नई दिल्ली/मेरठ (8 अप्रैल 2026): भारतीय राजनीति ने आज अपना एक बेहद अनुभवी, सशक्त और कद्दावर चेहरा खो दिया है। कांग्रेस पार्टी की वरिष्ठतम नेताओं में शुमार, पूर्व केंद्रीय मंत्री और मेरठ से दो बार सांसद रहीं मोहसिना किदवई (Mohsina Kidwai) का बुधवार को 93 वर्ष की आयु में निधन हो गया।READ ALSO:-यूपी में मौसम का रौद्र रूप: आंधी-बारिश और ओलों से कांपा प्रदेश, प्रयागराज में बहा पुल, CM योगी का अफसरों को '24 घंटे का अल्टीमेटम'!
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उन्होंने दिल्ली के एक निजी अस्पताल में अपनी अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर जैसे ही सियासी गलियारों में पहुंची, पूरे देश और विशेषकर उत्तर प्रदेश कांग्रेस में शोक की गहरी लहर दौड़ गई। मोहसिना किदवई केवल एक राजनेता नहीं थीं, बल्कि वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उस दौर की गवाह और सारथी थीं, जब देश की राजनीति कई बड़े ऐतिहासिक बदलावों से गुजर रही थी।
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मेरठ की 'अजेय नेत्री': आज तक कोई दूसरी महिला नहीं बन सकी सांसद
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut-Hapur Lok Sabha Seat) का राजनीतिक इतिहास मोहसिना किदवई के जिक्र के बिना हमेशा अधूरा रहेगा। मेरठ जैसे जटिल और राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में जहाँ बाहुबल और ध्रुवीकरण की राजनीति हावी रहती है, वहां मोहसिना किदवई ने अपनी जो अमिट छाप छोड़ी, उसे आज तक कोई मिटा नहीं सका है।
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सबसे बड़ी और हैरान करने वाली बात यह है कि मोहसिना किदवई मेरठ लोकसभा सीट से अब तक की पहली और इकलौती महिला सांसद हैं। उनके बाद आज तक कोई भी दूसरी महिला इस सीट से संसद की सीढ़ियां नहीं चढ़ सकी है।
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दो ऐतिहासिक जीत का रिकॉर्ड: मोहसिना किदवई ने मेरठ की जनता के दिलों पर राज करते हुए कांग्रेस के टिकट पर लगातार दो बार लोकसभा चुनाव जीता और बड़े-बड़े दिग्गजों को धूल चटाई।
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- \r\n 1980 का चुनाव: 1980 के लोकसभा चुनावों में जब देश में कांग्रेस की वापसी की लहर थी, तब मोहसिना किदवई ने मेरठ से चुनाव लड़ा। उन्होंने जनता पार्टी (सेक्युलर) यानी जेएनपी(एस) के दिग्गज उम्मीदवार हरीश पाल को 57,217 वोटों के भारी अंतर से करारी शिकस्त दी थी।\r\n \r\n
- \r\n 1984 का प्रचंड बहुमत: 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए सहानुभूति लहर वाले चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें फिर से मेरठ के चुनावी रण में उतारा। इस बार मोहसिना किदवई की आंधी इतनी तेज थी कि उन्होंने लोकदल (LKD) के मजबूत उम्मीदवार मंजूर अहमद को 96,518 वोटों के विशाल अंतर से हराकर दोबारा संसद में प्रवेश किया।\r\n \r\n
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दोनों ही कार्यकालों में उन्होंने मेरठ का लोकसभा में एक मजबूत महिला प्रतिनिधि के रूप में शानदार प्रतिनिधित्व किया और क्षेत्र के विकास के लिए कई अहम कदम उठाए।
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गांधी परिवार की बेहद खास और भरोसेमंद
\r\n\r\nमोहसिना किदवई की गिनती कांग्रेस के उन चुनिंदा वफादार नेताओं में होती थी, जिन पर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व आंख मूंदकर भरोसा करता था। उनका राजनीतिक जीवन बेहद लंबा और प्रभावशाली रहा। उत्तर प्रदेश की जमीनी राजनीति से अपना सफर शुरू करने वाली मोहसिना ने बहुत जल्द दिल्ली के सत्ता के गलियारों में अपनी मजबूत पहचान बना ली थी।
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वे पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के बेहद करीबी और भरोसेमंद नेताओं में शामिल थीं। यही कारण था कि उनके कार्यकालों में मोहसिना किदवई को केंद्र सरकार में कई भारी-भरकम और महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी सौंपी गई।
