उत्तर प्रदेश में व्यापार को आसान बनाने (Ease of Doing Business) की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य में यूपी फूड लाइसेंस नियम और पंजीकरण की प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिससे लाखों छोटे-बड़े व्यापारियों, ठेले-खोमचे वालों और स्ट्रीट फूड वेंडर्स को सीधे तौर पर फायदा पहुंचने वाला है। नए नियमों के लागू होने के बाद अब खाद्य कारोबारियों को अपने लाइसेंस का हर साल नवीनीकरण (Annual Renewal) कराने के झंझट से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी।READ ALSO:-महा-संग्राम का शंखनाद: 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों की तारीखों का महा-ऐलान, 4 मई को तय होगा 17 करोड़ मतदाताओं का भविष्य!
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यह फैसला ऐसे समय में आया है जब व्यापारी लंबे समय से कागजी कार्रवाई और लालफीताशाही को कम करने की मांग कर रहे थे। नए नियमों के गजट में प्रकाशन के साथ ही इन्हें आधिकारिक रूप से प्रभावी मान लिया गया है और ये 1 अप्रैल से पूरे प्रदेश में जमीनी स्तर पर लागू कर दिए जाएंगे। आइए विस्तार से समझते हैं कि यूपी फूड लाइसेंस नियम में क्या-क्या बदलाव हुए हैं और इसका आम व्यापारियों पर क्या असर पड़ेगा।
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यूपी फूड लाइसेंस नियम: अब हर साल नवीनीकरण की आवश्यकता नहीं
\r\n\r\nसबसे बड़ी राहत उन व्यापारियों को मिली है जो हर साल अपने फूड लाइसेंस को रिन्यू कराने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते थे या ऑनलाइन पोर्टल पर लंबी प्रक्रिया से गुजरते थे। पहले व्यापारी एक से पांच वर्ष की अवधि के लिए लाइसेंस लेते थे। यदि किसी कारणवश वे समय पर नवीनीकरण नहीं करा पाते थे, तो उनका लाइसेंस निरस्त (Cancel) हो जाता था।
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लाइसेंस निरस्त होने के बाद व्यापारियों को दोबारा पूरी जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, जिसमें समय और पैसा दोनों बर्बाद होते थे। लेकिन नए यूपी फूड लाइसेंस नियम के तहत इस बाध्यता को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। अब एक बार लाइसेंस मिलने के बाद, जब तक व्यापारी सभी मानकों का पालन करता रहेगा और अपना वार्षिक शुल्क चुकाता रहेगा, उसे रिन्यूअल के लिए अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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स्ट्रीट वेंडर्स और ठेले-खोमचे वालों के लिए 'स्वतः पंजीकरण' (Auto-Registration)
\r\n\r\nस्ट्रीट फूड भारत की संस्कृति और अर्थव्यवस्था का एक अहम हिस्सा है। उत्तर प्रदेश में लाखों लोग ठेले, खोमचे और रेहड़ी लगाकर अपना परिवार पालते हैं। नए यूपी फूड लाइसेंस नियम में इस वर्ग का विशेष ध्यान रखा गया है।
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नगर निगम या 'स्ट्रीट वेंडर्स (जीविका संरक्षण एवं पथ विक्रय विनियमन) अधिनियम, 2014' के तहत जो भी ठेले-खोमचे और फेरीवाले पहले से पंजीकृत हैं, उन्हें अब भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) में अपने-आप (Auto-matically) पंजीकृत मान लिया जाएगा।
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- \r\n दोहरे पंजीकरण से मुक्ति: इससे छोटे दुकानदारों और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को दोबारा रजिस्ट्रेशन कराने और लंबी कागजी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी।\r\n \r\n
- \r\n त्वरित प्रमाणपत्र: नए नियमों के तहत छोटे खुदरा विक्रेता, स्ट्रीट फूड विक्रेता, अस्थायी स्टाल संचालक, फूड ट्रक संचालक और कुटीर स्तर के खाद्य उद्योग भी इस व्यवस्था में शामिल होंगे। जरूरी दस्तावेज पूरे होने पर अब पंजीकरण प्रमाणपत्र तुरंत जारी किया जा सकेगा।\r\n \r\n
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कारोबारियों के लिए बढ़ाई गई टर्नओवर की सीमा
\r\n\r\nयूपी फूड लाइसेंस नियम में केवल रिन्यूअल की प्रक्रिया ही आसान नहीं की गई है, बल्कि व्यापार के टर्नओवर (Annual Turnover) की सीमा में भी कई गुना का इजाफा किया गया है। व्यापारियों के संगठन 'कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स' (CAIT) के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र गोयल ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि इससे छोटे और मझोले व्यापारियों (MSME) को बहुत बड़ी राहत मिलेगी।
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आइए देखते हैं टर्नओवर की पुरानी और नई सीमा में क्या अंतर आया है:
