उत्तर प्रदेश के मौसम में इस साल गजब की उठापटक और भारी बदलाव देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां अप्रैल के महीने से ही प्रदेश के कई हिस्सों में सूरज के तेवर तल्ख होने लगते हैं, वहीं इस बार बादलों, तेज हवाओं और ओलावृष्टि ने पूरे सूबे के मौसम का मिजाज पूरी तरह से बदलकर रख दिया है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का अलग-अलग रूप देखने को मिल रहा है।Read also:-UPPSC PCS Result: बिजनौर के 9 लाल और बेटियों ने रचा इतिहास, अभय प्रताप सिंह बने SDM (रैंक 3); जिले भर में जश्न का माहौल
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आने वाले कुछ दिन और महीने प्रदेश के मौसम के लिहाज से कैसे रहने वाले हैं, इस विषय को लेकर लखनऊ के आंचलिक मौसम केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बेहद अहम और विस्तृत जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया है कि इस साल उत्तर प्रदेश को दो अलग-अलग मौसमी मार झेलनी पड़ सकती है। आइए इस विस्तृत रिपोर्ट में समझते हैं कि यूपी में गर्मी, लू, बारिश और ओलावृष्टि का क्या पूर्वानुमान है और इसका आम जनजीवन तथा किसानों पर क्या असर पड़ने वाला है।
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पूर्वांचल में बरसेगी आग: 15 दिनों तक हीटवेव (लू) का खौफ
\r\n\r\nअगर बात उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से यानी पूर्वांचल की करें, तो यहाँ के निवासियों को इस बार गर्मी से कोई खास राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, पूर्वांचल के लोगों को आने वाले दिनों में चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी का सामना करना पड़ेगा। अप्रैल से लेकर जून महीने तक इस इलाके में हीटवेव (लू) का भयंकर प्रकोप देखने को मिल सकता है।
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वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार, पूर्वांचल में दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से कहीं अधिक रहने का अनुमान है। यह तापमान 41 डिग्री सेल्सियस से लेकर 45 डिग्री सेल्सियस के खतरनाक स्तर तक जा सकता है। सबसे बड़ी चिंता का विषय लू के दिनों की अवधि है। आमतौर पर गर्मियों के मौसम में हीटवेव लगातार 3 से 5 दिनों तक ही चलती है और फिर मौसम में हल्का बदलाव आ जाता है। लेकिन, इस बार के मौसमी मॉडल इशारा कर रहे हैं कि पूर्वांचल में 10 से 15 दिनों तक या उससे भी अधिक समय तक गर्म हवा के थपेड़े लोगों को लगातार परेशान कर सकते हैं।
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पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड: झुलसाने वाली गर्मी से राहत, पर रातें होंगी गर्म
\r\n\r\nपूर्वांचल के बिल्कुल विपरीत, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के जिलों के लिए मौसम विभाग ने थोड़ी राहत भरी खबर दी है। इस सीजन में पश्चिमी यूपी में हीटवेव (लू) का असर न के बराबर रहने वाला है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस हिस्से में दिन का अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच ही सीमित रहेगा।
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इसका मुख्य कारण इस क्षेत्र में हो रही लगातार बारिश और मौसम में आ रहे बदलाव हैं, जिनकी वजह से तापमान सामान्य से नीचे बना हुआ है। दिन में झुलसा देने वाली तेज गर्मी का सामना पश्चिमी यूपी के लोगों को कम करना पड़ेगा।
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हालांकि, एक बात जो पूरे उत्तर प्रदेश (चाहे वह पूर्वी हो या पश्चिमी) पर लागू होती है, वह यह है कि अप्रैल से जून के महीनों में न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है। इसका सीधा सा मतलब यह हुआ कि दिन में भले ही पश्चिमी यूपी में गर्मी कम लगे, लेकिन रातें काफी गर्म और उमस भरी होंगी।
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वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (पश्चिमी विक्षोभ) का खेल: अचानक आंधी-बारिश की वजह
\r\n\r\nआजकल यूपी के कई जिलों में अचानक से तेज आंधी आती है, बारिश होती है और फिर अचानक से तेज धूप निकल आती है। मौसम के इस अजीब व्यवहार के पीछे का मुख्य कारण वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (पश्चिमी विक्षोभ) है।
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मौसम वैज्ञानिक बताते हैं कि इस सीजन में पश्चिमी विक्षोभ का आना एक सामान्य बात है। हर साल इस समय आंधी-तूफान के साथ हल्की बारिश देखने को मिलती है। लेकिन, इस साल चिंता की बात यह है कि ये वेस्टर्न डिस्टर्बेंस बहुत जल्दी-जल्दी और अधिक सक्रिय रूप में आ रहे हैं। इसी कारण से लगातार आंधी-बारिश का मौसम बना हुआ है। बारिश के कारण लोगों को कुछ देर के लिए ठंडक और राहत जरूर महसूस होती है, लेकिन जैसे ही आसमान साफ होता है और धूप निकलती है, वातावरण में भारी उमस पैदा हो जाती है जो और भी ज्यादा असहज कर देती है।
