मेरठ। उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों की तरह मेरठ में भी सूर्य देव का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। अभी सूर्य के विशेष प्रभाव वाला 'नौतपा' शुरू होने में चार दिन का समय शेष है, लेकिन उससे पहले ही मेरठ का पारा आसमान छू रहा है। सुबह की शुरुआत होते ही तपन और चिलचिलाती धूप लोगों को झुलसाने लगती है, जिसका असर देर रात तक गर्म हवाओं (लू) के रूप में बना रहता है। इस भीषण मौसमी संकट को देखते हुए मेरठ स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. अशोक कटारिया के नेतृत्व में शहरवासियों को हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए युद्धस्तर पर विशेष इंतजाम किए गए हैं।READ ALSO:-मेरठ IIMT यूनिवर्सिटी के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज: फीस और हाजिरी के दबाव में MBA छात्रा ने किया सुसाइड, 22 घंटों से गेट पर डटे आक्रोशित छात्र
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सरकारी स्तर पर की गई इन तैयारियों के साथ-साथ निजी अस्पतालों के वरिष्ठ डॉक्टरों ने भी आम जनता के लिए विशेष मेडिकल एडवाइजरी जारी की है, ताकि लोग इस जानलेवा गर्मी के प्रकोप से खुद को सुरक्षित रख सकें।
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सरकारी दफ्तरों और सार्वजनिक जगहों पर बने 'ORS कॉर्नर'
\r\n\r\nगर्मी के इस मौसम में सबसे बड़ी समस्या शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) और अचानक चक्कर खाकर गिरने की होती है। इसे रोकने के लिए मेरठ के प्रमुख सरकारी कार्यालयों और व्यस्त सार्वजनिक स्थानों पर विशेष 'ORS कॉर्नर' स्थापित किए गए हैं।
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- \r\n तुरंत मिलेगी मदद: सीएमओ डॉ. अशोक कटारिया ने बताया कि इन कॉर्नर्स पर न केवल ओआरएस (ORS) के पैकेट मुफ्त उपलब्ध कराए जा रहे हैं, बल्कि आपातकालीन स्थिति के लिए आवश्यक दवाएं भी रखी गई हैं।\r\n \r\n
- \r\n दवाओं का स्टॉक: इनमें तेज बुखार, उल्टी, दस्त और डिहाइड्रेशन से तुरंत राहत देने वाली जीवनरक्षक दवाएं शामिल हैं, ताकि धूप से झुलसकर आने वाले किसी भी नागरिक को मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया जा सके।\r\n \r\n
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अधिकारियों की कार अब बनेगी 'चलता-फिरता' मेडिकल स्टोर
\r\n\r\nस्वास्थ्य विभाग ने एक अनोखी और सराहनीय पहल करते हुए जिला स्तरीय प्रशासनिक अधिकारियों की सरकारी गाड़ियों में भी एक 'इमर्जेंसी मेडिकल किट' रखवाई है। इस किट में ओआरएस घोल, ग्लूकोज और गर्मी से संबंधित बीमारियों की प्राथमिक दवाएं हर समय मौजूद रहेंगी। यदि फील्ड में निरीक्षण के दौरान कोई भी नागरिक या राहगीर गर्मी से बेहाल या बीमार नजर आता है, तो अधिकारी अपनी गाड़ी में मौजूद किट से उसे तुरंत राहत सामग्री और दवाएं उपलब्ध करा सकेंगे। इसके अलावा जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और जिला अस्पताल को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है।
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हीट स्ट्रोक मरीजों के लिए विशेष 'कोल्ड रूम' की व्यवस्था
\r\n\r\nअत्यधिक तापमान के कारण जब शरीर का थर्मल रेगुलेशन सिस्टम काम करना बंद कर देता है, तो मरीज 'हीट स्ट्रोक' (सांप सूंघना या लू लगना) का शिकार हो जाता है। ऐसे मरीजों का तापमान तुरंत सामान्य करना सबसे पहली प्राथमिकता होती है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने विशेष व्यवस्था की है:
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| \r\n अस्पताल/केंद्र का नाम \r\n | \r\n \r\n की गई व्यवस्था \r\n | \r\n \r\n मुख्य उद्देश्य \r\n | \r\n
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| \r\n जिला अस्पताल, मेरठ \r\n | \r\n \r\n विशेष एयर-कंडीशंड 'कोल्ड रूम' \r\n | \r\n \r\n हीट स्ट्रोक के गंभीर मरीजों को तुरंत भर्ती करना \r\n | \r\n
| \r\n मेडिकल कॉलेज अस्पताल \r\n | \r\n \r\n रैपिड कूलिंग बेड और कोल्ड रूम \r\n | \r\n \r\n शरीर के ऊंचे तापमान को बर्फ व अन्य संसाधनों से तेजी से कम करना \r\n | \r\n
| \r\n किठौर सीएचसी (CHC) \r\n | \r\n \r\n ग्रामीण क्षेत्र हेतु कोल्ड रूम \r\n | \r\n \r\n ग्रामीण इलाकों के मरीजों को स्थानीय स्तर पर त्वरित इलाज देना \r\n | \r\n
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मौसम वैज्ञानिक की चेतावनी: आने वाले दिनों में और बढ़ेगी तपिश
\r\n\r\nमेरठ के प्रसिद्ध मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही के अनुसार, वर्तमान स्थिति केवल शुरुआत है। आने वाले दिनों में, विशेषकर नौतपा के दौरान, तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है। सूखी पश्चिमी हवाएं और थार मरुस्थल की तपन मैदानी इलाकों को और प्रभावित करेगी, जिससे लू के थपेड़े तेज होंगे। उन्होंने विशेष रूप से हिदायत दी है कि दोपहर के समय अत्यंत आवश्यक काम होने पर ही बाहर निकलें और बच्चों व बुजुर्गों को घर के ठंडे वातावरण में ही रखें, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण वे हीट स्ट्रोक की चपेट में जल्दी आते हैं।
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मेडिकल गाइड: गर्मी और लू से बचाव के लिए बरतें ये 5 सावधानियां
\r\n\r\nअगर आपको इस मौसम में काम के सिलसिले में घर से बाहर निकलना ही पड़ता है, तो डॉक्टरों द्वारा सुझाई गई इन सावधानियों का कड़ाई से पालन करें:
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- \r\n तरल पदार्थों का सेवन बढ़ाएं (Keep Hydrated): शरीर में पानी की कमी कतई न होने दें। सादे पानी के अलावा दिनभर में नींबू पानी, पुदीने का रस, छाछ, नारियल पानी और ओआरएस घोल का लगातार सेवन करते रहें।\r\n \r\n
- \r\n पीक ऑवर्स में बाहर जाने से बचें: दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक सूरज की किरणें सबसे तीखी और खतरनाक होती हैं। इस दौरान सीधी धूप में निकलने से बचें। यदि जाना अनिवार्य हो, तो सिर पर छाता, टोपी या सूती गमछा जरूर बांधें।\r\n \r\n
- \r\n पहनावे पर दें ध्यान: गहरे रंग और सिंथेटिक कपड़ों से बचें। बाहर निकलते समय हमेशा ढीले, हल्के रंग के और शुद्ध सूती (Cotton) कपड़े पहनें, ताकि शरीर की त्वचा हवा के संपर्क में रहे और पसीना आसानी से सूख सके।\r\n \r\n
- \r\n खान-पान में बदलाव: इस मौसम में गरिष्ठ, ज्यादा तला-भुना और अत्यधिक मसालेदार भोजन खाने से पाचन तंत्र बिगड़ सकता है। इसके बजाय अपने आहार में तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी और लौकी जैसी पानी से भरपूर मौसमी सब्जियों और फलों को शामिल करें।\r\n \r\n
- \r\n इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज: यदि आपको या आपके आसपास किसी को अचानक चक्कर आना, तेज सिरदर्द, मतली (उल्टी होना), अत्यधिक कमजोरी या बिना पसीना आए तेज बुखार महसूस हो, तो उसे तुरंत किसी छायादार या ठंडी जगह पर ले जाएं, शरीर पर ठंडे पानी की पट्टियां रखें और बिना देर किए नजदीकी अस्पताल या डॉक्टर से संपर्क करें।\r\n \r\n
Sabse pehle comment karne wale banein.