भारतीय रेल (Indian Railways) के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। कोयले के धुएं और डीजल के शोर से अलग, अब भारत की पटरियों पर शांत और प्रदूषण मुक्त ट्रेनें दौड़ती नजर आएंगी। रेलवे ने देश में भारत में हाइड्रोजन ट्रेन (Hydrogen Train in India) चलाने का ऐतिहासिक फैसला लिया है।READ ALSO:-नमो भारत ने रचा इतिहास: परिचालन के दो वर्ष में पूरी की 2 करोड़ कम्यूटर ट्रिप, बना क्षेत्र का पसंदीदा परिवहन साधन
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
रेलवे के मुताबिक, इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत हरियाणा के जींद-सोनीपत मार्ग (Jind-Sonipat Route) से की जाएगी। अगर यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा, तो यह कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में भारत की सबसे बड़ी कामयाबी होगी।
\r\n\r\n

 

जंतर–मंतर गेम खेलें। पुलिस बनकर कॉकरोचों को पहचानो या आंदोलनकारी बनकर पहुंचो जंतर मंतर। खेलें ▶ \r\n\r\n

जींद-सोनीपत रूट ही क्यों?

\r\n\r\n
हाइड्रोजन ट्रेन संचालन अभी अपने शुरुआती चरण में है। जींद-सोनीपत रूट को इसलिए चुना गया है क्योंकि यह एक गैर-विद्युतीकृत (Non-Electrified) और छोटा रूट है, जो ट्रायल के लिए उपयुक्त है। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक रेलवे को 'नेट जीरो कार्बन एमिटर' बनाया जाए। भारत में हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन इसी दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है। हालांकि, इसे पूर्ण रूप से विस्तार मिलने में अभी थोड़ा समय लगेगा।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

क्या है हाइड्रोजन फ्यूल और कैसे बनता है?

\r\n\r\n
जब से हाइड्रोजन ट्रेन की चर्चा शुरू हुई है, लोगों के मन में सवाल है कि आखिर यह ईंधन बनता कैसे है? आपको बता दें कि हाइड्रोजन धरती पर मुक्त रूप में कम ही मिलता है। यह अक्सर पानी (H₂O) या प्राकृतिक गैस के साथ जुड़ा होता है। इसे अलग करने के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाए जाते हैं:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    पानी का इलेक्ट्रोलिसिस (Electrolysis): यह सबसे स्वच्छ तरीका है। इसमें पानी में बिजली प्रवाहित करके उसे हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में तोड़ा जाता है। अगर यह बिजली सौर या पवन ऊर्जा (Solar/Wind Energy) से आती है, तो इसे 'ग्रीन हाइड्रोजन' (Green Hydrogen) कहते हैं। इसमें प्रदूषण शून्य होता है।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    प्राकृतिक गैस से निर्माण: उद्योगों में मीथेन गैस से हाइड्रोजन निकाली जाती है। इसे 'ग्रे हाइड्रोजन' कहते हैं। अगर इस प्रक्रिया में निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) को कैप्चर (स्टोर) कर लिया जाए, तो इसे 'ब्लू हाइड्रोजन' कहा जाता है।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    कोयले का गैसीफिकेशन: कोयले को गैस में बदलकर भी हाइड्रोजन बनाई जाती है, लेकिन यह पर्यावरण के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदेह है क्योंकि इसमें कार्बन फुटप्रिंट सबसे अधिक होता है। भारतीय रेलवे का जोर 'ग्रीन हाइड्रोजन' पर है।
    \r\n
  6. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

दुनिया में कहां-कहां चल रही हैं हाइड्रोजन ट्रेनें?

\r\n\r\n
भारत इस तकनीक को अपनाने वाला दुनिया का पहला देश नहीं है, लेकिन एशिया में यह एक बड़ी उपलब्धि होगी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    जर्मनी (Germany): यहां दुनिया की पहली हाइड्रोजन पावर्ड पैसेंजर ट्रेन चल रही है। फ्रांसीसी कंपनी एल्सटॉम (Alstom) द्वारा निर्मित यह ट्रेन गैर-विद्युतीकृत रूटों पर नियमित सेवा दे रही है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    कनाडा (Canada): यहां भी हाइड्रोजन ट्रेन का सफल संचालन हो रहा है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    अन्य देश: फ्रांस, इटली, स्वीडन, पोलैंड और नीदरलैंड्स जैसे यूरोपीय देश भी इस तकनीक का ट्रायल कर चुके हैं और तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

यात्रियों को क्या होगा फायदा?

\r\n\r\n
भारत में हाइड्रोजन ट्रेन (Hydrogen Train in India) चलने से सबसे बड़ा फायदा पर्यावरण को होगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    प्रदूषण मुक्ति: इन ट्रेनों से धुआं नहीं, बल्कि केवल भाप और पानी निकलता है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    शोर में कमी: डीजल इंजन के मुकाबले हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेनें बहुत कम शोर करती हैं, जिससे यात्रा आरामदायक होती है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    सस्ती यात्रा: लंबी अवधि में हाइड्रोजन ईंधन डीजल के मुकाबले सस्ता और टिकाऊ विकल्प साबित हो सकता है।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
जींद-सोनीपत रूट पर भारत में हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत न केवल तकनीकी बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी एक मील का पत्थर साबित होगी। यह भविष्य की यात्रा है, जो हमें प्रदूषण मुक्त भारत की ओर ले जाएगी। अब देखना यह होगा कि ट्रायल के बाद इसे देश के अन्य हिस्सों में कब तक विस्तार मिलता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें