मेरठ। उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच चरमराती बिजली व्यवस्था और स्मार्ट प्रीपेड मीटरों से आ रहे बेतहाशा बिलों ने आम जनता की कमर तोड़ कर रख दी है। इस ज्वलंत मुद्दे को लेकर मेरठ में समाजवादी पार्टी (सपा) ने कड़ा रुख अपना लिया है। रविवार को समाजवादी पार्टी के विधायकों, पदाधिकारियों और सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने मेरठ स्थित ऊर्जा भवन (पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड का मुख्यालय) का घेराव कर विशाल प्रदर्शन किया। सपा नेताओं ने बिजली विभाग की नीतियों को जनविरोधी बताते हुए स्पष्ट मांग की है कि प्रदेश में तत्काल प्रभाव से स्मार्ट मीटर हटाकर पुराने पोस्टपेड मीटर वापस लगाए जाएं। इसके साथ ही, विभाग के प्रबंध निदेशक (एमडी) को व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए सात दिन का सख्त अल्टीमेटम दिया गया है।READ ALSO:-दुनिया पर मंडरा रहा 150 साल का सबसे बड़ा खतरा! 'मेगा अल नीनो' की आहट से वैज्ञानिक हैरान, जानिए क्या वाकई मचेगी तबाही?
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इस वृहद विरोध प्रदर्शन ने न केवल स्थानीय प्रशासन की नींद उड़ा दी है, बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था की खामियों को राष्ट्रीय विमर्श के पटल पर ला खड़ा किया है। आइए, इस पूरे घटनाक्रम, सपा नेताओं के तीखे बयानों और आम जनता की पीड़ा को विस्तार से समझते हैं।
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सपा कार्यकर्ताओं का ऊर्जा भवन कूच: नारों से गूंजा मेरठ

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विरोध प्रदर्शन की शुरुआत मेरठ स्थित समाजवादी पार्टी के जिला कार्यालय से हुई। जिलाध्यक्ष कर्मवीर सिंह गुमी के नेतृत्व में सुबह से ही पार्टी के नेता और कार्यकर्ता कार्यालय पर जुटने लगे थे। हाथों में तख्तियां, बैनर और पार्टी के झंडे लिए सैकड़ों की संख्या में सपाई जुलूस की शक्ल में सड़क पर उतर आए।
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 UP Smart Meter Protest | SP Calls it Digital Dhokha, Demands Removal

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कड़ी धूप और उमस की परवाह किए बिना, कार्यकर्ताओं का हुजूम बिजली विभाग और प्रदेश सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करता हुआ ऊर्जा भवन की ओर बढ़ा। "स्मार्ट मीटर वापस लो", "बिजली कटौती बंद करो" और "जनता का शोषण बंद करो" जैसे गगनभेदी नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। जैसे ही यह विशाल जुलूस ऊर्जा भवन के मुख्य द्वार पर पहुंचा, वहां का माहौल पूरी तरह से तनावपूर्ण हो गया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद, सपा कार्यकर्ता ऊर्जा भवन के परिसर में दाखिल होने में सफल रहे और एमडी कार्यालय का घेराव कर लिया।
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हंगामा बढ़ता देख और स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए, पीवीवीएनएल के प्रबंध निदेशक (एमडी) रवीश गुप्ता ने तुरंत अपने अधीनस्थ निदेशकों और वरिष्ठ बिजली अधिकारियों को प्रदर्शनकारियों से वार्ता के लिए भेजा।
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'स्मार्ट प्रीपेड मीटर नहीं, यह लूट का मीटर है' - विधायकों का तीखा प्रहार

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ऊर्जा भवन के सभागार में जब बिजली विभाग के अधिकारियों और सपा नेताओं के बीच वार्ता शुरू हुई, तो माहौल काफी तीखा था। सरधना क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के मुखर विधायक अतुल प्रधान और किठौर से विधायक व पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर ने अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई।
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विधायकों ने बेहद आक्रामक अंदाज में कहा कि जिसे सरकार 'स्मार्ट प्रीपेड मीटर' कहकर प्रचारित कर रही है, वह असल में जनता की गाढ़ी कमाई छीनने वाला 'लूट का मीटर' है। उन्होंने कहा कि आज पूरा मेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश इस मीटर की मनमानी से त्रस्त है।
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आंकड़ों से खोली विभाग की पोल: 84% कैसे बढ़ गई खपत?

