रामपुर/लखनऊ (UP Politics News): समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान (Azam Khan) और उनके परिवार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। शुक्रवार को रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट (Rampur MP MLA Court) ने आजम खान के बेटे और पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम (Abdullah Azam) को फर्जी पासपोर्ट मामले में दोषी करार देते हुए 7 साल की कड़ी सजा सुनाई है। कोर्ट ने उन पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।READ ALSO:-मेरठ में 'रक्तचरित्र': मां के सामने बेटे के सीने में उतार दी गोलियां, वकील बनने से पहले ही छात्र को मिली मौत; जीजा ने लिया 'लव मैरिज' का खूनी बदला
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यह फैसला अब्दुल्ला आजम के राजनीतिक करियर और आजम परिवार के लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है। अब्दुल्ला फिलहाल जेल में हैं और उनकी पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई।
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क्या है पूरा मामला? (Abdullah Azam Passport Case)
\r\n\r\nयह मामला दो अलग-अलग जन्मतिथियों के आधार पर दो पासपोर्ट बनवाने से जुड़ा है। भाजपा विधायक आकाश सक्सेना (Akash Saxena) ने सिविल लाइंस कोतवाली में अब्दुल्ला आजम के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप था कि अब्दुल्ला आजम ने असत्य और कूटरचित (Forged) दस्तावेजों का इस्तेमाल करके दो अलग-अलग पासपोर्ट हासिल किए और उनका उपयोग विदेश यात्राओं के लिए किया।
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कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और सबूतों के आधार पर अब्दुल्ला को दोषी माना। अभियोजन पक्ष की बहस पिछले हफ्ते ही पूरी हो गई थी, जिसके बाद कोर्ट ने आज (शुक्रवार) फैसला सुनाया।
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दो जन्मतिथि, दो पासपोर्ट: यही बनी मुसीबत
\r\n\r\nपुलिस जांच और कोर्ट में पेश किए गए दस्तावेजों के मुताबिक, अब्दुल्ला आजम के पास दो पासपोर्ट मिले थे, जिनमें जन्म की तारीखें अलग-अलग थीं:
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- \r\n पहला पासपोर्ट: इसमें जन्मतिथि 1 जनवरी 1993 दर्शाई गई थी।\r\n \r\n
- \r\n दूसरा पासपोर्ट: इसमें जन्मतिथि 30 सितंबर 1990 लिखी गई थी।\r\n \r\n
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दूसरा पासपोर्ट (संख्या Z 4307442) 10 जनवरी 2018 को जारी किया गया था। जांच में यह बात सामने आई कि शैक्षणिक प्रमाण पत्रों और अन्य दस्तावेजों में हेरफेर करके ये पासपोर्ट बनवाए गए थे। पासपोर्ट अधिनियम के तहत गलत जानकारी देकर एक से अधिक पासपोर्ट रखना गैरकानूनी है।
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तीसरी बार मिली सजा, बढ़ीं मुश्किलें
\r\n\r\nअब्दुल्ला आजम के लिए यह पहली सजा नहीं है। इससे पहले भी उन्हें दो अन्य मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है:
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- \r\n दो जन्म प्रमाण पत्र मामला: इसमें भी उन्हें सजा मिल चुकी है, जिसके कारण उनकी विधायकी भी चली गई थी।\r\n \r\n
- \r\n दो पैन कार्ड मामला: इसमें भी कोर्ट ने उन्हें दोषी माना था। अब पासपोर्ट मामले (Passport Case) में 7 साल की सजा होने के बाद उनकी जेल से रिहाई की उम्मीदें और धूमिल हो गई हैं।\r\n \r\n
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आकाश सक्सेना ने लड़ी कानूनी लड़ाई
\r\n\r\nइस मामले को अंजाम तक पहुंचाने में रामपुर शहर से भाजपा विधायक आकाश सक्सेना की मुख्य भूमिका रही। उन्होंने ही शिकायत दर्ज कराई थी कि अब्दुल्ला आजम ने चुनाव लड़ने और अन्य लाभ लेने के लिए अपनी उम्र से जुड़े दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा किया है। सक्सेना ने कोर्ट में सबूत पेश किए कि कैसे एक ही व्यक्ति की दो अलग-अलग जन्म तिथियां आधिकारिक दस्तावेजों में दर्ज हैं।
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5 पॉइंट्स में समझें कोर्ट का फैसला
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- \r\n दोषी करार: कोर्ट ने माना कि अब्दुल्ला ने जानबूझकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाए।\r\n \r\n
- \r\n सजा: आईपीसी और पासपोर्ट अधिनियम की धाराओं के तहत 7 साल की कैद।\r\n \r\n
- \r\n जुर्माना: 50,000 रुपये का आर्थिक दंड।\r\n \r\n
- \r\n पेशी: अब्दुल्ला आजम सीतापुर जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े थे।\r\n \r\n
- \r\n आरोप: शैक्षिक रिकॉर्ड और पासपोर्ट में अलग-अलग जन्मतिथि का उपयोग।\r\n \r\n
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रामपुर की राजनीति में कभी एकतरफा दबदबा रखने वाले आजम खान का परिवार अब कानूनी शिकंजे में बुरी तरह फंस चुका है। अब्दुल्ला आजम (Abdullah Azam) को मिली यह 7 साल की सजा न केवल उनके राजनीतिक भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लगाती है, बल्कि यह भी संदेश देती है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। अब देखना होगा कि अब्दुल्ला आजम के वकील इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में कब अपील करते हैं।
Sabse pehle comment karne wale banein.