उत्तर प्रदेश इस समय भीषण गर्मी और जानलेवा लू (Heatwave) की चपेट में है। अप्रैल के महीने में ही आसमान से आग बरस रही है। सूरज की तपिश और गर्म हवाओं ने लोगों का घर से निकलना मुहाल कर दिया है। हालात ये हैं कि सीजन में पहली बार पारे ने 47°C का खतरनाक आंकड़ा पार कर लिया है। सड़कों पर कर्फ्यू जैसा सन्नाटा है और इंसान से लेकर जानवर तक इस झुलसाने वाली गर्मी से बेहाल हैं।Read also:-बुलंदशहर में खूनी 'बर्थडे पार्टी': केक लगाने पर भड़का पूर्व बसपा नेता, जिम में बरसाईं अंधाधुंध गोलियां, BJP नेता के 3 रिश्तेदारों की दर्दनाक मौत
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मौसम विभाग (IMD) ने हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के 55 जिलों में लू का अलर्ट जारी किया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि आने वाले कुछ दिनों में मौसम करवट ले सकता है। आइए, विस्तार से जानते हैं उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों (यूपी वेस्ट और यूपी ईस्ट) के मौसम का हाल, बारिश का अलर्ट और इस साल मॉनसून पर मंडरा रहे अल-नीनो के खतरे के बारे में।
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बांदा में टूटा 4 साल का रिकॉर्ड, सऊदी और पाकिस्तान से भी ज्यादा गर्मी
\r\n\r\nपिछले 24 घंटों के आंकड़ों पर नजर डालें तो यूपी का बुंदेलखंड इलाका भट्टी की तरह तप रहा है। बांदा देश का सबसे गर्म शहर बन गया है। यहां गर्मी ने पिछले 4 साल का रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया है। बांदा में दिन का अधिकतम तापमान 47.4°C रिकॉर्ड किया गया। इससे पहले 30 अप्रैल 2022 को यहां पारा 47°C के पार गया था।
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हैरानी की बात यह है कि उत्तर प्रदेश का यह शहर सऊदी अरब और पाकिस्तान के सबसे गर्म माने जाने वाले इलाकों से भी ज्यादा तप रहा है। शनिवार को सऊदी अरब में तापमान 31°C और पाकिस्तान के जैकोबाबाद में 44°C दर्ज किया गया, जबकि बांदा इन सबसे कहीं आगे 47.4°C पर झुलस रहा था। शनिवार को देश के सबसे गर्म 41 शहरों की सूची जारी की गई, जिसमें से 14 शहर अकेले उत्तर प्रदेश के थे।
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शहरों का हाल: सड़कों पर सन्नाटा, चिड़ियाघर में जानवर बेहाल
\r\n\r\nरविवार को सुबह 8 बजे से ही तेज धूप और चुभन महसूस होने लगी थी। दफ्तरों और स्कूलों की छुट्टी होने के कारण दोपहर होते-होते शहरों की मुख्य सड़कों पर सन्नाटा पसर गया।
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- \r\n वाराणसी: पूर्वांचल के प्रमुख शहर वाराणसी में अप्रैल महीने में यह चौथी बार है जब दिन का तापमान 45°C तक पहुंच गया है। घाटों पर दोपहर के समय सन्नाटा पसरा है। इससे पहले 30 अप्रैल 2019 को यहां का अधिकतम तापमान 45.3°C रिकॉर्ड किया गया था।\r\n \r\n
- \r\n गोरखपुर: गर्मी का कहर सिर्फ इंसानों पर ही नहीं, बल्कि बेजुबान जानवरों पर भी टूट रहा है। गोरखपुर चिड़ियाघर में गर्मी से बेहाल भालू पानी के कुंड से बाहर निकलने का नाम नहीं ले रहा है। अन्य जानवरों को भी गर्मी से बचाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। कूलर और फव्वारों का सहारा लिया जा रहा है।\r\n \r\n
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यूपी वेस्ट और यूपी ईस्ट के शहरों का विस्तृत मौसम हाल
\r\n\r\nप्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में गर्मी का असर अलग-अलग रूप में देखा जा रहा है।
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यूपी वेस्ट (पश्चिमी उत्तर प्रदेश) का मौसम
\r\n\r\nपश्चिमी यूपी के इलाकों में सूखी गर्मी और तेज लू (Heatwave) का प्रकोप है।
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- \r\n मेरठ और एनसीआर: मेरठ, गाजियाबाद और नोएडा में सुबह से ही तेज धूप निकल रही है। मेरठ में वर्तमान तापमान 39°C से 42°C के बीच झूल रहा है। लू के थपेड़े लोगों को परेशान कर रहे हैं।\r\n \r\n
- \r\n आगरा और मथुरा: ताजनगरी आगरा में तापमान 44°C के पार बना हुआ है। पर्यटकों को दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने की सलाह दी जा रही है। मथुरा में भी गर्म हवाओं के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त है।\r\n \r\n
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यूपी ईस्ट (पूर्वी उत्तर प्रदेश) का मौसम
\r\n\r\nपूर्वी यूपी में उमस और चिलचिलाती धूप ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है।
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- \r\n प्रयागराज और कानपुर: ये दोनों शहर आग उगल रहे हैं। प्रयागराज में तापमान 45°C के पार है। कानपुर के औद्योगिक इलाकों में गर्मी के कारण मजदूरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।\r\n \r\n
- \r\n लखनऊ और बलिया: राजधानी लखनऊ में अधिकतम तापमान 43°C दर्ज किया गया है। वहीं बलिया और गाजीपुर जैसे सीमावर्ती जिलों में भीषण लू चल रही है। दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच सड़कें सुनसान नजर आती हैं।\r\n \r\n