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विधायक अतुल प्रधान ने वार्ता के दौरान हवा-हवाई बातें करने के बजाय ठोस आंकड़े पेश कर बिजली अधिकारियों को निरुत्तर कर दिया। उन्होंने बताया कि मेरठ और आसपास के क्षेत्रों में 11 लाख बिजली उपभोक्ताओं में से लगभग नौ लाख घरों और प्रतिष्ठानों में पुराने मीटर हटाकर स्मार्ट प्रीपेड मीटर थोप दिए गए हैं।
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अतुल प्रधान ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा प्रस्तुत करते हुए सवाल दागा: "पहले जब सामान्य मीटर लगे थे, तब प्रति भवन औसत बिजली खपत 118 यूनिट हुआ करती थी। लेकिन इन स्मार्ट मीटरों के लगने के बाद अचानक यह औसत खपत बढ़कर 219 यूनिट प्रति भवन कैसे हो गई? क्या रातों-रात जनता ने बिजली का उपयोग दोगुना कर दिया? बिजली की खपत में यह 84 प्रतिशत की छलांग स्पष्ट रूप से इन मीटरों की तकनीकी खामी और विभाग की सोची-समझी लूट को दर्शाती है।"
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उन्होंने कहा कि इन 'फास्ट-रनिंग' (तेज चलने वाले) मीटरों के कारण आम आदमी का बजट पूरी तरह से बिगड़ गया है। गांवों में बैठा किसान, जो पहले से ही मौसम की मार और महंगाई से जूझ रहा है, अब इन भारी-भरकम बिजली बिलों के बोझ तले दबकर आत्महत्या करने को मजबूर हो रहा है।
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"रोटी खाएं या बिजली का बिल भरें?" - जिलाध्यक्ष का सीधा सवाल

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सपा जिलाध्यक्ष कर्मवीर सिंह गुमी ने अधिकारियों की आंखों में आंखें डालते हुए आम जनता का दर्द बयां किया। उन्होंने एमडी रवीश गुप्ता के सामने सीधे सवाल दागे और कहा, "जब से ये स्मार्ट मीटर लगे हैं, आम उपभोक्ता के बिलों में सचमुच आग लग गई है। एक गरीब मजदूर, दिहाड़ी कामगार, छोटे किसान और मध्यम वर्गीय परिवार को आज यह समझ नहीं आ रहा है कि वह अपने बच्चों को दो वक्त की रोटी खिलाए या आपके विभाग के ये हजारों रुपये के बिजली बिल भरे।"
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गुमी ने विभाग की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि तकनीकी खामियों, सर्वर डाउन रहने, बिना रीडिंग लिए मनमाने बिल भेजने और अनियमित बिलिंग ने इस स्मार्ट मीटर व्यवस्था की पूरी पोल खोलकर रख दी है। उपभोक्ता जब शिकायत लेकर बिजली घरों पर जाते हैं, तो उन्हें घंटों लाइनों में खड़ा रखा जाता है और अंततः उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। यह एक प्रकार की तानाशाही है जिसे समाजवादी पार्टी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।
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जनता का खुला शोषण: पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर
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किठौर से विधायक और कद्दावर सपा नेता शाहिद मंजूर ने इस पूरी कवायद को "जनता का खुला शोषण" करार दिया। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर के नाम पर जो खेल चल रहा है, उसकी उच्च स्तरीय और पारदर्शी जांच होनी चाहिए।
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शाहिद मंजूर ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा, "हम यहां ज्ञापन सौंपकर फोटो खिंचवाने नहीं आए हैं। हमें शिकायत पंजिका में दर्ज होकर धूल फांकती हुई फाइलें नहीं चाहिए। हमें धरातल पर समाधान चाहिए। जब एक उपभोक्ता का बैलेंस खत्म होता है तो एक सेकंड में उसकी बिजली काट दी जाती है, लेकिन जब जर्जर तार टूटते हैं या ट्रांसफार्मर फुंकता है, तो उसे ठीक करने में हफ्तों क्यों लग जाते हैं? यह दोहरी नीति नहीं चलेगी।"
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जर्जर इंफ्रास्ट्रक्चर और अघोषित कटौती पर फूटा गुस्सा

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सपा नेताओं का गुस्सा सिर्फ स्मार्ट मीटरों तक सीमित नहीं था। उन्होंने भीषण गर्मी में हो रही अघोषित बिजली कटौती (Unannounced Power Cuts) पर भी भारी रोष प्रकट किया। प्रदेश सरकार द्वारा 24 घंटे बिजली देने के दावों की पोल खोलते हुए सपा नेताओं ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में 10-10 घंटे बिजली गायब रहती है।
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उन्होंने निम्नलिखित प्रमुख मांगें विभाग के सामने रखीं:

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    स्मार्ट मीटरों की वापसी: सभी स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को तुरंत हटाया जाए और उनकी जगह पुराने, विश्वसनीय पोस्टपेड मीटर लगाए जाएं।
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    बिलों में सुधार: जिन उपभोक्ताओं के बिल स्मार्ट मीटर की गड़बड़ी के कारण हजारों-लाखों में आ रहे हैं, उन्हें तुरंत कैंप लगाकर ठीक किया जाए और उनसे कोई अतिरिक्त सरचार्ज या पेनल्टी न वसूली जाए।
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  4. \r\n
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    अघोषित कटौती पर रोक: भीषण गर्मी को देखते हुए शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। रोस्टर के नाम पर की जाने वाली अंधाधुंध कटौती बंद हो।
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    जर्जर ढांचा बदला जाए: हादसों को दावत दे रहे बिजली के जर्जर तारों, ओवरलोड और पुराने ट्रांसफार्मरों, और टेढ़े हो चुके बिजली के खंभों को युद्ध स्तर पर अभियान चलाकर बदला जाए।
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7 दिन का अल्टीमेटम: "नहीं तो सड़कों पर होगा महा-आंदोलन"

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सभागार में चली लंबी और तीखी बहस के बाद विधायक अतुल प्रधान, विधायक शाहिद मंजूर, और जिलाध्यक्ष कर्मवीर सिंह गुमी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल सीधे प्रबंध निदेशक (एमडी) रवीश गुप्ता के कार्यालय पहुंचा। वहां उन्होंने स्पष्ट शब्दों में एक ज्ञापन सौंपा और सात दिन का अल्टीमेटम दिया।
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नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि अगले 7 दिनों के भीतर विभाग ने अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं किया, स्मार्ट मीटर की बिलिंग में पारदर्शिता नहीं लाई गई और जर्जर तारों को बदलने का काम शुरू नहीं किया गया, तो समाजवादी पार्टी पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उग्र आंदोलन छेड़ने के लिए विवश होगी।
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"आज हम ऊर्जा भवन के बाहर आए हैं, यदि 7 दिन में समाधान नहीं हुआ तो हम सड़कों को जाम करेंगे, बिजली दफ्तरों पर ताला जड़ेंगे और इस अंधी-बहरी व्यवस्था के खिलाफ एक ऐसा जन-आंदोलन खड़ा करेंगे जिसकी गूंज लखनऊ तक सुनाई देगी," अतुल प्रधान ने सख्त लहजे में कहा।
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एमडी रवीश गुप्ता का आश्वासन

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सपा के इस कड़े रुख और भारी जन-दबाव के बाद, पीवीवीएनएल के प्रबंध निदेशक रवीश गुप्ता ने मामले की नजाकत को समझते हुए आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि विभाग उपभोक्ताओं की समस्याओं को लेकर संवेदनशील है।
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एमडी ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि:

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    स्मार्ट मीटरों की तेज चलने की शिकायतों की तुरंत तकनीकी जांच कराई जाएगी।
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    बिलिंग संबंधी त्रुटियों को दूर करने के लिए विशेष समाधान शिविर (Camps) लगाए जाएंगे।
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    जर्जर तारों और ट्रांसफार्मरों को बदलने के लिए एक त्वरित कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
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हालांकि, सपा नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे केवल आश्वासनों से पीछे हटने वाले नहीं हैं; वे 7 दिन बाद जमीन पर किए गए कार्यों की समीक्षा करेंगे।
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प्रदर्शन में इन प्रमुख चेहरों की रही मौजूदगी

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ऊर्जा भवन पर हुए इस ऐतिहासिक और उग्र घेराव में समाजवादी पार्टी के कई वरिष्ठ और जमीनी नेता मौजूद रहे, जिन्होंने जनता की आवाज को बुलंद किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से:
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    अतुल प्रधान (विधायक, सरधना)
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    शाहिद मंजूर (विधायक, किठौर व पूर्व मंत्री)
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    कर्मवीर सिंह गुमी (जिलाध्यक्ष, सपा मेरठ)
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    प्रभुदयाल बाल्मीकि (पूर्व विधायक)
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    मृदुला यादव (वरिष्ठ सपा नेत्री)
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    नरवैर सिंह खालसा (वरिष्ठ नेता)
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    योगेंद्र जाटव
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इनके अलावा, युवा विंग, छात्र सभा और महिला मोर्चे के सैकड़ों कार्यकर्ता इस तपती दोपहरी में जनता के हकों की लड़ाई लड़ने के लिए ऊर्जा भवन प्रांगण में डटे रहे।
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मेरठ के ऊर्जा भवन पर समाजवादी पार्टी का यह प्रदर्शन महज एक राजनीतिक घटनाक्रम नहीं है; यह उस गहरे असंतोष और पीड़ा का प्रकटीकरण है जो उत्तर प्रदेश का हर दूसरा बिजली उपभोक्ता आज महसूस कर रहा है। स्मार्ट प्रीपेड मीटर, जिन्हें तकनीकी प्रगति और सहूलियत का नाम देकर पेश किया गया था, आज आम आदमी के लिए एक 'भस्मासुर' साबित हो रहे हैं।
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सपा द्वारा दिया गया 7 दिन का अल्टीमेटम अब बिजली विभाग और सरकार के पाले में गेंद डाल चुका है। देखना यह होगा कि क्या पीवीवीएनएल प्रशासन इन सात दिनों में वास्तव में कोई धरातलीय सुधार ला पाता है, या फिर एक सप्ताह बाद मेरठ की सड़कें एक बार फिर किसी बड़े और उग्र जन-आंदोलन की गवाह बनेंगी। जो भी हो, यह तय है कि 'बिजली और बिल' का यह मुद्दा आगामी समय में राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में सबसे ज्यादा गरमाने वाला है।
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