मेरठ (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर (Smart Prepaid Meter) लगाने के अभियान को लेकर उपभोक्ताओं और विद्युत विभाग के बीच लगातार टकराव की स्थिति बनी हुई है। मेरठ जिले के पॉश और घनी आबादी वाले मोहनपुरी (Mohanpuri) इलाके में यह टकराव तब चरम पर पहुंच गया, जब गुस्साए उपभोक्ताओं ने अपने घरों के बाहर लगे स्मार्ट मीटर खुद ही उखाड़ दिए और उन्हें सीधे बिजलीघर ले जाकर पटक दिया।READ ALSO:-चेन्नई एयरपोर्ट पर खौफनाक मंजर: लैंडिंग के बाद चलती फ्लाइट का इमरजेंसी गेट खोलकर कूदा यात्री, रनवे पर मची भारी अफरा-तफरी
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
हालांकि, प्रशासन की सख्ती और पुलिस केस दर्ज होने के बाद अब हालात बदल गए हैं। विभाग ने उखाड़े गए सभी मीटर वापस लगा दिए हैं, लेकिन उपभोक्ताओं के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। लैब टेस्टिंग की रिपोर्ट, मीटर रिप्लेसमेंट चार्ज और बिजली के 'सुपरफास्ट' बिल ने लोगों की रातों की नींद उड़ा दी है। आइए, इस पूरे घटनाक्रम और इसके हर पहलू को विस्तार से समझते हैं।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

विरोध की चिंगारी: ऊर्जा भवन से लेकर बिजलीघर तक प्रदर्शन

\r\n\r\n
इस पूरे विवाद की शुरुआत करीब पंद्रह दिन पहले हुई थी। सिविल लाइन थाना क्षेत्र (Civil Lines Police Station) के अंतर्गत आने वाले पुरानी मोहनपुरी इलाके की महिलाओं ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कार्यप्रणाली और तेजी से कट रहे बैलेंस को लेकर मोर्चा खोल दिया था।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
स्थानीय निवासियों का स्पष्ट आरोप था कि पुराने साधारण मीटरों की तुलना में इन स्मार्ट मीटरों में बिल कई गुना ज्यादा आ रहा है और रिचार्ज का पैसा रातों-रात खत्म हो रहा है। अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए महिलाओं ने स्थानीय बिजलीघर से लेकर मेरठ स्थित 'ऊर्जा भवन' (Urja Bhavan) तक कई बार शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए। उनकी केवल एक ही मांग थी— उनके घरों से स्मार्ट प्रीपेड मीटर तुरंत उतारे जाएं और उनकी जगह पहले वाले पुराने मीटर (Postpaid Meters) वापस लगाए जाएं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

जब उग्र हुआ आंदोलन और उखाड़ फेंके मीटर

\r\n\r\n
प्रशासनिक स्तर पर जब उपभोक्ताओं की इस जायज मांग और शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं हुई, तो लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। अधिकारियों की अनदेखी के चलते धीरे-धीरे यह आंदोलन उग्र रूप लेने लगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
परेशान महिलाओं और स्थानीय लोगों ने कानून को अपने हाथ में लेते हुए एक बड़ा कदम उठाया। उन्होंने अपने-अपने घरों के बाहर लगे 15 स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को खुद ही दीवारों से उखाड़ लिया। इसके बाद भारी संख्या में लोग न्यू मोहनपुरी स्थित बिजलीघर पहुंचे और वहां उखाड़े गए मीटरों को जमीन पर पटक कर अपना भारी विरोध दर्ज कराया। यह घटना विद्युत विभाग के लिए एक सीधी चुनौती बन गई।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

बैकफुट पर विभाग: फिर दर्ज कराई FIR

\r\n\r\n
लगातार हो रहे इस उग्र प्रदर्शन और मीटर उखाड़े जाने की घटना के कारण बिजली विभाग शुरुआत में पूरी तरह से बैकफुट पर आ गया था। अधिकारियों ने कई बार उपभोक्ताओं को समझाने-बुझाने की कोशिश की, लेकिन महिलाएं किसी भी कीमत पर दोबारा स्मार्ट मीटर लगवाने को राजी नहीं थीं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
जब बातचीत से कोई रास्ता नहीं निकला, तो आखिरकार विभाग ने कानूनी कार्रवाई का सहारा लिया। सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में विद्युत विभाग ने सिविल लाइन थाने में दो नामजद युवकों और 15 से 20 अज्ञात महिलाओं के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा (FIR) दर्ज करा दिया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