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अपने लंबे सियासी करियर में उन्होंने बतौर केंद्रीय मंत्री निम्नलिखित अहम विभाग संभाले:
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- \r\n स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (Health & Family Welfare)\r\n \r\n
- \r\n शहरी विकास मंत्रालय (Urban Development)\r\n \r\n
- \r\n पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Tourism & Civil Aviation)\r\n \r\n
- \r\n परिवहन मंत्रालय (Transport)\r\n \r\n
- \r\n ग्रामीण विकास मंत्रालय (Rural Development)\r\n \r\n
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इसके अलावा, वर्तमान दौर में भी गांधी परिवार (सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी) से उनके संबंध बेहद आत्मीय और पारिवारिक रहे। संकट के समय कांग्रेस पार्टी हमेशा उनके राजनीतिक अनुभव का लाभ उठाती रही।
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1932 से 2026 तक: एक नजर उनके शानदार सफर पर
\r\n\r\nमोहसिना किदवई का जन्म आज़ादी से पहले 1 जनवरी 1932 को उत्तर प्रदेश के बाराबंकी (Barabanki) जिले में हुआ था। शुरुआत से ही उनके भीतर सामाजिक सरोकार और राजनीतिक चेतना कूट-कूट कर भरी थी। उन्होंने बहुत कम उम्र में ही सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेना शुरू कर दिया था।
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लोकसभा में अपनी धाक जमाने के बाद, मोहसिना किदवई ने उच्च सदन (राज्यसभा) में भी अपनी शानदार पारी खेली। वे छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) राज्य से लगातार दो बार राज्यसभा की सदस्य चुनी गईं:
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- \r\n पहला कार्यकाल: 2004 से 2010 तक\r\n \r\n
- \r\n दूसरा कार्यकाल: 2010 से 2016 तक\r\n \r\n
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इससे पहले वे 1978 के उपचुनाव में भी विजयी रही थीं। उनका पूरा जीवन बेदाग राजनीतिक छवि और जनसेवा को समर्पित रहा।
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नम आंखों से दी जाएगी अंतिम विदाई: शाम 5 बजे सुपुर्दे खाक
\r\n\r\nउनके परिवार के सदस्य महमूद किदवई ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि इस दुखद खबर से पूरा परिवार और उनके चाहने वाले गहरे सदमे में हैं। उनके निधन पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। सभी ने माना है कि मोहसिना किदवई के जाने से भारतीय राजनीति ने अपना एक 'मार्गदर्शक' खो दिया है।
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अंतिम संस्कार का कार्यक्रम: मोहसिना किदवई की अंतिम यात्रा आज (बुधवार) दोपहर 3:00 बजे उनके नोएडा के सेक्टर-40 स्थित आवास से निकाली जाएगी। इसके बाद पूरे राजकीय सम्मान और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ शाम 5:00 बजे दिल्ली के प्रसिद्ध निजामुद्दीन कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्दे खाक किया जाएगा। उनके अंतिम दर्शन और जनाजे में शामिल होने के लिए कांग्रेस के कई बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं का हुजूम नोएडा और दिल्ली में जुटना शुरू हो गया है।
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मोहसिना किदवई का जाना सिर्फ एक पार्टी की क्षति नहीं है, बल्कि यह देश की उस तहजीब और राजनीतिक शुचिता वाले युग का अंत है, जहाँ राजनीति का अर्थ केवल सत्ता पाना नहीं, बल्कि जनता की सेवा करना होता था। मेरठ की जनता अपनी इस 'इकलौती महिला सांसद' को हमेशा एक विकासशील और प्रखर नेत्री के रूप में याद रखेगी।
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