"जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो न्याय की गुहार किससे लगाई जाए?" यह कहावत उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) जिले में तब सच साबित होती दिखी, जब न्याय की वर्दी पहनने वाली एक महिला सिपाही (Female Constable) खुद ही दरिंदगी और शोषण का शिकार हो गई। आम जनता की सुरक्षा का जिम्मा उठाने वाली पुलिस फोर्स के भीतर से एक ऐसी सनसनीखेज और शर्मनाक घटना सामने आई है, जिसने पूरे पुलिस महकमे (UP Police) को हिला कर रख दिया है। मेरठ में तैनात एक महिला कांस्टेबल ने नोएडा (गौतमबुद्धनगर) में तैनात एक हेड कांस्टेबल पर उसे ब्लैकमेल करने, ड्यूटी के दौरान पीछा करने, मोबाइल तोड़ने और सरेआम कार में खींचकर दुष्कर्म (Attempted Rape) का प्रयास करने का बेहद गंभीर आरोप लगाया है।READ ALSO:-बिजनौर में खौफनाक वारदात: मारपीट और तानों से आहत होकर युवक ने निगला जहर, 'मौत के सौदागर' पिता-पुत्री को बढ़ापुर पुलिस ने भेजा जेल
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यह मामला सिर्फ एक शारीरिक हमले का नहीं है, बल्कि यह एक 'पॉवर डायनेमिक्स' (Power Dynamics), मानसिक प्रताड़ना और 'कर्ज के जाल' (Debt Trap) का वह खौफनाक रूप है, जिसका सामना महिलाएं अपने कार्यस्थलों पर करती हैं—भले ही उन्होंने पुलिस की वर्दी ही क्यों न पहन रखी हो। विवाद की जड़ महज 40,000 रुपये का एक उधार था, जिसने एक महिला सिपाही की जिंदगी को नर्क बना दिया।
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मेरठ के एसएसपी (SSP Meerut) के आदेश पर इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच सीओ कैंट (CO Cantt) नवीना शुक्ला को सौंप दी गई है। आइए, इस पूरी घटना की शुरुआत (नोएडा की तैनाती से लेकर मेरठ की सड़कों तक), ईद के दिन हुए उस खौफनाक वाकये और आरोपी हेड कांस्टेबल के खिलाफ होने वाली संभावित कानूनी और विभागीय कार्रवाइयों का गहराई से विश्लेषण करते हैं।
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फ्लैशबैक - नोएडा के सेक्टर 20 थाने से शुरू हुई खौफनाक कहानी (The Genesis of the Nightmare)
\r\n\r\nअपराध अक्सर अचानक नहीं होते; वे धीरे-धीरे बुने गए जाल का परिणाम होते हैं। इस पूरी घटना की जड़ें आज से कुछ साल पहले नोएडा (गौतमबुद्धनगर) में पनपी थीं।
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पीड़ित महिला सिपाही (Victim Constable) और उसका पति, दोनों ही उत्तर प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत हैं और वर्तमान में मेरठ में रहते हैं। लेकिन मेरठ आने से पहले, पीड़िता ने अपने सेवाकाल के लगभग 5 साल नोएडा में बिताए थे।
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कैसे हुआ संपर्क? (The Acquaintance)
\r\n\r\nजब महिला सिपाही नोएडा के सेक्टर 20 थाने (Sector 20 Police Station) में तैनात थी, तब उसकी मुलाकात उसी थाने में तैनात आरोपी हेड कांस्टेबल से हुई। आरोपी हेड कांस्टेबल मूल रूप से उत्तर प्रदेश के शामली (Shamli) जिले का रहने वाला है और वह खुद भी शादीशुदा है तथा दो बच्चों का पिता है।
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एक ही थाने में ड्यूटी करने, एक साथ गश्त करने या एक ही विभाग में होने के कारण दोनों के बीच सामान्य बातचीत और जान-पहचान हो गई। अक्सर पुलिस विभाग में सहकर्मी एक-दूसरे के परिवार की तरह होते हैं, जो आपात स्थिति में एक-दूसरे के काम आते हैं। इसी भरोसे के चलते कहानी ने एक गलत मोड़ ले लिया।
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40,000 रुपये का वह मनहूस उधार (The Debt Trap)
