शनिवार देर रात देश की राजधानी दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट पर उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब रनवे पर दौड़ते एक अंतरराष्ट्रीय विमान में अचानक आग लग गई। दिल्ली से स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख जा रही स्विस एयरलाइंस (SWISS Airlines) की फ्लाइट के टेकऑफ करते ही उसका इंजन फेल हो गया। विमान में 4 मासूम नवजात बच्चों समेत कुल 232 लोग सवार थे। पायलट की सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई से एक बहुत बड़ी त्रासदी टल गई।READ ALSO:-यूपी में आसमानी आग: बांदा बना देश का सबसे गर्म शहर, सऊदी अरब को भी छोड़ा पीछे, 55 जिलों में लू का रेड अलर्ट जारी
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हवाई यात्रा को दुनिया के सबसे सुरक्षित यात्रा माध्यमों में से एक माना जाता है, लेकिन जब कोई तकनीकी खराबी आती है, तो वह क्षण यात्रियों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं होता। दिल्ली एयरपोर्ट पर शनिवार रात (रविवार तड़के) ऐसा ही एक खौफनाक मंजर देखने को मिला। आइए, इस पूरी घटना को विस्तार से जानते हैं कि आखिर रनवे पर उस रात क्या हुआ था और कैसे सैकड़ों जानें बचाई गईं।
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 एयरपोर्ट पर फायरकर्मियों ने विमान के लैंडिंग गियर में लगी आग को बुझाया।

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रात 1:08 बजे का वह खौफनाक पल: जब रनवे पर दौड़ी मौत

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शनिवार देर रात का समय था। दिल्ली का आईजीआई (IGI) एयरपोर्ट अपनी सामान्य व्यस्तता के साथ काम कर रहा था। स्विस एयरलाइंस की फ्लाइट संख्या LX147, जो कि एक भारी-भरकम एयरबस A330 (Airbus A330) विमान था, उड़ान भरने के लिए पूरी तरह तैयार थी। विमान में कुल 232 लोग सवार थे, जिनमें कई परिवार और 4 छोटे नवजात बच्चे भी शामिल थे। यात्री अपनी सीट बेल्ट बांध चुके थे और विमान ने रनवे पर रफ्तार पकड़ना शुरू कर दिया था।
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ठीक रात 1:08 बजे, जब विमान टेकऑफ स्पीड (V1 Speed) के करीब पहुंच रहा था, तभी अचानक एक जोरदार झटके और डरावनी आवाज के साथ विमान का एक इंजन फेल हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों और विमान के अंदर बैठे यात्रियों के अनुसार, कुछ ही सेकंड में इंजन और लैंडिंग गियर की तरफ से आग की लपटें और गहरा धुआं उठने लगा। केबिन के अंदर धुएं की गंध फैलते ही यात्रियों में दहशत फैल गई।
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 विमान से नीचे उतरने के दौरान भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।

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पायलट इन कमांड ने स्थिति की नजाकत को भांपते हुए तुरंत 'रिजेक्टेड टेकऑफ' (Rejected Takeoff) का फैसला लिया। विमान को पूरी ताकत से ब्रेक लगाकर रनवे पर ही रोक दिया गया। यह एक बेहद जोखिम भरा कदम होता है, लेकिन इसी त्वरित फैसले ने 232 लोगों की जिंदगी बचा ली।
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 विमान से पैंसजर्स को उतारने के लिए इमरजेंसी स्लाइड का इस्तेमाल किया गया।

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चीख-पुकार और इमरजेंसी इवैक्यूएशन: 6 यात्री हुए घायल

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विमान के रुकते ही क्रू मेंबर्स ने आपातकालीन प्रोटोकॉल (Emergency Protocol) लागू कर दिया। आग लगने की स्थिति में विमान को जल्द से जल्द खाली करना सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है। एविएशन नियमों के अनुसार, ऐसे हालात में पूरे विमान को 90 सेकंड के भीतर खाली करना होता है।
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विमान के दरवाजे खोले गए और इमरजेंसी स्लाइड (हवा से फूलने वाली फिसलपट्टी) को डिप्लॉय किया गया। रात के अंधेरे और आग के खौफ के बीच यात्रियों को स्लाइड के जरिए तेजी से नीचे उतारा जाने लगा। इस अफरा-तफरी और स्लाइड से तेजी से फिसलने के कारण 6 यात्री घायल हो गए। घायलों को तुरंत एयरपोर्ट की मेडिकल टीम द्वारा प्राथमिक उपचार दिया गया।
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सोचिए, उन माता-पिता की स्थिति क्या रही होगी जिनके हाथों में छोटे-छोटे नवजात बच्चे थे और उन्हें उस धधकते विमान से कूदकर अपनी जान बचानी थी। गनीमत यह रही कि सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और किसी भी तरह की कोई जनहानि नहीं हुई।
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स्विस एयरलाइंस (SWISS) का आधिकारिक बयान

