मुरादाबाद: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में वन्यजीवों और इंसानों के बीच संघर्ष (Man-Animal Conflict) की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। विशेषकर गन्ने की बेल्ट वाले इलाकों में तेंदुओं (Leopards) का आतंक एक बड़ी समस्या बन चुका है। मुरादाबाद जिले के थाना कांठ क्षेत्र के कई गांव इन दिनों ऐसे ही एक खूंखार तेंदुए की दहशत का सामना कर रहे हैं। हालात ये हो गए हैं कि शाम ढलते ही लोग अपने घरों में दुबकने को मजबूर हैं और किसानों ने डर के मारे खेतों में जाना बंद कर दिया है।READ ALSO:-रसोई गैस के नाम पर 'डिजिटल डकैती': WhatsApp पर आया एक मैसेज और पलक झपकते ही जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई साफ!
\r\n\r\n\r\n\r\n
बीते 24 घंटों में इस खूंखार तेंदुए ने जिस तरह से दो अलग-अलग गांवों में घुसकर दो मासूम बच्चियों को अपना निवाला बनाने की कोशिश की है, उसने प्रशासन और वन विभाग (Forest Department) की नींद उड़ा दी है।
\r\n\r\nजंतर–मंतर गेम खेलें। पुलिस बनकर कॉकरोचों को पहचानो या आंदोलनकारी बनकर पहुंचो जंतर मंतर। खेलें ▶ \r\n\r\n
रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात: आंगन से खेत तक मौत का सफर
\r\n\r\nतेंदुए के हमले की सबसे ताजा और खौफनाक वारदात कांठ थाना क्षेत्र के मिश्रीपुर गांव में सामने आई।
\r\n\r\n\r\n\r\n
ग्रामीणों और परिजनों से 'खबरीलाल' को मिली जानकारी के अनुसार, गांव के निवासी अवनीश कुमार की 10 वर्षीय बेटी दीपांशी बीती रात करीब पौने आठ (7:45 PM) बजे अपने घर के आंगन में चारपाई पर अपने भाई विशाल के साथ आराम कर रही थी। गर्मी का मौसम होने के कारण घर के दरवाजे खुले थे और बाहर अंधेरा घिरने लगा था।
\r\n\r\nFollow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\n
अचानक हुआ खूनी हमला: इसी दौरान घर के पास ही स्थित गन्ने के खेत में घात लगाकर बैठा एक विशालकाय तेंदुआ दबे पांव आंगन में घुस आया। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, तेंदुए ने मासूम दीपांशी पर छलांग लगा दी। तेंदुए ने अपने नुकीले दांतों से बच्ची की खोपड़ी (सिर) को अपने मजबूत जबड़ों में जकड़ लिया और उसे घसीटते हुए गन्ने के खेत की ओर भागने लगा।
\r\n\r\n\r\n\r\n
भाई की सूझबूझ और ग्रामीणों का साहस:
\r\n\r\nइस खौफनाक मंजर को देखकर दीपांशी का भाई विशाल बुरी तरह घबरा गया, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। उसने पूरी ताकत से चीखना और शोर मचाना शुरू कर दिया।
\r\n\r\n\r\n\r\n
\r\n\r\n\r\n"बचाओ-बचाओ! तेंदुआ दीपांशी को ले गया!" विशाल की चीख-पुकार सुनकर घर के लोग और आसपास के ग्रामीण तुरंत सतर्क हो गए। बिना अपनी जान की परवाह किए, दर्जनों ग्रामीण लाठी-डंडे, टॉर्च और कुल्हाड़ी लेकर गन्ने के खेत की तरफ दौड़ पड़े। ग्रामीणों ने योजनाबद्ध तरीके से गन्ने के खेत को चारों ओर से घेर लिया और जोर-जोर से शोर मचाने लगे।\r\n
खबरीलाल न्यूज़ का Telegram चैनल जॉइन करें Join › \r\n\r\n