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- \r\n पंजीकरण (Registration) की सीमा: पहले 12 लाख रुपये सालाना टर्नओवर तक के कारोबारियों को सिर्फ पंजीकरण (Registration) कराना होता था। अब सरकार ने इस सीमा को बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये कर दिया है। यानी 1.5 करोड़ तक का व्यापार करने वालों को अब भारी-भरकम लाइसेंस प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा, वे सिर्फ रजिस्ट्रेशन से काम चला सकेंगे।\r\n \r\n
- \r\n राज्य स्तर के लाइसेंस (State License) की सीमा: इसी तरह, पहले पांच करोड़ रुपये तक के सालाना टर्नओवर वाले कारोबारियों को राज्य स्तर (State Level) से लाइसेंस मिलता था। उससे अधिक टर्नओवर होने पर उन्हें केंद्र सरकार (Central FSSAI) से लाइसेंस लेना पड़ता था। नए नियमों में इस सीमा को बढ़ाकर सीधे 50 करोड़ रुपये कर दिया गया है।\r\n \r\n
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स्वच्छता और सुरक्षा मानकों पर कोई समझौता नहीं
\r\n\r\nलाइसेंस प्रक्रिया को आसान बनाने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि खाद्य सुरक्षा के साथ कोई ढिलाई बरती जाएगी। नए यूपी फूड लाइसेंस नियम स्पष्ट करते हैं कि सभी खाद्य कारोबारियों को स्वच्छता (Hygiene) और खाद्य सुरक्षा (Food Safety) से जुड़े मानकों का कड़ाई से पालन करना होगा।
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यदि कोई व्यापारी नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान भी रखा गया है:
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- \r\n स्वतः निलंबन (Auto-Suspension): यदि कोई कारोबारी अपना वार्षिक शुल्क (Annual Fee) या 'फूड सेफ्टी अनुपालन' से जुड़ा रिटर्न (Food Safety Compliance Return) समय पर जमा नहीं करता है, तो उसका लाइसेंस या पंजीकरण स्वतः निलंबित (Suspend) मान लिया जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n जोखिम आधारित निरीक्षण: खाद्य प्रतिष्ठानों, होटलों और रेस्टोरेंट का निरीक्षण अब पारंपरिक तरीके से न होकर 'जोखिम आधारित प्रणाली' (Risk-Based Inspection System) के तहत किया जाएगा। इसका अर्थ है कि जिन प्रतिष्ठानों में मिलावट या गंदगी की शिकायतें ज्यादा होंगी, वहां जांच प्राथमिकता पर होगी।\r\n \r\n
- \r\n थर्ड पार्टी ऑडिट: आवश्यकता पड़ने पर सरकार या संबंधित विभाग किसी निष्पक्ष एजेंसी (Third Party) से भी फूड सेफ्टी ऑडिट करा सकेगा।\r\n \r\n
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31 मार्च तक वैध लाइसेंस वालों के लिए जरूरी निर्देश
\r\n\r\nव्यापारियों के मन में यह सवाल उठना लाजमी है कि जिनके लाइसेंस अभी खत्म होने वाले हैं, उनका क्या होगा? सरकार ने इसके लिए भी स्थिति स्पष्ट कर दी है। जिन कारोबारियों के मौजूदा लाइसेंस या पंजीकरण की वैधता 31 मार्च तक है, उन्हें फिलहाल एक बार पुरानी प्रक्रिया के तहत ही अपना नवीनीकरण (Renewal) कराना होगा।
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एक अप्रैल से यह नया यूपी फूड लाइसेंस नियम पूरी तरह से सिस्टम में लागू हो जाएगा और इसके बाद किसी को भी आगामी वर्षों के लिए रिन्यूअल की इस जटिल प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा।
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उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा यूपी फूड लाइसेंस नियम में किया गया यह बदलाव 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' की दिशा में एक मास्टरस्ट्रोक है। एक अप्रैल से लागू हो रहे इन नियमों से न केवल इंस्पेक्टर राज पर लगाम लगेगी, बल्कि छोटे व्यापारियों और स्ट्रीट वेंडर्स का उत्पीड़न भी रुकेगा। टर्नओवर की सीमा 12 लाख से बढ़ाकर 1.5 करोड़ और 5 करोड़ से 50 करोड़ करने से प्रदेश के लाखों सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को सीधे तौर पर आर्थिक और मानसिक राहत मिलेगी। हालांकि, सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि प्रक्रियाओं के सरलीकरण की आड़ में आम जनता की सेहत के साथ कोई खिलवाड़ न हो, जिसके लिए जोखिम आधारित निरीक्षण और कड़े रिटर्न नियम बनाए गए हैं। कुल मिलाकर, यह कदम उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक नई गति प्रदान करने वाला साबित होगा।
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उत्तर प्रदेश में खाद्य कारोबारियों को राहत देते हुए सरकार ने 1 अप्रैल से फूड लाइसेंस के वार्षिक नवीनीकरण (Renewal) की अनिवार्यता खत्म कर दी है। नए 'यूपी फूड लाइसेंस नियम' के तहत 1.5 करोड़ तक के टर्नओवर पर सिर्फ पंजीकरण और 50 करोड़ तक के टर्नओवर पर राज्य लाइसेंस मिलेगा। इसके अलावा नगर निगम में पंजीकृत स्ट्रीट वेंडर्स को स्वतः FSSAI मान्यता मिल जाएगी। हालांकि, वार्षिक शुल्क और रिटर्न जमा न करने पर लाइसेंस रद्द हो सकता है।
Sabse pehle comment karne wale banein.