मेरठ (उत्तर प्रदेश): पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध और अवैध हथियारों की तस्करी के खिलाफ उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) ने एक बार फिर अपनी ताकत और मुस्तैदी का लोहा मनवाया है। मेरठ में एसटीएफ की फील्ड इकाई ने एक बेहद सटीक और गुप्त ऑपरेशन को अंजाम देते हुए अवैध हथियारों की तस्करी, खरीद-फरोख्त और गन हाउस के रजिस्टरों में हेराफेरी करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह (Interstate Arms Smuggling Gang) की कमर तोड़ दी है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
इस बड़ी कार्रवाई के तहत एसटीएफ ने लंबे समय से फरार चल रहे गिरोह के एक बेहद सक्रिय और शातिर सदस्य शैलेन्द्र सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। शैलेन्द्र की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में जो खुलासे हुए हैं, उसने पुलिस और जांच एजेंसियों के भी कान खड़े कर दिए हैं। यह गिरोह न केवल अवैध रूप से हथियारों की तस्करी करता था, बल्कि कागजों में हेराफेरी करके अवैध हथियारों को वैध लाइसेंस धारकों को बेचकर मोटा मुनाफा भी कमा रहा था। आइए, इस पूरे सनसनीखेज मामले की तह तक जाते हैं और जानते हैं कि एसटीएफ ने इस 'गन-सिंडिकेट' का पर्दाफाश कैसे किया।
\r\n\r\n\r\n\r\n
एसटीएफ के हत्थे चढ़ा शातिर तस्कर शैलेन्द्र सिंह
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) की मेरठ यूनिट पिछले काफी समय से इस अंतरराज्यीय गिरोह के नेटवर्क को खंगालने में जुटी हुई थी। इसी कड़ी में एसटीएफ को सूचना मिली कि गिरोह का एक अहम सदस्य शैलेन्द्र सिंह मेरठ के कंकरखेड़ा इलाके में छिपा हुआ है। सूचना पुख्ता होते ही एसटीएफ ने जाल बिछाकर उसे धर दबोचा।
\r\n\r\n\r\n\r\n
मामले के विवेचक (Investigating Officer) रविंद्र कुमार ने मीडिया को विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि गिरफ्तार अभियुक्त शैलेन्द्र सिंह कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत 69 गायत्री ग्रीन बाईपास रोड का निवासी है। वह पुलिस की रडार पर काफी समय से था और उसकी गिरफ्तारी इस पूरे नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है।
\r\n\r\nमौके से क्या-क्या हुआ बरामद?
\r\n\r\nFollow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\n
एसटीएफ की टीम ने जब शैलेन्द्र सिंह को गिरफ्तार किया और उसके ठिकानों की सघन तलाशी ली, तो वहां से कई ऐसे आपत्तिजनक दस्तावेज और हथियार मिले, जो इस काले कारोबार की पूरी पोल खोलते हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
बरामदगी का विवरण:
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n अवैध असलहा: 1 अवैध पिस्टल (.30 बोर)\r\n \r\n
- \r\n दस्तावेज (काले कारोबार की चाबी): 1 स्टॉक रजिस्टर (जिसमें हथियारों का लेखा-जोखा था)\r\n \r\n
- \r\n बिक्री का रिकॉर्ड: 1 शस्त्र विक्रय रजिस्टर (हथियारों की खरीद-बिक्री का रजिस्टर)\r\n \r\n
- \r\n फर्जीवाड़े का सबूत: 1 गन हाउस के लाइसेंस की फोटोकॉपी\r\n \r\n
\r\n\r\n
इन रजिस्टरों की बरामदगी इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि यह गिरोह एक समानांतर 'गन हाउस' चला रहा था, जहां अवैध हथियारों को फर्जी कागजातों के सहारे वैध बनाकर बाजार में उतारा जा रहा था।
\r\n\r\n\r\n\r\n
2 लाख की खरीद और 3 लाख में बिक्री: ऐसे चलता था फर्जीवाड़े का खेल
\r\n\r\nएसटीएफ की पूछताछ के दौरान आरोपी शैलेन्द्र सिंह ने अपना जुर्म कबूलते हुए जो कहानी बताई, वह किसी क्राइम थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है। शैलेन्द्र ने बताया कि उसने कुछ वर्ष पहले अपने एक परिचित और गिरोह के सदस्य अनिल बालियान उर्फ बंजी से महज 2 लाख रुपये में एक अवैध .30 बोर की पिस्टल खरीदी थी।
\r\n\r\n\r\n\r\n
चूंकि यह पिस्टल अवैध थी, इसलिए इसे सीधे बाजार में या किसी लाइसेंसी व्यक्ति को बेचना संभव नहीं था। यहीं से शुरू हुआ कागजी हेराफेरी (Document Forgery) का खौफनाक खेल।
\r\n\r\n\r\n\r\n
\r\n\r\n\r\nफर्जी सैन्य अधिकारी की एंट्री: अनिल बालियान के कहने और उसकी साजिश के अनुसार, शैलेन्द्र ने अपने पास मौजूद गन हाउस के स्टॉक रजिस्टर में एक फर्जी एंट्री की। इस अवैध पिस्टल को रजिस्टर में वैध दिखाने के लिए उसने 'मेजर हरेन्द्र सिंह' (Major Harendra Singh) नाम के एक फर्जी सैन्य अधिकारी का नाम और पता इस्तेमाल किया। रजिस्टर में यह दर्शाया गया कि यह असलहा उक्त सैन्य अधिकारी का है।\r\n
\r\n\r\n
कागजों में इस अवैध हथियार को 'सफेद' (वैध) करने के बाद, शैलेन्द्र ने एक असली लाइसेंस धारक व्यक्ति, अमरपाल सिंह, को अपने विश्वास में लिया। अमरपाल को इस फर्जीवाड़े की भनक तक नहीं लगने दी गई और उसे धोखे में रखकर वही अवैध पिस्टल 3 लाख रुपये की भारी कीमत में बेच दी गई। इस प्रकार, एक ही झटके में इस सिंडिकेट ने एक लाख रुपये का मुनाफा कमाया और एक खतरनाक अवैध हथियार को समाज में खुलेआम घूमने के लिए छोड़ दिया।READ ALSO:-मेरठ: भीषण गर्मी में बेगमपुल व्यापार संघ बना मसीहा, 3 घंटे तक चला मीठे जल और दूध का महा-वितरण, उमड़ा पूरा शहर
\r\n\r\n\r\n\r\n
23 नवंबर 2024 से जुड़ा है मामले का तार: कैसे खुली इस गिरोह की पोल?
\r\n\r\nइस पूरे सिंडिकेट के भंडाफोड़ की कहानी अचानक शुरू नहीं हुई, बल्कि इसके तार पिछले साल यानी 23 नवंबर 2024 की एक बड़ी घटना से जुड़े हुए हैं। विवेचक रविन्द्र कुमार के मुताबिक, एसटीएफ ने नवंबर 2024 में एक बहुत बड़ा ऑपरेशन चलाया था।
\r\n\r\n\r\n\r\n
उस समय एसटीएफ की टीम ने बागपत के रहने वाले रोहन नामक एक शातिर हथियार तस्कर को गिरफ्तार किया था। रोहन की गिरफ्तारी कोई आम गिरफ्तारी नहीं थी; उसके पास से 17 अवैध बंदूकें और 700 से अधिक जिंदा कारतूस बरामद हुए थे। इतनी बड़ी मात्रा में हथियारों की खेप पकड़े जाने के बाद ही एसटीएफ को यह अंदेशा हो गया था कि इसके पीछे कोई बहुत बड़ा अंतरराज्यीय सिंडिकेट काम कर रहा है। इसी घटना के संबंध में मेरठ के थाना कंकरखेड़ा में मुकदमा दर्ज किया गया था और तफ्तीश शुरू की गई थी। रोहन से पूछताछ में मिली लीड के आधार पर ही एसटीएफ एक-एक करके इस गिरोह की कड़ियों को जोड़ती चली गई।
\r\n\r\n\r\n\r\n
अब तक 9 गिरफ्तार, सलाखों के पीछे पहुंचा सरगना
\r\n\r\nनवंबर 2024 में रोहन की गिरफ्तारी से शुरू हुआ एसटीएफ का यह अभियान शैलेन्द्र सिंह की गिरफ्तारी तक अनवरत जारी रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में एसटीएफ अब तक गिरोह के मुख्य सरगना (Mastermind) सहित कुल 9 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
इन नौ लोगों की गिरफ्तारी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, और दिल्ली-एनसीआर में फैले अवैध हथियारों के एक बड़े आपूर्ति नेटवर्क को पूरी तरह से छिन्न-भिन्न कर दिया है। पुलिस का मानना है कि यह गिरोह न केवल स्थानीय बदमाशों को बल्कि बड़े माफियाओं को भी हथियारों की सप्लाई करता था।
\r\n\r\n\r\n\r\n
