मेरठ (क्राइम व ग्रामीण डेस्क): उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में दहशत और खौफ का माहौल पैदा कर दिया है। खेतों में खून-पसीना बहाकर अपने परिवार का पेट पालने वाले एक अन्नदाता को आवारा और हिंसक कुत्तों के झुंड ने अपना शिकार बना लिया। जानी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले किठौली गांव में मंगलवार का दिन एक परिवार के लिए ऐसा काल बनकर आया, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।READ ALSO:-गाजियाबाद में सनसनी: ट्रोनिका सिटी की गारमेंट्स फैक्ट्री में कर्मचारी की लव अफेयर के विवाद में कैंची से गोदकर हत्या, आरोपी सहकर्मी गिरफ्तार!
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यहाँ गन्ने के खेत में काम करने गए 58 वर्षीय किसान लख्मी को आवारा कुत्तों ने इस कदर नोचा कि उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद से जहां एक तरफ मृतक के परिवार में मातम पसरा है, वहीं दूसरी तरफ गांव वालों में स्थानीय प्रशासन के प्रति भारी रोष और गुस्सा है।
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कैसे घटी यह रूह कंपा देने वाली घटना? (घटना का पूरा घटनाक्रम)
\r\n\r\nग्रामीण जीवन में सुबह होते ही किसान अपने खेतों की ओर निकल पड़ते हैं। किठौली गांव के रहने वाले 58 वर्षीय लख्मी (पुत्र रामशरण) भी मंगलवार की सुबह करीब 8 बजे अपने गन्ने के खेत में काम करने के लिए निकले थे। उन्हें खेत में गन्ने की बंधाई का काम करना था।
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\r\n\r\nपरिवार वालों के अनुसार, यह उनके लिए एक सामान्य दिन था। दोपहर बीत गई और शाम ढलने लगी, लेकिन लख्मी घर वापस नहीं लौटे। जब शाम के करीब 4 बज गए, तो परिवार वालों को उनकी चिंता सताने लगी। इसी चिंता के बीच लख्मी के बड़े बेटे जितेंद्र ने अपने बेटे (लख्मी के पोते) ईशांत को खेत पर यह देखने के लिए भेजा कि दादा अभी तक घर क्यों नहीं आए हैं और काम कितना बचा है।
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\r\n\r\nपोते ने देखा ऐसा खौफनाक मंजर, उड़ गए होश और कांप गई रूह
\r\n\r\nअपने दादा को बुलाने के लिए ईशांत दौड़ता हुआ गन्ने के खेत पर पहुंचा। लेकिन खेत के अंदर घुसते ही उसने जो दृश्य देखा, वह किसी डरावने सपने से कम नहीं था।
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ईशांत ने देखा कि उसके दादा लख्मी जमीन पर खून से लथपथ गिरे पड़े हैं और उनके चारों तरफ आवारा, खूंखार कुत्तों का एक बड़ा झुंड मौजूद है। कुत्ते उनके शरीर को बेरहमी से नोच रहे थे। यह खौफनाक और विचलित कर देने वाला मंजर देखकर मासूम ईशांत के होश उड़ गए। वह बुरी तरह घबरा गया और डर के मारे वहां से चीखते-चिल्लाते हुए उल्टे पांव वापस गांव की ओर भागा।
\r\n\r\n\r\n\r\nलाठी-डंडे लेकर दौड़ा पूरा गांव, कुत्तों का झुंड मौके से भागा
\r\n\r\nबदहवास हालत में गांव पहुंचे ईशांत ने हांफते हुए अपने परिजनों और आसपास के ग्रामीणों को इस खौफनाक घटना की जानकारी दी। यह खबर पूरे गांव में जंगल की आग की तरह फैल गई।
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ग्रामीणों को जैसे ही पता चला कि कुत्तों ने लख्मी पर हमला कर दिया है, वे बिना एक पल गंवाए अपने-अपने घरों से लाठी, डंडे और जो भी हथियार हाथ लगा, उसे लेकर खेत की ओर दौड़ पड़े। जब ग्रामीणों की भारी भीड़ शोर मचाती हुई खेत में घुसी, तो लोगों का गुस्सा और लाठियां देखकर आवारा कुत्तों का झुंड वहां से भाग खड़ा हुआ। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
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ग्रामीणों ने जब लख्मी के पास जाकर देखा, तो उनकी सांसें थम चुकी थीं। कुत्तों के हिंसक हमले ने उनके शरीर पर गहरे और गंभीर घाव कर दिए थे, जिसके कारण अत्यधिक खून बहने से उनकी मौके पर ही मौत हो चुकी थी।
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ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, एक घंटे तक नहीं उठने दिया शव
\r\n\r\nइस दर्दनाक मौत की सूचना तुरंत स्थानीय जानी थाना पुलिस को दी गई। पुलिस बल आनन-फानन में मौके पर पहुंचा। लेकिन घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने पुलिस का घेराव कर लिया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी।
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गुस्साए ग्रामीणों ने करीब एक घंटे तक लख्मी के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए उठने नहीं दिया। गांव वालों का साफ कहना था कि इलाके में आवारा और जंगली कुत्तों की समस्या कोई नई नहीं है। लंबे समय से यह हिंसक कुत्ते खेतों में काम करने वाले किसानों, महिलाओं और स्कूल जाने वाले मासूम बच्चों के लिए जान का दुश्मन बने हुए हैं। कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन ने इन कुत्तों को पकड़ने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिसका नतीजा आज लख्मी की मौत के रूप में सामने आया है। भारी पुलिस फोर्स और अधिकारियों के समझाने-बुझाने और कड़ी कार्रवाई के आश्वासन के बाद ही ग्रामीण शांत हुए और शव को पुलिस के हवाले किया।
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पीछे छूट गया हंसता-खेलता परिवार, पत्नी और बेटों का रो-रोकर बुरा हाल
\r\n\r\nलख्मी अपने परिवार की रीढ़ थे। उनके आकस्मिक और दर्दनाक निधन से पूरा परिवार गहरे सदमे में है। परिवार में उनकी पत्नी उषा के अलावा दो बेटे, जितेंद्र और अंकुर हैं।
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- \r\n बड़ा बेटा जितेंद्र करीब 34 वर्ष का है, जिसके दो बच्चे (बेटे) हैं।\r\n \r\n
- \r\n छोटा बेटा अंकुर करीब 30 वर्ष का है, जिसका एक बेटा और एक बेटी है।\r\n \r\n
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जैसे ही खेत से लख्मी का क्षत-विक्षत शव घर लाया गया, पूरे घर में चीख-पुकार मच गई। पत्नी उषा का रो-रोकर बुरा हाल है, वह बार-बार बेहोश हो रही हैं। बेटों और पोते-पोतियों की आंखों से आंसू नहीं रुक रहे हैं। पूरे किठौली गांव में इस घटना के कारण मातम पसरा हुआ है और किसी के घर में चूल्हा नहीं जला है।
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पुलिस और प्रशासन का कड़ा रुख: सीओ सरधना का बयान
\r\n\r\nइस संवेदनशील मामले को लेकर पुलिस और प्रशासन अब अलर्ट मोड पर आ गए हैं। मौके पर पहुंचे सीओ (CO) सरधना, आशुतोष कुमार ने घटना की पुष्टि करते हुए विस्तृत जानकारी दी।
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सीओ आशुतोष कुमार ने बताया, "पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाल लिया है। मृतक किसान के शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरवाया गया है और उसे पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेज दिया गया है। मामले की गहनता से जांच की जा रही है।"
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उन्होंने आगे कहा कि ग्रामीणों की शिकायत को गंभीरता से लिया गया है। इस पूरी घटना की सूचना स्थानीय प्रशासन और वन विभाग (Forest Department) की टीम को दे दी गई है। इलाके में दहशत का कारण बने इन आवारा और हिंसक कुत्तों को पकड़ने के लिए जल्द ही एक विशेष अभियान (Dog Catching Drive) चलाया जाएगा, ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
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मेरठ की यह घटना ग्रामीण भारत में आवारा जानवरों के बढ़ते आतंक की एक भयावह तस्वीर पेश करती है। यह केवल एक किसान की मौत नहीं है, बल्कि सिस्टम की उस लापरवाही का भी नतीजा है, जहां आम आदमी की सुरक्षा अक्सर कागजों तक सिमट कर रह जाती है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन का 'अभियान' कितनी जल्दी जमीन पर उतरता है।



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