खबरीलाल विशेष रिपोर्ट | मेरठ: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) शहर में ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution) और 'वीआईपी कल्चर' (VIP Culture) के नाम पर वाहनों में अवैध हूटर और मॉडिफाइड साइलेंसर लगाकर दहशत फैलाने वालों की अब खैर नहीं है। मेरठ के परिवहन विभाग ने ऐसे वाहन चालकों और इन उपकरणों को लगाने वाले वर्कशॉप संचालकों (मैकेनिकों) के खिलाफ एक बड़ा और सख्त अभियान छेड़ने का बिगुल फूंक दिया है।READ ALSO:-मेरठ-बागपत के ग्रामीण एथलीटों के लिए ऐतिहासिक सौगात: रासना गांव में बनेगा इंटरनेशनल स्तर का 'सिंथेटिक ट्रैक', अब धूल-मिट्टी में नहीं बल्कि विश्वस्तरीय मैदान पर दौड़ेंगे युवा
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हाल ही में शहर के शास्त्रीनगर स्थित संभागीय परिवहन कार्यालय (RTO Office) में वाहन डीलरों और वर्कशॉप संचालकों की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में परिवहन विभाग के उच्चाधिकारियों ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि यदि किसी भी वर्कशॉप में वाहनों के भीतर अवैध रूप से प्रेशर हॉर्न, हूटर या तेज आवाज वाले मॉडिफाइड साइलेंसर लगाए गए, तो संचालक पर 1 लाख रुपये तक का भारी-भरकम जुर्माना लगाया जाएगा। खबरीलाल (Khabreelal) की इस विस्तृत रिपोर्ट में आइए जानते हैं विभाग के नए और सख्त दिशा-निर्देश क्या हैं।
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साइलेंसर की 'पटाखा' आवाज और हूटर पर लगा पूर्ण प्रतिबंध
\r\n\r\nमेरठ शहर की सड़कों पर अक्सर बुलेट जैसी भारी मोटरसाइकिलों से तेज 'पटाखा' (Firecracker sound) जैसी आवाज निकालते हुए युवा देखे जाते हैं। इसके अलावा, कई निजी कारों में अवैध रूप से पुलिस या वीआईपी हूटर और प्रेशर हॉर्न (Pressure Horns) लगा लिए जाते हैं, जिससे आम जनता, बुजुर्गों और मरीजों को भारी असुविधा व ध्वनि प्रदूषण का सामना करना पड़ता है।
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इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए आरटीओ (RTO) विभाग ने सीधे उन दुकानों और वर्कशॉप्स पर शिकंजा कसने की रणनीति बनाई है, जहां ये अवैध उपकरण बेचे और वाहनों में फिट किए जाते हैं। अधिकारियों ने बैठक में मौजूद सभी डीलरों और सर्विस सेंटर संचालकों को सख्त हिदायत दी है कि वे किसी भी ग्राहक के वाहन में कंपनी द्वारा दिए गए ऑरिजिनल (Original) साइलेंसर और हॉर्न के साथ कोई छेड़छाड़ न करें।
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वर्कशॉप संचालकों और मैकेनिकों के लिए कड़े दंड का प्रावधान
\r\n\r\nबैठक में अधिकारियों ने मोटर वाहन अधिनियम और ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण नियमों का हवाला देते हुए कड़े दंड के प्रावधानों से अवगत कराया।
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- \r\n 1 लाख रुपये का जुर्माना: यदि कोई भी वर्कशॉप संचालक, मैकेनिक या डीलर किसी वाहन में मॉडिफाइड साइलेंसर (Modified Silencer), प्रेशर हॉर्न या हूटर लगाता हुआ या बेचता हुआ पाया गया, तो उस पर ध्वनि प्रदूषण फैलाने के आरोप में 1 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके साथ ही वर्कशॉप का लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है।\r\n \r\n
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वाहन मालिकों को जाना पड़ सकता है जेल
\r\n\r\nकेवल मैकेनिक ही नहीं, बल्कि शौक के लिए अपनी बाइकों और कारों में इन अवैध उपकरणों को लगवाने वाले वाहन मालिकों के लिए भी नियम बेहद सख्त कर दिए गए हैं।
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- \r\n 6 माह का कारावास: ऐसे अवैध उपकरणों का उपयोग करते हुए पकड़े जाने पर वाहन स्वामी को छह महीने तक की जेल (कारावास) की सजा हो सकती है।\r\n \r\n
- \r\n 5 हजार रुपये का नकद जुर्माना: जेल के साथ-साथ वाहन मालिक पर 5,000 रुपये का चालान या नकद जुर्माना भी लगाया जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n ड्राइविंग लाइसेंस (DL) होगा अयोग्य: सबसे बड़ी कार्रवाई के तहत, दोषी पाए जाने वाले चालक का ड्राइविंग लाइसेंस (Driving License) तीन महीने (3 Months) की अवधि के लिए निलंबित (Suspend) कर दिया जाएगा, जिससे वह इस दौरान कोई भी वाहन चलाने के अयोग्य हो जाएगा।\r\n \r\n
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आम जनता के लिए जारी किए गए हेल्पलाइन नंबर
\r\n\r\nबैठक के दौरान परिवहन विभाग ने आम जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबरों की भी जानकारी दी। यदि सड़क पर कोई वाहन तेज प्रेशर हॉर्न, हूटर या मॉडिफाइड साइलेंसर के साथ ध्वनि प्रदूषण फैलाता हुआ नजर आता है, तो कोई भी नागरिक सीधे विभाग को इसकी शिकायत कर सकता है।
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- \r\n हेल्पलाइन नंबर: आम जनता अपनी शिकायत परिवहन विभाग के टोल-फ्री नंबर 18001800151 और शॉर्ट कोड 149 पर दर्ज करा सकती है। शिकायतकर्ता की जानकारी गुप्त रखी जाएगी और दोषी वाहन पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी।\r\n \r\n
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बैठक में इन अधिकारियों की रही मौजूदगी
\r\n\r\nशास्त्रीनगर आरटीओ कार्यालय में आयोजित इस महत्वपूर्ण और सख्त निर्देश वाली बैठक में परिवहन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इनमें मुख्य रूप से आरटीओ अनीता सिंह (RTO Anita Singh), आरटीओ (प्रवर्तन) अंबरीश कुमार, एआरटीओ राजेश कर्दम (ARTO Rajesh Kardam), एआरटीओ यूतिका सिंह और यात्रीकर अधिकारी प्रीति पांडेय शामिल रहीं।
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सभी अधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि सड़क सुरक्षा और शहर को ध्वनि प्रदूषण से मुक्त रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए ट्रैफिक पुलिस (Traffic Police) और परिवहन विभाग की संयुक्त टीमें आने वाले दिनों में शहर के विभिन्न चौराहों और प्रमुख मार्गों पर सघन चेकिंग अभियान चलाएंगी।
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निष्कर्ष: मेरठ आरटीओ का यह कदम शहरवासियों के लिए एक बड़ी राहत है, जो सड़कों पर दौड़ते मॉडिफाइड वाहनों के शोर से परेशान थे। वाहन चालकों और मैकेनिकों के लिए यह एक स्पष्ट चेतावनी है कि शौक और नियमों के उल्लंघन की कीमत अब बहुत भारी पड़ने वाली है। परिवहन विभाग की इस कार्रवाई और मेरठ शहर की हर प्रामाणिक खबर के लिए लगातार जुड़े रहें खबरीलाल (Khabreelal) के साथ।
Sabse pehle comment karne wale banein.