लखनऊ (खबरीलाल क्राइम इन्वेस्टिगेशन डेस्क): उत्तर प्रदेश में एक बार फिर आतंकियों ने अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देने की खौफनाक साजिश रची थी, लेकिन उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधी दस्ते (UP ATS) की पैनी नजर और अचूक रणनीति ने समय रहते इस बड़ी तबाही को टाल दिया है। यूपी एटीएस ने एक ऐसे बेहद खतरनाक और हाई-टेक आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है, जिसकी जड़ें तो मेरठ और नोएडा में थीं, लेकिन उसका पूरा कंट्रोल रूम सात समंदर पार दुबई (Dubai) में बैठकर चलाया जा रहा था।READ ALSO:-यूपी में मौसम का रौद्र रूप: आंधी-बारिश और ओलावृष्टि से 13 की मौत; मेरठ, बिजनौर और गाजियाबाद समेत पश्चिमी यूपी में अलर्ट
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दुबई में बैठा मास्टरमाइंड आकिब पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (ISI) और वहां के खूंखार हैंडलर्स के इशारे पर भारत में तबाही का रिमोट कंट्रोल दबाने की तैयारी में था। लेकिन इससे पहले कि 'मौत का खेल' शुरू होता, एटीएस ने लखनऊ रेलवे स्टेशन को बम से उड़ाने जा रहे 4 आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया। 'खबरीलाल' की इस विस्तृत और एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में आइए सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं कि आखिर कैसे रची गई थी यूपी को खून से नहलाने की यह अंतरराष्ट्रीय साजिश।
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दुबई की ऐशगाह में बैठा मास्टरमाइंड आकिब और उसका खौफनाक प्लान
\r\n\r\nजांच एजेंसियों के रडार पर आया आकिब, मूल रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ का रहने वाला है। वह पिछले काफी लंबे समय से दुबई में छिपा बैठा है और वहां से भारत विरोधी गतिविधियों का एक मजबूत सिंडिकेट चला रहा है। एटीएस की जांच में यह साफ हो गया है कि आकिब का मुख्य काम भारत के भटके हुए युवाओं की 'ब्रेनवॉशिंग' (Brainwashing) करना, उनके अंदर कट्टरपंथ का जहर घोलना और फिर उन्हें स्लीपर सेल या आतंकी मॉड्यूल के रूप में तैयार करना है।
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आकिब इन युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए सीधे पाकिस्तानी आतंकी आकाओं (Handlers) के संपर्क में लाता था। सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि आकिब एक-दो नहीं, बल्कि कई ऐसे छोटे-छोटे आतंकी मॉड्यूल (Terror Modules) तैयार कर चुका है, जिनका एकमात्र लक्ष्य भारत में विद्रोह भड़काना और सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ना है। आकिब के सोशल मीडिया अकाउंट्स (जैसे इंस्टाग्राम और टेलीग्राम) पर एके-47 (AK-47) और अन्य अत्याधुनिक भारी हथियारों के साथ उसकी कई तस्वीरें वायरल हैं। इन्हीं तस्वीरों ने एटीएस के शक को यकीन में बदला और इस बड़े ऑपरेशन की नींव रखी गई।
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'डेविल' गैंग का पर्दाफाश: सोशल मीडिया बना आतंकियों का नया हथियार
\r\n\r\nएडीजी कानून-व्यवस्था (ADG Law and Order) और यूपी एटीएस के प्रमुख अमिताभ यश ने इस पूरे ऑपरेशन का खुलासा करते हुए बताया कि हमारी टीम ने चार बेहद खतरनाक आतंकियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम हैं:
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- \r\n साकिब उर्फ डेविल (निवासी: मेरठ)\r\n \r\n
- \r\n अरबाब (निवासी: मेरठ)\r\n \r\n
- \r\n विकास उर्फ रौनक (निवासी: गौतमबुद्धनगर / नोएडा)\r\n \r\n
