उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कक्षा 9 के छात्र की दर्दनाक मौत के मामले में मेरठ पुलिस की घोर लापरवाही सामने आई है। स्थानीय स्तर पर न्याय न मिलने के बाद अब वंश कुशवाहा हत्याकांड की गूंज देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंच गई है। शोषित क्रांति दल के एक प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित परिवार के साथ मिलकर राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग (NCBC) की अध्यक्ष साध्वी निरंजन ज्योति से दिल्ली स्थित उनके कार्यालय में मुलाकात की। आयोग ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कड़ा रुख अपनाया है और मेरठ पुलिस के उच्चाधिकारियों से जवाब तलब किया है।Read also:-सिस्टम की बेरुखी ने छीन ली देश की 'दंगल गर्ल': बिजनौर थाने के भीतर खुद को फूंकने वाली महिला पहलवान की मौत; खाकी और फौजी पर लगे गंभीर दाग!
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वंश कुशवाहा हत्याकांड: 28 मई का वह काला दिन

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घटना की पृष्ठभूमि को समझना बेहद जरूरी है। 28 मई 2026 को मेरठ निवासी और कक्षा 9 में पढ़ने वाले छात्र वंश कुशवाहा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। पीड़ित परिवार का स्पष्ट आरोप है कि वंश के ही चार दोस्तों ने उसे पानी में डुबोकर बेरहमी से मार डाला। परिवार का कहना है कि यह कोई हादसा नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी साजिश के तहत की गई हत्या थी।
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एक होनहार किशोर की असमय मौत से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। माता-पिता ने जब घटना की असलियत जानी, तो वे न्याय की गुहार लगाने स्थानीय थाने पहुंचे। लेकिन उन्हें वहां से निराशा ही हाथ लगी। आरोप है कि पुलिस ने इस स्पष्ट वंश कुशवाहा हत्याकांड को गंभीरता से नहीं लिया और आरोपियों को बचाने का प्रयास किया। 
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मेरठ पुलिस की घोर लापरवाही और 5 घंटे का धरना

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भारत की न्याय व्यवस्था में किसी भी अपराध की जांच का पहला कदम एफआईआर (FIR) दर्ज करना होता है। लेकिन पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना के इतने दिन बीत जाने के बावजूद मेरठ पुलिस ने आज तक इस मामले में मुकदमा (रिपोर्ट) दर्ज नहीं किया है। थाने के चक्कर काट-काटकर थक चुके परिवार ने अंततः लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जताने का फैसला किया।
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बीते शुक्रवार को पीड़ित परिवार ने शोषित क्रांति दल के कार्यकर्ताओं के भारी समर्थन के साथ मेरठ के कमिश्नरी पार्क में एक विशाल धरना प्रदर्शन किया। यह धरना लगातार 5 घंटे तक चला। पीड़ित माता-पिता चिलचिलाती धूप में अपने बेटे की तस्वीर लिए न्याय की भीख मांगते रहे। प्रशासन के अधिकारियों ने मौके पर आकर आश्वासन भी दिया, किंतु धरने के बाद भी पुलिस ने वंश कुशवाहा हत्याकांड की रिपोर्ट नहीं लिखी। पुलिस की इसी हठधर्मिता के कारण मामले ने तूल पकड़ लिया।
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राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग (NCBC) ने अपनाया सख्त रुख

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जब मेरठ प्रशासन और पुलिस ने पीड़ित परिवार की एक न सुनी, तो शोषित क्रांति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली पहुंचा। इस प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित परिवार को साथ लेकर राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग (National Commission for Backward Classes) की अध्यक्ष साध्वी निरंजन ज्योति जी से मुलाकात की।
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प्रतिनिधिमंडल ने आयोग की अध्यक्ष को 28 मई से लेकर अब तक के पूरे घटनाक्रम, पुलिस की लापरवाही, और 5 घंटे के धरने के बावजूद FIR दर्ज न होने की पूरी कहानी विस्तार से बताई। साध्वी निरंजन ज्योति ने एक पिछड़े वर्ग के किशोर की हत्या और पुलिसिया संवेदनहीनता पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने तत्काल एक्शन लेते हुए अपने सचिव को कड़े निर्देश दिए हैं कि इस मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) मेरठ को विस्तृत आख्या (रिपोर्ट) के साथ आयोग के समक्ष तलब किया जाए। 
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शोषित क्रांति दल की न्याय की लड़ाई में अहम भूमिका