हथियारों का जखीरा: घातक विदेशी असलहे बरामद, उड़े जांच एजेंसियों के होश
\r\n\r\nइस गिरोह के पास से बरामद हथियारों की सूची देखकर खुद एसटीएफ और पुलिस के आला अधिकारी भी हैरान रह गए। इस सिंडिकेट की पहुंच केवल देसी कट्टों या सामान्य हथियारों तक सीमित नहीं थी, बल्कि ये लोग घातक विदेशी और अत्याधुनिक हथियारों की तस्करी में भी लिप्त थे।
\r\n\r\n\r\n\r\n
अब तक के छापों में गिरोह से बरामद विदेशी और घातक हथियारों की सूची:
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n यूएस राइफल विनचेस्टर .30 बोर कार्बाइन (US Rifle Winchester .30 bore carbine): यह एक बेहद अत्याधुनिक और घातक अमेरिकी हथियार है, जिसका भारत में अवैध रूप से मिलना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है।\r\n \r\n
- \r\n यूएस राइफल स्प्रिंग फील्ड आर्मरी 30 बोर (US Rifle Springfield Armory 30 bore): एक और उच्च क्षमता वाली अमेरिकी राइफल जो आमतौर पर सैन्य या विशेष बलों के पास होती है।\r\n \r\n
- \r\n पम्प गन रिपीट 12 बोर (Pump gun repeat 12 bore): भीड़ या गैंगवार में भारी तबाही मचाने में सक्षम हथियार।\r\n \r\n
- \r\n .45 बोर और .30 बोर की कई विदेशी और उच्च गुणवत्ता वाली पिस्टलें।\r\n \r\n
- \r\n भारी मात्रा में जिंदा कारतूस: सैकड़ों की संख्या में कारतूस बरामद किए गए हैं, जो बताते हैं कि ये लोग किसी बड़े अपराध या गैंगवार की तैयारी के लिए हथियारों की जमाखोरी कर रहे थे।\r\n \r\n
\r\n\r\n
सख्त कानूनी कार्रवाई: किन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा?
\r\n\r\nगिरफ्तार किए गए अभियुक्त शैलेन्द्र सिंह के खिलाफ मेरठ के थाना कंकरखेड़ा में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आर्म्स एक्ट की बेहद गंभीर और सख्त धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
लगाई गई मुख्य धाराएं:
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n BNS की धारा 318(4): छल और बेईमानी से संपत्ति (पैसे) परिदत्त करने के लिए प्रेरित करना (धोखाधड़ी)।\r\n \r\n
- \r\n BNS की धारा 336(3): कूट रचना (Forgery) और फर्जी दस्तावेज तैयार करना।\r\n \r\n
- \r\n BNS की धारा 338: कूट रचित दस्तावेज को असली के रूप में इस्तेमाल करना।\r\n \r\n
- \r\n BNS की धारा 340(2): फर्जी नाम और पते का इस्तेमाल कर छल करना।\r\n \r\n
- \r\n 25(8) आर्म्स एक्ट (Arms Act): अवैध रूप से हथियारों को रखने, उनकी खरीद-फरोख्त करने और तस्करी करने से संबंधित आर्म्स एक्ट की सख्त धारा।\r\n \r\n
\r\n\r\n
समाज और सुरक्षा के लिए यूपी एसटीएफ का कड़ा प्रहार
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश के मेरठ में एसटीएफ द्वारा अंजाम दिया गया यह ऑपरेशन राज्य में कानून व्यवस्था (Law and Order) को सुदृढ़ करने और संगठित अपराध पर लगाम लगाने की दिशा में एक मील का पत्थर है। फर्जी नामों और गन हाउस की आड़ में चल रहे इस अवैध हथियारों के काले कारोबार का भंडाफोड़ होना इस बात का प्रमाण है कि यूपी पुलिस और एसटीएफ की खुफिया तंत्र कितनी गहराई से काम कर रहा है। विदेशी हथियारों की बरामदगी यह भी दर्शाती है कि तस्करों के तार अंतरराष्ट्रीय सीमाओं या बड़े सिंडिकेट से जुड़े हो सकते हैं, जिसकी विस्तृत जांच अभी जारी है। फिलहाल शैलेन्द्र सिंह को माननीय न्यायालय के समक्ष पेश कर जेल भेज दिया गया है, और एसटीएफ इस गिरोह के बाकी बचे संभावित गुर्गों की तलाश में जुटी हुई है।
Sabse pehle comment karne wale banein.