- \r\n लोकेश उर्फ पपला पंडित (निवासी: गौतमबुद्धनगर / नोएडा)\r\n \r\n
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इस मॉड्यूल का सबसे खतरनाक मोहरा साकिब था, जो खुद को 'डेविल' (Devil) कहलवाना पसंद करता था। दुबई में बैठे आकिब ने इंस्टाग्राम और टेलीग्राम के जरिए साकिब 'डेविल' की सीधी बातचीत पाकिस्तानी हैंडलर्स से करवाई। इसके बाद साकिब ने अरबाब, विकास और लोकेश को अपने साथ जोड़ा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल चैट को एन्क्रिप्ट (Encrypt) रखने और जांच एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए किया जा रहा था।
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लखनऊ रेलवे स्टेशन पर 'रक्तपात' की थी पूरी तैयारी
\r\n\r\nइस आतंकी मॉड्यूल का सबसे पहला और बड़ा टारगेट उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ थी। गिरफ्तार किए गए चारों आतंकी साकिब, अरबाब, विकास और लोकेश भारी मात्रा में विस्फोटक लेकर लखनऊ रेलवे स्टेशन (Lucknow Railway Station) पर एक बड़ा ब्लास्ट करने के इरादे से पहुंचे थे। लखनऊ रेलवे स्टेशन हर समय हजारों यात्रियों की भीड़ से खचाखच भरा रहता है। आतंकियों की साजिश थी कि स्टेशन पर धमाका करके ज्यादा से ज्यादा बेगुनाह लोगों की जान ली जाए और पूरे देश में खौफ का माहौल पैदा किया जाए। लेकिन एटीएस की इंटेलिजेंस यूनिट ने सटीक इनपुट के आधार पर जाल बिछाया और गुरुवार को इन चारों को स्टेशन पर खून-खराबा करने से ठीक पहले धर दबोचा। अगर एटीएस चंद मिनटों की भी देरी करती, तो शायद आज पूरा देश एक बड़े मातम में डूबा होता।
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रक्षा प्रतिष्ठान और हिंदुत्ववादी नेता थे राडार पर: रेकी का खौफनाक सच
\r\n\r\nएटीएस की पूछताछ में जो खुलासे हुए हैं, उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। इस मॉड्यूल का काम सिर्फ एक धमाका करना नहीं था, बल्कि यह एक लंबी और गहरी साजिश का हिस्सा थे।
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- \r\n सेना के कैंट इलाकों की रेकी: आरोपियों ने कुबूल किया है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश के कई अति-संवेदनशील और महत्वपूर्ण रक्षा प्रतिष्ठानों (Defense Establishments) और सैन्य छावनी (Cantt) इलाकों की गुपचुप तरीके से रेकी (Reckee) की थी। उन्होंने इन सैन्य क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था, एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स और जवानों की मूवमेंट के वीडियो बनाकर पाकिस्तानी आकाओं को भेजे थे।\r\n \r\n
- \r\n हिंदुत्ववादी नेताओं की 'हिट लिस्ट': रक्षा प्रतिष्ठानों के अलावा, प्रदेश के कई प्रमुख और फायरब्रांड हिंदुत्ववादी नेता भी इनके सीधे निशाने पर थे। इन आतंकियों ने उन नेताओं के घरों, उनके आने-जाने के रास्तों (रूट्स), उनकी दिनचर्या और उनकी सुरक्षा में लगे गार्ड्स की पूरी डिटेल जुटाई थी।\r\n \r\n
- \r\n पैसे का खेल: यह सब मुफ्त में नहीं हो रहा था। पाकिस्तानी हैंडलर्स साकिब 'डेविल' को टेलीग्राम या व्हाट्सएप पर किसी खास जगह की 'गूगल लोकेशन' (Google Location) भेजते थे। साकिब अपने गुर्गों के साथ वहां पहुंचता, एचडी क्वालिटी में वहां के चप्पे-चप्पे का वीडियो रिकॉर्ड करता और उसे वापस पाकिस्तान भेज देता। हर एक सटीक वीडियो और जानकारी के बदले दुबई और पाकिस्तान के रूट से साकिब के खातों में भारी-भरकम 'फंडिंग' (पैसे) ट्रांसफर की जाती थी।\r\n \r\n
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तबाही का 'ट्रेलर': सिग्नल बॉक्स और सिलेंडर ब्लास्ट की साजिश
\r\n\r\nयह आतंकी मॉड्यूल सिर्फ बड़े धमाकों की फिराक में ही नहीं था, बल्कि देश के अंदरूनी सिस्टम को पंगु बनाने के लिए छोटी-छोटी लेकिन घातक आगजनी (Arson) की घटनाओं को भी अंजाम दे रहा था। एटीएस को आरोपियों के मोबाइल फोन से कई ऐसे खौफनाक वीडियो बरामद हुए हैं, जिनमें वे अलग-अलग शहरों में आगजनी की घटनाओं को अंजाम देते दिख रहे हैं। इनकी साजिश रेलवे के सिग्नल बॉक्स में आग लगाकर बड़े ट्रेन हादसों (Train Derailment) को अंजाम देने की थी। इसके अलावा, गैस सिलेंडरों से भरे ट्रकों और वाहनों में विस्फोट करके रिहायशी इलाकों में तबाही मचाने का भी प्लान था। इन छोटी वारदातों के जरिए वे 'बड़े गेम' के लिए अपना खौफ कायम कर रहे थे।
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5 दिन की पुलिस रिमांड: अब उगलवाए जाएंगे 'स्लीपर सेल' के गहरे राज
\r\n\r\nएटीएस ने शनिवार को भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच चारों खूंखार आरोपियों (साकिब, अरबाब, विकास और लोकेश) को अदालत (Court) में पेश किया। मामले की गंभीरता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को देखते हुए, एटीएस ने अदालत से आरोपियों की लंबी रिमांड की मांग की। अदालत ने एटीएस की दलीलों को स्वीकार करते हुए चारों आतंकियों को 5 दिन की पुलिस रिमांड (Police Remand) पर भेज दिया है। अब एटीएस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) इन चारों से 'थर्ड डिग्री' और मनोवैज्ञानिक तरीके से गहन पूछताछ कर रही है।
\r\n\r\nएटीएस के सामने अब कई बड़े सवाल हैं, जिनके जवाब तलाशे जा रहे हैं:
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- \r\n इस मॉड्यूल में यूपी के अन्य किन जिलों के युवा शामिल हैं?\r\n \r\n
- \r\n आकिब के अलावा पाकिस्तान में बैठे वो कौन से बड़े चेहरे हैं, जो इन्हें सीधे निर्देश दे रहे थे?\r\n \r\n
- \r\n इनके पास जो फंडिंग आ रही थी, उसका हवाला रूट (Hawala Route) क्या था?\r\n \r\n
- \r\n लखनऊ के अलावा और कौन से शहर इनके अगले टारगेट पर थे?\r\n \r\n
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खबरीलाल का निष्कर्ष: एटीएस की मुस्तैदी ने बचाया यूपी को
\r\n\r\nयूपी एटीएस की इस त्वरित और सर्जिकल स्ट्राइक जैसी कार्रवाई ने यकीनन एक बहुत बड़े आतंकी हमले की साजिश को समय रहते दफन कर दिया है। जांच एजेंसी अब दुबई में सुरक्षित पनाहगाह बनाकर बैठे मास्टरमाइंड आकिब तक पहुंचने और उसे भारत प्रत्यर्पित (Extradite) कराने की कानूनी प्रक्रिया में जुट गई है।
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यह पूरी घटना इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और उसके पाले हुए आतंकी संगठन अब सीधे बॉर्डर पार करने के बजाय, दुबई जैसे तीसरे देशों का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे सोशल मीडिया के 'डार्क वेब' और एन्क्रिप्टेड ऐप्स को अपना हथियार बनाकर हमारे ही देश के युवाओं को हमारे खिलाफ इस्तेमाल कर रहे हैं। एटीएस की इस बड़ी कामयाबी ने यह साबित कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर भी पूरी सख्ती से लागू है।
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(देश और प्रदेश की सुरक्षा से जुड़ी हर बड़ी खबर, क्राइम की एक्सक्लूसिव इनसाइड स्टोरी और एटीएस के इस ऑपरेशन के हर नए अपडेट के लिए लगातार पढ़ते रहें अपना भरोसेमंद न्यूज़ पोर्टल - खबरीलाल)
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