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उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में आस्था, धर्म और कानूनी विवाद का एक अनोखा और तनावपूर्ण संगम देखने को मिल रहा है। मेरठ के सदर इलाके में स्थित प्राचीन और ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ मंदिर से गुरुवार को भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलदाऊ और बहन सुभद्रा की रथयात्रा निकाली जा रही है। लेकिन इस बार की रथयात्रा किसी उत्सव से ज्यादा एक प्रशासनिक चुनौती बनी हुई है। करीब 116 वर्षों से अनवरत चली आ रही इस पारंपरिक रथयात्रा पर इस साल मंदिर विवाद का गहरा साया है। स्थिति यह है कि यात्रा पूरी तरह से प्रशासन की कड़ी निगरानी और भारी पुलिस बल के पहरे में निकाली जा रही है। वर्षों पुरानी परंपराओं को दरकिनार करते हुए प्रशासन ने इस बार कई ऐसे सख्त कदम उठाए हैं, जिससे मंदिर के पुजारियों और श्रद्धालुओं में भारी रोष और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।READ ALSO:-150 करोड़ की हवस में लहूलुहान हुए खून के रिश्ते: गाजियाबाद में कलयुगी बेटे ने पिता के चेहरे और सीने में दागीं 6 गोलियां, चीखती रही मां- 'तूने पूरा घर उजाड़ दिया'
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प्रशासन के हाथ में मंदिर की कमान, रिसीवर की देखरेख में यात्रा लंबे समय से सदर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर के प्रबंधन और स्वामित्व को लेकर दो पक्षों के बीच गहरा विवाद चल रहा है। इस विवाद के कारण ही प्रशासन ने मंदिर परिसर और इसके आयोजनों को अपने नियंत्रण में ले लिया है। मौजूदा समय में मंदिर के लिए बाकायदा रिसीवर नियुक्त किए गए हैं। सदर तहसीलदार और सदर थाना प्रभारी के संयुक्त निर्देशन में इस पूरी रथयात्रा का आयोजन किया जा रहा है। प्रशासनिक हस्तक्षेप के कारण इस बार रथयात्रा को लेकर अंतिम समय तक यह स्पष्ट नहीं था कि यात्रा निकलेगी भी या नहीं, या फिर इसका स्वरूप कैसा होगा। इसी असमंजस के चलते इस साल रथयात्रा की तैयारियां बेहद सीमित समय में और भारी दबाव के बीच पूरी की गईं।
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एक दिन में सिमटीं हफ्तों की तैयारियां हर साल रथयात्रा से एक सप्ताह पहले ही मंदिर परिसर में उत्सव का माहौल शुरू हो जाता था। रथ की सफाई, रंग-रोगन, सजावट और शहर में निमंत्रण का दौर हफ्तों पहले से चलता था। लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ। अंतिम समय में प्रशासन द्वारा हरी झंडी मिलने के बाद बुधवार को आनन-फानन में रथगृह से भगवान का भव्य चांदी का रथ बाहर निकाला गया और उसकी साफ-सफाई कराई गई। प्रशासन द्वारा मंदिर की व्यवस्था पूरी तरह से अपने हाथ में लेने के बाद आयोजन की एक-एक जिम्मेदारी प्रशासन के कंधों पर है।
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परंपराओं पर प्रहार: पुजारियों को चांदी के रथ से उतारा गया इस बार की रथयात्रा में जो सबसे बड़ा और विवादित बदलाव देखने को मिला है, वह है पुजारियों का रथ पर न होना। पिछले कई दशकों से यह एक अटूट परंपरा रही है कि भगवान के रथ पर विराजमान होकर मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित गणेश दत्त शर्मा और पंडित विष्णु दत्त शर्मा यात्रा में शामिल होते थे और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित करते थे। लेकिन इस बार प्रशासन ने सख्त फरमान जारी करते हुए दोनों पुजारियों को रथ पर बैठने से साफ मना कर दिया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पुजारी केवल भगवान की पूजा-अर्चना करेंगे और आरती उतारेंगे, लेकिन यात्रा के दौरान वे रथ पर सवार नहीं होंगे।
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पुजारियों का फूटा गुस्सा, कहा- यह मौखिक आदेश और दबाव की राजनीति है प्रशासन के इस फैसले से मंदिर के पुजारियों में भारी आक्रोश है। पंडित गणेश दत्त शर्मा ने प्रशासन की इस कार्रवाई को पूरी तरह से अनुचित और दबाव में लिया गया फैसला बताया है। उनका कहना है कि 15 जुलाई को प्रशासन के अधिकारियों ने उन्हें मौखिक रूप से यह फरमान सुनाया कि वे रथ पर नहीं बैठेंगे। इसके लिए उन्हें कोई लिखित आदेश या नोटिस नहीं दिया गया है।
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पंडित शर्मा ने सीधे तौर पर न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि 10 जुलाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट आदेश पारित किया था। कोर्ट के आदेश में साफ कहा गया था कि रथयात्रा अपने 'परंपरागत तरीके' से निकाली जाएगी और कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। पुजारियों का तर्क है कि परंपरागत तरीके का मतलब ही यही है कि जिस तरह से पिछले 116 सालों से पुजारी रथ पर बैठते आए हैं, उन्हें बैठने दिया जाए। इस मामले में अब अगली कानूनी सुनवाई 20 जुलाई को प्रस्तावित है, लेकिन उससे पहले ही प्रशासन के इस रवैये ने विवाद को और हवा दे दी है।
