उत्तर प्रदेश पुलिस (UP Police) में शामिल होकर देश और प्रदेश की सेवा करने का जज्बा रखने वाले नौजवानों के लिए एक बेहद ही ऐतिहासिक और मंगलकारी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने रोजगार के मोर्चे पर एक बहुत बड़ा कदम उठाते हुए पुलिस विभाग में बंपर भर्तियों का रास्ता साफ कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार देर रात पुलिस महकमे के कामकाज की गहन समीक्षा करते हुए ऐलान किया है कि उत्तर प्रदेश पुलिस में शामिल होने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए आने वाला वर्ष 2026-27 बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। इस एक वर्ष के भीतर यूपी पुलिस में 81 हजार से अधिक पदों पर भर्ती (UP Police Recruitment) की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई है।Read also:-मेरठ में 'पाप के नेटवर्क' का भंडाफोड़: दिल्ली-दून हाईवे पर हाई-प्रोफाइल सेक्स रैकेट पकड़ा गया, एजेंट की कार से 2400 कंडोम बरामद
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इस उच्च स्तरीय बैठक में न केवल भर्तियों पर चर्चा हुई, बल्कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था (Law and Order), आपातकालीन सेवाओं, साइबर सुरक्षा और पुलिस महकमे के आंतरिक सुधारों को लेकर भी कई अहम दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। आइए, इस पूरी खबर को विस्तार से जानते हैं।
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81 हज़ार पदों का महा-अभियान: किन पदों पर होगी भर्ती?

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बैठक के दौरान शीर्ष पुलिस अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि पुलिस विभाग में मैनपावर की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक विशाल भर्ती अभियान प्रस्तावित है। इस अभियान के तहत उपनिरीक्षक (Sub-Inspector - SI), सिपाही (Constable), रेडियो सहायक परिचालक (Radio Assistant Operator), कंप्यूटर ऑपरेटर ग्रेड-ए (Computer Operator Grade-A) और पुलिस उपनिरीक्षक-गोपनीय (Confidential SI) सहित कई महत्वपूर्ण कैटेगरी में 81 हजार से अधिक पदों पर भर्तियां निकाली जाएंगी।
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मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (UPPRPB) को स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए हैं कि सभी सीधी भर्तियां पूरी पारदर्शिता, निष्पक्षता और तय आरक्षण प्रावधानों के हिसाब से समय-सीमा के भीतर पूरी कराई जाएं। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह से 'तकनीक आधारित' (Technology-driven) बनाया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की धांधली की गुंजाइश न रहे और प्रदेश के मेहनती युवाओं का व्यवस्था पर विश्वास और अधिक मजबूत हो सके। अधिकारियों के अनुसार, इनमें से कुछ पदों के लिए प्राथमिक प्रक्रिया शुरू भी कर दी गई है।
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रसूखदारों पर गिरेगी गाज: लंबे समय से जमे पुलिसकर्मियों का होगा तबादला

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का फोकस सिर्फ नई भर्तियों पर ही नहीं है, बल्कि विभाग की आंतरिक कार्यप्रणाली को सुधारने पर भी है। वीवीआईपी ड्यूटी और मलाईदार पोस्टिंग का मोह रखने वालों के लिए सीएम ने कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजभवन, मुख्यमंत्री आवास, पुलिस मुख्यालय सहित राजधानी लखनऊ में जो पुलिसकर्मी लंबे समय से एक ही जगह पर तैनात हैं, उनका तत्काल प्रभाव से ट्रांसफर (Police Transfer Policy) होना चाहिए।
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मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों से कहा कि वे पुलिस विभाग में 'नतीजे देने वाली कार्यशैली' (Result-oriented approach) को अपनाएं। हर स्तर पर जवाबदेही (Accountability) तय की जाए। लापरवाही बरतने वाले या काम में ढिलाई करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को बख्शा नहीं जाएगा।
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डायल 112 (PRV) बनेगा सुपरफास्ट: 6 मिनट से भी कम होगा रिस्पांस टाइम

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प्रदेशवासियों को किसी भी आपात स्थिति में तुरंत पुलिस सहायता उपलब्ध कराने वाली पीआरवी-112 सेवा (PRV-112 Service) की समीक्षा करते हुए सीएम योगी ने इसे और अधिक चुस्त बनाने के निर्देश दिए। वर्तमान में पीआरवी का औसत रिस्पांस टाइम 6 मिनट है, जिसे मुख्यमंत्री ने और कम करने का लक्ष्य दिया है।
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इसके लिए निम्नलिखित कदम उठाने को कहा गया है:

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    रणनीतिक लोकेशन: पीआरवी वाहनों की लोकेशन इस तरह तय की जाए कि वे किसी भी सूचना पर पलक झपकते ही पहुंच सकें।
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    डेटा आधारित पेट्रोलिंग: अपराध के आंकड़ों का विश्लेषण करके 'हॉटस्पॉट आधारित पेट्रोलिंग' की जाए।
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    रूट चार्ट की समीक्षा: हर 15 दिन में पुलिस पेट्रोलिंग के रूट चार्ट की समीक्षा की जाए।
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    वाहनों की वृद्धि: जरूरत के अनुसार बेड़े में अतिरिक्त चार पहिया और दो पहिया वाहन शामिल किए जाएं ताकि संकरी गलियों में भी पुलिस तुरंत पहुंच सके।
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अग्निशमन सेवाएं: 'एक तहसील-एक फायर टेंडर' का लक्ष्य
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गर्मी के मौसम या औद्योगिक क्षेत्रों में आगजनी की घटनाओं से निपटने के लिए अग्निशमन एवं आपात सेवा (Fire and Emergency Services) की समीक्षा की गई। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 में विभाग ने करीब 42 हजार आग की घटनाओं पर सफलतापूर्वक काबू पाया और 10 हजार से अधिक आपात मामलों में त्वरित कार्रवाई की। इस उत्कृष्ट कार्यप्रणाली के चलते लगभग 800 करोड़ रुपए की बहुमूल्य संपत्ति जलने से बचाई गई।
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सीएम ने निर्देश दिए कि हर जिले में अत्याधुनिक 'हाइड्रोलिक फायर टेंडर' उपलब्ध कराए जाएं, ताकि ऊंची इमारतों में लगने वाली आग पर भी काबू पाया जा सके। इसके साथ ही 'एक तहसील-एक फायर टेंडर' के संकल्प को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
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साइबर क्राइम पर तगड़ा प्रहार: सुरक्षित कराए गए 425 करोड़ रुपए
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डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों (Cyber Crime) पर लगाम लगाने के लिए यूपी पुलिस तेजी से खुद को अपग्रेड कर रही है। साइबर क्राइम मुख्यालय की समीक्षा रिपोर्ट में बताया गया कि वर्ष 2025-26 में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ठगी के शिकार लोगों के 425.7 करोड़ रुपए सुरक्षित कराए हैं।
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    शिकायतें और कार्रवाई: कुल 3.91 लाख शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 3.14 लाख पर तत्काल कार्रवाई की गई।
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    डिवाइस ब्लॉकिंग: अपराध में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों पर सीधा प्रहार करते हुए 1.14 लाख IMEI नंबर ब्लॉक किए गए और 1.99 लाख अन्य डिवाइस पर कार्रवाई की गई। कुल 7287 मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई की गई।
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    साइबर हेल्पलाइन 1930: इस महत्वपूर्ण हेल्पलाइन की कॉल हैंडलिंग क्षमता को बढ़ाकर 1709 से 7467 कॉल प्रतिदिन कर दिया गया है। कुल कॉल्स में से करीब 59% मामलों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया है।
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    पुलिस ट्रेनिंग: तकनीक से निपटने के लिए 65,608 पुलिसकर्मियों को विशेष साइबर प्रशिक्षण दिया गया है और 84,705 प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं। सीएम ने साइबर अपराध के खिलाफ तकनीक आधारित और 'जीरो डिले' कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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भ्रष्टाचार पर 'जीरो टॉलरेंस' और जेल सुधार
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सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) की समीक्षा करते हुए बताया गया कि 414 लंबित जांचों में से 340 जांचों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने सरकारी महकमों में भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) नीति को दोहराते हुए ट्रैप और सर्च की कार्रवाइयों को और तेज करने के निर्देश दिए।
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वहीं, कारागार प्रशासन (Prison Administration) की कार्यप्रणाली को सुरक्षित और आधुनिक बनाने के लिए निर्देश दिए गए कि कैदियों की न्यायालय में पेशी के दौरान सुरक्षा जोखिमों को कम करने के लिए 'वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग' व्यवस्था को 100% सुनिश्चित किया जाए।
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आधुनिकीकरण, प्रशिक्षण और ऑपरेशन मुस्कान
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यूपी पुलिस को पेपरलेस बनाने की दिशा में पुलिस रेडियो विभाग द्वारा 75 में से 63 जिलों में ई-ऑफिस (e-Office) व्यवस्था लागू कर दी गई है। शेष जिलों में काम तेजी से जारी है। जल्द ही 936 प्रधान परिचालकों का प्रशिक्षण भी शुरू किया जाएगा।
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आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW) में सेंट्रल क्रैक टीम और केस मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से जांच को मजबूत किया जा रहा है। सीआईडी (CID) की विवेचना प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
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इन्फ्रास्ट्रक्चर और ट्रेनिंग: पुलिस आवास निगम ने 350 करोड़ रुपये की लागत से 142 निर्माण कार्य पूरे कर लिए हैं। अगले वित्तीय वर्ष (2026-27) में 226 और निर्माण कार्य पूरे करने का बड़ा लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा, प्रशिक्षण निदेशालय के अंतर्गत अब तक 60 हजार से अधिक पुलिस आरक्षियों (Constables) को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि 2026-27 में 4500 उपनिरीक्षकों (SI) का प्रशिक्षण प्रस्तावित है।
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ऑपरेशन मुस्कान: राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) ने मानवीय संवेदनाओं की मिसाल पेश करते हुए 'ऑपरेशन मुस्कान' (Operation Muskaan) के तहत 2325 खोए हुए बच्चों को उनके परिजनों से मिलाने का नेक काम किया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए तकनीकी निगरानी (CCTV और AI सर्विलांस) को और मजबूत करने के सख्त निर्देश दिए हैं। नागरिक सुरक्षा विभाग में भी सभी जिलों में इकाइयों का गठन कर 7500 स्वयंसेवकों की भर्ती की गई है, जो आपदा और आपातकाल में पुलिस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करेंगे।
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कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यह समीक्षा बैठक न केवल यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली में एक बड़ा तकनीकी और प्रशासनिक बदलाव लाने वाली है, बल्कि प्रदेश के उन लाखों बेरोजगार युवाओं के लिए भी एक 'स्वर्णिम अवसर' लेकर आई है, जो 81 हजार पदों की इस बंपर भर्ती (UP Police Recruitment 2026-27) के जरिए अपने सपनों को उड़ान देना चाहते हैं। युवाओं को अब बिना समय गंवाए अपनी शारीरिक और लिखित परीक्षा की तैयारी में पूरी ताकत के साथ जुट जाना चाहिए।
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