इंसानों की इतनी बड़ी भीड़ और भारी शोर-शराबे को देखकर तेंदुआ घबरा गया। उसने घायल दीपांशी को खेत के बीच में ही लहूलुहान अवस्था में छोड़ दिया और अंधेरे का फायदा उठाकर गन्ने की घनी फसल में कहीं गायब हो गया।
\r\n\r\n\r\n\r\n
अस्पताल में जिंदगी और मौत से जंग:
\r\n\r\nखून से लथपथ दीपांशी को तुरंत मुरादाबाद के जिला अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, तेंदुए के दांतों और पंजों से बच्ची के सिर और गर्दन पर गहरे घाव हुए हैं। फिलहाल उसकी स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है और आईसीयू (ICU) में उसका सघन उपचार चल रहा है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
24 घंटे में दूसरा हमला: महदूद कलमी गांव में भी मचा था कोहराम
\r\n\r\nमिश्रीपुर गांव की यह घटना कोई इकलौता मामला नहीं है। इस घटना से ठीक 24 घंटे पहले, इसी इलाके के महदूद कलमी गांव में भी इस खूंखार तेंदुए ने एक दुस्साहसिक वारदात को अंजाम दिया था।
\r\n\r\n
🏪 आपके शहर के ऑफर
विज्ञापन · स्थानीय दुकानों की ताज़ा स्कीम · स्वाइप करें →
सभी ऑफर देखें →
यहां तेंदुए ने सीधे एक घर के भीतर घुसकर महज 2 वर्षीय मासूम बच्ची सिदरा नूर पर जानलेवा हमला कर दिया था। उस वक्त बच्ची घर के अंदर खेल रही थी। परिजनों की सतर्कता और शोर मचाने के कारण सिदरा की जान तो बच गई, लेकिन वह भी इस हमले में बुरी तरह घायल हो गई।
\r\n\r\n\r\n\r\n
लगातार दो दिनों में, दो अलग-अलग गांवों में मासूम बच्चियों पर हुए इन सीधे हमलों ने यह साबित कर दिया है कि यह तेंदुआ अब इंसानी बस्तियों से खौफ नहीं खा रहा है और आदमखोर (Man-eater) होने की दिशा में बढ़ रहा है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
गन्ने के खेत: तेंदुओं की सबसे सुरक्षित शरणस्थली
\r\n\r\nपश्चिमी उत्तर प्रदेश (विशेषकर मुरादाबाद, बिजनौर और मेरठ बेल्ट) में गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर होती है। कृषि विशेषज्ञों और वन्यजीव अधिकारियों का कहना है कि:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n गन्ने की 10 से 12 फीट ऊंची और घनी फसल तेंदुओं के लिए एक प्राकृतिक जंगल (Natural Forest) का काम करती है।\r\n \r\n
- \r\n इन खेतों में छिपना आसान होता है और यहां जंगली सूअर, सियार और आवारा कुत्ते आसानी से शिकार के लिए मिल जाते हैं।\r\n \r\n
- \r\n मादा तेंदुए अक्सर गन्ने के खेतों को ही अपने शावकों (Cubs) को जन्म देने और सुरक्षित रखने के लिए चुनती हैं।\r\n \r\n
\r\n\r\n
यही कारण है कि जब किसान अपने खेतों में काम करने जाते हैं या बच्चे खेतों के आसपास खेलते हैं, तो उनका सामना इन खतरनाक मांसाहारी जीवों से हो जाता है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, ग्रामीणों में भारी आक्रोश
\r\n\r\nइन दोनों घटनाओं के बाद से कांठ इलाके के ग्रामीणों में भारी गुस्सा और आक्रोश है। सूचना मिलने के बाद पुलिस और वन विभाग की टीम (Forest Ranger Team) मौके पर जरूर पहुंची और उन्होंने कई घंटों तक गन्ने के खेतों में कॉम्बिंग (तलाशी अभियान) भी की, लेकिन चालाक तेंदुए का कोई सुराग नहीं लग सका।