\r\n\r\nपीड़िता के अनुसार, नोएडा में तैनाती के दौरान उसे किसी व्यक्तिगत या पारिवारिक कारण से पैसों की सख्त जरूरत पड़ गई। मुसीबत की इस घड़ी में, उसने अपने 'सहकर्मी' माने जाने वाले उसी हेड कांस्टेबल से 40,000 रुपये उधार ले लिए।
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अपराध शास्त्र (Criminology) में इसे 'वल्नेरेबिलिटी एक्सप्लॉइटेशन' (Vulnerability Exploitation) कहा जाता है। जैसे ही महिला ने उससे पैसे लिए, आरोपी हेड कांस्टेबल ने इसे महिला की 'मजबूरी' नहीं, बल्कि अपनी 'ताकत' समझ लिया। इसके बाद से ही उस हेड कांस्टेबल का रवैया पूरी तरह से बदल गया और उसने पैसों के लेन-देन की आड़ में महिला सिपाही पर गलत नजर रखनी शुरू कर दी।
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नोएडा में भी हुई थी शिकायत (The First Red Flag)
\r\n\r\nयह कोई पहला मौका नहीं था जब आरोपी ने अपनी हदें पार की हों। पीड़िता का आरोप है कि नोएडा में रहते हुए ही आरोपी हेड कांस्टेबल उस पर शारीरिक संबंध (Sexual Relations) बनाने का दबाव डालने लगा था। जब पानी सिर से ऊपर जाने लगा, तो पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर तत्कालीन थाना प्रभारी (SHO Noida) से इस बात की मौखिक/लिखित शिकायत भी की थी। लेकिन, अक्सर 'डिपार्टमेंट की बदनामी' के डर से ऐसे मामलों को अंदरूनी तौर पर दबाने या रफा-दफा करने की कोशिश की जाती है, जिसका नतीजा यह हुआ कि आरोपी के हौसले और बुलंद हो गए।
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मेरठ ट्रांसफर और 'शिकारी' का पीछा (Stalking Across Districts)
\r\n\r\nपीड़िता को लगा कि शायद नोएडा से ट्रांसफर (Transfer) होने के बाद उसकी जिंदगी की यह काली छाया हमेशा के लिए दूर हो जाएगी। हाल ही में, महिला सिपाही का स्थानांतरण गौतमबुद्धनगर से मेरठ (Meerut) कर दिया गया। वह अपने पति के साथ मेरठ में शांतिपूर्ण जीवन जीने और अपनी ड्यूटी करने की कोशिश कर रही थी।
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लेकिन, आरोपी हेड कांस्टेबल के सिर पर हवस और सनक इस कदर सवार थी कि उसने मेरठ तक महिला का पीछा (Stalking) करना शुरू कर दिया।
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ड्यूटी छोड़कर पीछा करना (Dereliction of Duty)
\r\n\r\nपीड़िता के एसएसपी ऑफिस में दिए गए बयान के अनुसार, आरोपी हेड कांस्टेबल इतना दुस्साहसी हो चुका था कि वह अपनी नोएडा की सरकारी ड्यूटी छोड़कर (बिना आधिकारिक अनुमति के) अक्सर मेरठ आ धमकता था। यह सीधे तौर पर पुलिस आचरण नियमावली (Police Conduct Rules) का घोर उल्लंघन है।
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वह मेरठ आकर महिला को फोन पर धमकियां देता, उसके रास्ते में खड़ा हो जाता और पैसों का हवाला देकर लगातार उस पर नाजायज शारीरिक संबंध बनाने का भयंकर दबाव (Coercion) बना रहा था। एक विवाहित महिला, जो खुद पुलिस में है, उसके लिए यह मानसिक प्रताड़ना (Mental Trauma) बर्दाश्त के बाहर होती जा रही थी।
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'ईद' के दिन का वह खौफनाक वाकया (The Horror at Era Gate)
\r\n\r\nआरोपी की दरिंदगी और सनक अपने चरम पर तब पहुंची, जब उसने त्यौहार के दिन को भी अपने घिनौने मंसूबों के लिए चुन लिया।
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त्यौहार की ड्यूटी (The Duty on Eid): पुलिस बल के लिए त्यौहार का मतलब छुट्टी नहीं, बल्कि दोगुनी सतर्कता और ड्यूटी होता है। 'ईद' (Eid) के दिन पीड़िता मेरठ में अपनी मुस्तैद ड्यूटी पर तैनात थी। आरोपी हेड कांस्टेबल उस दिन भी नोएडा से अपनी ड्यूटी/छुट्टी छोड़कर मेरठ आ गया।