पार्षद का नेतृत्व और लिखित समझौते से खत्म हुआ धरना

\r\n\r\n
मुकदमा दर्ज होने के बावजूद उपभोक्ताओं का गुस्सा शांत नहीं हुआ। बुधवार के दिन, एफआईआर (FIR) की परवाह किए बिना महिलाएं स्थानीय पार्षद उत्तम सैनी (Uttam Saini) के नेतृत्व में एक बार फिर न्यू मोहनपुरी बिजली घर पहुंच गईं और अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गईं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
देर रात तक यह धरना-प्रदर्शन चलता रहा। आखिरकार, स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए विद्युत विभाग के उच्चाधिकारियों को हस्तक्षेप करना पड़ा। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से एक लिखित प्रार्थना पत्र (Written Request) लिया और उन्हें भरोसा दिलाया कि उनके घरों पर सुचारू रूप से विद्युत आपूर्ति बहाल की जाएगी और मीटर वापस लगाए जाएंगे। इस आश्वासन के बाद ही धरना समाप्त हुआ।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

लैब टेस्टिंग का चौंकाने वाला नतीजा: 15 में से 12 मीटर निकले 'डैमेज'

\r\n\r\n
धरना खत्म होने के बाद विभाग ने अपनी तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू की। जिन 15 मीटरों को महिलाओं ने उखाड़कर बिजलीघर पर फेंका था, उन सभी को जांच के लिए तुरंत 'लैब टेस्टिंग' (Lab Testing) के लिए भेज दिया गया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
अगले ही दिन जब लैब से टेस्टिंग रिपोर्ट वापस आई, तो विभाग के अधिकारी भी हैरान रह गए। रिपोर्ट के अनुसार, 15 में से 12 स्मार्ट मीटर पूरी तरह से खराब या 'डैमेज' हो चुके थे। उखाड़ने और फेंकने के दौरान किसी मीटर की डिजिटल स्क्रीन टूट चुकी थी, तो किसी का बाहरी आवरण (Body) चकनाचूर हो गया था। ऐसे में इन डैमेज मीटरों को दोबारा इंस्टॉल करना तकनीकी रूप से संभव नहीं था।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

उपभोक्ताओं पर गिरी दोहरी मार: देना होगा मीटर चार्ज

\r\n\r\n
लैब रिपोर्ट आने के बाद विभाग ने सख्त फैसला लिया है। विभागीय नियमावली (Departmental Rules) का हवाला देते हुए यह तय किया गया है कि जिन उपभोक्ताओं के मीटर टूट गए हैं, उन्हें पुराने मीटर की कीमत या नए मीटर का शुल्क (Meter Replacement Charge) अपनी जेब से भरना होगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
अधिकारियों ने सभी 15 घरों में नए या सही किए गए मीटर वापस लगवा दिए हैं और बिजली की आपूर्ति (Power Supply) फिर से शुरू कर दी है। लेकिन, सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि मीटर वापस लगाते समय विभाग ने किसी भी उपभोक्ता को इस बात की आधिकारिक जानकारी नहीं दी कि उन्हें मीटर शुल्क के रूप में कितनी अतिरिक्त राशि का भुगतान करना होगा। यह राशि सीधे उनके आगामी बिल या प्रीपेड बैलेंस में जोड़कर काटी जाएगी, जो उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ा आर्थिक झटका साबित होगी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