\r\n\r\n\r\n\r\n
ग्रामीणों के गंभीर आरोप:
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि वन विभाग की ढिलाई और सुस्ती मासूम बच्चों की जान पर भारी पड़ रही है।\r\n \r\n
- \r\n उनका कहना है कि इलाके में तेंदुए की मौजूदगी की शिकायतें पिछले कई दिनों से की जा रही थीं, लेकिन विभाग ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया।\r\n \r\n
- \r\n ग्रामीण अब लामबंद हो गए हैं और उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही तेंदुए को नहीं पकड़ा गया, तो वे सड़कों पर उतरकर चक्का जाम करेंगे।\r\n \r\n
\r\n\r\n
वन विभाग का स्पष्टीकरण:
\r\n\r\nग्रामीणों के भारी विरोध को देखते हुए मुरादाबाद वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की है। वन विभाग के एक अधिकारी ने 'खबरीलाल' को फोन पर बताया:
\r\n\r\n\r\n\r\n
\r\n\r\n\r\n"हम ग्रामीणों की चिंता को समझते हैं। हमारी टीमें लगातार इलाके में गश्त कर रही हैं। हमने तेंदुए को सुरक्षित पकड़ने के लिए पिंजरा (Trap Cage) मंगा लिया है और उसे आज रात ही संभावित रास्तों पर लगा दिया जाएगा। इसके अलावा, नाइट विजन कैमरे (Night Vision Cameras) और ट्रैंक्विलाइजर गन (Tranquilizer Gun) से लैस विशेष टीम को भी अलर्ट पर रखा गया है। हमारी कोशिश है कि जल्द से जल्द इस तेंदुए को पकड़कर दूर घने जंगलों या चिड़ियाघर में शिफ्ट कर दिया जाए।"\r\n
\r\n\r\n
खबरीलाल की अपील: इन बातों का रखें विशेष ध्यान
\r\n\r\nजब तक वन विभाग इस तेंदुए को पिंजरे में कैद नहीं कर लेता, तब तक स्थानीय ग्रामीणों को अपनी सुरक्षा खुद सुनिश्चित करनी होगी। वन्यजीव विशेषज्ञों ने कुछ महत्वपूर्ण बचाव के तरीके साझा किए हैं:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n बच्चों को अकेला न छोड़ें: शाम ढलने के बाद और सुबह तड़के बच्चों को घर के बाहर या आंगन में बिल्कुल अकेला न खेलने दें।\r\n \r\n
- \r\n समूह में खेतों में जाएं: किसानों को सलाह दी जाती है कि वे खेतों में अकेले न जाएं। कम से कम 3-4 लोगों के समूह में जाएं और अपने साथ लाठी-डंडे जरूर रखें।\r\n \r\n
- \r\n रोशनी का प्रबंध: घरों के बाहर और पशुओं के बाड़े के पास तेज रोशनी वाले बल्ब (Floodlights) जलाकर रखें। तेंदुए आमतौर पर तेज रोशनी वाली जगहों पर जाने से बचते हैं।\r\n \r\n
- \r\n शोर करें: गन्ने के खेत के पास से गुजरते समय या खेत में घुसने से पहले ताली बजाएं, टिन का डिब्बा पीटें या रेडियो बजाएं। इंसानी आवाज और शोर सुनकर जंगली जानवर अपना रास्ता बदल लेते हैं।\r\n \r\n
\r\n\r\n
मुरादाबाद का प्रशासन और वन विभाग भले ही अब नींद से जागा हो, लेकिन दीपांशी और सिदरा नूर के परिवारों पर जो गुजरी है, उसका दर्द ताउम्र उनके जेहन में रहेगा। उम्मीद है कि जल्द ही यह खूंखार तेंदुआ पिंजरे में कैद होगा और इलाके के लोग फिर से बिना खौफ के खुली हवा में सांस ले सकेंगे।
Sabse pehle comment karne wale banein.