मेरठ/बागपत (Religious & Administration News): श्रावण मास (सावन) के पवित्र महीने में भगवान शिव के भक्तों द्वारा निकाली जाने वाली ऐतिहासिक और विशाल 'कांवड़ यात्रा' के लिए उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड प्रशासन ने अपनी तैयारियां युद्धस्तर पर शुरू कर दी हैं। हर साल लाखों की संख्या में शिवभक्त (कांवड़िये) हरिद्वार, ऋषिकेश और गोमुख से पवित्र गंगाजल लेकर अपने-अपने गंतव्यों की ओर प्रस्थान करते हैं। इस विशाल जनसैलाब को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित तरीके से उनके गंतव्य तक पहुंचाना प्रशासन के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होता।READ ALSO:-मेरठ का बेगमपुल चौराहा बना 'डेथ ट्रैप': मानसून की पहली ही बारिश में धंसी सड़क, नगर निगम के दावों की खुली पोल
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इसी चुनौती से निपटने और यात्रा को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से पुलिस और प्रशासन ने एक बेहद सख्त और विस्तृत 'कांवड़ यात्रा गाइडलाइन 2026' जारी कर दी है। इस बार प्रशासन का पूरा जोर सुरक्षा, ध्वनि नियंत्रण और यातायात प्रबंधन पर है। पिछली बार की खामियों से सबक लेते हुए, इस बार अधिकारियों ने ग्राउंड जीरो पर उतरकर कमान संभाल ली है। आइए, जानते हैं प्रशासन द्वारा जारी किए गए इन कड़े दिशा-निर्देशों और तैयारियों की पूरी विस्तृत जानकारी।
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1. डाक कांवड़ और डीजे को लेकर प्रशासन का सबसे बड़ा और सख्त फैसला

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कांवड़ यात्रा के दौरान सबसे बड़ा आकर्षण और चुनौती 'डाक कांवड़' (Dak Kanwar) होती है। युवा शिवभक्त बड़े-बड़े ट्रकों और वाहनों पर विशालकाय कांवड़ और भारी-भरकम डीजे (DJ) सिस्टम लगाकर तेज गति से चलते हैं। कई बार अत्यधिक ऊंचाई के कारण कांवड़ बिजली के हाई-टेंशन तारों से टकरा जाती है, जिससे बड़े और दर्दनाक हादसे हो जाते हैं।
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इन हादसों को जड़ से खत्म करने के लिए उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के उच्चाधिकारियों की संयुक्त बैठक में एक सख्त फैसला लिया गया है:
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    ऊंचाई की सीमा (Height Limit): एडीजी (ADG) भानु भास्कर ने स्पष्ट रूप से निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी डाक कांवड़ या डीजे वाले वाहन की अधिकतम ऊंचाई 10 से 12 फीट से अधिक नहीं होनी चाहिए। 12 फीट से ऊंची किसी भी कांवड़ को यात्रा मार्ग पर आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी और उसे बैरियर पर ही रोक दिया जाएगा।
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    ध्वनि प्रदूषण पर लगाम (Noise Control): तेज आवाज में बजने वाले डीजे से न केवल आम जनता, मरीजों और बुजुर्गों को परेशानी होती है, बल्कि कई बार यह विवाद का कारण भी बनता है। इसलिए, गाइडलाइन में स्पष्ट किया गया है कि डीजे की आवाज (Volume) 75 डेसिबल (Decibels) से अधिक नहीं होनी चाहिए।
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    कार्रवाई की चेतावनी: यदि कोई भी कांवड़ जत्था इन नियमों का उल्लंघन करता हुआ पाया गया, तो उस पर तत्काल प्रभाव से मोटर वाहन अधिनियम और ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण नियमों के तहत भारी जुर्माना और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। डीजे को जब्त भी किया जा सकता है।
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2. आसमान से जमीन तक 'तीसरी आंख' का कड़ा पहरा: हाई-टेक निगरानी

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सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए यूपी पुलिस इस बार पूरी तरह से हाई-टेक (High-Tech) संसाधनों का इस्तेमाल कर रही है। कांवड़ यात्रा मार्ग के चप्पे-चप्पे पर नजर रखने के लिए पुलिस ने आधुनिक तकनीक का जाल बिछा दिया है।
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    कंट्रोल रूम का निरीक्षण: कांवड़ यात्रा की निगरानी व्यवस्था को परखने के लिए एडीजी भानु भास्कर, डीआईजी कलानिधि नैथानी और एसएसपी अविनाश पांडेय ने पुलिस लाइन स्थित मुख्य कंट्रोल रूम (Control Room) का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को 24 घंटे कैमरों की स्क्रीन्स पर नजर गड़ाए रखने के सख्त निर्देश दिए हैं। मेरठ के बाद एडीजी ने हापुड़ जाकर वहां के डीआईजी के साथ स्थानीय कंट्रोल रूम की व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया।
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    ड्रोन और सीसीटीवी (Drones & CCTV): संपूर्ण कांवड़ यात्रा मार्ग, प्रमुख चौराहों, विश्राम शिविरों और संवेदनशील इलाकों की निगरानी के लिए व्यापक स्तर पर सीसीटीवी (CCTV) कैमरे इंस्टॉल किए गए हैं। इसके अलावा, आसमान से निगरानी के लिए लगातार ड्रोन (Drones) उड़ाए जाएंगे, ताकि भीड़भाड़ वाले इलाकों में किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत पकड़ा जा सके।
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3. 'रूट डायवर्जन' का मेगा प्लान: नहीं लगेगा महाजाम

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कांवड़ यात्रा के दौरान हाईवे और प्रमुख सड़कों पर भारी वाहनों के प्रवेश से भयंकर ट्रैफिक जाम लग जाता है, जिससे आम यात्रियों और खुद कांवड़ियों को भारी असुविधा होती है। प्रशासन ने इस बार 'जीरो ट्रैफिक जाम' (Zero Traffic Jam) का लक्ष्य रखा है।
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    एसपी यातायात को कड़े निर्देश: एडीजी ने एसपी यातायात (SP Traffic) राजेश श्रीवास्तव को एक फुल-प्रूफ और स्मार्ट रूट डायवर्जन (Route Diversion) प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
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    भारी वाहनों पर रोक: यात्रा के चरम दिनों में हाईवे पर भारी वाहनों (ट्रकों, डंपरों, बसों) का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। उन्हें वैकल्पिक मार्गों (Alternative Routes) से निकाला जाएगा। हल्के वाहनों के लिए भी अलग लेन की व्यवस्था की जाएगी।
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    एडवांस प्रचार-प्रसार: लोगों को अचानक परेशानी न हो, इसके लिए रूट डायवर्जन प्लान को लागू करने से कई दिन पहले ही समाचार पत्रों, एफएम रेडियो और सोशल मीडिया के माध्यम से इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
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4. सोशल मीडिया की निगरानी और अफवाह फैलाने वालों की खैर नहीं

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आजकल किसी भी बड़े आयोजन में सबसे बड़ा खतरा अफवाहों से होता है। पुलिस महकमा इस बात को लेकर पूरी तरह सतर्क है।
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    पुलिस की साइबर सेल (Cyber Cell) और सर्विलांस टीमें लगातार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (फेसबुक, व्हाट्सएप, एक्स/ट्विटर, इंस्टाग्राम) पर पैनी नजर रख रही हैं।
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    निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी भी असामाजिक या शरारती तत्व ने कांवड़ यात्रा को लेकर कोई भी भ्रामक जानकारी, फर्जी वीडियो या धार्मिक उन्माद फैलाने वाली पोस्ट शेयर की, तो उसे तुरंत गिरफ्तार कर उसके खिलाफ रासुका (NSA) या गैंगस्टर एक्ट के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। यात्रा के दौरान शांति और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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5. ग्राउंड जीरो पर अफसर: पुरा महादेव मंदिर में डाला डेरा

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तैयारियां सिर्फ कागजों तक सीमित न रहें, इसके लिए आला अफसर खुद फील्ड में उतरकर पसीना बहा रहे हैं। शनिवार और रविवार की छुट्टी वाले दिन भी अधिकारियों ने विश्राम नहीं किया।
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    अधिकारियों के दल ने ऐतिहासिक और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे प्रमुख शिव मंदिर— बागपत के पुरा महादेव मंदिर (Pura Mahadev Temple) का दौरा किया। यहां लाखों की संख्या में शिवभक्त जलाभिषेक करने आते हैं।
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    अधिकारियों ने मंदिर प्रांगण में जलाभिषेक कर भगवान शिव का आशीर्वाद लिया और उसके बाद मंदिर की सुरक्षा, बैरिकेडिंग, और भीड़ नियंत्रण (Crowd Management) की तैयारियों का बारीकी से जायजा लिया।
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6. कांवड़ शिविरों में स्वच्छता और बिजली विभाग को विशेष टास्क

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यात्रा मार्ग पर जगह-जगह लगने वाले कांवड़ सेवा शिविरों (Kanwar Camps) और ढाबों के लिए भी प्रशासन ने नियम तय किए हैं।
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    स्वच्छता और शुद्धता: सभी शिविर आयोजकों और ढाबा संचालकों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे भोजन की शुद्धता और आसपास के क्षेत्र में सर्वोच्च स्तर की स्वच्छता (Cleanliness) बनाए रखें। पॉलीथिन का उपयोग वर्जित रहेगा और कूड़े के निस्तारण की उचित व्यवस्था करनी होगी।
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    बिजली विभाग अलर्ट: बारिश के मौसम में करंट फैलने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एडीजी ने बिजली विभाग की टीमों को निर्देश दिए हैं कि यात्रा मार्ग में पड़ने वाले सभी बिजली के खंभों (Poles) को नीचे से मोटी पन्नी (Plastic Cover) या इंसुलेशन से अच्छी तरह कवर किया जाए। साथ ही, लटकते हुए तारों को तुरंत कसा जाए ताकि कांवड़ियों को कोई नुकसान न पहुंचे।
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आस्था के साथ अनुशासन का समागम

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कांवड़ यात्रा उत्तर भारत का एक महापर्व है, जो असीम श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड पुलिस द्वारा जारी की गई यह विस्तृत गाइडलाइन दर्शाती है कि प्रशासन इस पवित्र यात्रा को बिना किसी विघ्न के संपन्न कराने के लिए पूरी तरह से कटिबद्ध है।
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अब यह जिम्मेदारी शिवभक्त कांवड़ियों और आम नागरिकों की भी है कि वे प्रशासन के इन दिशा-निर्देशों का पूर्ण रूप से पालन करें। 12 फीट की ऊंचाई का नियम हो या 75 डेसिबल ध्वनि की सीमा, ये सभी नियम स्वयं भक्तों की सुरक्षा और सुविधा के लिए ही बनाए गए हैं। यदि आस्था के साथ अनुशासन का सही तालमेल बना रहेगा, तो निश्चित ही इस वर्ष की कांवड़ यात्रा ऐतिहासिक, भव्य और पूर्णतः सुरक्षित साबित होगी। 'बम-बम भोले' के जयकारों के साथ प्रशासन की मुस्तैदी, इस बार कांवड़ यात्रा को एक नया और सुरक्षित आयाम देने जा रही है।
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