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मौसम विभाग का अलर्ट: 'दोपहर में भूलकर भी न निकलें बाहर'
\r\n\r\nIMD ने प्रदेश के 55 जिलों में लू का अलर्ट जारी करते हुए एडवायजरी जारी की है। मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि दोपहर के वक्त ज्यादातर शहरों में तापमान 42°C से 45°C (कुछ जगहों पर 47°C तक) के बीच रहेगा।
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स्वास्थ्य विभाग और IMD की सख्त हिदायतें:
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- \r\n घर में रहें: दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच बेहद जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें।\r\n \r\n
- \r\n हाइड्रेशन: शरीर में पानी की कमी न होने दें। ज्यादा से ज्यादा पानी, नीबू पानी, छाछ और ओआरएस (ORS) का घोल पिएं।\r\n \r\n
- \r\n पहनावा: हल्के रंग के और ढीले सूती कपड़े पहनें। घर से बाहर निकलते समय सिर को तौलिया, गमछा या टोपी से जरूर ढकें। छाते का प्रयोग करें।\r\n \r\n
- \r\n लक्षणों पर ध्यान दें: चक्कर आना, तेज सिर दर्द, तेज बुखार, उल्टी, या कमजोरी महसूस होने पर तुरंत ठंडी जगह पर जाएं और बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें। बच्चों और बुजुर्गों की सेहत का विशेष ख्याल रखें।\r\n \r\n
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कब मिलेगी गर्मी से राहत? जानिए बारिश का पूर्वानुमान
\r\n\r\nलखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल सिंह ने भीषण गर्मी के बीच एक राहत भरी खबर दी है। सोमवार (27 अप्रैल) से एक नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय होने जा रहा है, जिससे मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। पारे में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जा सकती है।
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अगले 3 दिन के मौसम का पूर्वानुमान:
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- \r\n 27 अप्रैल: पश्चिमी यूपी के कई जिलों और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में तेज आंधी-तूफान के साथ बूंदाबांदी और हल्की बारिश हो सकती है। इससे तपिश से फौरी राहत मिलेगी।\r\n \r\n
- \r\n 28 अप्रैल: पूरे उत्तर प्रदेश में बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है। आसमान में बादल छाए रहेंगे और कई जगहों पर तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश होगी। आंधी-तूफान जैसे हालात बन सकते हैं।\r\n \r\n
- \r\n 29 अप्रैल: पश्चिमी यूपी में गरज-चमक के साथ बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। हालांकि, पूर्वी यूपी में आसमान साफ होने से गर्मी के तेवर फिर से तीखे हो सकते हैं। 1 मई तक मौसम में इसी तरह का उतार-चढ़ाव बना रहेगा।\r\n \r\n
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इस साल मॉनसून पर 'अल-नीनो' (El Nino) का साया
\r\n\r\nगर्मी से जूझ रहे लोगों की निगाहें अब मॉनसून पर टिकी हैं, लेकिन मौसम विभाग की भविष्यवाणी किसानों की चिंता बढ़ाने वाली है। मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. एम. महापात्रा के अनुसार, इस साल जून से सितंबर के बीच उत्तर प्रदेश समेत पूरे भारत में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है। इसका मुख्य कारण 'अल-नीनो' है।
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प्रशांत महासागर में 'ला नीना' (La Nina) की स्थितियां खत्म हो रही हैं और 'अल नीनो' के संकेत मजबूत हो रहे हैं। इसके अलावा, इस साल जनवरी-मार्च के दौरान उत्तरी गोलार्ध में बर्फबारी कम हुई है, जो दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की चाल को धीमा कर सकती है।
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क्या हैं अल-नीनो और ला-नीना? आसान भाषा में समझें
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- \r\n अल नीनो (El Nino): इस भौगोलिक घटना में प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है। इसका चक्र आमतौर पर 10 साल में दो बार आता है। भारत के लिए यह एक बुरी खबर होती है क्योंकि इसके प्रभाव से मॉनसून कमजोर पड़ जाता है। जिन क्षेत्रों में अच्छी बारिश होती है, वहां सूखा पड़ने लगता है और कम बारिश वाले इलाकों में बेमौसम भारी बारिश होने लगती है।\r\n \r\n
- \r\n ला नीना (La Nina): यह अल नीनो के बिल्कुल विपरीत है। इसमें समुद्र का पानी तेजी से ठंडा होता है। भारत के लिए ला नीना शुभ माना जाता है। इसके प्रभाव से देशभर में आसमान में घने बादल छाते हैं, अच्छी और भरपूर बारिश होती है, जो कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी का काम करती है। लेकिन इस साल, ला नीना विदा ले रहा है और अल नीनो का खतरा मंडरा रहा है।\r\n \r\n
Sabse pehle comment karne wale banein.