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\r\nमेरठ: सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद मेरठ के शास्त्री नगर स्थित सेंट्रल मार्केट में स्थिति विस्फोटक हो गई है। 859 संपत्तियों के अवैध 'सेटबैक' को तोड़ने के आदेश और 44 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सीलिंग ने सैकड़ों परिवारों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। शुक्रवार को इस कार्रवाई के विरोध में महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा। हाथों में 'पलायन' के पोस्टर लेकर महिलाएं सड़क पर उतर आईं और प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि उनके मकान तोड़े गए, तो वे सामूहिक रूप से आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर होंगी।READ ALSO:-बिजनौर में विदेश से लौटे 'दूल्हे' का डर्टी सीक्रेट: 3 बच्चों की मां संग रंगरलियां मनाते रंगेहाथ पकड़ा गया आसिफ, पब्लिक ने जूतों-चप्पलों से उतारा 'आशिकी' का भूत!
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"पैसे अफसरों ने खाए, हम क्यों मरें?" – महिलाओं का आक्रोश
\r\n\r\nप्रदर्शनकारी महिलाओं का आरोप है कि इस पूरी बर्बादी का जिम्मेदार आवास विकास परिषद है। शीतल, सिम्मी और नीलम जैसी महिलाओं ने सिसकते हुए बताया कि उनकी दुकानों के ऊपर ही मकान बने हैं। यदि सेटबैक के नाम पर नीचे की दुकानें तोड़ी जाती हैं, तो पूरा ढांचा गिर जाएगा।
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- \r\n सिम्मी मौर्य ने बताया, "पहले बच्चों का स्कूल (MPS) सील हुआ, फिर हमारी रोजी-रोटी (दुकान) छीनी गई और अब छत छीनने की तैयारी है। हमने पलायन के पोस्टर लगा दिए हैं, इसके बाद भी कार्रवाई नहीं रुकी तो हम जहर खा लेंगे।"\r\n \r\n
- \r\n नीलम का कहना है कि आवास विकास के अफसरों ने सालों पहले पैसे लेकर ये निर्माण होने दिए, और आज जब सुप्रीम कोर्ट का डंडा चला है तो वे पल्ला झाड़कर हमें मरने के लिए छोड़ रहे हैं।\r\n \r\n
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70 करोड़ का 'रहस्य': व्यापारियों ने उठाए सवाल
\r\n\r\nसीलिंग की कार्रवाई के दौरान व्यापारियों ने एक बड़ा खुलासा किया। उनका दावा है कि आवास विकास परिषद ने 'भू-उपयोग' (Land Use) बदलवाने के नाम पर व्यापारियों से 70 करोड़ रुपये वसूले थे। व्यापारियों का सवाल है कि जब कोर्ट में सुनवाई चल रही थी, तब परिषद ने यह बात क्यों छिपाई कि उन्होंने इस बाजार को नियमित करने के नाम पर करोड़ों रुपये लिए हैं?
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इस पर एडीएम सिटी बृजेश कुमार सिंह का कहना है कि पैसा लेने का मामला और सुप्रीम कोर्ट का सीलिंग आदेश दो अलग-अलग चीजें हैं। यदि कोई व्यापारी अपना पैसा वापस चाहता है, तो प्रशासन उसमें सहयोग करेगा।
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सड़क पर 'अस्पताल': फुटपाथ पर इंजेक्शन और ओपीडी
\r\n\r\nसेंट्रल मार्केट की सीलिंग की सबसे वीभत्स तस्वीर स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सामने आई है। सील की गई 44 संपत्तियों में कई नामी क्लीनिक और अस्पताल शामिल हैं।
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- \r\n डॉक्टर अभिषेक जैन समेत कई अन्य डॉक्टर्स अब सड़क किनारे बैठकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं।\r\n \r\n
- \r\n शाहजहांपुर और अन्य दूर-दराज के जिलों से आए मरीज घंटों फुटपाथ पर बैठने को मजबूर हैं। गुर्दे की बीमारी से जूझ रहे महेंद्र जैसे मरीजों को खुले में इलाज कराना पड़ रहा है क्योंकि अंदर शौचालय तक जाने की अनुमति नहीं है।\r\n \r\n
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राजनीतिक और सामाजिक उबाल: सपा और भाकियू मैदान में:-
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इस मामले ने अब राजनीतिक मोड़ भी ले लिया है:
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- \r\n सपा का प्रदर्शन: समाजवादी पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया कि सीलिंग के दौरान सपा नेता जीतू नागपाल और शैंकी वर्मा के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। सपा का कहना है कि जब एक व्यापारी को दिल का दौरा पड़ा, तब प्रशासन की बजाय उनके नेता मदद को आगे आए।\r\n \r\n
- \r\n भाकियू (धन सिंह कोतवाल): भारतीय किसान यूनियन ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पूछा है कि जब आवास विकास का कार्यालय पास में ही था, तो पिछले 25 वर्षों में यह बाजार कैसे बन गया? उन्होंने मांग की कि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो, न कि व्यापारियों पर।\r\n \r\n
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पुलिस का रुख: "कोर्ट का आदेश सर्वोपरि"
\r\n\r\nमौके पर पहुंचे नौचंदी थाना प्रभारी अनूप सिंह ने प्रदर्शनकारी महिलाओं को समझाने की कोशिश की। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे मानवीय संवेदनाओं को समझते हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना किसी भी सूरत में नहीं होने दी जाएगी। पुलिस बल को तैनात कर दिया गया है ताकि ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।
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निष्कर्ष: मेरठ का सेंट्रल मार्केट इस समय एक बड़े मानवीय संकट के मुहाने पर खड़ा है। एक तरफ कानून का राज और सुप्रीम कोर्ट का आदेश है, तो दूसरी तरफ सैकड़ों परिवारों का रोजगार और आशियाना। व्यापारियों का आरोप है कि वे भ्रष्टाचार और प्रशासनिक ढिलाई की बलि चढ़ रहे हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या शासन स्तर से इन व्यापारियों को कोई राहत मिल पाती है या 859 संपत्तियों पर बुलडोजर चलना तय है।
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Sabse pehle comment karne wale banein.