उत्तर प्रदेश के आसमान पर अब मानसून के घने और काले बादलों ने पूरी तरह से अपना डेरा जमा लिया है। भीषण और जानलेवा गर्मी से झुलस रहे प्रदेशवासियों को जहां एक ओर इस मानसूनी बारिश ने बड़ी राहत दी है, वहीं दूसरी ओर कई शहरों में इसने तबाही का मंजर भी पेश करना शुरू कर दिया है। बुधवार सुबह से ही मथुरा, गाजियाबाद, प्रयागराज, और मेरठ समेत प्रदेश के करीब 20 से अधिक प्रमुख शहरों में झमाझम और लगातार बारिश का दौर जारी है। बारिश की यह रफ्तार इतनी तेज है कि कुछ ही घंटों में कई शहरों का ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है।Read also:-गोल्ड मार्केट में तहलका: 30% तक धड़ाम हुआ सोना! क्या डूब जाएगा पैसा या यह है खरीदारी का 'गोल्डन चांस'?
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
मौसम विभाग ने इस अचानक बदले मौसम के मिजाज को देखते हुए उत्तर प्रदेश के 68 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी कर दिया है। प्रशासनिक अमले को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं, क्योंकि इन 68 जिलों में से 12 जिलों में बेहद भारी बारिश (Heavy Rainfall) की प्रबल संभावना जताई गई है। प्रदेश के ज्यादातर जिलों में इस समय घने बादल छाए हुए हैं और हल्की ठंडी हवाओं के चलने के बावजूद कुछ इलाकों में उमस का स्तर भी बढ़ गया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

हाथरस और मथुरा में बिगड़े हालात: कमर तक पानी, बहने लगे वाहन

\r\n\r\n
बारिश का सबसे भयानक और डरावना रूप हाथरस और मथुरा जिले में देखने को मिला है। हाथरस में चंद घंटों की मूसलाधार बारिश ने पूरे शहर को जलमग्न कर दिया है। शहर की मुख्य सड़कों से लेकर रिहायशी कॉलोनियों तक में कमर तक पानी भर गया है। जलभराव की स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि सड़कों पर पानी का बहाव किसी उफनती नदी जैसा लग रहा है। इस तेज बहाव की चपेट में आकर कई कारें और दोपहिया वाहन पानी में खिलौनों की तरह बहते हुए नजर आए। स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है और लोग अपने घरों में कैद होने को मजबूर हो गए हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
कमोबेश यही हाल मथुरा का भी रहा। मंगलवार को मथुरा में हुई भारी बारिश के कारण शहर के सभी छोटे-बड़े नाले ओवरफ्लो हो गए। गंदे पानी का सैलाब सड़कों पर आ गया। इसी दौरान एक बेहद खौफनाक घटना घटी जब एक डिलीवरी बॉय अपनी बाइक समेत उफनाते नाले के तेज बहाव में बहने लगा। गनीमत यह रही कि वहां मौजूद स्थानीय लोगों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए अपनी जान पर खेलकर उस युवक को बाइक समेत बाहर खींच लिया, अन्यथा एक बड़ा और दर्दनाक हादसा हो सकता था।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

मेरठ: मानसून ने खोली दावों की पोल, जलभराव से हाहाकार

\r\n\r\n
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर मेरठ में भी मानसून ने नगर निगम के उन तमाम दावों की कलई खोल कर रख दी है, जिनमें मानसून से पहले नालों की सफाई और ड्रेनेज व्यवस्था को दुरुस्त करने की बात कही गई थी। मंगलवार को मेरठ में लगातार छह घंटे तक हुई मूसलाधार बारिश ने पूरे शहर को एक कृत्रिम झील में तब्दील कर दिया। शहर के कई पॉश इलाकों से लेकर निचले इलाकों तक में भारी जलभराव की समस्या पैदा हो गई। ओवरफ्लो होते नालों के कारण लोगों का घरों से निकलना मुहाल हो गया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इसी बीच, मेरठ के टीपी नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दिल्ली रोड स्थित मेवला पुल के नीचे एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। यहां एक उफनाते नाले में मनोज नाम का एक डिलीवरी बॉय अपनी बाइक के साथ अचानक गिर गया। पानी का बहाव तेज था और नाला पूरी तरह से भरा हुआ था। मनोज ने किसी तरह अपनी सूझबूझ और हिम्मत से खुद को संभाला और नाले से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। घटना की सूचना मिलते ही टीपी नगर थाना पुलिस और नगर निगम की रेस्क्यू टीम तुरंत मौके पर पहुंची, लेकिन घंटों की मशक्कत के बाद भी युवक की बाइक का कोई सुराग नहीं लग सका।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
मेरठ में ही बारिश के कारण एक और बड़ा हादसा भावनपुर थाना क्षेत्र के छिलोरा गांव में हुआ। यहां लगातार हो रही बारिश की वजह से एक कच्चे-पक्के मकान की छत पर भारी मात्रा में पानी जमा हो गया था। पानी के दबाव और सीलन के कारण बुधवार सुबह मकान की छत भरभराकर नीचे गिर पड़ी। राहत की बात यह रही कि जिस वक्त यह हादसा हुआ, उस समय घर में सो रही महिला छत गिरने वाले स्थान से कुछ ही दूरी पर थी। चंद कदमों के फासले ने उस महिला की जान बचा ली, हालांकि घर का काफी सामान मलबे में दबकर नष्ट हो गया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

सहारनपुर और गाजियाबाद में मौसम हुआ सुहावना

\r\n\r\n
एक तरफ जहां मेरठ और हाथरस जैसे जिलों में बारिश आफत बनकर बरसी है, वहीं गाजियाबाद और सहारनपुर के लोगों के लिए यह राहत की फुहारें लेकर आई है। गाजियाबाद में पिछले 24 घंटों से रुक-रुक कर हो रही बारिश ने लोगों को भीषण और जानलेवा गर्मी से बड़ी राहत दिलाई है। बुधवार तड़के से ही यहां हल्की बारिश का सिलसिला जारी है, जिसके कारण तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार, गाजियाबाद का तापमान 5 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क कर 30 डिग्री सेल्सियस पर आ गया है और 8 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ठंडी हवाएं चल रही हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
सहारनपुर में भी बुधवार सुबह से मौसम ने सुखद करवट ली है। सुबह करीब 7 बजे से आसमान में काली घटाएं छा गईं और हल्की बूंदाबांदी शुरू हो गई। इस बारिश ने शहरवासियों को उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत दी है। मौसम विभाग का अनुमान है कि सहारनपुर में बुधवार को अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रहेगा। दिनभर आसमान में बादल छाए रहेंगे और रुक-रुक कर बारिश का यह खुशनुमा दौर जारी रहने की पूरी उम्मीद है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

क्या कहते हैं मौसम वैज्ञानिक? बंगाल की खाड़ी से आ रहा है सिस्टम

\r\n\r\n
उत्तर प्रदेश में अचानक मानसून के इतने उग्र होने के पीछे के वैज्ञानिक कारणों को समझाते हुए मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने विस्तृत जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का एक बेहद मजबूत सिस्टम (Weather System) तैयार हुआ था। यह मानसूनी सिस्टम अब बंगाल की खाड़ी से आगे बढ़ते हुए मध्य प्रदेश और उसके आसपास के इलाकों तक पहुंच चुका है। इसी शक्तिशाली सिस्टम का सीधा और व्यापक असर उत्तर प्रदेश के मौसम पर पड़ रहा है, जिसकी वजह से मानसून ने अचानक इतनी जोर पकड़ ली है। मौसम विभाग के राडार और सैटेलाइट इमेजरी के अनुसार, अगले 5 दिनों तक उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का यह सिलसिला इसी तरह जारी रहेगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
आंकड़ों की बात करें तो, पिछले 24 घंटों में सबसे अधिक बारिश उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में दर्ज की गई है। सोनभद्र में 31 मिलीमीटर बारिश हुई है, जो कि इस अवधि के लिए निर्धारित सामान्य 10.5 मिलीमीटर बारिश से 195 प्रतिशत अधिक है। हालांकि, अगर इस पूरे मानसूनी सीजन की शुरुआत यानी 1 जून से लेकर अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें, तो प्रदेश में कुल मिलाकर 45 प्रतिशत कम बारिश हुई है। यह भारी बारिश उस बड़े अंतर को पाटने का काम कर रही है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

इस साल कम बारिश की आशंका का क्या है असली कारण?

\r\n\r\n
जहां एक ओर अभी भारी बारिश हो रही है, वहीं मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के महानिदेशक डॉ. एम महापात्रा ने इस पूरे साल के मानसून को लेकर एक चिंताजनक संकेत भी दिया है। उनके अनुसार, इस साल वैश्विक मौसम पैटर्न में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रशांत महासागर में 'ला नीना' (La Niña) जैसी स्थितियां, जो आमतौर पर भारत में अच्छी बारिश लाती हैं, अब खत्म हो रही हैं और यह पैटर्न 'अल नीनो' (El Niño) की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
अल नीनो की स्थिति भारतीय उपमहाद्वीप में कम वर्षा का मुख्य कारण मानी जाती है। इसका सीधा अर्थ यह है कि इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के अपने सामान्य स्तर से कमजोर रहने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं। इसके अतिरिक्त, इस वर्ष जनवरी से मार्च के बीच उत्तरी गोलार्ध (Northern Hemisphere) में बर्फबारी भी सामान्य से काफी कम हुई है। यह कम बर्फबारी भी सीधे तौर पर मानसूनी हवाओं की गति और उनकी नमी सोखने की क्षमता को प्रभावित करती है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
अगर हम पिछले साल यानी 2025 के मानसून सीजन (जून से सितंबर) के आंकड़ों की तुलना इस साल से करें, तो तस्वीर और साफ हो जाती है। पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश में औसतन 870 से 900 मिलीमीटर तक बेहतरीन बारिश दर्ज की गई थी, जो कि राज्य के सामान्य मानसूनी औसत से लगभग 10 से 15 प्रतिशत अधिक थी। लेकिन इस साल अल नीनो के प्रभाव के चलते किसानों और आम लोगों को मौसम के इस अजीबोगरीब उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है, जहां कभी अचानक सूखा तो कभी अचानक बाढ़ जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें