डेयरी उत्पादों के बाजार में सबसे बड़े ब्रांड अमूल ने त्योहारी सीजन के ठीक बीच में ग्राहकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। नई Amul Ghee Price Hike लागू होने के बाद, कंपनी ने घी और बटर की खुदरा कीमतों में 3 रुपये से लेकर 50 रुपये तक का बड़ा इजाफा कर दिया है। एक तरफ जहां त्योहारों के कारण बाजार में मांग अपने चरम पर है, वहीं दूसरी तरफ अचानक हुई इस मूल्य वृद्धि ने आम आदमी की रसोई का बजट सीधा प्रभावित किया है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, दाम बढ़ने का मुख्य कारण गुजरात और राजस्थान में नकली घी के खिलाफ चलाए गए सख्त अभियान को माना जा रहा है, जिसकी वजह से बाजार में एकाएक ब्रांडेड उत्पादों की मांग में भारी उछाल आ गया है।

कीमतों में हुए इस नए बदलाव के बाद, अमूल का 1 किलो घी का कार्टन अब 630 रुपये के बजाय 680 रुपये में ग्राहकों को मिलेगा। यानी सीधे तौर पर 50 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। इसी तरह, 500 ग्राम प्योर घी के पाउच की कीमत 325 रुपये से बढ़ाकर 345 रुपये कर दी गई है। घी के अलावा कंपनी ने लोकप्रिय बटर के दामों में भी बदलाव किया है। अब 100 ग्राम अमूल बटर का छोटा पैक 63 रुपये से बढ़कर 66 रुपये का हो गया है। वहीं, 500 ग्राम बटर का पैक अब 310 रुपये के पुराने दाम की जगह 325 रुपये में बेचा जाएगा।

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यह नई मूल्य वृद्धि ऐसे समय में लागू की गई है जब हाल ही में ग्राहकों को कीमतों के मोर्चे पर कुछ राहत मिली थी। आपको बता दें कि सितंबर 2025 में केंद्र सरकार ने डेयरी उत्पादों पर लगने वाले जीएसटी (GST) को 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया था। इस कर कटौती का सीधा फायदा ग्राहकों को देते हुए अमूल ने अपने 700 से ज्यादा उत्पादों के दाम कम किए थे। उस वक्त 1 लीटर घी का कार्टन 650 रुपये से घटकर 610 रुपये और 5 लीटर का टिन 3,275 रुपये से कम होकर 3,075 रुपये का हो गया था। इसके साथ ही बटर के दाम भी गिरे थे। लेकिन मौजूदा Amul Ghee Price Hike ने उस जीएसटी कटौती के कारण मिले आर्थिक फायदे को काफी हद तक बेअसर कर दिया है।

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अमूल से जुड़े एक वरिष्ठ कोऑपरेटिव पदाधिकारी ने इस बाजार की स्थिति को स्पष्ट किया है। उनके अनुसार, हाल ही में गुजरात और राजस्थान के विभिन्न इलाकों में नकली घी का कारोबार करने वालों पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई हुई है। आंकड़ों की बात करें तो, पिछले छह महीनों में ही इन दोनों राज्यों से लगभग 2 लाख किलो नकली घी जब्त किया गया है। इस सख्त कानूनी कार्रवाई के बाद से ग्राहकों का भरोसा स्थानीय और खुले घी से पूरी तरह उठ गया है और उन्होंने सुरक्षा के मद्देनजर अमूल जैसे प्रमाणित ब्रांड का रुख किया है। त्यौहारी सीजन में पूरे साल का लगभग 45 प्रतिशत घी इस्तेमाल होता है, और ठीक इसी समय ब्रांडेड घी की मांग बढ़ने से पूरी सप्लाई चेन पर भारी दबाव बन गया है।

मांग में अचानक हुए इस भारी इजाफे के कारण कई बड़े शहरों में अमूल उत्पादों की किल्लत भी साफ देखने को मिल रही है। गुजरात के वडोदरा और अहमदाबाद जैसे शहरों में स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि पीछे से घी का पर्याप्त स्टॉक नहीं आ रहा है। हालात यह हैं कि मंगलवार को अहमदाबाद के सैटेलाइट इलाके स्थित डी-मार्ट जैसे बड़े आउटलेट में भी अमूल घी और बटर का स्टॉक पूरी तरह खत्म मिला। गणेश उत्सव के बाद से ही विशेषकर काउ घी की उपलब्धता पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। सप्लाई की यह समस्या सिर्फ गुजरात तक ही सीमित नहीं है। इससे पहले जुलाई और सितंबर के महीनों के दौरान पुणे और कोलकाता जैसे महानगरों से भी आपूर्ति बाधित होने और स्टॉक खत्म होने की शिकायतें प्रमुखता से सामने आ चुकी हैं।

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