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इस पूरे घटनाक्रम में पीड़ित परिवार को अकेला न छोड़ते हुए शोषित क्रांति दल ने एक मजबूत स्तंभ की तरह काम किया है। दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत ने स्पष्ट किया कि जब तक वंश कुशवाहा के हत्यारों को सजा नहीं मिल जाती और लापरवाह पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह लड़ाई सड़क से लेकर आयोग और न्यायालय तक लड़ी जाएगी।
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दिल्ली में राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग की अध्यक्ष से मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल में कई प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे। इनमें मेरठ महानगर अध्यक्ष वरुण कुमार, एडवोकेट दिनेश कुमार, अक्षित शर्मा, आदेश गगोल, रोहित यादव, और राहुल एडवोकेट आदि की उपस्थिति प्रमुख रही। इन सभी नेताओं ने एक स्वर में वंश कुशवाहा हत्याकांड की निष्पक्ष जांच और फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की मांग की है। 
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कानून व्यवस्था और पुलिस की जवाबदेही पर उठते सवाल

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यह घटना केवल एक परिवार के दुख की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस सिस्टम की विफलता को भी दर्शाती है जिसे आम आदमी की सुरक्षा के लिए बनाया गया है। हत्या जैसे संगीन अपराध में भी अगर पुलिस हफ्तों तक मुकदमा दर्ज न करे, तो यह अपराधियों के हौसले बुलंद करने जैसा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर FIR न होने से साक्ष्य (सबूत) नष्ट होने का खतरा सबसे अधिक रहता है। ऐसे में वंश कुशवाहा हत्याकांड में पुलिस की यह देरी जांच प्रक्रिया को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। अब जब मामला राष्ट्रीय आयोग के संज्ञान में आ गया है, तो उम्मीद की जा रही है कि मेरठ पुलिस की नींद टूटेगी और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी होगी।
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अंततः, वंश कुशवाहा हत्याकांड उत्तर प्रदेश में पुलिस की कार्यशैली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। एक 14-15 साल के मासूम छात्र की हत्या और उसके बाद न्याय के लिए उसके परिवार का दर-दर भटकना बेहद हृदयविदारक है। शोषित क्रांति दल की पहल और राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग (NCBC) द्वारा SSP मेरठ को तलब किए जाने से परिवार को न्याय की एक नई किरण दिखाई दी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आयोग के सख्त निर्देशों के बाद मेरठ पुलिस कितनी जल्दी एफआईआर दर्ज करती है और आरोपियों को कानून के कटघरे में खड़ा करती है। समाज और प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में किसी भी पीड़ित परिवार को महज एक एफआईआर दर्ज कराने के लिए इतना लंबा संघर्ष न करना पड़े।
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    28 मई 2026 को मेरठ में 9वीं कक्षा के छात्र वंश कुशवाहा की 4 दोस्तों द्वारा पानी में डुबोकर हत्या कर दी गई थी।
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    घटना के बाद से ही मेरठ पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज नहीं की, जिसके विरोध में शुक्रवार को परिवार ने कमिश्नरी पार्क में 5 घंटे का धरना दिया।
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    न्याय न मिलने पर शोषित क्रांति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत के नेतृत्व में परिवार ने दिल्ली में राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग की अध्यक्ष साध्वी निरंजन ज्योति से मुलाकात की।
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    आयोग ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए सचिव को निर्देश दिया है कि SSP मेरठ को रिपोर्ट के साथ आयोग में तलब किया जाए।
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Disclaimer (अस्वीकरण): यह खबर शोषित क्रांति दल द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति/जानकारी और पीड़ित परिवार के बयानों पर आधारित है। मामले में लगाए गए आरोप (हत्या और पुलिस द्वारा रिपोर्ट दर्ज न करना) अभी जांच का विषय हैं। पुलिस प्रशासन या अन्य संबंधित पक्षों का आधिकारिक बयान आने पर खबर को अपडेट किया जा सकता है। Khabreelal.com इस मामले में किसी भी पक्ष के दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है, हमारा उद्देश्य केवल घटनाक्रम की जानकारी आप तक पहुंचाना है।
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