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पूर्वानुमान के मुताबिक, 10 अप्रैल तक ऐसे दो और वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव होने वाले हैं। इसका मतलब है कि आने वाले हफ्तों में भी मौसम इसी तरह से अस्थिर बना रहेगा और बारिश का दौर बीच-बीच में लौटता रहेगा।
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आंकड़ों की गवाही: 1100% ज्यादा बारिश ने तोड़े सभी रिकॉर्ड
\r\n\r\nमौसम विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस बार बारिश ने कई पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
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- \r\n मार्च महीने का हाल: मार्च की शुरुआत में हल्की गर्मी थी, लेकिन इसके बाद तेज आंधी और बारिश का दौर शुरू हो गया। पूरे महीने का औसत तापमान 21°C से 35°C के बीच रहा। आमतौर पर मार्च में मुश्किल से 1 या 2 दिन बारिश होती है, लेकिन इस बार 15 से 20 मार्च के बीच ही 27 जिलों में भयंकर आंधी-बारिश और ओलावृष्टि हुई। फिर 26 से 31 मार्च के बीच लगातार 4-5 दिन मौसम खराब रहा। पूरे मार्च में औसतन 8.8 मिमी बारिश होती है, लेकिन इस बार 9.3 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 6% अधिक है।\r\n \r\n
- \r\n अप्रैल की चौंकाने वाली शुरुआत: 1 अप्रैल के आंकड़े और भी ज्यादा चौंकाने वाले रहे। मौसम वैज्ञानिकों को इस दिन मात्र 0.1 मिमी बारिश की उम्मीद थी, लेकिन पूरे यूपी में औसतन 1.2 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। यह सामान्य से 1100% ज्यादा है।\r\n \r\n
- \r\n आगे का अनुमान: मौसम विभाग का अनुमान है कि पूरे अप्रैल महीने में सामान्य से 104% से अधिक बारिश हो सकती है और कई जिलों में ओले भी गिर सकते हैं। मानसून को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है और इसके आने की सही तारीख मई में ही पता चल सकेगी।\r\n \r\n
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यूपी के जिलों में बारिश के आंकड़े (मार्च-अप्रैल)
\r\n\r\nनीचे दी गई तालिका में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि किन जिलों में सबसे ज्यादा और किन जिलों में सबसे कम बारिश दर्ज की गई है:
\r\n\r\n| \r\n सर्वाधिक बारिश वाले जिले \r\n | \r\n \r\n बारिश (mm) \r\n | \r\n \r\n सबसे कम बारिश वाले जिले \r\n | \r\n \r\n बारिश (mm) \r\n | \r\n
| \r\n बिजनौर \r\n | \r\n \r\n 23.2 \r\n | \r\n \r\n मुजफ्फरनगर \r\n | \r\n \r\n 7.2 \r\n | \r\n
| \r\n बाराबंकी \r\n | \r\n \r\n 18.2 \r\n | \r\n \r\n बिजनौर (अन्य क्षेत्र) \r\n | \r\n \r\n 6.8 \r\n | \r\n
| \r\n लखनऊ \r\n | \r\n \r\n 18.0 \r\n | \r\n \r\n सहारनपुर \r\n | \r\n \r\n 5.2 \r\n | \r\n
| \r\n बहराइच \r\n | \r\n \r\n 15.4 \r\n | \r\n \r\n संभल \r\n | \r\n \r\n 2.7 \r\n | \r\n
| \r\n मेरठ \r\n | \r\n \r\n 11.2 \r\n | \r\n \r\n | \r\n \r\n | \r\n
(नोट: सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, बरेली, बदायूं, एटा, अलीगढ़, बुलंदशहर, मेरठ, अमरोहा, नोएडा और गाजियाबाद जैसे जिलों में औसत बारिश दर्ज की गई है।)
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अन्नदाता पर कुदरत की मार: ओलावृष्टि से खेतों में बिछी फसलें
\r\n\r\nइस बेमौसम बारिश और बदलते मौसम का सबसे बड़ा और विनाशकारी प्रभाव उत्तर प्रदेश के किसानों पर पड़ा है। वर्तमान समय में रबी की सभी प्रमुख फसलें अपनी मेच्योरिटी स्टेज (पकने की अवस्था) में हैं। ऐसे समय में जब फसल कटाई के लिए तैयार खड़ी हो, तब बेमौसम बारिश, तेज आंधी और ओलावृष्टि का होना किसानों के लिए किसी बड़े दुःस्वप्न से कम नहीं है।
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वैज्ञानिकों का स्पष्ट कहना है कि यदि केवल हल्की बारिश होती और हवा न चलती, तो शायद फसलों को थोड़ा बहुत फायदा हो सकता था। लेकिन, तेज तूफानी हवाओं के कारण खेतों में लहलहाती फसलें पूरी तरह से जमीन पर गिर गई हैं। विशेष रूप से गेहूं, सरसों, दलहन और तिलहन की फसलों को सबसे भारी नुकसान पहुंचा है।
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आंकड़े बताते हैं कि महज पिछले 5 दिनों के भीतर ही उत्तर प्रदेश के 15,000 से 20,000 किसानों की खून-पसीने की कमाई आंधी और ओलों की भेंट चढ़ गई है। पकी हुई फसलों पर ओले गिरने से बालियां टूट गई हैं और दाने जमीन पर बिखर गए हैं। मौसम विभाग की चेतावनी कि अप्रैल में अभी और बारिश व ओलावृष्टि हो सकती है, किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें और गहरी कर रही है।
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निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि उत्तर प्रदेश का मौसम आने वाले समय में बेहद चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। जहां एक ओर पूर्वांचल को भयंकर लू से बचाव की तैयारी करनी होगी, वहीं पश्चिमी यूपी और किसानों को बेमौसम आंधी-तूफान से अपनी फसलों और जान-माल को सुरक्षित रखने के उपाय खोजने होंगे।
Sabse pehle comment karne wale banein.