3 दिन में माइनस 939 रुपये पहुंचा बैलेंस: एक आम परिवार की व्यथा

\r\n\r\n
इस पूरे घटनाक्रम के बीच असली समस्या जस की तस बनी हुई है— वह है बिजली के अनाप-शनाप बिल। मोहनपुरी निवासी वीरेंद्र का दर्द इस पूरी व्यवस्था की पोल खोलता है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
वीरेंद्र ने बताया कि उनका मीटर भी उखाड़ा गया था। विवाद सुलझने के बाद जिस दिन उनके घर पर दोबारा मीटर लगाया गया, उसी दिन उन्होंने 500 रुपये का प्रीपेड रिचार्ज कराया था। लेकिन महज तीन दिन के अंदर उनका बैलेंस न केवल जीरो हो गया, बल्कि स्मार्ट मीटर का आधिकारिक ऐप उनका बैलेंस माइनस 939 रुपये (-₹939) दिखा रहा है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
यानी तीन दिन में उनके घर का बिजली बिल लगभग 1439 रुपये कट चुका है। वीरेंद्र का कहना है कि उनके घर में बिजली की खपत बेहद सामान्य है— केवल एक फ्रिज, एक कूलर और सुबह के समय एक निश्चित अवधि के लिए पानी की मोटर चलती है। इतनी कम खपत में तीन दिन में 1400 रुपये से ज्यादा का बिल आना किसी भी मध्यमवर्गीय परिवार के लिए समझ से परे और कमर तोड़ने वाला है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

FIR के खौफ ने साधी चुप्पी: अब बोलने को तैयार नहीं लोग

\r\n\r\n
पुलिस की एफआईआर (FIR) ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। जिन परिवारों ने मीटर उखाड़ने की इस मुहिम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था, अब वे पूरी तरह से खामोश हो गए हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
सिविल लाइन थाने में दर्ज रिपोर्ट का पता चलने के बाद से विरोध करने वाले परिवारों में दहशत का माहौल है। कोई भी व्यक्ति अब मीडिया या अधिकारियों के सामने स्मार्ट मीटर पर बात करने से भी कतरा रहा है। यदि कोई एकाध व्यक्ति अपनी समस्या बताने की कोशिश भी करता है, तो पुलिस केस के डर से उसके परिवार के अन्य सदस्य उसे तुरंत शांत करा देते हैं। लोगों को डर है कि कहीं उनके खिलाफ कोई बड़ी कानूनी कार्रवाई न हो जाए।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

अधिकारियों का स्पष्ट रुख: "वसूला जाएगा पूरा शुल्क"

\r\n\r\n
इस पूरे मामले पर विद्युत विभाग का रुख बेहद सख्त और स्पष्ट है। सुपरिटेंडेंट इंजीनियर (SE) मोहम्मद अरशद ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए बताया है कि:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
"सभी 15 उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट मीटर वापस इंस्टॉल कर दिए गए हैं और बिजली सप्लाई चालू है। कुल 15 उखाड़े गए मीटरों में से 12 मीटर लैब टेस्टिंग के दौरान डैमेज और खराब स्थिति में मिले हैं। इन सभी खराब मीटरों को हटाकर उनकी जगह नए मीटर लगा दिए गए हैं। सरकारी नियमों के तहत, मीटर को नुकसान पहुंचाने के कारण नए मीटर का पूरा शुल्क संबंधित उपभोक्ताओं के खाते से ही वसूला जाएगा।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

समाधान की बजाय उलझती व्यवस्था

\r\n\r\n
मेरठ के मोहनपुरी का यह मामला केवल एक इलाके की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को लेकर चल रहे अविश्वास और प्रशासनिक सख्ती का एक जीता-जागता उदाहरण है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
एक तरफ जहां उपभोक्ता बेतहाशा कट रहे बिलों और तकनीकी खामियों से त्रस्त हैं, वहीं दूसरी तरफ विभाग अपनी नियमावली और पुलिस कार्रवाई के दम पर योजना को लागू करने पर अड़ा है। इस तरह के टकराव से न तो व्यवस्था सुधरेगी और न ही राजस्व में कोई वास्तविक वृद्धि होगी। सरकार और ऊर्जा विभाग को चाहिए कि वह स्मार्ट मीटरों की प्रोग्रामिंग (Billing Algorithm) का स्वतंत्र ऑडिट कराए और उपभोक्ताओं के मन में बैठे डर और अविश्वास को दूर करे, ताकि लोगों को यह न लगे कि 'स्मार्ट' तकनीक के नाम पर उन्हें लूटा जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन