उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग और शिक्षकों के बीच एक बार फिर टकराव की स्थिति बनती नजर आ रही है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने परिषदीय विद्यालयों (Primary and Upper Primary Schools) में शिक्षकों की ऑनलाइन हाजिरी (Online Attendance) को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है। सरकार पीछे हटने के मूड में नहीं है, लेकिन विरोध को देखते हुए नियमों में कुछ ढील जरूर दी गई है।READ ALSO:-UP Weather: पश्चिमी हवाओं ने फिर बढ़ाई ठिठुरन, अगले 3 दिन में और लुढ़केगा पारा; इन 7 जिलों में कोहरे का 'येलो अलर्ट'
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अपर मुख्य सचिव (बेसिक शिक्षा) पार्थ सारथी सेन शर्मा ने स्कूल शिक्षा निदेशक को एक विस्तृत शासनादेश जारी किया है। इस आदेश के मुताबिक, अब शिक्षकों को स्कूल पहुंचने के बाद ऑनलाइन हाजिरी लगाने के लिए एक घंटे की मोहलत (Relaxation) मिलेगी। हालांकि, शिक्षक संगठन इस आदेश के बाद फिर से आंदोलन की रणनीति बना सकते हैं।
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क्या है नए शासनादेश में?

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अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि डिजिटल अटेंडेंस व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू किया जाए। इसमें शिक्षकों की व्यावहारिक समस्याओं, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की दिक्कत, का समाधान निकालने का प्रयास किया गया है।
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    एक घंटे का मार्जिन: शिक्षकों को विद्यालय खुलने के समय से एक घंटे के भीतर अपनी उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज करनी होगी। उदाहरण के लिए, यदि स्कूल सुबह 9 बजे खुलता है, तो 10 बजे तक हाजिरी मान्य होगी।
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    सिस्टम लॉक: एक घंटे की अवधि बीत जाने के बाद डिजिटल सिस्टम ऑटोमेटिक लॉक हो जाएगा और हाजिरी दर्ज नहीं हो पाएगी।
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    ऑफलाइन मोड की सुविधा: जिन सुदूर ग्रामीण विद्यालयों में नेटवर्क की गंभीर समस्या है, वहां शिक्षकों को ऑफलाइन मोड में हाजिरी लगाने की छूट दी गई है। यह डेटा ऐप में सेव रहेगा और जैसे ही मोबाइल नेटवर्क क्षेत्र में आएगा, यह ऑटोमेटिक सर्वर पर सिंक (Sync) हो जाएगा।
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प्रधानाध्यापक पर होगी जिम्मेदारी

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नये आदेश में प्रधानाध्यापकों (Headmasters) की जवाबदेही तय की गई है। विद्यालय के सभी शिक्षकों की उपस्थिति को प्रमाणित करने और डिजिटल प्रणाली में अपडेट करने की जिम्मेदारी प्रधानाध्यापक की होगी।
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शासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि यदि कोई प्रधानाध्यापक इस डिजिटल प्रणाली का विरोध करता है या हाजिरी अपडेट करने में आनाकानी करता है, तो उनसे प्रभार (Charge) वापस ले लिया जाएगा और यह जिम्मेदारी किसी अन्य शिक्षक को सौंप दी जाएगी।
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कमेटी की रिपोर्ट के बाद आया फैसला

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गौरतलब है कि इससे पहले जुलाई 2024 में जब सरकार ने ऑनलाइन हाजिरी अनिवार्य की थी, तो पूरे प्रदेश में शिक्षकों ने जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया था। भारी विरोध को देखते हुए सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ा था। इसके बाद समस्याओं के समाधान के लिए अक्टूबर में एक 15 सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया था।
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इस कमेटी में विभागीय अधिकारियों के अलावा शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों और शिक्षकों को भी शामिल किया गया था। सूत्रों के मुताबिक, कमेटी ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपी है। इसी रिपोर्ट की सिफारिशों के आधार पर 'एक घंटे की छूट' और 'ऑफलाइन मोड' जैसे प्रावधानों के साथ यह नया आदेश जारी किया गया है।
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शिक्षकों का रुख और संभावित टकराव

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भले ही सरकार ने नियमों में थोड़ी ढील दी हो, लेकिन शिक्षक संगठन अभी भी पूर्ण संतुष्ट नहीं हैं। शिक्षक संघों का कहना है कि ऑनलाइन हाजिरी से पहले सरकार को उनकी पुरानी मांगें माननी चाहिए।
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    शिक्षकों की प्रमुख मांगें:

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      राज्य कर्मचारियों की भांति 31 दिन का उपार्जित अवकाश (Earned Leave) मिले।
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      आकस्मिक स्थितियों के लिए आधे दिन के अवकाश (Half-day Leave) की व्यवस्था हो।
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      कैशलेस चिकित्सा सुविधा को सही ढंग से लागू किया जाए।
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शिक्षकों का तर्क है कि वे ऑनलाइन हाजिरी के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन पहले उन्हें मूलभूत सुविधाएं दी जाएं। बिना सुविधाओं के केवल निगरानी बढ़ाना शिक्षकों के मानसिक उत्पीड़न जैसा है।
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अपर मुख्य सचिव के आदेश के बाद अब गेंद स्कूल शिक्षा निदेशक के पाले में है, जो जल्द ही इस व्यवस्था को लागू करने की तारीख का ऐलान करेंगे। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या 'एक घंटे की मोहलत' शिक्षकों के गुस्से को शांत कर पाएगी, या प्रदेश में एक बार फिर 'कलम बंद हड़ताल' जैसा माहौल बनेगा। फिलहाल, स्कूलों में सुगबुगाहट तेज हो गई है।
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उत्तर प्रदेश सरकार ने परिषदीय शिक्षकों की ऑनलाइन हाजिरी के लिए नया आदेश जारी किया है। अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा के निर्देशानुसार, शिक्षकों को स्कूल खुलने के 1 घंटे के भीतर हाजिरी लगानी होगी। नेटवर्क न होने पर ऑफलाइन हाजिरी की सुविधा मिलेगी जो बाद में सिंक हो जाएगी। यह फैसला विशेष कमेटी की रिपोर्ट के बाद लिया गया है।
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