उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में लोगों की जान से खिलवाड़ करने वाले एक बेहद खतरनाक और सनसनीखेज मुजफ्फरनगर फर्जी डिग्री रैकेट का पुलिस ने सफलतापूर्वक भंडाफोड़ किया है। मुजफ्फरनगर पुलिस और एसओजी (SOG) की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय स्तर पर फर्जी मेडिकल डिग्रियां तैयार करने वाले गिरोह को पकड़ा है। इस कार्रवाई में 15 हजार रुपये के इनामी और लंबे समय से पुलिस को चकमा दे रहे मुख्य आरोपी इमलाख उर्फ इमलाक समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किए गए अन्य दो आरोपी बिना किसी वैध मेडिकल डिग्री के खुलेआम अस्पताल और डायग्नोस्टिक सेंटर का संचालन कर रहे थे।READ ALSO:-UP Free Education Scheme: गरीब परिवारों के लिए वरदान बनी यूपी सरकार की यह स्कीम! बच्चों को मिलेगी मुफ्त पढ़ाई, रहना और खाना, जानें कैसे कराएं बच्चे का एडमिशन
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आज के समय में जब स्वास्थ्य सेवाएं सबसे अहम हैं, ऐसे में यह मुजफ्फरनगर फर्जी डिग्री रैकेट समाज और आम जनता के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका था। आइए, इस पूरी पुलिस कार्रवाई, आरोपियों की कार्यप्रणाली और समाज पर पड़ने वाले इसके असर को विस्तार से समझते हैं। 
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मुजफ्फरनगर फर्जी डिग्री रैकेट का कैसे हुआ खुलासा?

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सोमवार की दोपहर मुजफ्फरनगर पुलिस कार्यालय में एक अहम प्रेसवार्ता का आयोजन किया गया। इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) संजय कुमार वर्मा ने मीडिया को संबोधित करते हुए इस पूरे मुजफ्फरनगर फर्जी डिग्री रैकेट की परतें खोलीं। एसएसपी ने बताया कि इस सनसनीखेज मामले की शुरुआत राज्य सरकार के आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल पर मिली एक गुप्त शिकायत से हुई थी।
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पोर्टल पर दर्ज शिकायत में स्पष्ट रूप से आरोप लगाया गया था कि इमलाख नाम का व्यक्ति भोले-भाले युवाओं और फर्जी डॉक्टरों से मोटी रकम वसूलकर उन्हें जाली मेडिकल डिग्रियां उपलब्ध कराता है। इतना ही नहीं, शिकायत में यह भी कहा गया था कि इमलाख अपने खुद के संस्थान में पढ़ने वाले छात्रों के मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्रों (Original Certificates) को जबरन रोक लेता था और उन्हें वापस करने के एवज में अवैध वसूली (Extortion) करता था।
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'बाबा इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी' की आड़ में काला कारोबार

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पुलिस की प्रारंभिक जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में पता चला कि मुख्य आरोपी इमलाख 'बाबा इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी' के नाम से एक संस्थान का संचालन कर रहा था। इसी संस्थान के नाम की आड़ में वह B.Pharma (बी.फार्मा), D.Pharma (डी.फार्मा) और यहां तक कि BAMS (बीएएमएस) जैसी कथित फर्जी मेडिकल डिग्रियां तैयार कर लोगों से लाखों रुपये वसूल रहा था।
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पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इमलाख का यह अवैध कारोबार कोई नया नहीं है। वह इससे पहले भी फर्जीवाड़े के एक मामले में उत्तराखंड एसटीएफ (Uttarakhand STF) की बड़ी कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार होकर जेल की हवा खा चुका है। जमानत पर बाहर आने के बाद उसने फिर से यही गोरखधंधा शुरू कर दिया। बाद में थाना छपार में उसके खिलाफ गंभीर धाराओं में नया मुकदमा दर्ज किया गया था और पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर 15 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया था। 
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6 लाख रुपये में बिकी BAMS की फर्जी डिग्री

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इस मुजफ्फरनगर फर्जी डिग्री रैकेट में पुलिस ने इमलाख के अलावा दो कथित डॉक्टरों को भी गिरफ्तार किया है, जो समाज के लिए मौत के सौदागर बने हुए थे। एसएसपी संजय कुमार वर्मा के मुताबिक, थाना छपार पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने बरला-बसेड़ा रोड से मुख्य आरोपी इमलाख के साथ-साथ वी.के. गौतम और खतौली निवासी मंसूर उलहक को धर दबोचा।
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पूछताछ में जो खुलासे हुए, वे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करते हैं। पुलिस गिरफ्त में आए वी.के. गौतम ने बिना किसी दबाव के स्वीकार किया कि उसके पास कोई भी वैध या असली मेडिकल डिग्री नहीं है। उसने पुलिस को बताया कि उसने मास्टरमाइंड इमलाख को BAMS (बैचलर ऑफ आयुर्वेद, मेडिसिन एंड सर्जरी) की कथित फर्जी डिग्री बनवाने के लिए नकद छह लाख रुपये दिए थे।
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'एमएस सर्जन' बनकर चला रहा था बड़ा अस्पताल

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वी.के. गौतम का फर्जीवाड़ा सिर्फ डिग्री तक सीमित नहीं था। पुलिस का दावा है कि वी.के. गौतम इसी फर्जी डिग्री और अपने रसूख के दम पर उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में 'हिमालयन मेडिकेयर सेंटर' नाम से एक पूरा अस्पताल संचालित कर रहा था। लोगों को भ्रमित करने के लिए वह अपने विजिटिंग कार्ड और मेडिकल लेटरहेड पर खुद को गर्व से 'एमएस सर्जन' (MS Surgeon) लिखता था। बिना किसी मेडिकल ज्ञान के वह मरीजों का इलाज कर रहा था, जो सीधे तौर पर लोगों की हत्या के प्रयास के समान है। 
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गिरफ्तारी के दौरान पुलिस टीम ने आरोपियों के पास से भारी मात्रा में संदिग्ध सामग्री बरामद की है। तलाशी में विजिटिंग कार्ड, फर्जी मेडिकल लेटरहेड, मरीजों के इलाज के रिकॉर्ड, अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट, कई मोबाइल फोन और दर्जनों अन्य संदिग्ध दस्तावेज मिले हैं, जिनकी गहनता से जांच की जा रही है।
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इस पूरे रैकेट में बिचौलिये मंसूर की भूमिका

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कोई भी बड़ा आपराधिक नेटवर्क बिना बिचौलियों के नहीं चलता। इस मुजफ्फरनगर फर्जी डिग्री रैकेट में खतौली निवासी मंसूर उलहक मुख्य बिचौलिये (Middleman) की भूमिका निभा रहा था। पुलिस की कड़ी पूछताछ में मंसूर उलहक ने अपना जुर्म कबूल करते हुए बताया कि वह फर्जी डॉक्टरों की तलाश करता था और उन्हें इमलाख से मिलवाता था।
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मंसूर ने ही डॉक्टर गौतम से छह लाख रुपये की रकम ली थी, जिसमें से उसने अपना मोटा कमीशन काटा और बाकी के पैसे इमलाख तक सुरक्षित पहुंचाए। पुलिस का कहना है कि रविवार के दिन ये तीनों आरोपी एक नई फर्जी डिग्री सौंपने और पैसों के लेन-देन का हिसाब करने के सिलसिले में एक गुप्त स्थान पर मिले थे। मुखबिर की सटीक सूचना पर पुलिस ने घेराबंदी की और वहीं से तीनों को गिरफ्तार कर लिया। 
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मास्टरमाइंड पर 11 केस दर्ज, पुलिस टीम को मिलेगा इनाम

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एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में बताया कि मुख्य आरोपी इमलाख कोई साधारण अपराधी नहीं है। उसके खिलाफ पहले से ही हत्या के प्रयास (Attempt to Murder), रंगदारी, गैंगस्टर एक्ट, आर्म्स एक्ट और धोखाधड़ी समेत कुल 11 गंभीर आपराधिक मुकदमे विभिन्न थानों में दर्ज हैं। वह एक कुख्यात अपराधी है जिसने शिक्षा और चिकित्सा जैसे पवित्र क्षेत्रों को अपने काले धन का जरिया बना लिया था।
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वर्तमान में तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धोखाधड़ी, जालसाजी और अन्य संबंधित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस आरोपियों को रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है ताकि इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और फर्जी डिग्री धारकों का भी पता लगाया जा सके। इस उत्कृष्ट और त्वरित कार्रवाई के लिए एसएसपी ने थाना छपार पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम के उत्साहवर्धन के लिए 25 हजार रुपये का नकद पुरस्कार देने की घोषणा भी की है।
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अंततः यह मुजफ्फरनगर फर्जी डिग्री रैकेट इस बात का ज्वलंत उदाहरण है कि कैसे कुछ अपराधी चंद रुपयों के लालच में आम लोगों की जिंदगी से खेल रहे हैं। बिना डिग्री वाले झोलाछाप डॉक्टरों का अस्पताल चलाना स्वास्थ्य विभाग की निगरानी प्रणाली की एक बड़ी नाकामी भी है। मुजफ्फरनगर पुलिस की यह कार्रवाई निश्चित रूप से सराहनीय है। हालांकि, प्रशासन को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी फर्जी डिग्रियों के सहारे राज्य और देश में चल रहे अन्य सभी अवैध क्लीनिकों और अस्पतालों को तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए। मरीजों को भी चाहिए कि वे किसी भी डॉक्टर से इलाज कराने से पहले उसकी डिग्री और पंजीकरण संख्या (Registration Number) की आधिकारिक पुष्टि अवश्य करें।
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मुजफ्फरनगर पुलिस और एसओजी की टीम ने 15 हजार के इनामी अपराधी इमलाख सहित 3 लोगों को गिरफ्तार कर एक बड़े अंतरराज्यीय फर्जी मेडिकल डिग्री रैकेट का पर्दाफाश किया है। आरोपी 6 लाख रुपये में BAMS जैसी फर्जी डिग्रियां बेचते थे। गिरफ्तार आरोपियों में से एक वी.के. गौतम फर्जी डिग्री के आधार पर खुद को 'एमएस सर्जन' बताकर हरिद्वार में अस्पताल चला रहा था। मुख्य आरोपी पर पहले से 11 मामले दर्ज हैं। पुलिस टीम को इस कामयाबी के लिए 25,000 रुपये का इनाम दिया गया है।
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