देशभर में लगातार बढ़ती महंगाई के बीच आम जनता को एक और बड़ा और करारा झटका लगा है। पेट्रोल, डीजल और रोजमर्रा के सामानों की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच अब रसोई गैस (LPG price hike) ने भी लोगों के घर का बजट बिगाड़ दिया है। सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) ने घरेलू एलपीजी (LPG) गैस सिलेंडर का इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं की जेब ढीली करते हुए कीमतों में बड़ा इजाफा किया है। इस नई मूल्य वृद्धि ने हर वर्ग के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।READ ALSO:-महंगाई का 'साइलेंट अटैक': बिस्कुट से लेकर साबुन तक 10% महंगे, पश्चिम एशिया के संकट ने बिगाड़ा आपकी रसोई का बजट!
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दिल्ली में ₹942 तक पहुंचा गैस सिलेंडर का दाम प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, तेल कंपनियों ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में एकमुश्त ₹29 की बढ़ोतरी की है। कीमतों में यह बदलाव रविवार, 7 जून से प्रभावी हो गया है। इस वृद्धि के बाद देश की राजधानी नई दिल्ली में बिना सब्सिडी वाले साधारण गैस सिलेंडर (gas cylinder price Delhi) की कीमत जो पहले ₹913 हुआ करती थी, वह अब बढ़कर सीधे ₹942 के स्तर पर पहुंच गई है।
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अन्य महानगरों की बात करें, तो वहां भी स्थानीय टैक्स और परिवहन लागत के आधार पर कीमतों में इसी अनुपात में इजाफा देखने को मिला है। पिछले कुछ समय से गैस की कीमतों में स्थिरता बनी हुई थी, जिससे आम जनता को थोड़ी राहत महसूस हो रही थी, लेकिन इस अचानक हुई ₹29 की बढ़ोतरी ने एक बार फिर से रसोई के अर्थशास्त्र को पूरी तरह से हिला कर रख दिया है।
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उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों पर महंगाई की दोहरी मार इस मूल्य वृद्धि का सबसे दुखद और सीधा असर समाज के उस गरीब और वंचित तबके पर पड़ने वाला है, जो प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) का लाभ उठाता है। जब भी गैस के दाम बढ़ते हैं, तो उज्ज्वला लाभार्थियों को उम्मीद होती है कि सरकार उन्हें अतिरिक्त सब्सिडी देकर राहत प्रदान करेगी। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ है।
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सरकार ने गैस सिलेंडर के मूल दाम (LPG gas cylinder price) तो ₹29 बढ़ा दिए हैं, लेकिन उज्ज्वला योजना के तहत दी जाने वाली ₹300 की सब्सिडी राशि में किसी भी प्रकार का कोई बदलाव या वृद्धि नहीं की गई है। सब्सिडी स्थिर रहने और मूल कीमत बढ़ने का सीधा सा अर्थ यह है कि उज्ज्वला सिलेंडर भी अब उपभोक्ताओं के लिए ₹29 महंगा हो गया है।
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अगर हम आंकड़ों पर गौर करें, तो दिल्ली में रहने वाले उज्ज्वला लाभार्थियों को पहले जो गैस सिलेंडर ₹613 में प्राप्त होता था, उसी सिलेंडर को भरवाने के लिए अब उन्हें ₹642 अपनी जेब से चुकाने होंगे। गरीब परिवारों के लिए, जो दिन-रात मजदूरी करके अपना घर चलाते हैं, ₹29 की यह अतिरिक्त लागत भी महीने के अंत में एक बड़ा आर्थिक बोझ बन जाती है।
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क्या हैं प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के मौजूदा नियम और शर्तें? प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत साल 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उत्तर प्रदेश के बलिया से की गई थी। इस योजना का मुख्य और प्राथमिक उद्देश्य देश की गरीब और ग्रामीण महिलाओं को लकड़ी और कोयले के धुएं से मुक्ति दिलाकर एक स्वच्छ, सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त ईंधन (LPG) प्रदान करना था। धुएं के कारण महिलाओं को होने वाली गंभीर श्वसन बीमारियों को रोकने में यह योजना काफी हद तक सफल भी रही है।
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आधिकारिक सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के तहत देश भर में अब तक 10.5 करोड़ से अधिक गरीब परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। समय के साथ इस योजना के नियमों में कई बड़े बदलाव भी हुए हैं, जिन्हें जानना हर लाभार्थी के लिए बेहद जरूरी है:
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    सालाना सिलेंडर की सीमा घटी: जब यह योजना शुरू की गई थी, तब लाभार्थियों को साल भर में 12 सिलेंडरों पर सब्सिडी का लाभ मिलता था। हालांकि, बाद में सरकारी नियमों और बजट आवंटन में हुए बदलावों के कारण अब उज्ज्वला लाभार्थियों को एक वित्तीय वर्ष में (Ujjwala subsidy limit) केवल 9 सिलेंडरों पर ही ₹300 की निर्धारित सब्सिडी दी जाती है।
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    10वां सिलेंडर पड़ेगा भारी: अगर कोई उज्ज्वला लाभार्थी परिवार एक साल में 9 सिलेंडर की सीमा को पार कर लेता है और 10वां सिलेंडर बुक करता है, तो उसे उस पर कोई सब्सिडी नहीं मिलेगी। यानी 10वां सिलेंडर उन्हें बिना सब्सिडी वाले सामान्य उपभोक्ता की तरह पूरे ₹942 में ही खरीदना पड़ेगा।
