उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद में दलित समाज की महिलाओं पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी और टीपी नगर थाना पुलिस की कार्यप्रणाली का मामला अब तूल पकड़ चुका है। दिल्ली स्थित राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने इस संवेदनशील मामले में सीधे दखल देते हुए मेरठ के प्रशासनिक और पुलिस महकमे को नोटिस जारी किया है।READ ALSO:-मेरठ: दलित समाज पर अमर्यादित टिप्पणी मामले में SC-ST एक्ट न लगाने से भड़का शोषित क्रांति दल, टीपी नगर SHO के खिलाफ निकाला जुलूस, सीओ ब्रह्मपुरी का घेराव कर सौंपा ज्ञापन
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क्या है पूरा मामला?

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यह पूरा घटनाक्रम एंटी करप्शन फाउंडेशन ऑफ इंडिया के मेरठ जिला युवा अध्यक्ष मयंक वर्मा द्वारा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में की गई एक आधिकारिक शिकायत से जुड़ा है।
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शिकायत पत्र के अनुसार, बीते 6 अगस्त 2026 को थाना टीपी नगर क्षेत्र के मोहकमपुर एवं शिवपुरम इलाके में चार युवकों द्वारा हाईवे पर तेज रफ्तार बाइक से स्टंटबाजी की जा रही थी। आरोप है कि इस दौरान वहां से गुजर रहीं अनुसूचित जाति (दलित) समाज की महिलाओं को निशाना बनाकर इन युवकों ने खुलेआम जातिसूचक शब्दों, अत्यंत अभद्र और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसे शिकायत का मुख्य आधार बनाया गया है।
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पुलिसिया कार्रवाई पर उठे सवाल: FIR में नहीं लगाई गई SC/ST एक्ट की धाराएं

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शिकायतकर्ता मयंक वर्मा ने आयोग को बताया कि घटना को लेकर थाना टीपी नगर में शिकायत दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने मामले में मुकदमा अपराध संख्या-0423/2026 दर्ज किया, लेकिन धाराओं को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया।
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    लगाई गई धाराएं: पुलिस ने एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1)(a) व 352 और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 67 लगाई।
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    क्या नहीं लगाया: महिलाओं के विरुद्ध हुए इस जातिगत अपराध के बावजूद एफआईआर में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (SC/ST Act) की धाराएं शामिल नहीं की गईं।
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थाना प्रभारी की कथित 'कॉल रिकॉर्डिंग' से बढ़ा विवाद

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शिकायत में यह भी सनसनीखेज दावा किया गया है कि थाना प्रभारी की 'रविकांत' नामक व्यक्ति से बातचीत की एक कॉल रिकॉर्डिंग उपलब्ध है। आरोप है कि इस ऑडियो में थाना प्रभारी स्पष्ट रूप से कह रहे हैं कि इस मामले में एससी/एसटी एक्ट नहीं लगाया जाएगा।
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शिकायतकर्ता ने NCSC से मांग की है कि वायरल वीडियो और कॉल रिकॉर्डिंग को केस की जांच का हिस्सा बनाया जाए और जानबूझकर धाराएं न लगाने वाले थाना प्रभारी एवं केस के विवेचक (Investigation Officer) की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
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NCSC का अल्टीमेटम: DM-SSP से मांगी इन बिंदुओं पर रिपोर्ट

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राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने इस मामले में कड़ा नोटिस जारी करते हुए मेरठ के जिलाधिकारी और एसएसपी को 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में विशेष रूप से निम्न विवरण मांगे हैं:
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    घटना की तारीख और स्थान।
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    दर्ज अपराध संख्या का विवरण।
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    पीड़ित महिलाओं एवं नामजद अभियुक्तों का विस्तृत ब्यौरा।
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    एफआईआर में लगाई गई धाराओं की जानकारी।
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    आरोपियों की गिरफ्तारी की वर्तमान स्थिति।
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    आरोप-पत्र (Chargesheet) या अंतिम रिपोर्ट (FR) की स्थिति।
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    एससी/एसटी अत्याचार निवारण नियमों के तहत पीड़ितों के लिए की गई कार्रवाई।
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अनुच्छेद 338 के तहत समन जारी करने की चेतावनी

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राष्ट्रीय आयोग ने अपने नोटिस में सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि निर्धारित 15 दिन के भीतर मेरठ प्रशासन की ओर से संतोषजनक रिपोर्ट प्राप्त नहीं होती है, तो आयोग कड़े कदम उठाएगा।
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आयोग ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट न मिलने की स्थिति में भारत के संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को नई दिल्ली में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए समन (Summon) जारी किया जा सकता है। NCSC के इस एक्शन के बाद मेरठ पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है।
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डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह समाचार रिपोर्ट एंटी करप्शन फाउंडेशन ऑफ इंडिया के पदाधिकारी द्वारा जारी प्रेस नोट और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) द्वारा मेरठ प्रशासन को भेजे गए नोटिस की जानकारी पर आधारित है। खबर का उद्देश्य घटनाक्रम और उस पर हो रही प्रशासनिक एवं विधिक कार्यवाही को निष्पक्षता के साथ पाठकों तक पहुंचाना है।
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