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इस गंभीर घटना के बाद स्विस एयरलाइंस ने अपना आधिकारिक बयान जारी किया है। एयरलाइन प्रबंधन ने इस बात की पुष्टि की है कि खराबी एयरबस A330 विमान में आई थी।
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कंपनी के प्रवक्ता ने बताया, "हमें दिल्ली में फ्लाइट LX147 से जुड़ी इस आपातकालीन घटना के बारे में पूरी जानकारी मिली है। यह घटना भारतीय समयानुसार रात 1 बजे के बाद घटी। रिपोर्ट के अनुसार, जैसे ही विमान टेकऑफ करने के लिए रनवे पर तेजी से आगे बढ़ा, विमान के बाईं ओर के लैंडिंग गियर से अचानक धुआं निकलता हुआ देखा गया। इसके तुरंत बाद क्रू ने फ्लाइट को सुरक्षित रूप से रोक दिया।"
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एयरलाइन ने यात्रियों को हुई परेशानी पर खेद जताते हुए कहा, "हमारी स्थानीय टीमें (Ground Staff) मौके पर मौजूद हैं और सभी प्रभावित यात्रियों की पूरी देखभाल कर रही हैं। उनके रुकने और वैकल्पिक उड़ानों की व्यवस्था की जा रही है। हम भारत के स्थानीय उड्डयन अधिकारियों (DGCA) के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इस घटना के सटीक तकनीकी कारणों की गहराई से जांच करने के लिए हमारी एक विशेष टीम जल्द ही स्विट्जरलैंड से दिल्ली पहुंचेगी।"
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दिल्ली एयरपोर्ट पर 10 दिन के अंदर दूसरा बड़ा हादसा

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यह घटना सिर्फ एक विमान की तकनीकी खराबी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिल्ली एयरपोर्ट के सुरक्षा रिकॉर्ड पर भी सवाल खड़े करती है। पिछले मात्र 10 दिनों के भीतर इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर विमानों से जुड़ी यह दूसरी बड़ी घटना है, जिसने एविएशन सेक्टर की चिंता बढ़ा दी है।
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क्या हुआ था 16 अप्रैल को? इससे ठीक कुछ दिन पहले, 16 अप्रैल को दिल्ली एयरपोर्ट पर दो यात्री विमान आपस में टकरा गए थे। उस दिन अकासा एयर (Akasa Air) का विमान दिल्ली से हैदराबाद जाने के लिए टैक्सीवे पर तैयार खड़ा था। उसी दौरान, लेह से उड़ान भरकर दिल्ली पहुंचा स्पाइसजेट (SpiceJet) का विमान टैक्सी करते हुए अकासा के विमान के बेहद करीब आ गया।
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इस चूक के कारण स्पाइसजेट के दाहिने पंख (Right Wing) का हिस्सा, अकासा एयर के विमान के बाएं तरफ के पिछले पंख (Rear Wing) में जा घुसा। जोरदार टक्कर से दोनों विमानों को भारी नुकसान पहुंचा था। हालांकि, उस घटना में भी एयरपोर्ट स्टाफ की मुस्तैदी से दोनों विमानों में सवार सभी यात्रियों को सुरक्षित उतार लिया गया था और किसी यात्री को चोट नहीं आई थी।
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उड्डयन सुरक्षा (Aviation Safety) पर उठते सवाल

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लगातार हो रही ये घटनाएं नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और एयरपोर्ट अथॉरिटी के लिए एक बड़ा अलर्ट हैं। एक तरफ जहां ग्राउंड कंट्रोल और टैक्सीवे मैनेजमेंट में चूक (जैसे स्पाइसजेट-अकासा मामले में) देखने को मिली, वहीं अब एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान में टेकऑफ के वक्त इंजन फेलियर और लैंडिंग गियर में आग लगने की घटना सामने आई है।
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ऐसी घटनाएं यात्रियों के मन में हवाई यात्रा को लेकर एक डर पैदा करती हैं। विमानों का उचित मेंटेनेंस, रनवे की सुरक्षा और पायलटों की ट्रेनिंग—इन सभी पैमानों पर विमानन कंपनियों को और अधिक सख्ती बरतने की जरूरत है। फिलहाल, डीजीसीए (DGCA) ने स्विस एयरलाइंस की इस घटना को गंभीरता से लिया है और मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। ब्लैक बॉक्स (FDR और CVR) के डेटा का विश्लेषण करने के बाद ही साफ हो पाएगा कि यह मानवीय भूल थी, मेंटेनेंस की कमी थी, या कोई अप्रत्याशित तकनीकी खराबी।
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