पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और संघर्ष के बीच भारत में रसोई गैस (LPG) की किल्लत की खबरों ने आम जनता की चिंता बढ़ा दी थी। इन आशंकाओं को खारिज करते हुए केंद्र सरकार ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता में देशवासियों को आश्वस्त किया है कि भारत की ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने स्पष्ट किया कि घरेलू एलपीजी की डिलीवरी का सामान्य चक्र (Cycle) अभी भी लगभग 2.5 दिन का है, इसलिए उपभोक्ताओं को घबराहट (Panic) में आकर जल्दबाजी में बुकिंग करने की कोई आवश्यकता नहीं है।READ ALSO:-सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: 13 साल से कोमा में रह रहे हरीश राणा को मिली इच्छामृत्यु की मंजूरी, देश का ऐसा पहला मामला
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सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए न केवल कच्चे तेल के आयात मार्गों में बदलाव किया है, बल्कि घरेलू स्तर पर एलपीजी उत्पादन में 25 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि भी की है। आइए, जानते हैं कि सरकार ने सप्लाई चैन को मजबूत करने और कालाबाजारी रोकने के लिए क्या बड़े कदम उठाए हैं।
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पैनिक बुकिंग और जमाखोरी से बचें: सरकार की अपील

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संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि कुछ स्थानों से गलत सूचनाओं के कारण 'पैनिक बुकिंग' और जमाखोरी की खबरें मिली हैं। उन्होंने कहा, "घरेलू एलपीजी की आपूर्ति स्थिति सामान्य है। ग्राहकों को सिलेंडर बुक करने के लिए किसी भी तरह की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। फीडबैक से पता चला है कि कुछ लोग गलत जानकारी की वजह से पैनिक बुकिंग कर रहे हैं, जो अनावश्यक है।"
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सरकार ने यह भी साफ किया कि वितरण स्तर पर होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए 'डिलीवरी ऑथेंटिकेशन सिस्टम' (Delivery Authentication System) को कड़ाई से लागू किया गया है।
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अस्थायी उपाय: 21 से बढ़कर 25 दिन हुआ बुकिंग गैप

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एक अस्थायी मांग प्रबंधन उपाय (Temporary Demand Management) के तौर पर, सरकार ने दो एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग के बीच के न्यूनतम अंतराल को 21 दिनों से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि लोग स्टॉक जमा न करें और सभी जरूरतमंद उपभोक्ताओं को समान रूप से गैस उपलब्ध हो सके।
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घरेलू उत्पादन में 25% की वृद्धि और रणनीतिक बदलाव
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पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात को देखते हुए भारत सरकार ने दूरदर्शी कदम उठाए हैं। सुजाता शर्मा ने बताया कि 8 मार्च को एक विशेष आदेश जारी किया गया था, जिसके तहत देश की सभी रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स को एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने के निर्देश दिए गए थे।
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मुख्य उपलब्धियां:

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    उत्पादन में उछाल: इन कोशिशों के चलते घरेलू एलपीजी उत्पादन में 25% की बढ़ोतरी हुई है।
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    उपभोक्ताओं को प्राथमिकता: बढ़ी हुई पूरी गैस केवल घरेलू उपभोक्ताओं (Domestic Consumers) को दी जा रही है।
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    गैर-घरेलू क्षेत्र: अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे अनिवार्य क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है।
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    कमेटी का गठन: होटलों और रेस्टोरेंट्स जैसे कमर्शियल यूज़र्स को दिए जाने वाले अलॉटमेंट की समीक्षा के लिए IOCL, HPCL और BPCL के कार्यकारी निदेशकों की एक तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है, जो पारदर्शी वितरण सुनिश्चित करेगी।
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कच्चे तेल का आयात और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz)

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भारत अपनी एलपीजी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, जिसका 90 प्रतिशत हिस्सा 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के जरिए आता है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण इस मार्ग पर जोखिम बढ़ गया है।
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सरकार की वैकल्पिक रणनीति: सुजाता शर्मा ने बताया कि भारत अब 40 देशों से कच्चा तेल खरीद रहा है। सरकार ने रणनीतिक रूप से उन मार्गों को प्राथमिकता दी है जो होर्मुज जलडमरूमध्य से बाहर हैं। पहले भारत का 55 प्रतिशत तेल आयात अन्य मार्गों से होता था, जिसे अब बढ़ाकर 70 प्रतिशत कर दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि एलएनजी (LNG) के दो जहाज अगले कुछ दिनों में भारत पहुंचने वाले हैं, जिससे ऊर्जा भंडार और मजबूत होगा।
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समुद्री सुरक्षा और प्रवासियों की सुरक्षा

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शिपिंग, पोर्ट और वॉटरवेज मंत्रालय के विशेष सचिव, राजेश कुमार सिन्हा ने अपडेट दिया कि भारत के सभी पोर्ट ऑपरेशन्स स्थिर हैं और सरकार नाविकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पश्चिम एशिया में भारतीय प्रवासियों की भलाई सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए विदेश मंत्रालय में एक 24x7 कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है।
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सरकार ने राज्य सरकारों को भी सख्त निर्देश दिए हैं कि वे ईंधन की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाएं। सुजाता शर्मा ने अंत में यह भी याद दिलाया कि आज भी भारत में एलपीजी की कीमतें कई पड़ोसी देशों की तुलना में काफी कम हैं।
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कुल मिलाकर, भारत सरकार ने पश्चिम एशिया के संकट को देखते हुए अपनी ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) की किलेबंदी कर ली है। घरेलू उत्पादन में 25% की वृद्धि और आयात मार्गों का विविधीकरण यह सुनिश्चित करता है कि देश में रसोई गैस की कोई कमी नहीं होगी। आम जनता के लिए सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और पैनिक बुकिंग से बचकर सरकार के '25 दिन के नियम' का सहयोग करें।
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