मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश पुलिस (UP Police) को कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने और अपराध पर लगाम कसने के लिए मंगलवार को 47 नए और ऊर्जावान उपनिरीक्षक (Sub-Inspectors/दरोगा) मिल गए हैं। पीतल नगरी के नाम से मशहूर मुरादाबाद स्थित प्रतिष्ठित डॉ. भीमराव आंबेडकर उत्तर प्रदेश पुलिस अकादमी (Dr. Bhimrao Ambedkar UP Police Academy) के ऐतिहासिक परेड ग्राउंड पर इन प्रशिक्षु दरोगाओं की शानदार पासिंग आउट परेड का आयोजन किया गया।READ ALSO:-मेरठ में बकरीद की तैयारियों पर महा-मंथन: शहर काजी ने की CM के आदेश की सराहना, लेकिन कांवड़ यात्रा का हवाला देकर मांगी '15 मिनट की नमाज' की मोहलत
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कदम-ताल करते हुए, खाकी वर्दी में सजे इन युवा अफसरों के चेहरों पर देश सेवा का जज्बा और एक साल की कड़ी मेहनत का संतोष साफ झलक रहा था। जैसे ही इन कैडेट्स ने परेड ग्राउंड पर तिरंगे और मुख्य अतिथि को सलामी दी, पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट और देशभक्ति की धुनों से गूंज उठा। इस दीक्षांत समारोह के साथ ही ये 47 प्रशिक्षु अब आधिकारिक रूप से नागरिक पुलिस के उपनिरीक्षक बन गए हैं।
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एक साल का कठोर प्रशिक्षण: 19 मई 2025 से शुरू हुआ था सफर
\r\n\r\nपुलिस की नौकरी केवल रौब की नहीं, बल्कि भारी जिम्मेदारी और अनुशासन की होती है। इस जिम्मेदारी को उठाने के लिए इन 47 कैडेट्स ने एक साल तक पसीना बहाया है। अकादमी के अधिकारियों के अनुसार, मृतक आश्रित (Deceased Dependents) कोटे और सीधी भर्ती (Direct Recruitment) के माध्यम से चुने गए इन कुल 47 उपनिरीक्षकों का आधारभूत प्रशिक्षण पिछले साल 19 मई 2025 को शुरू हुआ था।
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क्या-क्या सीखा इन नए दरोगाओं ने? एक साल के इस व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान इन प्रशिक्षुओं को केवल शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक और बौद्धिक रूप से भी मजबूत बनाया गया है।
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- \r\n शारीरिक सौष्ठव और हथियार प्रशिक्षण: सुबह की पीटी (Physical Training), लंबी दौड़, बाधा पार करना (Obstacle Course) और अत्याधुनिक हथियारों (जैसे इंसास, एके-47, और पिस्टल) को चलाने की सटीक ट्रेनिंग दी गई।\r\n \r\n
- \r\n कानूनी ज्ञान: पुलिसिंग की रीढ़ यानी कानून की पढ़ाई। इन कैडेट्स को देश में लागू हुए नए आपराधिक कानूनों—भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) का गहन अध्ययन कराया गया है।\r\n \r\n
- \r\n साइबर क्राइम और फोरेंसिक साइंस: बदलते वक्त के साथ अपराध के तरीके भी बदले हैं। इसलिए इन नए दरोगाओं को साइबर अपराधों की जांच, डिजिटल साक्ष्य जुटाने और फोरेंसिक साइंस की बारीकियों से भी अवगत कराया गया है।\r\n \r\n
- \r\n भीड़ नियंत्रण और मानवाधिकार: दंगा नियंत्रण, आंसू गैस का प्रयोग, और सबसे महत्वपूर्ण, ड्यूटी के दौरान मानवाधिकारों (Human Rights) का सम्मान करना सिखाया गया है।\r\n \r\n
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45 पुरुष और 2 महिला अफसरों ने बढ़ाई खाकी की शान
\r\n\r\nपासिंग आउट परेड में शामिल होने वाले इन 47 उपनिरीक्षकों के बैच में 45 पुरुष और 2 महिला उपनिरीक्षक शामिल हैं। महिला उपनिरीक्षकों की मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि आधी आबादी अब सुरक्षा बलों में भी कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है और समाज के लिए एक प्रेरणा बन रही है।
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इस बैच में मृतक आश्रित कोटे से आए वो युवा भी शामिल हैं, जिन्होंने अपने पिता या परिवार के सदस्य को खोने के दुख को अपनी ताकत बनाया और उसी पुलिस बल का हिस्सा बनकर अपने परिवार की विरासत और देश सेवा की परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है। पासिंग आउट परेड के दौरान दर्शक दीर्घा में बैठे इन युवा अफसरों के परिजनों की आंखें गर्व और खुशी के आंसुओं से नम थीं।
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"शपथ को हमेशा याद रखें": मुख्य अतिथि डीजी (ट्रेनिंग) राजीव सभरवाल का प्रेरक संबोधन
\r\n\r\nइस भव्य पासिंग आउट परेड की सलामी मुख्य अतिथि के रूप में पधारे पुलिस महानिदेशक (डीजी, ट्रेनिंग) श्री राजीव सभरवाल ने ली। खुली जीप में सवार होकर मुख्य अतिथि ने परेड का निरीक्षण किया और उसके बाद कैडेट्स के शानदार मार्च पास्ट की प्रशंसा की।
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अपने सारगर्भित और प्रेरक संबोधन में डीजी ट्रेनिंग राजीव सभरवाल ने पास आउट हो रहे सभी नए उपनिरीक्षकों और उनके परिजनों को बधाई दी। उन्होंने युवा दरोगाओं को पुलिसिंग के असली मायने समझाते हुए कहा:
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\r\n\r\n\r\n"अकादमी का यह सुरक्षित माहौल अब पीछे छूट गया है। असली परीक्षा अब फील्ड (कार्यक्षेत्र) में शुरू होगी। पुलिस की वर्दी आपको अधिकार देती है, लेकिन इसके साथ ही यह समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को न्याय दिलाने की बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी लाती है। फील्ड में जाकर पूरी ईमानदारी, निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ अपना काम करें। आज इस पवित्र परेड ग्राउंड पर तिरंगे के सामने आपने संविधान और कानून की रक्षा की जो शपथ ली है, उसे अपने पूरे सेवाकाल में एक मंत्र की तरह हमेशा याद रखें।"\r\n
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उन्होंने आगे कहा कि पुलिस की छवि जनता के बीच उसके व्यवहार से बनती है, इसलिए आम जनमानस के साथ मधुर व्यवहार रखें लेकिन अपराधियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने में कभी पीछे न हटें।
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आगे की राह: अब जनपदों में होगा 'व्यावहारिक प्रशिक्षण' (Practical Training)
\r\n\r\nअकादमी की चारदीवारी में कानून की किताबें पढ़ने और हथियार चलाने की ट्रेनिंग पूरी होने के बाद, अब इन 47 नए उपनिरीक्षकों का असली इम्तिहान शुरू होगा। पासिंग आउट परेड के तुरंत बाद, उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय द्वारा इन सभी को प्रदेश के अलग-अलग जनपदों (जिलों) में तैनात किया जाएगा।
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जनपदों में इन्हें सीधे थानों का चार्ज नहीं मिलेगा, बल्कि इन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण (Practical Training) के दौर से गुजरना होगा।
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- \r\n थानों में रहकर ये पुलिस की कार्यप्रणाली की जमीनी हकीकत समझेंगे।\r\n \r\n
- \r\n सीनियर पुलिस अधिकारियों और अनुभवी इंस्पेक्टरों के दिशा-निर्देशन में एफआईआर (FIR) दर्ज करना, केस डायरी (Case Diary) लिखना, और अपराध स्थल का मुआयना करना सीखेंगे।\r\n \r\n
- \r\n वीआईपी ड्यूटी (VIP Duty), त्योहारों पर कानून-व्यवस्था (Law and Order) संभालना और रात्रिकालीन गश्त (Night Patrolling) के गुर सीखेंगे।\r\n \r\n
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जीरो टॉलरेंस नीति को मिलेगी नई धार
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश सरकार की अपराध और अपराधियों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति को सफल बनाने में सबसे अहम भूमिका पुलिस महकमे की होती है। उपनिरीक्षक (SI) वह कड़ी होता है जो सीधे जनता से जुड़ता है और मुकदमों की विवेचना (Investigation) करता है।
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मुरादाबाद की डॉ. भीमराव आंबेडकर पुलिस अकादमी से निकले ये 47 युवा और तकनीक-सक्षम दरोगा जब थानों में अपनी ड्यूटी संभालेंगे, तो निश्चित तौर पर इससे यूपी पुलिस के अनुसंधान (Investigation) के स्तर में सुधार आएगा और अपराधियों में खौफ तथा आम जनता में पुलिस के प्रति विश्वास और अधिक मजबूत होगा।
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Sabse pehle comment karne wale banein.