नई दिल्ली/मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद में दलित समाज पर कथित प्रशासनिक अत्याचार और उनके पुश्तैनी रोजगार को छीने जाने के खिलाफ अब आवाज राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक पहुंच गई है। मेरठ के गांव डूंगर में दलित समुदाय की चर्म शोधन (Leather Tanning) इकाइयों पर प्रशासन द्वारा अचानक की गई सीलिंग की कार्रवाई के विरोध में 'शोषित क्रांति दल' (SKD) ने कड़ा मोर्चा खोल दिया है।READ ALSO:-देश के खजाने पर 294 करोड़ का डाका: 37 फर्जी कंपनियों के जाल से लेकर 'हवाला' तक का सफर, कोर्ट ने मास्टरमाइंड आकिब की जमानत की खारिज
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली स्थित मुख्यालय पहुंचकर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के अध्यक्ष किशोर मकवाना से औपचारिक मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने आयोग के समक्ष एक विस्तृत शिकायती पत्र सौंपते हुए मेरठ जिला प्रशासन की कार्रवाई को अन्यायपूर्ण, मनमाना और दलितों पर सीधा अत्याचार करार दिया है। दल ने मांग की है कि इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप कर पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाया जाए।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

क्या है पूरा विवाद? पुश्तैनी काम और सरकारी अनुबंध की अनदेखी

\r\n\r\n
शोषित क्रांति दल द्वारा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को सौंपे गए शिकायती पत्र में पूरे घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा दिया गया है। विवाद का मुख्य केंद्र मेरठ जिले का 'डूंगर' गांव है, जहां दलित समाज के लोग पीढ़ियों से अपने पुश्तैनी काम यानी चर्म शोधन (मरे हुए पशुओं के चमड़े को साफ करने और पकाने का काम) से अपनी आजीविका चलाते आ रहे हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
सरकारी सहयोग और इकाइयां: ज्ञापन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि दलित समाज के ये लोग कोई अवैध कार्य नहीं कर रहे थे। खुद उत्तर प्रदेश सरकार के 'जिला ग्राम्य विकास अभिकरण' (DRDA) ने इन गरीब परिवारों के उत्थान और रोजगार को व्यवस्थित करने के लिए इन्हें चर्म शोधन इकाइयां (Tanning Units) बनाकर दी थीं। संगठन के अनुसार, इन इकाइयों के संचालन का सरकारी अनुबंध (Contract) 17 जून 2024 तक पूरी तरह से वैध था (या पूर्व में किए गए अनुबंध के आधार पर यह कार्य संचालित था)। इसके बावजूद प्रशासन ने बिना किसी विधिक प्रक्रिया का पालन किए इन गरीब मजदूरों के रोजगार पर ताला जड़ दिया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

13 अप्रैल 2026 का वह दिन: जब छिन गई 150 परिवारों की रोजी-रोटी

\r\n\r\n
शोषित क्रांति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत ने NCSC अध्यक्ष को बताया कि मेरठ जिला प्रशासन की तानाशाही का सबसे वीभत्स रूप 13 अप्रैल 2026 को देखने को मिला।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    बिना नोटिस हुई कार्रवाई: आरोप है कि प्रशासन ने किसी भी प्रकार की पूर्व सूचना, कारण बताओ नोटिस या चेतावनी दिए बिना अचानक गांव में दबिश दी और दलितों की इन वैध चर्म शोधन इकाइयों पर सील लगा दी।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    लाखों का कच्चा माल बर्बाद: चमड़े का काम एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें कच्चे माल (Raw Material) को समय पर प्रोसेस करना होता है। सीलिंग इतनी जल्दबाजी में की गई कि चर्म शोधकों को अपनी इकाइयों में रखा कच्चा माल समेटने या खत्म करने तक का समय नहीं दिया गया। नतीजतन, इकाइयों के अंदर रखा लाखों रुपये की कीमत का कच्चा माल अब पूरी तरह सड़कर बेकार हो चुका है, जिससे इन परिवारों की कमर टूट गई है।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

भुखमरी की कगार पर पहुंचे मजदूर, आर्थिक और मानसिक प्रताड़ना का आरोप

\r\n\r\n
प्रशासन की इस एकतरफा कार्रवाई का सबसे बड़ा और दुखद प्रभाव वहां के निवासियों के जीवन पर पड़ा है। शिकायती पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि रोजगार छिनने और लाखों रुपये का माल बर्बाद होने के कारण गांव डूंगर के करीब डेढ़ सौ (150) दलित परिवार आज भुखमरी की कगार पर आ गए हैं।
\r\n\r\n
दल के नेताओं का कहना है कि:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
\r\n
"यह केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह जानबूझकर दलितों को आर्थिक रूप से कमजोर करने और उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन करने की साजिश है। जिन परिवारों का पेट दिन भर की मजदूरी और इसी पुश्तैनी काम से पलता था, उनके सामने आज अपने बच्चों को दो वक्त की रोटी खिलाने का संकट खड़ा हो गया है। यह सरासर दलितों पर अत्याचार है।"
\r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

NCSC अध्यक्ष से की गई ये प्रमुख मांगें

\r\n\r\n
शोषित क्रांति दल के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाना के सामने स्थिति की गंभीरता को रखते हुए निम्नलिखित त्वरित कदम उठाने का अनुरोध किया है:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    तत्काल सील हटाई जाए: मेरठ जिला प्रशासन को आयोग की तरफ से सख्त निर्देश जारी किए जाएं कि वह बिना किसी देरी के गांव डूंगर की चर्म शोधन इकाइयों से सील हटाए।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    रोजगार की बहाली: दलित समाज के लोगों को उनका पुश्तैनी कार्य सुचारू रूप से दोबारा शुरू करने दिया जाए ताकि वे अपने परिवारों का भरण-पोषण कर सकें।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    नुकसान की भरपाई: प्रशासन की लापरवाही और जल्दबाजी के कारण जो लाखों रुपये का कच्चा माल सड़ा है, उसकी निष्पक्ष जांच कराकर पीड़ित परिवारों को उचित सरकारी मुआवजा दिलाया जाए।
    \r\n
  6. \r\n
  7. \r\n
    दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई: दलितों को बिना नोटिस प्रताड़ित करने वाले जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
    \r\n
  8. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

प्रतिनिधिमंडल में ये प्रमुख चेहरे रहे मौजूद

\r\n\r\n
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के समक्ष मेरठ के दलितों की इस पीड़ा को मजबूती से रखने के लिए शोषित क्रांति दल के कई वरिष्ठ और स्थानीय पदाधिकारी मौजूद रहे। मुलाकात के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत जी के साथ मुख्य रूप से निम्नलिखित नेता शामिल थे:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    वरुण कुमार (मेरठ महानगर अध्यक्ष)
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    रोहित यादव
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    संजीव कुमार
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    चिरंजी लाल
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    गुलशन कुमार
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    चंद्रपाल
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    नरेंद्र अग्रवाल
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
आगे की राह: आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना है और शिकायती पत्र प्राप्त कर लिया है। अब मेरठ के दलित समाज और शोषित क्रांति दल को उम्मीद है कि देश का सर्वोच्च दलित अधिकार निकाय (NCSC) जल्द ही इस मामले में मेरठ जिला प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब तलब करेगा और पीड़ित परिवारों को न्याय व उनका रोजगार वापस दिलाएगा। दल ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सील नहीं खोली गई, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से अपना आंदोलन और तेज करने को विवश होंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन