वैश्विक बाजार में इस समय भारी उथल-पुथल मची हुई है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और संभावित युद्ध के साये का सीधा असर कमोडिटी मार्केट (Commodity Market) पर देखने को मिल रहा है। आमतौर पर देखा जाता है कि जब भी दुनिया में युद्ध या संकट की स्थिति होती है, तो सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग तेजी से बढ़ती है। लेकिन, इस बार बाजार का मिजाज बिल्कुल अलग है और लगातार सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की जा रही है। अगर आप भी गहने खरीदने या निवेश करने का मन बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। आइए विस्तार से समझते हैं कि कीमतों में कितनी कमी आई है और इस गिरावट के पीछे के मुख्य कारण क्या हैं।READ ALSO:-यूपी मौसम का 'डबल अटैक': पूर्वांचल में 15 दिन झुलसाएगी भीषण लू, पश्चिमी यूपी में आंधी-बारिश से खेतों में बिछी फसलें
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सराफा बाजार का ताजा हाल: कितने गिरे दाम?
\r\n\r\nइंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय सर्राफा बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट का दौर जारी है। गुरुवार को 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत में 5,346 रुपए की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद यह 1.46 लाख रुपए के स्तर पर आ गया है। इससे ठीक एक दिन पहले, बुधवार को सोने का भाव 1.51 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था।
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चांदी की चमक भी इस तनावपूर्ण माहौल में फीकी पड़ी है। एक किलो चांदी की कीमत में 15,176 रुपए की भारी गिरावट आई है, जिसके बाद चांदी 2.25 लाख रुपए प्रति किलो पर पहुंच गई है। गौरतलब है कि 25 मार्च को चांदी का भाव 2.40 लाख रुपए के उच्च स्तर पर था। कुल मिलाकर देखें तो अमेरिका-ईरान जंग की आशंकाओं के बीच महज 34 दिनों के भीतर सोना 13,590 रुपए और चांदी 42,040 रुपए सस्ती हो चुकी है।
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अलग-अलग शहरों में सोने के दाम अलग होने की 4 मुख्य वजहें
\r\n\r\nअक्सर लोगों के मन में यह सवाल होता है कि एक ही देश में अलग-अलग शहरों में सोने के दाम अलग क्यों होते हैं। सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट के बीच यह समझना भी जरूरी है कि आपके शहर का रेट किन बातों पर निर्भर करता है:
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- \r\n ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी (परिवहन और सुरक्षा): सोने जैसी कीमती धातु को एक शहर से दूसरे शहर या राज्य में ले जाने के लिए विशेष सुरक्षा और परिवहन की जरूरत होती है। इसमें ईंधन और कड़ी सुरक्षा का भारी खर्च जुड़ता है। यही कारण है कि सप्लाई चेन में दूरी बढ़ने पर दाम अपने आप बढ़ जाते हैं।\r\n \r\n
- \r\n खरीदारी की मात्रा (बल्क बाइंग): दक्षिण भारत में सोने की खपत देश में सबसे ज्यादा (करीब 40%) है। वहां के ज्वेलर्स थोक में बड़ी खरीदारी करते हैं। हालांकि, थोक खरीदारी पर उन्हें जो छूट मिलती है, उसका पूरा फायदा ग्राहकों तक नहीं पहुंच पाता है, जिससे कीमतों में अंतर बना रहता है।\r\n \r\n
- \r\n लोकल ज्वेलर्स एसोसिएशन: हर राज्य और बड़े शहर के ज्वेलर्स एसोसिएशन स्थानीय स्तर पर मांग और सप्लाई (Demand and Supply) के आधार पर अपने-अपने रेट तय करते हैं। स्थानीय कर भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं।\r\n \r\n
- \r\n पुराना स्टॉक और खरीद मूल्य: किसी भी ज्वेलरी शॉप पर सोने का भाव इस बात पर भी निर्भर करता है कि ज्वेलर ने अपना पुराना स्टॉक किस रेट पर खरीदा था। उनका अपना खरीदी रेट ही यह तय करता है कि वे ग्राहकों को कितने मार्जिन के साथ सोना बेचेंगे।\r\n \r\n
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क्या हैं सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट के मुख्य कारण?
\r\n\r\nजैसा कि पहले बताया गया, जंग के माहौल में सोने-चांदी के दाम अमूमन बढ़ते हैं, लेकिन इस बार सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे कुछ अलग ही आर्थिक समीकरण काम कर रहे हैं:
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- \r\n कैश की बचत (Cash is King): मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते तनाव और जंग की आशंकाओं के बीच बड़े निवेशक जोखिम से बचना चाहते हैं। अनिश्चितता के इस दौर में लिक्विडिटी (नगदी) बनाए रखने के लिए निवेशक अपनी होल्डिंग (गोल्ड-सिल्वर) बेचकर भारी मात्रा में कैश इकट्ठा कर रहे हैं।\r\n \r\n
- \r\n प्रॉफिट बुकिंग का दबाव: जनवरी के महीने में सोने और चांदी की कीमतों ने अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर को छुआ था। ऐसे में बड़े निवेशकों और फंड हाउसों ने मुनाफावसूली (Profit Booking) करते हुए जमकर बिक्री की। बाजार में अचानक सप्लाई बढ़ने से कीमतों में यह भारी गिरावट आई है।\r\n \r\n
- \r\n ब्याज दरों का सीधा असर: अमेरिका के फेडरल रिजर्व (US Fed) द्वारा ब्याज दरों में कटौती न करने और सख्त रुख अपनाए रखने से डॉलर मजबूत हुआ है। डॉलर की मजबूती ने कीमती धातुओं की चमक को कम कर दिया है।\r\n \r\n
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कमोडिटी मार्केट के जाने-माने एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक, भू-राजनीतिक अस्थिरता और डॉलर की चाल को देखते हुए सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट का यह सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है। उन्होंने निवेशकों को सलाह दी है कि इस अस्थिर माहौल में जल्दबाजी में सोने-चांदी में भारी निवेश करने से अभी बचना चाहिए और बाजार के स्थिर होने का इंतजार करना चाहिए।
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ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें खास ध्यान
\r\n\r\nअगर आप इस सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट का फायदा उठाकर ज्वेलरी खरीदने जा रहे हैं, तो धोखाधड़ी से बचने के लिए इन बातों का जरूर ध्यान रखें:
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- \r\n सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: भारत में सोना खरीदते समय हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। आभूषणों पर एक खास अल्फान्यूमेरिक (Alphanumeric) HUID कोड होता है (जैसे- AZ4524)। इस कोड को 'BIS Care App' पर डालकर आप चेक कर सकते हैं कि सोना असली है या नहीं और वह कितने कैरेट (18K, 22K या 24K) का है।\r\n \r\n
- \r\n कीमत क्रॉस चेक करें: खरीदारी से पहले सोने का सही वजन और उस दिन की आधिकारिक कीमत कई प्रमाणित सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक जरूर करें। मेकिंग चार्ज के नाम पर होने वाली ठगी से बचने के लिए अलग-अलग कैरेट के भाव की जानकारी होना बहुत जरूरी है।\r\n \r\n
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असली चांदी की पहचान करने के 4 आसान और अचूक तरीके
\r\n\r\nसोने के साथ-साथ बाजार में नकली चांदी का चलन भी काफी बढ़ गया है। घर बैठे असली चांदी की पहचान करने के लिए आप इन चार तरीकों को आजमा सकते हैं:
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- \r\n मैग्नेट टेस्ट (चुंबक परीक्षण): असली चांदी कभी भी चुंबक (Magnet) की तरफ आकर्षित नहीं होती है। अगर चांदी का बर्तन या गहना चुंबक से चिपक जाए, तो समझ लें कि उसमें भारी मिलावट है या वह पूरी तरह नकली है।\r\n \r\n
- \r\n आइस टेस्ट (बर्फ परीक्षण): चांदी ऊष्मा (Heat) की बहुत अच्छी सुचालक होती है। अगर आप असली चांदी पर बर्फ का टुकड़ा रखेंगे, तो वह कमरे के तापमान पर रखी किसी भी अन्य धातु के मुकाबले बहुत तेजी से पिघलेगी।\r\n \r\n
- \r\n स्मेल टेस्ट (गंध परीक्षण): शुद्ध और असली चांदी में किसी भी प्रकार की कोई गंध (Smell) नहीं होती है। अगर आपके चांदी के आभूषणों से कॉपर (तांबे) या किसी केमिकल जैसी अजीब गंध आ रही है, तो वह निश्चित रूप से नकली है।\r\n \r\n
- \r\n क्लॉथ टेस्ट (कपड़े से परीक्षण): चांदी की किसी भी वस्तु को एक साफ सफेद सूती कपड़े से जोर से रगड़ें। अगर कपड़े पर काले रंग का दाग या निशान आ जाए, तो समझ लें कि आपकी चांदी असली है, क्योंकि चांदी हवा में मौजूद ऑक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया करके ऑक्साइड बनाती है जो रगड़ने पर कपड़े पर लग जाता है।\r\n \r\n
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अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के संकट के बावजूद वैश्विक बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट लगातार जारी है। जहां 24 कैरेट सोना 1.46 लाख रुपये पर आ गया है, वहीं चांदी 2.25 लाख रुपये प्रति किलो रह गई है। विशेषज्ञ इसके पीछे निवेशकों द्वारा कैश को तरजीह देने और जनवरी के हाई रेट्स के बाद प्रॉफिट बुकिंग को मुख्य वजह मान रहे हैं। अलग-अलग शहरों में ट्रांसपोर्टेशन और स्थानीय टैक्स की वजह से कीमतों में अंतर होता है। इस अस्थिर बाजार में विशेषज्ञों ने फिलहाल बड़े निवेश से बचने की सलाह दी है, और जो लोग खरीदारी कर रहे हैं उन्हें BIS हॉलमार्क और शुद्धता की जांच अनिवार्य रूप से करनी चाहिए।
Sabse pehle comment karne wale banein.