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    केवल महिलाओं के नाम पर कनेक्शन: इस योजना की सबसे बड़ी शर्त यह है कि गैस कनेक्शन केवल और केवल परिवार की एक वयस्क महिला (जिसकी उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक हो) के नाम पर ही जारी किया जाता है।
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    कोई पुराना कनेक्शन नहीं होना चाहिए: आवेदन करने वाले परिवार (राशन कार्ड के आधार पर) के पास पहले से देश की किसी भी तेल कंपनी का कोई अन्य एलपीजी कनेक्शन (LPG Connection) मौजूद नहीं होना चाहिए।
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कनेक्शन के साथ मिलने वाली मुफ्त सुविधाएं उज्ज्वला योजना के तहत जब पहली बार किसी महिला के नाम पर कनेक्शन जारी किया जाता है, तो सरकार और तेल कंपनियों की ओर से उन्हें कई चीजें पूरी तरह से मुफ्त प्रदान की जाती हैं। इसमें शामिल हैं:
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    पहली बार का भरा हुआ 14.2 किलो का गैस सिलेंडर।
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    एक उच्च गुणवत्ता वाला सुरक्षित रेगुलेटर।
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    सुरक्षा मानकों पर खरी उतरने वाली सेफ्टी होज पाइप (रबर ट्यूब)।
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    खाना पकाने के लिए दो बर्नर वाला एक गैस चूल्हा (Stove)।
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    एक उपभोक्ता पासबुक (डीजीसीसी बुकलेट)। इन सभी उपकरणों का खर्च सरकार और तेल विपणन कंपनियां मिलकर वहन करती हैं, ताकि गरीब परिवार पर शुरुआत में ही बड़ा आर्थिक बोझ न पड़े।
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उज्ज्वला योजना का लाभ उठाने के लिए कैसे करें आवेदन? यदि कोई पात्र और जरूरतमंद महिला अभी भी इस योजना के लाभ से वंचित है और वह नया कनेक्शन प्राप्त करना चाहती है, तो इसके लिए एक बेहद सरल और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई गई है।
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आवेदनकर्ता महिला अपने सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ अपने निवास स्थान के सबसे नजदीकी गैस एजेंसी (चाहे वह इंडेन, एचपी या भारत गैस हो) के कार्यालय में जा सकती है। इसके अलावा, जो लोग तकनीक से वाकिफ हैं, वे सरकारी गैस कंपनियों के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल या 'उमंग' (UMANG) ऐप के माध्यम से भी घर बैठे ऑनलाइन आवेदन (Online Application) कर सकते हैं।
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आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज:

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    पहचान और निवास प्रमाण: इसके लिए आधार कार्ड का होना सबसे अनिवार्य है, जो पहचान और पते दोनों का काम करता है।
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    गरीबी रेखा का प्रमाण: राज्य सरकार द्वारा जारी किया गया बीपीएल (BPL) राशन कार्ड या अंत्योदय कार्ड, जिसमें परिवार के सभी सदस्यों के नाम दर्ज हों।
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    बैंक खाता विवरण: सब्सिडी की ₹300 की राशि सीधे लाभार्थी के खाते में भेजी जाती है, इसलिए एक सक्रिय बैंक खाते की पासबुक की फोटोकॉपी अनिवार्य है। बैंक खाता आधार से लिंक होना चाहिए।
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    केवाईसी (KYC) फॉर्म: गैस एजेंसी द्वारा दिया जाने वाला एक केवाईसी फॉर्म, जिसमें दो पासपोर्ट साइज फोटो के साथ सभी जानकारी भरनी होती है।
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क्या भविष्य में मिलेगी राहत? अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) और प्राकृतिक गैस की कीमतों में हो रहे उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय घरेलू बाजार पर पड़ता है। चूंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए रुपये की विनिमय दर और भू-राजनीतिक तनाव सीधे तौर पर इन कीमतों को तय करते हैं। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह से स्थिर नहीं हो जाती, तब तक एलपीजी की कीमतों में किसी बड़ी गिरावट की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी।
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फिलहाल, ₹29 की यह बढ़ोतरी आम आदमी के साथ-साथ उज्ज्वला योजना के तहत आने वाले उन करोड़ों गरीब परिवारों के लिए एक चुनौती बन गई है, जो पहले से ही खाद्य पदार्थों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती महंगाई का सामना कर रहे हैं। सरकार को भविष्य में इन गरीब परिवारों की राहत के लिए सब्सिडी की राशि पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता पड़ सकती है।
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