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सड़क पर हाई-वोल्टेज ड्रामा: रथयात्रा के दौरान महिलाओं और पुलिस में नोकझोंक पुजारियों को रथ पर न बैठने देने का विवाद सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सड़क पर भी दिखाई दिया। गुरुवार को जब भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा कड़ी सुरक्षा के बीच शांतिपूर्वक शुरू हुई, तो कुछ ही दूरी पर विवाद फिर से खड़ा हो गया। यात्रा मार्ग में अचानक दो महिलाओं ने रथ के आगे चल रहे श्रद्धालुओं की भीड़ को रोकने का प्रयास किया और पुलिस से इस बदलाव का विरोध जताया। देखते ही देखते मौके पर भारी हंगामा हो गया। महिलाओं और तैनात पुलिसकर्मियों के बीच तीखी बहस और नोकझोंक शुरू हो गई। स्थिति को बिगड़ता देख तुरंत महिला पुलिसकर्मियों की टुकड़ी को आगे किया गया। महिला पुलिसकर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद समझा-बुझाकर दोनों महिलाओं को शांत कराया और रथयात्रा के मार्ग को साफ करवाया।
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मंदिर समिति की सचिव ने खोले मोर्चे, प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप इस पूरे घटनाक्रम के बीच मंदिर समिति की सचिव राशि शर्मा ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर और तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने बंद कमरे में हुई बैठक के दौरान तानाशाही रवैया अपनाते हुए मौखिक रूप से यह तुगलकी फरमान सुना दिया कि पुजारी रथ पर सवार नहीं होंगे। राशि शर्मा ने इसे सनातन धर्म की गहरी आस्था और सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं का सीधा अपमान बताया है।
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उनका सबसे गंभीर आरोप यह है कि जिन लोगों के खिलाफ न्यायालय द्वारा मंदिर की संपत्ति कुर्क करने का आदेश पारित किया जा चुका है, प्रशासन उन्हीं लोगों को इस पवित्र आयोजन में प्राथमिकता दे रहा है और उनका पक्ष ले रहा है। उन्होंने कहा कि आस्था के मामलों में इस तरह का प्रशासनिक हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
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दूसरे पक्ष का बयान: हम प्रशासन के साथ हैं वहीं, इस विवाद में दूसरे पक्ष का नेतृत्व कर रहे गणेश अग्रवाल का रुख बिल्कुल अलग है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनका गुट पुलिस और प्रशासन के सभी निर्देशों का पूरी तरह से पालन करेगा। अग्रवाल ने कहा कि उनके लिए भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का सफल और शांतिपूर्ण आयोजन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। वे प्रशासन का पूरा सहयोग कर रहे हैं। उनकी टीम द्वारा ही भगवान के चांदी के रथ को खूबसूरत फूलों से सजाया जा रहा है और यात्रा में शामिल होने वाले हजारों श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रसाद की भी व्यवस्था की गई है। उनका मानना है कि विवाद को भगवान की यात्रा के बीच में नहीं लाना चाहिए।
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पुलिस छावनी में तब्दील हुआ शहर, ड्रोन से हो रही निगरानी विवाद की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे सदर बाजार और यात्रा मार्ग को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। पीएसी की कई कंपनियां, पुलिस बल और खुफिया विभाग के अधिकारी सादे कपड़ों में भीड़ के बीच मौजूद हैं। छतों से भी निगरानी रखी जा रही है ताकि कोई अप्रिय घटना न घटे। पूरे कार्यक्रम के दौरान पुलिस बल रथ के चारों तरफ सुरक्षा घेरा बनाकर चल रहा है।
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प्रशासन की इस अभूतपूर्व कड़ी निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था के बीच निकलने वाली इस बार की भगवान जगन्नाथ रथयात्रा पर पूरे मेरठ शहर की नजरें टिकी हुई हैं। जहां एक तरफ हजारों श्रद्धालुओं की अगाध श्रद्धा और आस्था हिलोरे मार रही है, वहीं दूसरी तरफ परंपराओं के टूटने और कानूनी विवाद के कारण यह यात्रा पूरे क्षेत्र में चर्चा और बहस का सबसे बड़ा विषय बन गई है। अब सभी की निगाहें 20 जुलाई को होने वाली हाई कोर्ट की सुनवाई पर टिक गई हैं, जिससे यह तय होगा कि 116 साल पुराने इस ऐतिहासिक मंदिर के प्रबंधन का ऊंट भविष्य में किस करवट बैठेगा।
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