बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर (Dr BR Ambedkar) की 135वीं जयंती के अवसर पर अब्दुल्लापुर हुसैनी चौक पर शिया मुसलमानों (Shia Muslims) ने भाईचारे का संदेश दिया। उन्होंने अंबेडकर यात्रा का शरबत और
अब्दुल्लापुर से होकर गुजरने वाली भव्य अंबेडकर जयंती यात्रा का स्थानीय शिया मुस्लिम (Shia Muslims) समुदाय ने बेहद गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। यह आयोजन यह संदेश देने के लिए काफी था कि बाबा साहेब के विचार और उनका लिखा संविधान देश के हर नागरिक और हर धर्म के लोगों को एक सूत्र में पिरोने का काम करता है।
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@khabreelal_news बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर अब्दुल्लापुर हुसैनी चौक पर शिया मुसलमानों ने भाईचारे का संदेश दिया। उन्होंने अंबेडकर यात्रा का शरबत और कोल्ड ड्रिंक बांटकर स्वागत किया। इस मौके पर पूर्व पार्षद शौकत अली सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। pic.twitter.com/H2WhwJQqXx
मंगलवार को जब बाबा साहेब की जयंती के उपलक्ष्य में निकाली जा रही विशाल पदयात्रा हुसैनी चौक के पास पहुंची, तो वहां पहले से ही स्वागत की शानदार तैयारियां की गई थीं। अप्रैल महीने की इस चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी के बीच यात्रा में शामिल लोगों को राहत पहुंचाने के लिए शिया समुदाय के लोगों ने स्टॉल लगा रखे थे।
यात्रा में शामिल पदयात्रियों, युवाओं और महिलाओं को रोक-रोक कर प्रेमपूर्वक ठंडा शरबत और कोल्ड ड्रिंक पिलाई गई। इस दौरान "बाबा साहेब अमर रहें" के नारों के साथ-साथ आपसी प्रेम और सौहार्द की भावना स्पष्ट रूप से देखने को मिली। पदयात्रियों ने भी इस सत्कार के लिए मुस्लिम समुदाय का तहे दिल से शुक्रिया अदा किया।
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कार्यक्रम में शामिल प्रमुख गणमान्य चेहरे
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हुसैनी चौक पर आयोजित इस स्वागत समारोह में शिया समुदाय के कई प्रमुख लोगों और समाजसेवियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस नेक काम की अगुवाई करते हुए सभी ने खुद अपने हाथों से लोगों को शरबत बांटा।
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इस विशेष अवसर पर मुख्य रूप से:
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मो. अमीर
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फैसल अली
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मेंहदी हसन
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फैसल
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पूर्व पार्षद शौकत अली
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मंसूर नक़वी
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सहित इलाके के कई अन्य गणमान्य व्यक्ति और युवा मौजूद रहे। पूर्व पार्षद शौकत अली ने इस मौके पर कहा कि बाबा साहेब ने देश को ऐसा संविधान दिया है जो सभी को बराबरी का हक देता है। उनकी जयंती सिर्फ किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि पूरे देश का त्योहार है।
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एकता और भाईचारे का कड़ा संदेश
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आज के दौर में जहां अक्सर समाज में नफरत फैलाने की कोशिशें की जाती हैं, वहां अब्दुल्लापुर के हुसैनी चौक से आई यह तस्वीर उन सभी ताकतों के लिए एक कड़ा संदेश है। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि भारतीय समाज की जड़ें आपसी सम्मान और एकता से गहराई से जुड़ी हुई हैं। डॉ. अंबेडकर का सपना भी एक ऐसे ही प्रबुद्ध और समतामूलक समाज का था, जहां धर्म या जाति के आधार पर कोई भेदभाव न हो। शिया समुदाय द्वारा अंबेडकर यात्रा का यह स्वागत बाबा साहेब के उसी सपने को साकार करने की दिशा में एक छोटा लेकिन बेहद प्रभावशाली कदम है।
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