दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के लोगों के लिए देवभूमि उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों की यात्रा अब बेहद सुगम और तेज होने वाली है। अब वह दिन दूर नहीं जब श्रद्धालु और पर्यटक केवल कुछ ही घंटों में दिल्ली की भीड़भाड़ से निकलकर गंगा के शांत घाटों तक पहुंच सकेंगे। इस बड़े और ऐतिहासिक बदलाव का मुख्य कारण बहुप्रतीक्षित नमो भारत मेरठ से ऋषिकेश कॉरिडोर का प्रस्तावित विस्तार है। केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और उत्तराखंड सरकार के बीच बनी एक महत्वपूर्ण सहमति के बाद नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने इस महात्वाकांक्षी रैपिड रेल परियोजना को पंख लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस योजना के धरातल पर उतरने के बाद दिल्ली से ऋषिकेश तक का सफर महज तीन घंटे में पूरा किया जा सकेगा।READ ALSO:-हरिद्वार की पावन धरती पर आध्यात्मिक महाकुंभ: गंगा तट पर स्थापित हुआ 5211 किलो का दुनिया का सबसे विशाल 'पारद शिवलिंग'
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नमो भारत मेरठ से ऋषिकेश: नए रूट और स्टेशनों का पूरा मास्टरप्लान

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प्रस्तावित विस्तार के तहत नया रैपिड रेल ट्रैक मेरठ के अंतिम स्टेशन मोदीपुरम से शुरू किया जाएगा। यह नया ट्रैक पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कृषि प्रधान और औद्योगिक क्षेत्रों से होते हुए उत्तराखंड की शिवालिक पहाड़ियों और धार्मिक नगरियों को जोड़ेगा।
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अधिकारियों द्वारा तैयार किए गए शुरुआती खाके के अनुसार, इस नए रूट में कई महत्वपूर्ण शहरों को स्टेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। संभावित रूट में मेरठ का दौराला, मुजफ्फरनगर जिले का खतौली और मुजफ्फरनगर शहर, पुरकाजी, उत्तराखंड का रुड़की, हरिद्वार, हर की पैड़ी और अंतिम पड़ाव के रूप में ऋषिकेश शामिल हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इस परियोजना का टर्मिनस स्टेशन (अंतिम स्टेशन) लक्ष्मण झूला क्षेत्र में प्रस्तावित किया गया है। करीब 150 किलोमीटर लंबे इस पूरे विस्तार में से लगभग 72 किलोमीटर का हिस्सा उत्तर प्रदेश की सीमा में आएगा, जबकि शेष 78 किलोमीटर का हिस्सा उत्तराखंड राज्य में बिछाया जाएगा। (Internal link to related article: उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच इन्फ्रास्ट्रक्चर कनेक्टिविटी और हाईवे प्रोजेक्ट्स)
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तीन घंटे में दिल्ली से ऋषिकेश: दूरी, गति और समय का गणित

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यात्रियों के लिए सबसे बड़ी राहत समय की बचत होगी। वर्तमान में, सड़क मार्ग से मेरठ होते हुए दिल्ली से ऋषिकेश पहुंचने में लोगों को भारी जाम और टोल प्लाजा के कारण कम से कम छह से सात घंटे का समय लग जाता है। वीकेंड और त्योहारों के दौरान तो यह समय और भी बढ़ जाता है। लेकिन इस नई परियोजना के पूरा होने के बाद यात्रा का समय लगभग आधा रह जाएगा।
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फिलहाल नमो भारत ट्रेन दिल्ली के सराय काले खां से मेरठ के मोदीपुरम तक लगभग 82 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर पर संचालित की जा रही है। अब मेरठ से आगे ऋषिकेश तक 150 किलोमीटर के विस्तार के बाद इस नमो भारत कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 230 किलोमीटर हो जाएगी। चूंकि नमो भारत (रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम) ट्रेन की अधिकतम परिचालन गति 160 किलोमीटर प्रति घंटा है, ऐसे में स्टेशनों पर रुकने के बावजूद, दिल्ली से ऋषिकेश की कुल दूरी केवल तीन घंटे में आराम से तय की जा सकेगी। 
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सरकारों के बीच सैद्धांतिक सहमति और डीपीआर (DPR) सर्वे की शुरुआत

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यह परियोजना लंबे समय से चर्चा में थी, लेकिन इसे गति तब मिली जब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर से विशेष मुलाकात की। मुख्यमंत्री धामी ने दिल्ली-ऋषिकेश कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए एक विस्तृत प्रस्ताव केंद्र को सौंपा था। उच्च स्तर पर हुई इन चर्चाओं के बाद अब इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ाने पर तीनों सरकारों (केंद्र, यूपी और उत्तराखंड) के बीच पूर्ण सहमति बन गई है।
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परियोजना में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक देरी न हो, इसके लिए उत्तराखंड सरकार ने अतिरिक्त सचिव रीना जोशी को नोडल अधिकारी नियुक्त कर दिया है। इसके साथ ही NCRTC और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से भी जरूरी प्रशासनिक प्रक्रियाएं आरंभ कर दी गई हैं। अधिकारियों के मुताबिक, अब सबसे पहला और अहम कदम विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करना है। इसके लिए 150 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित रूट का सर्वे बहुत जल्द शुरू होने जा रहा है। इसी सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ट्रैक की अंतिम एलाइनमेंट (Alignment), स्टेशनों की सटीक लोकेशन, परियोजना की कुल लागत और निर्माण पूरा करने की समयसीमा (Deadline) निर्धारित की जाएगी। (Internal link to related article: भारत में रैपिड रेल परियोजनाओं का भविष्य और डीपीआर प्रक्रिया)
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तीर्थयात्रियों, पर्यटन और स्थानीय रोजगार के लिए गेम चेंजर

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उत्तराखंड देश के सबसे बड़े धार्मिक और इको-पर्यटन (Eco-tourism) राज्यों में गिना जाता है। हर साल लाखों श्रद्धालु हरिद्वार में गंगा स्नान, ऋषिकेश में योग और एडवेंचर स्पोर्ट्स, तथा विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा (केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री) के लिए यहां पहुंचते हैं।
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इस रेलवे कॉरिडोर के बनने से इन सभी यात्रियों को एक तेज, वातानुकूलित, सुरक्षित और आधुनिक परिवहन सुविधा मिलेगी। इसके प्रमुख फायदे इस प्रकार होंगे:
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    सड़क दुर्घटनाओं और जाम में कमी: हाईवे पर बसों और निजी वाहनों का दबाव काफी कम हो जाएगा, जिससे सड़क हादसों में कमी आएगी और रुड़की-हरिद्वार हाईवे पर लगने वाले भीषण जाम से मुक्ति मिलेगी।
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    व्यापार और पर्यटन को संजीवनी: हरिद्वार और ऋषिकेश जैसे शहरों में पर्यटन गतिविधियों में भारी उछाल आएगा। जब यात्री आसानी से पहुंच सकेंगे, तो होटल इंडस्ट्री, ट्रैवल एजेंसियों, परिवहन और स्थानीय हस्तशिल्प कारोबार से जुड़े क्षेत्रों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।
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    निवेश और रोजगार: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार, यह केवल एक रेल लाइन नहीं बल्कि आर्थिक विकास का नया पावरहाउस है। इससे रियल एस्टेट और उद्योगों में निवेश बढ़ेगा तथा हजारों स्थानीय युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। 
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नमो भारत ट्रेन का दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर पहले ही देश की पहली रीजनल रैपिड ट्रांजिट प्रणाली (RRTS) के रूप में अपनी उपयोगिता साबित कर चुका है। सराय काले खां से शुरू होकर मोदीपुरम तक के स्टेशनों को जोड़ने वाली यह प्रणाली अब देवभूमि के द्वार तक दस्तक देने जा रही है। नमो भारत मेरठ से ऋषिकेश कॉरिडोर का यह विस्तार क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, धार्मिक पर्यटन और पर्यावरण के अनुकूल आधुनिक परिवहन व्यवस्था के लिहाज से एक असली 'गेम चेंजर' साबित होगा। यदि इस रूट का निर्माण तय समय सीमा के भीतर पूरा कर लिया जाता है, तो यह उत्तर भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास में एक सुनहरा अध्याय जोड़ेगा, जो भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक मील का पत्थर बनेगा।
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दिल्ली से मेरठ तक चलने वाली नमो भारत रैपिड रेल का विस्तार अब ऋषिकेश तक किया जा रहा है। 150 किलोमीटर लंबे इस नए कॉरिडोर के जरिए यात्री दिल्ली से सीधे हरिद्वार और लक्ष्मण झूला (ऋषिकेश) तक मात्र तीन घंटे में पहुंच सकेंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर केंद्र, यूपी और उत्तराखंड सरकार के बीच सहमति बन गई है और जल्द ही डीपीआर सर्वे शुरू होने वाला है। इस रूट के बनने से न केवल चारधाम यात्रियों और पर्यटकों को विश्व स्तरीय परिवहन सुविधा मिलेगी, बल्कि क्षेत्र में व्यापार, पर्यटन और रोजगार के असीम अवसर भी उत्पन्न होंगे।
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