लखनऊ, 22 सितंबर, 2025: उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने सार्वजनिक स्थानों और पुलिस रिकॉर्ड से जातिगत भेदभाव को खत्म करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद, अब पुलिस रिकॉर्ड और सार्वजनिक स्थलों पर नाम के साथ जाति का उल्लेख करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। जाति-आधारित रैलियों पर भी रोक रहेगी।READ ALSO:-"बेटियां नशा छोड़ें, वरना बच्चों को क्या सिखाएंगी?" - CCSU मेरठ समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का कड़ा संदेश
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अखिलेश यादव ने पूछे पांच सवाल
\r\n\r\nयोगी सरकार के इस फैसले पर पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट के जरिए सरकार से पांच सवाल पूछे, जो इस प्रकार हैं:
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- \r\n "5000 सालों से मन में बसे जातिगत भेदभाव को दूर करने के लिए क्या किया जाएगा?"\r\n \r\n
- \r\n "वस्त्र, वेशभूषा और प्रतीक चिन्हों के माध्यम से जाति-प्रदर्शन से उपजे जातिगत भेदभाव को मिटाने के लिए क्या किया जाएगा?"\r\n \r\n
- \r\n "किसी के मिलने पर नाम से पहले ‘जाति’ पूछने की जातिगत भेदभाव की मानसिकता को ख़त्म करने के लिए क्या किया जाएगा?"\r\n \r\n
- \r\n "किसी का घर धुलवाने की जातिगत भेदभाव की सोच का अंत करने के लिए क्या उपाय किया जाएगा?"\r\n \r\n
- \r\n "किसी पर झूठे और अपमानजनक आरोप लगाकर बदनाम करने के जातिगत भेदभाव से भरी साज़िशों को समाप्त करने के लिए क्या किया जाएगा?"\r\n \r\n
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क्या है योगी सरकार का नया निर्देश?
\r\n\r\nकार्यवाहक मुख्य सचिव दीपक कुमार ने सभी वरिष्ठ अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं। इन निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि:
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- \r\n FIR और गिरफ्तारी मेमो में आरोपी की जाति नहीं लिखी जाएगी, बल्कि केवल माता-पिता के नाम लिखे जाएंगे।\r\n \r\n
- \r\n 2023 के एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि पुलिस थानों में लगे नोटिस बोर्ड पर भी आरोपियों के नाम के साथ जाति का जिक्र न हो।\r\n \r\n
- \r\n सभी साइनबोर्ड या घोषणाएं, जो किसी क्षेत्र या संपत्ति को जाति विशेष से जोड़ती हैं, उन्हें तुरंत हटाया जाएगा। भविष्य में ऐसे बोर्ड दोबारा न लगें, इसके लिए औपचारिक नियम बनाए जाएंगे।\r\n \r\n
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सरकार का यह कदम समाज में समानता और संवैधानिक मूल्यों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है, जबकि विपक्ष इसे केवल सतही बदलाव मान रहा है और असली भेदभाव को खत्म करने के लिए ठोस कदमों की मांग कर रहा है।
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Sabse pehle comment karne wale banein.