इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicles) का चलन तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन 'रेंज एंग्जायटी' (रास्ते में चार्ज खत्म होने का डर) अभी भी कई लोगों को EV खरीदने से रोकता है। इसी समस्या को जड़ से खत्म करने और मेरठ को एक 'ग्रीन और स्मार्ट सिटी' (Smart City) बनाने की दिशा में नगर निगम ने एक बेहद महत्वाकांक्षी कदम उठाया है। वर्ष 2027 तक पूरे शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एक मजबूत और सुलभ बुनियादी ढांचा (Infrastructure) तैयार कर लिया जाएगा। शासन के निर्देशों के बाद नगर निगम ने इसके लिए जमीन चिह्नित करने का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया है और इसी सप्ताह इसका विस्तृत प्रस्ताव उत्तर प्रदेश शासन को भेज दिया जाएगा।READ ALSO:-बागपत डबल मर्डर: बड़ौत में टेंट कारोबारी पिता-पुत्र की सरेआम गोली मारकर हत्या, उग्र भीड़ ने हमलावर को पीटा; आक्रोशित व्यापारियों ने किया हाईवे जाम
\r\n\r\n\r\n\r\n
आइए, मेरठ में होने जा रहे इस बड़े बदलाव और इससे आम जनता को मिलने वाले फायदों को विस्तार से समझते हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
'पीपीपी मॉडल' (PPP Model) पर होगा स्टेशनों का निर्माण
\r\n\r\nमेरठ नगर निगम इस मेगा प्रोजेक्ट को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत धरातल पर उतारेगा। इस व्यवस्था के अंतर्गत नगर निगम शहर के प्रमुख स्थानों पर केवल अपनी जमीन मुहैया कराएगा, जबकि चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने, मशीनें लगाने और उसका संचालन करने का पूरा खर्च चयनित निजी कंपनी उठाएगी।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n शासन को भेजा जा रहा प्रस्ताव: नगर आयुक्त सौरभ गंगवार के अनुसार, इस कार्य योजना को जल्द से जल्द मूर्त रूप देने के लिए शासन को इसी सप्ताह प्रस्ताव भेजा जा रहा है। शासन से हरी झंडी (स्वीकृति) मिलते ही टेंडर (Tender) की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n नोडल अधिकारी की नियुक्ति: निर्माण अनुभाग के अधिशासी अभियंता शिरीष सिंह को इस अहम प्रोजेक्ट का नोडल अधिकारी बनाया गया है, जबकि सहायक नगर आयुक्त व संपत्ति अनुभाग की वरिष्ठ प्रभारी तनुजा निगम को स्टेशनों के लिए उपयुक्त जमीन तलाशने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।\r\n \r\n
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\n
'चार्ज एंड चिल': शॉपिंग और रेस्टोरेंट के पास बनेंगे स्टेशन
\r\n\r\nनगर निगम की योजना केवल चार्जिंग स्टेशन बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे लोगों की सुविधा और लाइफस्टाइल के साथ जोड़ने की है। एक इलेक्ट्रिक कार को फुल चार्ज होने में आमतौर पर आधे से डेढ़ घंटे तक का समय लगता है। इस समय का सदुपयोग करने के लिए स्टेशनों की जगह बहुत सोच-समझकर चुनी जा रही है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
जगह चुनते समय इन बातों का रखा जा रहा है खास ध्यान:
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n कमर्शियल हब: चार्जिंग स्टेशन के आसपास अच्छे रेस्टोरेंट, ढाबे, खान-पान की दुकानें या बड़े बाजार (Shopping Markets) होने चाहिए। ताकि जब तक गाड़ी चार्ज हो, लोग अपने परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिता सकें या अपनी जरूरत की शॉपिंग कर सकें।\r\n \r\n
- \r\n बिजली उपकेंद्र की निकटता: यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि चयनित स्थान के पास ही कोई बड़ा बिजली उपकेंद्र (Power Substation) मौजूद हो। इससे फायदा यह होगा कि स्टेशन तक बिजली पहुंचाने के लिए ज्यादा लंबी लाइनें नहीं बिछानी पड़ेंगी और हाई-वोल्टेज सप्लाई निर्बाध रूप से मिलती रहेगी।\r\n \r\n
\r\n\r\n
इन प्रमुख मार्गों और इलाकों को दी जा रही है प्राथमिकता
\r\n\r\nनगर आयुक्त ने 3 से 4 दिन के भीतर जमीन का सर्वे पूरा करने के निर्देश दिए हैं। प्रारंभिक सर्वे में शहर के अंदरूनी और मुख्य मार्गों को 'हॉटस्पॉट' के रूप में देखा जा रहा है। जिन जगहों पर सबसे पहले EV चार्जिंग स्टेशन खोले जाने की संभावना है, वे इस प्रकार हैं:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n दिल्ली रोड (Delhi Road)\r\n \r\n
- \r\n बिजली बंबा बाइपास रोड\r\n \r\n
- \r\n गढ़ रोड (Garh Road)\r\n \r\n
- \r\n हापुड़ रोड\r\n \r\n
- \r\n मवाना रोड\r\n \r\n
- \r\n बागपत रोड\r\n \r\n
- \r\n रूड़की रोड और सरधना रोड\r\n \r\n
- \r\n साकेत और सिविल लाइंस (Civil Lines) जैसे पॉश इलाके।\r\n \r\n
\r\n\r\n
बिना इंतजार किए बदलें बैटरी: 5 'बैटरी स्वैपिंग स्टेशन' भी बनेंगे
\r\n\r\nचार्जिंग स्टेशनों के अलावा मेरठ में 5 बैटरी स्वैपिंग स्टेशन (Battery Swapping Stations) भी स्थापित किए जाएंगे। यह तकनीक उन लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जिनके पास समय की कमी होती है, विशेषकर ई-रिक्शा, डिलीवरी बॉय और कमर्शियल EV चालकों के लिए।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n कैसे करेगा काम? स्वैपिंग स्टेशन पर आपको अपनी गाड़ी चार्ज होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। आप अपनी गाड़ी की डिस्चार्ज (खाली) बैटरी वहां जमा करेंगे और उसके बदले तुरंत एक फुल चार्ज्ड बैटरी अपनी गाड़ी में लगा लेंगे।\r\n \r\n
- \r\n इस पूरी प्रक्रिया में पेट्रोल भरवाने जितना ही (महज 2 से 3 मिनट) समय लगता है। नगर निगम का लक्ष्य जनवरी 2027 तक इस सुविधा को शहरवासियों के लिए पूरी तरह उपलब्ध कराना है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
उत्तर प्रदेश EV नीति 2022: प्रदेश भर में बिछेगा 1500 स्टेशनों का जाल
\r\n\r\nमेरठ में हो रहा यह विकास उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण और गतिशीलता नीति 2022 (UP EV Policy 2022) का एक अहम हिस्सा है। नगर निगम के मुख्य अभियंता प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि राज्य सरकार पूरे प्रदेश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
प्रदेश स्तरीय लक्ष्य (2027 तक):
\r\n\r\nपूरे उत्तर प्रदेश में कुल 1500 पब्लिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n इसके अलावा प्रदेश भर में 375 बैटरी स्वैपिंग स्टेशन बनाए जाएंगे।\r\n \r\n
- \r\n इस नीति के तहत यूपी के प्रत्येक जिले में कम से कम 20 ईवी चार्जिंग और 5 बैटरी स्वैपिंग स्टेशन खोलना अनिवार्य कर दिया गया है। मेरठ इसी लक्ष्य की पूर्ति की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
केंद्र सरकार की गाइडलाइंस का होगा सख्ती से पालन
\r\n\r\nइन स्टेशनों का निर्माण मनमाने ढंग से नहीं, बल्कि केंद्र सरकार (Central Government) द्वारा जारी की गई सख्त और वैज्ञानिक गाइडलाइंस के अनुसार किया जाएगा:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n शहरी क्षेत्र: शहर के अंदर हर 3 किलोमीटर के दायरे में कम से कम एक पब्लिक चार्जिंग स्टेशन होना अनिवार्य है।\r\n \r\n
- \r\n हाईवे और एक्सप्रेस-वे: लंबी दूरी की यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए नेशनल हाईवे और एक्सप्रेस-वे पर हर 25 किलोमीटर की दूरी पर चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।\r\n \r\n
- \r\n भारी वाहन: ट्रकों, बसों और भारी कमर्शियल इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए हर 100 किलोमीटर की दूरी पर एक विशेष और हाई-कैपेसिटी चार्जिंग स्टेशन बनाया जाना अनिवार्य है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
ई-बसों का बढ़ेगा कुनबा: 50 से 400 तक पहुंचेगी संख्या
\r\n\r\nप्राइवेट वाहनों के साथ-साथ मेरठ में सार्वजनिक परिवहन (Public Transport) का भी पूरी तरह से कायाकल्प होने जा रहा है। वर्तमान में शहर के विभिन्न रूटों पर केवल 50 ई-बसों (E-Buses) का संचालन किया जा रहा है, जो शहर की घनी आबादी के हिसाब से काफी कम हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n 400 बसों की है जरूरत: परिवहन विभाग और नगर निगम के सर्वे के अनुसार, मेरठ शहर को जाम और प्रदूषण मुक्त सार्वजनिक परिवहन देने के लिए कुल 400 ई-बसों की आवश्यकता है।\r\n \r\n
- \r\n 350 बसों का गैप होगा पूरा: शासन ने ई-बसों की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य तय कर दिया है। प्रथम चरण में जल्द ही शहर को 100 नई ई-बसें मिल सकती हैं।\r\n \r\n
- \r\n नया ई-बस डिपो: इतनी बड़ी संख्या में बसों के रखरखाव, पार्किंग और चार्जिंग के लिए वर्तमान डिपो पर्याप्त नहीं होगा। इसलिए एक नया और विशाल ई-बस डिपो बनाने का प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है। इसके लिए भी शहर के बाहरी या उपयुक्त इलाके में जल्द ही जमीन चिह्नित की जाएगी।\r\n \r\n
\r\n\r\n
पर्यावरण और अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव
\r\n\r\nमेरठ में EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ई-बसों के इस विस्तार से शहर को दोहरे फायदे होंगे:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n प्रदूषण में भारी कमी: डीजल और पेट्रोल से चलने वाले ऑटो, विक्रम और पुरानी बसों के हटने से मेरठ के Air Quality Index (AQI) में जबरदस्त सुधार देखने को मिलेगा।\r\n \r\n
- \r\n रोजगार के नए अवसर: इन स्टेशनों के निर्माण, संचालन और नए ई-बस डिपो के खुलने से शहर में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के कई नए अवसर पैदा होंगे।\r\n \r\n
\r\n\r\n
मेरठ नगर निगम की यह पहल शहर को भविष्य की परिवहन तकनीक (Future Mobility) के लिए तैयार कर रही है। वह दिन दूर नहीं जब मेरठ की सड़कों पर प्रदूषण फैलाने वाले धुएं की जगह शांत और स्वच्छ इलेक्ट्रिक वाहन दौड़ते नजर आएंगे। शासन की मंजूरी और टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही शहरवासी 2027 से पहले ही इस आधुनिक बुनियादी ढांचे का लाभ उठा सकेंगे।
Sabse pehle comment karne wale banein.