एक खतरनाक षड़यंत्रकारी गृहमंत्री भी है, जिसका नाम अमित शाह है। अगर इन दोनों में जरा सी भी नैतिकता बची हो, तो आज इन्हें पूरे देश से सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए। आज आपने देखा कि अरविंद केजरीवाल की ईमानदारी पर जो चोट लगी थी, उसकी वजह से वे फैसला सुनकर आज फफककर रो पड़े। यह आंसू इस देश के लोकतंत्र के आंसू हैं।"
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गोपाल राय (AAP नेता और पूर्व मंत्री): गोपाल राय ने जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, "एजेंसियों का दुरुपयोग करके लगातार 2 साल तक हमारे नेताओं को प्रताड़ित किया गया। हर तरह से परेशान किया गया। एक झूठा प्रोपेगेंडा फैलाया गया। आज सारे झूठों और बेबुनियाद आरोपों का पर्दाफाश हो गया है।" राय ने आगे कहा, "हम बीजेपी से कहना चाहते हैं कि केंद्र सरकार ने हमारी पार्टी के तमाम नेताओं को फंसाकर पार्टी की आवाज को दबाने की जो कोशिश की, वह नाकाम रही है। हम बीजेपी से कहना चाहते हैं कि काम करिए और काम करके सत्ता में आइए। एजेंसियों और सत्ता का दुरुपयोग करके आप यह सोचते हैं कि हम सभी को चुप कर देंगे, तो ऐसा नहीं होने वाला। देश में अभी न्यायपालिका जिंदा है।"
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लोकतंत्र और न्याय की जीत

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राउज एवेन्यू कोर्ट का यह फैसला भारतीय राजनीति में लंबे समय तक याद रखा जाएगा। दिल्ली शराब नीति केस में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य 21 लोगों को बरी किया जाना यह साबित करता है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को कानूनी हथियार बनाकर न्यायपालिका को गुमराह नहीं किया जा सकता।
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जहां एक ओर इस फैसले से आम आदमी पार्टी को एक नई ऊर्जा और नैतिक बल मिला है, वहीं दूसरी ओर जांच एजेंसियों (विशेषकर CBI) की साख पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न लग गया है। कोर्ट द्वारा जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच का आदेश देना इस बात का प्रमाण है कि सत्ता के दबाव में या जल्दबाजी में रची गई मनगढ़ंत कहानियां कानून की कसौटी पर नहीं टिक सकतीं।
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आगामी समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि CBI इस फैसले के खिलाफ उच्च अदालतों में क्या रुख अपनाती है और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के केस का भविष्य क्या होता है। फिलहाल, दिल्ली की सियासत में 'कट्टर ईमानदारी' का नारा एक बार फिर पूरी मजबूती से गूंज रहा है।
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दिल्ली शराब नीति केस में राउज एवेन्यू कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया सहित 23 लोगों को CBI मामले में बरी कर दिया है। अदालत ने माना कि CBI के आरोप बिना सबूतों और महज अनुमानों पर आधारित थे। इस मौके पर केजरीवाल भावुक हो गए और उन्होंने इसे मोदी सरकार का राजनीतिक षड्यंत्र बताया। कोर्ट ने CBI की कार्यप्रणाली पर सख्त टिप्पणी करते हुए जांच अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए हैं। इस फैसले से आम आदमी पार्टी को बड़ी राजनीतिक राहत मिली है, जबकि ED के केस का आधार भी अब कमजोर हो गया है।
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