उत्तर प्रदेश की राजनीति ने अपना एक ऐसा चमकता हुआ सितारा खो दिया है, जिसने छात्र राजनीति की दहलीज से कदम रखकर प्रदेश के सत्ता शिखर तक का सफर अपने संघर्ष और अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता के दम पर तय किया था। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के कद्दावर नेता, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री रहे श्री अरुण कुमार सिंह 'मुन्ना' जी के आकस्मिक निधन से पूरे प्रदेश में शोक का माहौल है। उनके निधन का समाचार मिलते ही उनके समर्थकों, पुराने मित्रों और राजनीतिक सहयोगियों में भारी निराशा छा गई।READ ALSO:-हाहाकार के बाद बैकफुट पर यूपी सरकार: पुराने स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने पर लगी तत्काल रोक, 75 लाख उपभोक्ताओं को '45 दिन का अभयदान'; जानिए अपना मीटर बदलवाने का पूरा प्रोसेस
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इसी कड़ी में, 21 अप्रैल 2026 को मेरठ महानगर में उनके सम्मान और स्मृति में एक विशेष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। यह सभा जिला सहकारी बैंक, मेरठ के पूर्व चेयरमैन स्व० श्री धर्म दिवाकर जी के पी.एल. शर्मा रोड स्थित निज आवास पर आयोजित की गई। इस सभा में मेरठ और आसपास के क्षेत्रों से आए कई प्रमुख राजनेताओं, समाजसेवियों, किसान नेताओं और उनके पुराने साथियों ने शिरकत की। सभी ने नम आंखों से अपने प्रिय नेता 'मुन्ना भैया' को पुष्पांजलि अर्पित की और उनके साथ बिताए गए सुनहरे पलों को साझा किया।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय: समाजवादी गढ़ को भेदकर लहराया था NSUI का परचम
\r\n\r\nश्रद्धांजलि सभा को मुख्य रूप से संबोधित करते हुए मेरठ की खरखौदा विधानसभा के पूर्व विधायक श्री राजेन्द्र शर्मा जी ने अरुण कुमार सिंह 'मुन्ना' जी के शानदार राजनीतिक जीवन और उनके व्यक्तिगत संबंधों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
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70 के दशक का दौर उत्तर प्रदेश की राजनीति, विशेषकर छात्र राजनीति के लिए एक स्वर्ण काल माना जाता है। उस समय अरुण कुमार सिंह छात्रों के बीच अपने उपनाम "मुन्ना" के नाम से बेहद लोकप्रिय थे। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (Allahabad University) उस दौर में देश की राजनीति की नर्सरी हुआ करता था, और वहां छात्र संघ के चुनाव किसी विधानसभा चुनाव से कम नहीं होते थे।
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राजेन्द्र शर्मा जी ने पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताया कि उस समय इलाहाबाद विश्वविद्यालय 'समाजवादी युवजन सभा' का एक बेहद मजबूत और अभेद्य किला माना जाता था। समाजवादी विचारधारा के दिग्गज छात्र नेता जैसे श्री श्यामकिशन पाण्डेय, श्री सतीश अग्रवाल और श्री मोहन सिंह का वहां डंका बजता था। समाजवादी युवजन सभा ने लगातार 12 वर्षों तक विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनावों में एकतरफा जीत दर्ज कर एक छत्र राज स्थापित कर लिया था।
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ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में श्री अरुण कुमार सिंह "मुन्ना" ने कांग्रेस के छात्र संगठन की कमान संभाली। अपनी अद्भुत नेतृत्व क्षमता, ओजस्वी भाषण शैली और छात्रों के बीच जमीनी पकड़ के बल पर उन्होंने पहले छात्र संघ के उपाध्यक्ष (Vice President) का चुनाव जीता और उसके कुछ समय बाद, उसी समाजवादी गढ़ को ढहाते हुए वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र-संघ के अध्यक्ष (President) चुने गए। वह विश्वविद्यालय के इतिहास में कांग्रेस समर्थित प्रथम अध्यक्ष थे। इस ऐतिहासिक जीत ने उन्हें रातों-रात उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक कद्दावर युवा चेहरे के रूप में स्थापित कर दिया।
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गांधी परिवार के करीबी और यूपी सरकार में मंत्री पद का शानदार सफर
\r\n\r\nछात्र राजनीति की इस अपार सफलता के बाद, मुन्ना जी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने तत्कालीन दिग्गज मुख्यमंत्रियों श्री हेमवती नन्दन बहुगुणा जी और श्री नारायण दत्त तिवारी जी के कार्यकाल में 'नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इण्डिया' (NSUI) की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी।
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राजेन्द्र शर्मा जी ने बताया कि श्री अरुण कुमार सिंह "मुन्ना" जी की संगठनात्मक क्षमता और वफादारी के कारण उनके देश की पूर्व प्रधानमंत्री स्व० श्रीमती इन्दिरा गांधी जी और स्व० श्री राजीव गांधी जी से बेहद करीबी और आत्मीय संबंध बन गए थे। गांधी परिवार का उन पर पूरा भरोसा था। इसी भरोसे के चलते वर्ष 1978 से 1980 तक मुन्ना जी ने उत्तर प्रदेश में युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष (UP Youth Congress President) के रूप में कार्य किया और संगठन को नई ऊर्जा दी।
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उनके इस समर्पण का परिणाम यह रहा कि 1980 से 1989 तक के पूरे दशक में, जब उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का सुनहरा दौर था, मुन्ना जी राज्य सरकार में एक शक्तिशाली कैबिनेट मंत्री रहे। उन्होंने माननीय वीरबहादुर सिंह जी, श्री वी.पी. सिंह जी (विश्वनाथ प्रताप सिंह) और श्री नारायण दत्त तिवारी जी के मुख्यमंत्री कार्यकाल में उत्तर प्रदेश के मंत्रिमंडल में अपनी सेवाएं दीं। इस दौरान उन्होंने पशुधन एवं सहकारिता मंत्री (Minister of Animal Husbandry and Cooperatives) के रूप में कई ऐतिहासिक और जन-कल्याणकारी फैसले लिए, जिनका लाभ आज भी प्रदेश के किसानों और पशुपालकों को मिल रहा है।
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राजेन्द्र शर्मा जी के साथ व्यक्तिगत संबंध और कांग्रेस संगठन का दौर
\r\n\r\nपूर्व विधायक राजेन्द्र शर्मा जी ने रुंधे हुए गले से अपने और मुन्ना जी के बीच के प्रगाढ़ व्यक्तिगत संबंधों का स्मरण किया। उन्होंने बताया, "मुझे आज भी वो दिन स्पष्ट रूप से स्मरण है कि श्री अरुण कुमार सिंह 'मुन्ना' जी से मेरा प्रथम परिचय स्वर्गीय श्री अमरीश कुमार शर्मा जी के माध्यम से हुआ था। वह पहली मुलाकात जल्द ही एक गहरे पारिवारिक और राजनीतिक रिश्ते में बदल गई और हमारे संबंध समय के साथ निरंतर प्रगाढ़ होते चले गए।"
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राजेन्द्र शर्मा जी ने कांग्रेस संगठन के उन दिनों को याद किया जब उत्तर प्रदेश में पार्टी अपने चरम पर थी। उन्होंने कहा, "यह मेरा परम सौभाग्य रहा कि जब श्री अरुण कुमार सिंह 'मुन्ना' जी प्रदेश में कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष थे, तब मैं युवा कांग्रेस और मुख्य कांग्रेस संगठन में महामंत्री के पद पर आसीन था। हमने साथ मिलकर प्रदेश भर में अनगिनत दौरे किए, रैलियां कीं और पार्टी के आधार को मजबूत करने का काम किया। उनका मार्गदर्शन एक बड़े भाई की तरह हमेशा मेरे साथ रहा।"
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मेरठ का विकास: मुन्ना जी की वो 'चिरस्मरणीय देन' जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता
\r\n\r\nअरुण कुमार सिंह 'मुन्ना' जी भले ही प्रदेश स्तर के नेता थे, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश, और विशेष रूप से मेरठ के प्रति उनका लगाव और उनका योगदान अद्वितीय रहा है। मेरठ आज भी उनके द्वारा किए गए विकास कार्यों का ऋणी है।
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राजेन्द्र शर्मा जी ने उनके सहकारिता मंत्री रहते हुए मेरठ में हुए बड़े बदलावों का जिक्र किया। उस दौर में मेरठ जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष पंडित धर्म दिवाकर जी हुआ करते थे (जिनके आवास पर यह शोक सभा आयोजित हुई)।
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राजेन्द्र शर्मा जी ने बताया कि, "सौभाग्य से मैं उस समय खरखौदा विधानसभा क्षेत्र से विधायक था। किसानों की समस्याओं को देखते हुए हम लोगों (मेरे और पं. धर्म दिवाकर जी) ने तत्कालीन सहकारिता मंत्री मुन्ना जी से कुछ मांगें की थीं। उन्होंने बिना किसी देरी के, हमारे निवेदन को स्वीकार करते हुए मेरठ के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की उपज को सुरक्षित रखने के लिए तीन बड़े शीत गृह (Cold Storages) स्वीकृत किए। ये कोल्ड स्टोरेज खरखौदा, सरावनी एवं पावती गांवों में स्थापित किए गए थे। हालांकि, यह हमारे लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद है कि रखरखाव के अभाव में आज वे तीनों शीत गृह बंद पड़े हैं।"
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सहकारी बैंक की शाखाओं का विस्तार: किसानों और आम आदमी को बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ने के लिए मुन्ना जी ने सहकारिता विभाग के खजाने मेरठ के लिए खोल दिए थे। उनके ही मंत्री कार्यकाल में और उनके विशेष प्रयासों से मेरठ जिले (और उस समय के अविभाजित मेरठ) के दौराला, जानी, मुरादनगर (अब गाजियाबाद) और बागपत में सहकारी बैंक की नई शाखाएं स्थापित की गई थीं। इन शाखाओं ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में एक बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी।
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1985 का विधानसभा चुनाव: जब मुन्ना जी ने एक सप्ताह तक खरखौदा के गांव-गांव की खाक छानी
\r\n\r\nमुन्ना जी के विशाल हृदय और अपने मित्रों के प्रति उनकी निष्ठा का एक सबसे बड़ा उदाहरण 1985 का विधानसभा चुनाव था। राजेन्द्र शर्मा जी ने एक भावुक वाकया साझा करते हुए कहा, "श्री अरुण कुमार सिंह 'मुन्ना' जी को मेरठ की मिट्टी और यहां के लोगों से गहरा लगाव था। मेरे राजनीतिक करियर में उनका योगदान मैं कभी नहीं भूल सकता। 1985 के विधानसभा चुनाव के दौरान, जब मैं खरखौदा सीट से मैदान में था, तब एक कैबिनेट मंत्री होते हुए भी मुन्ना जी ने मेरे लिए अपना कीमती समय निकाला। उन्होंने पूरे एक सप्ताह तक खरखौदा विधानसभा के गांव-गांव, गली-गली का दौरा किया। उन्होंने मेरे लिए दिन-रात प्रचार किया, जिसका ही यह परिणाम था कि मुझे उस चुनाव में एक शानदार विजय प्राप्त हुई।"
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श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित प्रमुख हस्तियां और साथी
\r\n\r\nश्रद्धांजलि सभा के अंत में वहां उपस्थित सभी साथियों और गणमान्य व्यक्तियों ने मुन्ना जी की तस्वीर पर पुष्प अर्पित किए और दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। सभी ने एक स्वर में कहा कि मुन्ना जी जैसे बेदाग, संघर्षशील और जमीन से जुड़े नेता आज की राजनीति में विरले ही मिलते हैं।
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इस भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा में क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियों, कृषक नेताओं और पुराने सहयोगियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित साथी एवं मित्रगण उपस्थित रहे:
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- \r\n श्री अमित कुमार शर्मा, पूर्व सचिव, नानकचन्द महाविद्यालय, मेरठ।\r\n \r\n
- \r\n चौधरी जबर सिंह, पूर्व उपाध्यक्ष, जिला सहकारी बैंक, मेरठ।\r\n \r\n
- \r\n चौधरी हरेन्द्र सिंह, पूर्व अध्यक्ष, जिला सहकारी बैंक, मेरठ।\r\n \r\n
- \r\n श्री सतपाल सिंह यादव, पूर्व प्रधान, बुढ़सैनी।\r\n \r\n
- \r\n चौधरी जितेन्द्र सिंह, वरिष्ठ कृषक नेता।\r\n \r\n
- \r\n श्री विरेन्द्र पाल सिंह, जनता वैदिक कॉलिज, बड़ौत।\r\n \r\n
- \r\n श्री पुनीत शर्मा, महामंत्री, व्यापार संघ, बेगमपुल, मेरठ।\r\n \r\n
- \r\n श्री सौरभ दिवाकर एवं श्री गौरव दिवाकर (स्व. धर्म दिवाकर जी के सुपुत्र)।\r\n \r\n
- \r\n श्री दीपक तोमर, ग्राम समयपुर (पूर्व अध्यक्ष, सहकारी समिति)।\r\n \r\n
- \r\n श्री जितेन्द्र सिंह, भटीपुरा।\r\n \r\n
- \r\n श्री धर्मपाल त्यागी, पूर्व चैयरमैन सहकारी समिति, खरखौदा।\r\n \r\n
- \r\n श्री किशोर त्यागी, पूर्व सदस्य, जिला पंचायत, माछरा।\r\n \r\n
- \r\n श्री राजकुमार त्यागी, पूर्व प्रमुख, सरधना।\r\n \r\n
- \r\n ठाकुर रणजीत सिंह, पूर्व प्रबंधक, इण्टर कॉलिज, सलावा।\r\n \r\n
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श्री अरुण कुमार सिंह 'मुन्ना' जी का जाना उत्तर प्रदेश की राजनीति के एक सुनहरे और संघर्षशील अध्याय का अंत है। उनका जीवन, छात्रों के हकों की लड़ाई से लेकर किसानों की सहकारिता तक, हमेशा जनसेवा को समर्पित रहा। मेरठ का यह शहर उनके द्वारा दिए गए योगदान—चाहे वह कोल्ड स्टोरेज हों या सहकारी बैंक की शाखाएं—के लिए सदैव उनका ऋणी रहेगा। उनकी स्मृतियां उनके समर्थकों और चाहने वालों के दिलों में हमेशा जीवित रहेंगी।
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