केंद्र सरकार ने भारत को दालों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक बहुत बड़ा और महत्वाकांक्षी मिशन लॉन्च किया है। लेकिन इस योजना का मतलब क्या है? इससे किसानों, आम जनता और देश को असल में क्या फायदा होगा? चलिए, आपके मन में उठने वाले हर सवाल का जवाब जानते हैं।READ ALSO:-यूपी मौसम अपडेट: अगले 5 दिन होगी झमाझम बारिश, पूर्वी और पश्चिमी यूपी के लिए IMD का अलर्ट
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सवाल 1: आखिर यह 'मिशन आत्मनिर्भरता इन पल्सेज़' है क्या?
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जवाब: यह केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई एक ₹11,440 करोड़ की योजना है, जिसका एकमात्र लक्ष्य भारत को दालों के उत्पादन में 100% आत्मनिर्भर बनाना है। अभी हम अपनी जरूरत की 15-20% दालें विदेशों से खरीदते हैं, जिस पर बहुत सारा पैसा खर्च होता है। इस मिशन का मकसद 2030-31 तक देश में ही इतनी दाल उगाना है कि हमें बाहर से एक दाना भी न मंगाना पड़े।
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सवाल 2: इस मिशन से किसानों को सबसे बड़ा और सीधा फायदा क्या होगा?
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जवाब: किसानों के लिए यह मिशन एक "गोल्डन गारंटी" की तरह है। सरकार ने ऐलान किया है कि वह अगले चार सालों तक अरहर (तुअर), उड़द और मसूर की पूरी 100% फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदेगी।
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    मतलब: अब किसानों को यह चिंता नहीं करनी पड़ेगी कि उनकी फसल बिकेगी या नहीं, या बाजार में दाम गिर गए तो क्या होगा। NAFED और NCCF जैसी सरकारी एजेंसियां उनकी पूरी उपज को एक तयशुदा अच्छी कीमत पर खरीद लेंगी। यह किसानों के लिए जीरो रिस्क और पक्के मुनाफे की गारंटी है।
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सवाल 3: क्या सरकार सिर्फ फसल खरीदेगी या उगाने में भी कोई मदद करेगी?
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जवाब: सरकार किसानों को बीज बोने से लेकर फसल उगाने तक, हर कदम पर मदद देगी।
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    मुफ्त और टॉप क्वालिटी बीज: किसानों को 126 लाख क्विंटल सर्टिफाइड बीज और 88 लाख मुफ्त बीज किट दिए जाएंगे ताकि पैदावार जबरदस्त हो।
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    खेती का विस्तार: धान की कटाई के बाद खाली पड़े खेतों जैसी जगहों पर दाल की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे उत्पादन का क्षेत्र बढ़े।
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सवाल 4: इस योजना का आम आदमी की रसोई और थाली पर क्या असर पड़ेगा?
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जवाब: यह योजना सीधे तौर पर आपकी रसोई के बजट से जुड़ी है।
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    कीमतों में स्थिरता: जब देश में दालों का उत्पादन जरूरत के मुताबिक होगा, तो हमें विदेशी बाजारों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे दालों की कीमतों में अचानक आने वाले उछाल पर रोक लगेगी और दाम स्थिर रहेंगे।
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    हर वक्त उपलब्धता: देश में भरपूर स्टॉक होने से बाजार में दाल की कमी नहीं होगी और यह हर समय आसानी से उपलब्ध रहेगी। यानी, यह मिशन दाल की महंगाई को काबू में रखने का एक बड़ा मास्टरप्लान है।
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सवाल 5: सरकार ने यह लक्ष्य पूरा करने के लिए क्या डेडलाइन रखी है?
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जवाब: सरकार ने इस मिशन के लिए एक स्पष्ट रोडमैप बनाया है। लक्ष्य है कि साल 2030-31 तक भारत में 350 लाख टन दालों का उत्पादन किया जाए, जिसके लिए 310 लाख हेक्टेयर भूमि पर दालों की खेती होगी। यह एक लंबा लेकिन ठोस प्लान है, जो देश की खाद्य सुरक्षा को अभूतपूर्व मजबूती देगा।
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