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सरेआम बदसलूकी और मोबाइल तोड़ना: ड्यूटी पॉइंट पर पहुंचकर आरोपी ने महिला सिपाही को घेर लिया और जबरन अपने साथ चलने के लिए मजबूर करने लगा। जब महिला सिपाही ने इसका कड़ा विरोध किया और ड्यूटी पर होने का हवाला दिया, तो आरोपी ने अपना आपा खो दिया। उसने सरेआम महिला सिपाही के हाथ से उसका मोबाइल फोन छीन लिया और उसे जमीन पर पटक कर चकनाचूर कर दिया। स्मार्टफोन तोड़ना सिर्फ गुस्से का इजहार नहीं था; यह सबूतों (कॉल रिकॉर्डिंग, चैट) को मिटाने और महिला का बाहरी दुनिया/उसके पति से संपर्क काटने की एक सोची-समझी साजिश (Destruction of Evidence) थी।
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एरा गेट का खौफनाक ट्रैप (The Attempted Rape in the Car)
\r\n\r\nमोबाइल तोड़ने के बाद आरोपी वहां से चला गया, लेकिन उसकी साजिश अभी खत्म नहीं हुई थी। कुछ देर बाद, उसने पीड़िता के घर के लैंडलाइन या किसी अन्य वैकल्पिक नंबर पर फोन किया और कहा कि वह उसका तोड़ा हुआ मोबाइल या उसका सिम कार्ड वापस करना चाहता है। उसने मोबाइल वापस करने के बहाने पीड़िता को कंकरखेड़ा (Kankarkhera) क्षेत्र के एरा गेट (Era Gate) के पास बुलाया।
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जैसे ही महिला सिपाही अपनी स्कूटी (Scooty) से वहां पहुंची, आरोपी पहले से ही अपनी कार में घात लगाए बैठा था। पीड़िता के पास आते ही आरोपी ने दरिंदगी की सारी हदें पार कर दीं।
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- \r\n उसने महिला सिपाही को जबरन कार के अंदर खींचने (Abduction/Assault) का प्रयास किया।\r\n \r\n
- \r\n कार के अंदर उसने महिला के साथ जोर-जबरदस्ती और दुष्कर्म (Attempted Rape) करने की कोशिश की।\r\n \r\n
- \r\n जब महिला सिपाही ने अपनी आबरू बचाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी और जोर-जोर से शोर मचाना शुरू किया, तो आसपास के लोगों के इकट्ठा होने के डर से आरोपी घबरा गया।\r\n \r\n
- \r\n भागने से पहले, आरोपी ने महिला को बेबस करने के लिए उसकी स्कूटी की चाबी (Scooty Keys) भी छीन ली और अपनी कार लेकर वहां से फरार हो गया।\r\n \r\n
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सड़क पर बेबस, डरी हुई और सदमे में डूबी महिला सिपाही ने किसी तरह अपने पुलिसकर्मी पति को इस खौफनाक वारदात की जानकारी दी।
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एसएसपी ऑफिस में न्याय की गुहार - जांच शुरू (The Path to Justice)
\r\n\r\nजब पानी सिर के ऊपर से गुजर गया और जान-माल व इज्जत पर बन आई, तो पीड़िता ने चुप रहने के बजाय अपने खाकी के सम्मान के लिए लड़ने का फैसला किया।
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एसएसपी कार्यालय में शिकायत: अगले ही दिन, पीड़िता अपने पति के साथ मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP Meerut) के कार्यालय पहुंची। उसने अपनी लिखित शिकायत (Complaint) में नोएडा से लेकर मेरठ तक के उस पूरे खौफनाक सफर, 40 हजार के लेन-देन, पीछा करने, मोबाइल तोड़ने और कंकरखेड़ा के एरा गेट पर हुए दुष्कर्म के प्रयास की पूरी दास्तां पुलिस कप्तान के सामने बयां कर दी।
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सीओ कैंट को सौंपी गई जांच: मामले की गंभीरता—जहां आरोपी और पीड़िता दोनों ही पुलिस विभाग के कर्मचारी हैं—को देखते हुए, एसएसपी ने इस हाई-प्रोफाइल मामले की निष्पक्ष जांच का जिम्मा सर्किल ऑफिसर कैंट (CO Cantt) श्रीमती नवीना शुक्ला को सौंप दिया। एक महिला पुलिस अधिकारी को जांच सौंपना इस बात का संकेत है कि विभाग पीड़िता की संवेदनशीलता को समझ रहा है।
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जांच की वर्तमान स्थिति (Status of Investigation):
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- \r\n बयान दर्ज: सीओ नवीना शुक्ला के सामने पीड़िता और उसके पति ने पेश होकर अपने विस्तृत बयान (Statements) दर्ज करा दिए हैं। बयानों में महिला ने स्पष्ट रूप से हेड कांस्टेबल पर 'दुष्कर्म के प्रयास' (Attempt to Rape) का आरोप दोहराया है।\r\n \r\n
- \r\n नोटिस जारी: प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) के सिद्धांत का पालन करते हुए, आरोपी हेड कांस्टेबल को भी अपना पक्ष रखने और सफाई देने के लिए आधिकारिक नोटिस (Show-cause Notice) जारी कर दिया गया है।\r\n \r\n
- \r\n मुकदमे की तैयारी: सीओ कैंट ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होते ही एक विस्तृत रिपोर्ट एसएसपी को सौंपी जाएगी। एसएसपी के आदेश मिलते ही आरोपी हेड कांस्टेबल के खिलाफ सुसंगत धाराओं में आपराधिक मुकदमा (FIR) दर्ज कर लिया जाएगा।\r\n \r\n
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भाग 5: लीगल डिकोडर - आरोपी हेड कांस्टेबल पर किन धाराओं में गिरेगी गाज? (The Legal Framework under BNS)
\r\n\r\nयह मामला सिर्फ विभागीय अनुशासनहीनता का नहीं है, बल्कि यह एक संगीन आपराधिक मामला है। यदि पीड़िता के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो आरोपी हेड कांस्टेबल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की बेहद सख्त धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज होगा:
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- \r\n दुष्कर्म का प्रयास (Attempted Rape): भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64 (बलात्कार) को धारा 62 (अपराध करने का प्रयास) के साथ पढ़ा जाएगा। यह एक अत्यंत गंभीर और गैर-जमानती (Non-bailable) अपराध है, जिसमें आरोपी को 5 से 7 साल तक की कड़ी सजा हो सकती है।\r\n \r\n
- \r\n शील भंग करने के इरादे से हमला (Assault to Outrage Modesty): BNS की धारा 74 के तहत, किसी महिला का शील भंग करने के इरादे से उस पर हमला करना या आपराधिक बल का प्रयोग करना दंडनीय है।\r\n \r\n
- \r\n पीछा करना (Stalking): BNS की धारा 76 के तहत, किसी महिला की इच्छा के विरुद्ध बार-बार उसका पीछा करना या उससे संपर्क करने की कोशिश करना स्पष्ट रूप से अपराध है। नोएडा से मेरठ आकर परेशान करना इस धारा के तहत आता है।\r\n \r\n
- \r\n संपत्ति को नुकसान पहुंचाना (Mischief & Damage): मोबाइल फोन तोड़ना BNS की धारा 324 (Mischief) के अंतर्गत आता है।\r\n \r\n
- \r\n चोरी/लूट का प्रयास (Snatching/Theft): महिला की स्कूटी की चाबी और मोबाइल छीनना धारा 303/304 (चोरी/स्नैचिंग) के दायरे में आ सकता है।\r\n \r\n
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विभागीय कार्रवाई (Departmental Action):
\r\n\r\nआपराधिक मुकदमे के साथ-साथ, आरोपी पर 'उत्तर प्रदेश पुलिस आचरण नियमावली' (UP Police Conduct Rules) के तहत 'कदाचार' (Misconduct) की विभागीय जांच (Departmental Inquiry - D.E.) भी शुरू की जाएगी।
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- \r\n बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने (नोएडा से मेरठ जाने) के लिए कार्रवाई।\r\n \r\n
- \r\n महिला सहकर्मी के साथ कार्यस्थल (विस्तारित) पर यौन उत्पीड़न के लिए PoSH Act (Prevention of Sexual Harassment at Workplace) के तहत विशाखा गाइडलाइंस के अनुसार विभागीय समिति द्वारा जांच।\r\n \r\n
- \r\n दोष सिद्ध होने पर निलंबन (Suspension) से लेकर सेवा समाप्ति (Dismissal from Service) तक की कार्रवाई हो सकती है।\r\n \r\n
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समाज और पुलिस महकमे के लिए एक बड़ा 'वेक-अप कॉल' (The Broader Impact)
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यह घटना सिर्फ दो व्यक्तियों के बीच का विवाद नहीं है; यह हमारे समाज और प्रशासनिक ढांचे की कई कड़वी सच्चाइयों को उजागर करती है।
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1. महिलाओं के लिए कार्यस्थल की असुरक्षा
\r\n\r\nजब पुलिस की वर्दी पहनने वाली, खुद को और दूसरों को सुरक्षित रखने की ट्रेनिंग लेने वाली एक महिला सिपाही अपने ही वरिष्ठ (Head Constable) के हाथों इस कदर प्रताड़ित हो सकती है, तो एक आम कामकाजी महिला (Corporate or Unorganized sector) की सुरक्षा का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। यह 'पावर डायनेमिक्स' (Power Dynamics) का सबसे गंदा रूप है, जहां एक वरिष्ठ पद पर बैठा व्यक्ति अपने से कनिष्ठ (Junior) को अपनी जागीर समझ लेता है।
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2. 'कर्ज का जाल' और ब्लैकमेलिंग की मानसिकता
\r\n\r\nआरोपी की मानसिकता को समझिए। उसने 40,000 रुपये उधार दिए और बदले में वह महिला की 'आत्मा और शरीर' खरीदना चाहता था। समाज में ऐसे कई 'शिकारी' (Predators) मौजूद हैं, जो पहले महिलाओं की आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें मदद की पेशकश करते हैं, और फिर उसी अहसान के तले उन्हें दबाकर उनका यौन शोषण (Sexual Exploitation) करने की कोशिश करते हैं।
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3. पुलिस महकमे की अंदरूनी शिकायत प्रणाली
\r\n\r\nपीड़िता ने बताया कि उसने नोएडा में भी थाना प्रभारी से शिकायत की थी। यह पुलिस विभाग के लिए एक बहुत बड़ा सवालिया निशान है। अगर उसी समय (Initial stage) पर आरोपी हेड कांस्टेबल को कड़ी फटकार लगाई गई होती या उस पर विभागीय कार्रवाई की गई होती, तो आज यह नौबत (रेप का प्रयास) नहीं आती। अक्सर फोर्स के अंदर "विभाग की इज्जत" के नाम पर मामलों को दबाने की प्रवृत्ति (Cover-up culture) ही ऐसे अपराधियों का मनोबल बढ़ाती है।
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आगे की राह (The Final Verdict)
\r\n\r\n"अपराधी चाहे खादी पहने हो या खाकी, उसका एक ही स्थान है— सलाखों के पीछे।" मेरठ की यह घटना उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए अपनी 'ज़ीरो टॉलरेंस पॉलिसी' (Zero Tolerance Policy) साबित करने का एक बहुत बड़ा अवसर है।
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अब सबकी निगाहें सीओ कैंट नवीना शुक्ला की जांच रिपोर्ट और एसएसपी मेरठ के अगले कदम पर टिकी हैं। दो बच्चों का पिता होकर अपनी ही महिला सहकर्मी की इज्जत पर हाथ डालने वाले इस हेड कांस्टेबल को अगर सख्त से सख्त सजा (आपराधिक और विभागीय दोनों) नहीं मिली, तो महिला पुलिसकर्मियों का अपने ही विभाग से भरोसा उठ जाएगा।
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पीड़ित महिला सिपाही की हिम्मत की दाद देनी होगी कि उसने लोकलाज या 'डिपार्टमेंटल प्रेशर' के डर से घुटने नहीं टेके, बल्कि एक असली 'सिपाही' की तरह अपने सम्मान की लड़ाई लड़ने के लिए सामने आई। यह लड़ाई अब सिर्फ उसकी नहीं, बल्कि वर्दी में काम करने वाली हर उस महिला की लड़ाई है, जो सम्मान के साथ अपनी ड्यूटी करना चाहती है।
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(नोट: यह खबर पीड़िता द्वारा एसएसपी कार्यालय में दी गई शिकायत और सीओ कैंट के प्रारंभिक बयानों पर आधारित है। मामले की आधिकारिक पुलिस जांच जारी है और अंतिम निर्णय पुलिस विवेचना व माननीय न्यायालय के अधीन है।)
Sabse pehle comment karne wale banein.